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August 19, 2026 Blog

Gauna Devuthani Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जब क्षीरसागर में चार महीनों की लंबी योगनिद्रा पूरी करके सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु अपनी आँखें खोलते हैं, तो पूरे ब्रह्मांड में भक्ति और आनंद की एक लहर दौड़ जाती है। सनातन परंपरा में देवउठनी एकादशी का पर्व दो दिनों में मनाया जाता है, जिसमें गृहस्थ जन पहले दिन और वैष्णव संप्रदाय, साधु-संत व संन्यासी दूसरे दिन व्रत रखते हैं। इस दूसरे दिन मनाई जाने वाली एकादशी को ही 'गौण देवउठनी एकादशी' या 'वैष्णव देवउठनी एकादशी' कहा जाता है। यह दिन केवल एक उपवास नहीं है, बल्कि प्रभु के प्रति निश्छल भक्ति, समर्पण और वैराग्य का अलौकिक उत्सव है। जब साधक भावविभोर होकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के चरणों में शीश झुकाता है, तो उसके जीवन के सारे कष्ट, अंधकार और पाप मिट जाते हैं। यदि आप भी वर्ष में गौण देवउठनी एकादशी 2026 (Gauna Devuthani Ekadashi 2026) की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि की तलाश कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगा।

Devutthana Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा

गौण देवउठनी एकादशी क्या है? (Introduction)

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि जब दो दिनों तक व्याप्त होती है या द्वादशी तिथि से युक्त होती है, तब दूसरे दिन गौण देवउठनी एकादशी 2026 (Gauna Devuthani Ekadashi 2026) मनाई जाती है। इसे वैष्णव देवउठनी एकादशी या भागवत एकादशी भी कहा जाता है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से चार महीनों के लिए योगनिद्रा में गए भगवान विष्णु इसी पावन अवसर पर जागते हैं। इस दिन वैष्णव साधक और गृहस्थ जन पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप और माता तुलसी का पूजन करते हैं। इस दिन से ही चातुर्मास के दौरान रुके हुए सभी मांगलिक व शुभ कार्य जैसे विवाह, सगाई और गृह प्रवेश पुनः प्रारंभ हो जाते हैं।

गौण देवउठनी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में गौण देवउठनी एकादशी 2026 (Gauna Devuthani Ekadashi 2026) का पावन पर्व 21 नवंबर, शनिवार को पूरे देश में अपार भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और व्रत पारण के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:

  • गौण देवउठनी एकादशी तिथि: 21 नवंबर 2026, शनिवार
  • कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि प्रारंभ: 20 नवंबर 2026 को रात 11:20 बजे से
  • कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि समाप्त: 21 नवंबर 2026 को रात 09:45 बजे तक
  • पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (प्रातःकाल): सुबह 06:47 बजे से सुबह 09:30 बजे तक
  • अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 08:08 बजे से सुबह 09:30 बजे तक
  • गौण एकादशी व्रत पारण समय: 22 नवंबर 2026, रविवार को सुबह 06:48 बजे से सुबह 08:58 बजे तक

गौण देवउठनी एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गौण देवउठनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशाल है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि वैष्णव संप्रदाय के लिए द्वादशी युक्त एकादशी का व्रत रखना सर्वोपरि होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से हज़ार अश्वमेध यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञ करने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

यह पर्व हमारी सुप्त चेतना को जगाने का प्रतीक है। भगवान विष्णु का योगनिद्रा से उठना हमें सिखाता है कि अज्ञानता और आलस्य की नींद छोड़कर ईश्वर भक्ति और धर्म के मार्ग पर अग्रसर होना ही मानव जीवन का मूल उद्देश्य है। इस दिन प्रभु की साधना करने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

गौण देवउठनी एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

Gauna Devuthani Ekadashi 2026 festival

Guruvayur Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

गौण देवउठनी एकादशी 2026 (Gauna Devuthani Ekadashi 2026) पर भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा पूर्ण सात्विकता और निष्ठा के साथ की जाती है। 

  1. प्रातः स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। संभव हो तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
  2. पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर या आंगन में एक लकड़ी की चौकी रखें। उस पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  3. प्रभु का श्रृंगार: भगवान विष्णु को पीला चंदन, रोली, कुमकुम और अक्षत लगाएं। उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, जनेऊ और तुलसी दल अर्पित करें।
  4. गन्ने का मंडप और शालिग्राम पूजन: घर के आंगन में गेरू से भगवान के चरण चिन्ह बनाएं। गन्ने का मंडप बनाकर उसमें भगवान शालिग्राम और तुलसी जी का पौधा स्थापित करें।
  5. विशेष भोग अर्पण: प्रभु को सिंघाड़ा, शकरकंद, गन्ना, केला, पेड़ा और हलवे का भोग लगाएं। ध्यान रहे कि भोग में तुलसी पत्र अवश्य शामिल हो।
  6. प्रभु को जगाना: दीप प्रज्वलित करके 'उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद त्यज निद्रां जगत्पते' मंत्र का जाप करते हुए घंटी या मंजीरा बजाकर प्रभु को जगाएं।
  7. कथा और आरती: गौण देवउठनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में 'ॐ जय जगदीश हरे' की आरती गाकर क्षमा प्रार्थना करें।

गौण देवउठनी एकादशी व्रत के जरूरी नियम (Rules)

इस पावन व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  • दशमी के नियम: एकादशी से एक दिन पहले दशमी की शाम को सूर्यास्त के बाद अन्न ग्रहण न करें और सात्विक रहें।
  • चावल का त्याग: एकादशी के दिन घर में चावल पकाना और खाना सख्त वर्जित माना गया है।
  • तुलसी दल न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें। पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
  • पूर्ण संयम: पूरे दिन मन में सात्विक विचार रखें, किसी पर क्रोध न करें और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।

गौण देवउठनी एकादशी व्रत के मुख्य लाभ (Benefits)

  • समस्त पापों से मुक्ति: जाने-अनजाने में हुए जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • मोक्ष और वैकुंठ धाम की प्राप्ति: आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और विष्णु लोक प्राप्त होता है।
  • पारिवारिक सुख-समृद्धि: घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति आती है।
  • आरोग्य और शक्ति: मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • प्रातः काल उठकर माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
  • रात के समय भगवान विष्णु के भजनों का संकीर्तन और जागरण करें।
  • जरूरतमंदों को गन्ने, सिंघाड़े, तिल, गर्म कपड़े और अन्न का दान करें।

क्या न करें:

  • इस दिन किसी भी जीव या मनुष्य को शारीरिक व मानसिक कष्ट न पहुँचाएं।
  • घर में दातून करना, पेड़-पौधों के पत्ते तोड़ना या बाल धोना वर्जित माना जाता है।
  • लहसुन, प्याज, मदिरा या तामसिक भोजन का प्रयोग घर में बिल्कुल न होने दें।

गौण देवउठनी एकादशी की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में शंखासुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था, जिसने तीनों लोकों में भारी उत्पात मचा रखा था। उसने वेदों को चुराकर समुद्र की गहराइयों में छिपा दिया। देवताओं की पुकार सुनकर भगवान श्री हरि विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया और शंखासुर का वध करके वेदों का उद्धार किया।

शंखासुर से युद्ध करते हुए भगवान विष्णु अत्यधिक थक गए थे। युद्ध के पश्चात आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में चले गए। वे लगातार चार महीनों तक सोए रहे। देवताओं, ऋषियों और मुनियों ने चार महीनों तक प्रभु की निरंतर सेवा की और कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन स्तुति गाकर उन्हें जगाया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया कि जो भी मनुष्य इस पावन तिथि को व्रत रखकर उनका पूजन करेगा, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे और उसे बैकुंठ लोक में स्थान मिलेगा। तभी से देवउठनी एकादशी मनाने की परंपरा चली आ रही है।

निष्कर्ष (Conclusion)

गौण देवउठनी एकादशी 2026 (Gauna Devuthani Ekadashi 2026) का यह पावन पर्व केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति हमारी अनन्य भक्ति, समर्पण और आत्मिक शुद्धि का मार्ग है। जब सृष्टि के स्वामी भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं, तो वे हमारे जीवन से अज्ञानता के अंधेरे को मिटाकर खुशियों और समृद्धि का नया सबेरा लाते हैं। वर्ष की यह गौण देवउठनी एकादशी 2026 (Gauna Devuthani Ekadashi 2026)  आपके और आपके पूरे परिवार के जीवन में अपार सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और भगवान श्री हरि विष्णु का अलौकिक आशीर्वाद लेकर आए। जय श्री हरि विष्णु जय माता तुलसी

Rama Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. गौण देवउठनी एकादशी 2026 (Gauna Devuthani Ekadashi 2026) में कब है?
गौण देवउठनी एकादशी 2026 (Gauna Devuthani Ekadashi 2026) का महापर्व 21 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा।

2. गौण देवउठनी एकादशी और सामान्य देवउठनी एकादशी में क्या अंतर है?
गृहस्थ जन पहले दिन देवउठनी एकादशी मनाते हैं, जबकि वैष्णव संप्रदाय, साधु-संत और संन्यासी दूसरे दिन गौण (वैष्णव) देवउठनी एकादशी का व्रत रखते हैं।

3. गौण देवउठनी एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा?
इस व्रत का पारण 22 नवंबर 2026, रविवार को सुबह 06:48 बजे से सुबह 08:58 बजे के बीच किया जाएगा।

4. क्या गौण देवउठनी एकादशी के दिन चावल खा सकते हैं?
नहीं, हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार किसी भी एकादशी के दिन चावल का सेवन करना पूरी तरह से वर्जित है।

5. भगवान विष्णु को जगाने के लिए कौन सा मंत्र बोला जाता है?
प्रभु को नींद से जगाने के लिए 'उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥' मंत्र का जप किया जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.