अमावस्या की रात में दीयों की रोशनी से घर खुशियों से भर जाता है। पटाखों की आवाज, मिठाइयों की खुशबू, वंदनवार से सजे घर और प्रियजनों के चेहरे पर मुस्कान दिवाली की खुशी को दर्शाते हैं। दिवाली सिर्फ दीप जलाने का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह हमारे अंदर के अंधकार को दूर करने और आशा का दीपक जलाने का अवसर है। जब माँ लक्ष्मी और श्री गणेश जी हम पर कृपा करते हैं, तो जीवन का हर पहलू रोशन हो जाता है। यदि आप में दिवाली 2026 (Diwali 2026) की तिथि, लक्ष्मी पूजा के शुभ मुहूर्त और विधि की जानकारी चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी होगा।
कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपोत्सव ही दिवाली है। यह हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार है, जो पूरे भारत और दुनिया में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पांच दिनों तक चलता है और धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होता है। मुख्य दिवाली के दिन माता लक्ष्मी, भगवान श्री गणेश और कुबेर देव की पूजा की जाती है। इस दिन मिट्टी के दीये जलाकर भगवान राम के अयोध्या आगमन और माता लक्ष्मी के प्राकट्य का जश्न मनाया जाता है।
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दिवाली 2026 (Diwali 2026) 08 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के समय का विवरण इस प्रकार है:
दिवाली पर्व तिथि: 08 नवंबर 2026, रविवारदिवाली 2026 (Diwali 2026) का महत्व सिर्फ बाहरी सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक संदेश है। त्रेतायुग में भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाकर पूरी नगरी को रोशन किया था। इसी पावन तिथि को क्षीरसागर के समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। आध्यात्मिक दृष्टि से यह पर्व हमें सिखाता है कि ज्ञान और भक्ति का एक दीप हमारे जीवन के सभी कष्टों को मिटा सकता है।

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दिवाली 2026 (Diwali 2026) की शाम को प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष विधान है। आइए जानते हैं चरणबद्ध पूजा विधि:
दिवाली 2026 (Diwali 2026) के दिन पूजा और उपवास के नियमों का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध करके अधर्म पर धर्म की विजय पताका फहराई, तो उनके 14 वर्ष का वनवास भी पूर्ण हो चुका था। जब श्री राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण अयोध्या लौटने वाले थे, तो पूरे राज्य में हर्ष की लहर दौड़ गई।
कार्तिक मास की अमावस्या तिथि होने के कारण आकाश में चंद्रमा नहीं था और चारों तरफ घना अंधेरा था। अपने प्रिय राजा राम के स्वागत के लिए अयोध्या वासियों ने हर घर, गली और चौराहे पर मिट्टी के दीये जलाए। दीयों की उस अलौकिक ज्योति से पूरी अयोध्या नगरी जगमगा उठी और अमावस्या की काली रात भी पूर्णिमा की भांति आलोकित हो गई। दीपों की उसी माला की याद में हर वर्ष यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधेरे पर उजाले की जीत के रूप में मनाया जाता है।
दिवाली 2026 (Diwali 2026) सिर्फ दीये जलाने या नए कपड़े पहनने का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे दिलों को आपस में जोड़ने और अपने भीतर प्रेम की लौ जलाने का सबसे पवित्र माध्यम है। जब हम निश्छल भाव से दूसरों के जीवन में खुशियों का उजाला फैलाते हैं, तो माँ लक्ष्मी का सच्चा आशीर्वाद हमें प्राप्त होता है। वर्ष 2026 की यह दिवाली आपके और आपके परिवार के जीवन में रिद्धि-सिद्धि, सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और असीम शांति लेकर आए। आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं
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Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.