संसार में जब अधर्म, भय और संकट का अंधकार छाने लगता है, तब माता जगदम्बा का उग्र रूप ही भक्तों के लिए ढाल बनकर खड़ा होता है। दस महाविद्याओं में पांचवीं महाविद्या के रूप में पूजी जाने वाली माँ त्रिपुर भैरवी शक्ति और परिवर्तन की वो अलौकिक ऊर्जा हैं, जो भक्त के जीवन से हर प्रकार के भय, शत्रु बाधा और कष्ट को क्षण भर में भस्म कर देती हैं। इस पावन अवसर को हम भैरवी जयंती 2026 (Bhairavi Jayanti 2026) के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं।
मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि वह पावन दिन है, जब ब्रह्मांडीय चेतना से माँ भैरवी का प्राकट्य हुआ था। यदि आप भी अपने जीवन में साहस, उग्र संकटों से सुरक्षा, तंत्र बाधाओं से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं, तो भैरवी जयंती 2026 की तिथि (Bhairavi Jayanti 2026 Date) का यह शुभ दिन आपके लिए बेहद कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, त्रिपुर भैरवी पूजा विधि (Tripur Bhairavi Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।
वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष (अगहन) माह की पूर्णिमा तिथि को तंत्र और शक्ति साधना की अधिष्ठात्री देवी माँ त्रिपुर भैरवी (Maa Tripur Bhairavi) का प्राकट्य दिवस यानी भैरवी जयंती का पर्व (Bhairavi Jayanti Festival) मनाया जाता है।
माँ भैरवी दस महाविद्याओं में अति उग्र और शक्तिशाली देवी मानी जाती हैं। नाम में 'भैरवी' शब्द होने के बावजूद यह भगवान शिव के भैरव स्वरूप की शक्ति हैं। माँ भैरवी का स्वरूप सूर्य के समान तेजस्वी, सिर पर मुकुट और चार भुजाओं से सुशोभित है, जिसमें वे जप माला, पुस्तक, वरद और अभय मुद्रा धारण किए हुए हैं। भैरवी जयंती का दिन केवल तांत्रिकों या साधकों के लिए ही नहीं, बल्कि सामान्य गृहस्थों के लिए भी माँ की असीम कृपा और अभय दान पाने का सबसे पावन दिन होता है।
भैरवी जयंती का पूजन पूर्णिमा तिथि के उदयातिथि और प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में भैरवी जयंती तिथि (Bhairavi Jayanti Tithi) और शुभ मुहूर्त की तालिका नीचे दी गई है:
भैरवी जयंती तिथि (Bhairavi Jayanti 2026 Date): 23 दिसंबर 2026, बुधवार
मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 23 दिसंबर 2026 को प्रातः 05:10 बजे से
मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि समाप्त: 24 दिसंबर 2026 को प्रातः 03:45 बजे तक
प्रातः काल पूजा मुहूर्त: 23 दिसंबर 2026 को सुबह 07:12 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक
निशिता काल (मध्यरात्रि) पूजा मुहूर्त: 23 दिसंबर 2026 को रात 11:52 बजे से मध्यरात्रि 12:47 बजे तक (साधकों के लिए)
उदयातिथि और पूर्णिमा तिथि के मान के अनुसार, भैरवी जयंती का पावन पर्व (Bhairavi Jayanti Festival) 23 दिसंबर 2026 को ही पूरे देश में भक्तिभाव से मनाया जाएगा।
सनातन धर्म और तंत्र शास्त्र में माँ त्रिपुर भैरवी का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। माँ भैरवी हमारे मूलाधार चक्र और अष्टसिद्धियों की स्वामिनी हैं। वे काल यानी मृत्यु के भय को मिटाने वाली देवी हैं।
मान्यता है कि भैरवी जयंती व्रत (Bhairavi Jayanti Vrat) पर माँ की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर छिपा भय, अवसाद और हीनभावना समाप्त हो जाती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जब तक हम अपने अंदर के भय का सामना नहीं करते, तब तक हम वास्तविक सत्य को प्राप्त नहीं कर सकते। जो साधक या गृहस्थ इस दिन निष्कपट भाव से माँ भैरवी की शरण में जाते हैं, उन्हें जीवन में कभी किसी शत्रु या विपत्ति का डर नहीं सताता।

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भैरवी जयंती के दिन माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा सात्विक और श्रद्धापूर्वक इस प्रकार करें:
प्रातः स्नान और शुद्धता: पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
संकल्प: पूजा स्थल पर बैठकर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर माँ त्रिपुर भैरवी का ध्यान करते हुए व्रत एवं पूजन का संकल्प लें।
चौकी स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माँ दुर्गा या माँ त्रिपुर भैरवी का चित्र/यंत्र स्थापित करें।
अभिषेक और श्रृंगार: माता को लाल चंदन, रोली, अक्षत, कुमकुम और लाल वस्त्र या चुनरी अर्पित करें। माँ को लाल कनेर, गुड़हल या गुलाब के फूल चढ़ाएं।
विशेष भोग: माँ भैरवी को गुड़ से बने व्यंजन, खीर, लाल फल (जैसे अनार) और मेवे का भोग लगाएं।
मंत्र जप: कुशा के आसन पर बैठकर त्रिपुर भैरवी मंत्र (Tripur Bhairavi Mantra) "ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा" या "ॐ त्रिपुर भैरव्यै नमः" का लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से जप करें।
आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में धूप-दीप जलाकर माँ भैरवी की आरती करें और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हुए अभय का आशीर्वाद लें।
इस दिन मन में सात्विकता और पवित्रता बनाए रखें, किसी के प्रति गलत भावना न लाएं।
यदि व्रत रख रहे हैं तो केवल फलाहार करें और अन्न का त्याग रखें।
पूजा के समय लाल रंग के वस्त्र और लाल आसन का प्रयोग करना सबसे उत्तम होता है।
साधना या जप के दौरान अपना ध्यान पूरी तरह माँ के चरणों में एकाग्र रखें।
शत्रु और तंत्र बाधा से मुक्ति: गुप्त शत्रुओं का नाश होता है और टोने-टोटके या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव खत्म होता है।
भय और मानसिक तनाव का नाश: काल सर्प, अकाल मृत्यु का भय और अवसाद (Depression) दूर होता है।
वाक्-सिद्धि और सफलता: वाक्-शक्ति में वृद्धि होती है और कठिन से कठिन कार्यों में सफलता मिलती है।
आध्यात्मिक जागृति: साधकों का कुंडलिनी जागरण और आत्मिक विकास तेजी से होता है।
क्या करें:
माँ भैरवी को लाल फूल और कुमकुम अवश्य अर्पित करें।
गरीबों या जरूरतमंदों को लाल वस्त्र, भोजन या फल दान करें।
रात्रि के समय दुर्गा सप्तशती या भैरवी स्तोत्र का पाठ करें。
क्या न करें:
भैरवी जयंती के दिन लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा जैसी तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।
किसी भी स्त्री या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें, क्योंकि स्त्री में माँ का वास होता है।
पूजा के दौरान मन में क्रोध, घमंड या दुर्भावना न लाएं।
पौराणिक भैरवी जयंती कथा (Bhairavi Jayanti Vrat Katha) के अनुसार, जब दैत्यराज नारद और अन्य दानवों के अत्याचारों से तीनों लोक कांप उठे थे, तब सभी देवता और मुनि संकट में पड़ गए। दानव इतने शक्तिशाली थे कि उन्हें परास्त करना देवताओं के लिए असंभव हो गया था।
सृष्टि में संतुलन और धर्म की रक्षा के लिए भगवान शिव की सहमति से जगदम्बा ने अपने तेज से एक अत्यंत तेजस्वी और उग्र रूप प्रकट किया। उनका रूप सहस्रों सूर्यों के समान दीप्तिमान था, कंठ में मुंडमाला थी और वे काल के समान विकराल नजर आ रही थीं।
माता के इस उग्र और अभय स्वरूप को 'त्रिपुर भैरवी' कहा गया। माँ भैरवी ने अपनी एक ही हुंकार से दैत्यों की विशाल सेना को भस्म कर दिया और धर्म की पुनः स्थापना की। जिस दिन माँ भगवती ने ब्रह्मांड की रक्षा के लिए यह अवतार धारण किया था, वह मार्गशीर्ष पूर्णिमा का पावन दिन था। तभी से इस तिथि को 'भैरवी जयंती' के रूप में पूजा जाने लगा।
भैरवी जयंती का यह महापर्व हमें सिखाता है कि बुराई और भय से डरने के बजाय साहस के साथ उसका सामना करना चाहिए। माँ त्रिपुर भैरवी अपने भक्तों के लिए माता के समान कृपालु और शत्रुओं के लिए काल का रूप हैं। यदि आप भी अपने जीवन में चारों ओर से दुखों, भय और रुकावटों से घिरे महसूस कर रहे हैं, तो भैरवी जयंती 2026 (Bhairavi Jayanti 2026) के इस पावन अवसर पर पूरे विश्वास के साथ माँ त्रिपुर भैरवी की आराधना करें। माँ की कृपा से आपके जीवन का हर डर मिट जाएगा और जीवन में विजय का मार्ग प्रशस्त होगा।
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Q1: भैरवी जयंती 2026 (Bhairavi Jayanti 2026) में कब है?
भैरवी जयंती का पावन पर्व 23 दिसंबर 2026, बुधवार के दिन मनाया जाएगा।
Q2: माँ त्रिपुर भैरवी दस महाविद्याओं में कौन से स्थान पर आती हैं?
माँ त्रिपुर भैरवी दस महाविद्याओं में पांचवीं महाविद्या के रूप में पूजी जाती हैं।
Q3: भैरवी जयंती पर किस रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है?
भैरवी जयंती के दिन पूजा के समय लाल रंग के वस्त्र पहनना सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है।
Q4: क्या गृहस्थ लोग भी माँ भैरवी की पूजा कर सकते हैं?
जी हां, गृहस्थ लोग भी सात्विक विधि से माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा करके भय, रोग और शत्रुओं से मुक्ति का आशीर्वाद पा सकते हैं।
Q5: माँ भैरवी की पूजा में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
इस दिन "ॐ त्रिपुर भैरव्यै नमः" या "ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा" मंत्र का जप करना अत्यंत कल्याणकारी होता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.