जब आश्विन माह की ठंडी हवाएं चलने लगती हैं और वातावरण में शंख व ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देने लगती है, तब हर भक्त का हृदय माँ जगदम्बा के आगमन की खुशी से झूम उठता है। शरद ऋतु की शुरुआत में आने वाली शारदीय नवरात्रि केवल नौ दिनों का त्यौहार नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति, वात्सल्य और उत्सव का वो पावन संगम है जिसका इंतजार हर सनातनी पूरे साल करता है। इस पावन अवसर को हम शारदीय नवरात्रि 2026 (Shardiya Navratri 2026) के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं।
माँ दुर्गा जब अपने नौ स्वरूपों में हमारे घरों में विराजती हैं, तो घर का कोना-कोना सकारात्मक ऊर्जा से महक उठता है। यदि आप भी माँ भवानी के स्वागत की तैयारी कर रहे हैं और जीवन में आरोग्य, सुख तथा समृद्धि की कामना रखते हैं, तो शारदीय नवरात्रि 2026 की तिथि (Shardiya Navratri 2026 Date) का यह पावन अवसर आपके लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि की सही तिथि, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, दुर्गा पूजा विधि (Durga Puja Vidhi) और इसका पौराणिक महत्व।
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक चलने वाले नौ दिवसीय शक्ति पर्व को शारदीय नवरात्रि पर्व (Shardiya Navratri Festival) कहा जाता है। हिंदू धर्म में वर्ष में आने वाली चार नवरात्रियों में शारदीय नवरात्रि का स्थान सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय माना गया है।
इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पहले दिन कलश स्थापना (Kalash Sthapana) यानी घटस्थापना के साथ इस पावन पर्व की शुरुआत होती है। देश भर में गरबा, डांडिया और दुर्गा पूजा के पंडालों की भव्यता देखते ही बनती है।
शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ घटस्थापना के साथ होता है। सही तिथि और मुहूर्त में कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में कलश स्थापना मुहूर्त (Kalash Sthapana Muhurat) और शारदीय नवरात्रि की तिथियों की जानकारी नीचे दी गई है:
शारदीय नवरात्रि प्रारंभ (प्रतिपदा): 11 अक्टूबर 2026, रविवार
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 10 अक्टूबर 2026 को रात 11:25 बजे से
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 11 अक्टूबर 2026 को रात 09:40 बजे तक
घटस्थापना (कलश स्थापना) मुहूर्त: 11 अक्टूबर 2026 को सुबह 06:22 बजे से सुबह 10:14 बजे तक
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त: 11 अक्टूबर 2026 को दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
दुर्गा नवमी (महानवमी): 19 अक्टूबर 2026, सोमवार
विजयदशमी (दशहरा): 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार
उदयातिथि और शास्त्र प्रमाण के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 2026 का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेगा।
हिंदू धर्मग्रंथों में शारदीय नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा बताया गया है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध करने से पूर्व आश्विन माह में ही माँ शक्ति की नौ दिनों तक कठोर उपासना की थी, जिसके बाद उन्हें विजय का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था।
आध्यात्मिक दृष्टि से, यह नौ दिन अपनी अंतरात्मा को शुद्ध करने, कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने और मन के विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार) को समाप्त करने का सर्वोत्तम समय माना जाता है। जो भक्त इन नौ दिनों में सच्चे मन से माँ दुर्गा का पूजन करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और माँ दुर्गा का पूजन इस प्रकार करें:
प्रातः स्नान और शुद्धता: प्रतिपदा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहनें।
जौ बोना (सप्तधान्य): मिट्टी के एक वेदी या पात्र में साफ मिट्टी बिछाएं और उसमें जौ (ज्वार) बोएं।
कलश स्थापना: तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल, गंगाजल, सिक्के, सुपारी और दूर्वा डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और उस पर नारियल (लाल चुन्नी में लपेटकर) स्थापित करें।
चौकी स्थापना: माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र को लाल कपड़ा बिछी चौकी पर स्थापित करें। कलश को माँ दुर्गा के दाईं ओर रखें।
अखंड ज्योति जलाएं: यदि आप नौ दिनों की अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो शुद्ध घी का दीपक जलाएं और "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र का ध्यान करें।
श्रृंगार और भोग: माँ दुर्गा को लाल चुनरी, रोली, अक्षत, कुमकुम, लाल पुष्प और सुहाग की सामग्री अर्पित करें। प्रथम दिन माँ शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाएं।
आरती और पाठ: दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और कपूर जलाकर माँ भवानी की आरती गाएं।
नौ दिनों तक घर में पूर्ण रूप से सात्विक वातावरण बनाए रखें।
यदि संभव हो तो नौ दिनों तक या प्रतिपदा व अष्टमी-नवमी का नवरात्रि व्रत (Navratri Vrat) रखें।
व्रत के दौरान फलाहार या एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करें।
नौ दिनों तक पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें और भूमि पर शयन करें।
घर में कलह न होने दें और मन में किसी के प्रति कटु विचार न लाएं।
आत्मिक और मानसिक शांति: मन का भय, तनाव और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
आरोग्य और शक्ति: व्रत रखने से शरीर शुद्ध होता है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
सुख और समृद्धि: घर से दरिद्रता मिटती है और धन-धान्य की बरकत होती है।
विजय और सफलता: जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
क्या करें:
प्रतिदिन माँ दुर्गा के नौ रूपों की कथा और आरती करें।
अष्टमी या नवमी के दिन 9 नन्हीं कन्याओं को आदरपूर्वक भोजन कराएं और कन्या पूजन (Kanya Pujan) करके उपहार दें।
घर के मुख्य द्वार पर वंदनवार (तोरण) लगाएं और दीपक जलाएं।
क्या न करें:
नवरात्रि के नौ दिनों में दाढ़ी, बाल या नाखून न काटें।
भोजन में लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा जैसी तामसिक चीजों का प्रयोग न करें।
चमड़े की बनी वस्तुओं का प्रयोग पूजा के दौरान न करें।
पौराणिक शारदीय नवरात्रि कथा (Shardiya Navratri Vrat Katha) के अनुसार, महिषासुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था, जिसने अपनी कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके वरदान प्राप्त कर लिया था कि कोई भी देव, दानव या पुरुष उसका वध न कर सके। अपनी इस शक्ति के अहंकार में आकर उसने तीनों लोकों में तबाही मचा दी और देवताओं को स्वर्ग से निकाल बाहर किया।
व्याकुल होकर सभी देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शरण में पहुँचे। तब तीनों देवों और समस्त देवताओं के तेज से एक अलौकिक देवी का प्राकट्य हुआ, जिन्हें 'माँ दुर्गा' कहा गया। सभी देवताओं ने माँ दुर्गा को अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए।
माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच लगातार नौ दिनों तक भयंकर युद्ध चला। नौ दिनों के भीषण संग्राम के बाद दसवें दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया और तीनों लोकों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। तभी से माँ दुर्गा के इस पराक्रम को याद करने और शक्ति की उपासना के लिए हर साल शारदीय नवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है।
शारदीय नवरात्रि का यह महापर्व हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सत्य और धर्म की ही होती है। माँ दुर्गा केवल एक शक्ति नहीं, बल्कि हर भक्त की पुकार सुनने वाली करुणामयी माँ हैं। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सुरक्षा का कवच चाहते हैं, तो शारदीय नवरात्रि 2026 (Shardiya Navratri 2026) के इस शुभ अवसर पर पूरे भक्तिभाव से माँ जगदम्बा की आराधना करें और अपने घर में उनका स्वागत करें। माँ भवानी आपके जीवन के हर अंधकार को दूर करके खुशियों का प्रकाश फैलाएंगी।
Q1: शारदीय नवरात्रि 2026 (Shardiya Navratri 2026) में कब से शुरू हो रही है?
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026, रविवार के दिन घटस्थापना के साथ शुरू हो रही है।
Q2: घटस्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त क्या है?
11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 06:22 बजे से सुबह 10:14 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा।
Q3: नवरात्रि में कन्या पूजन किस दिन करना चाहिए?
कन्या पूजन मुख्य रूप से महाअष्टमी (18 अक्टूबर) या महानवमी (19 अक्टूबर 2026) के दिन किया जाता है।
Q4: क्या नवरात्रि के दिनों में बाल या नाखून काटना वर्जित है?
जी हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों तक बाल, दाढ़ी या नाखून काटने से बचना चाहिए।
Q5: नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं?
जौ को सृष्टि की पहली फसल माना जाता है। जौ जितनी तेजी से और हरी-भरी उगती है, घर में उतनी ही सुख-समृद्धि का आगमन माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.