हिंदू पंचांग में अमावस्या वह दिन होता है जब आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। यह तिथि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि कई विशेष पूजाएं और कर्मकांड केवल अमावस्या के दिन ही किए जाते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार अमावस्या हर महीने आती है और इसका आध्यात्मिक महत्व भी उतना ही गहरा है।
धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या का स्थान बहुत ऊँचा है। इस दिन गंगा स्नान, विशेष पूजा-पाठ और पितरों के लिए पिंडदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे न केवल पापों का क्षय होता है बल्कि मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है।
अमावस्या का पितृ पक्ष से भी गहरा संबंध है। मान्यता है कि इस दिन पितरों की आत्माएं अपने वंशजों के करीब आती हैं, इसलिए लोग श्राद्ध, तर्पण और पितृ तर्पण जैसे कर्म करते हैं। इससे पितरों को शांति मिलती है और वे अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं।
इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों की सहायता करना, अन्न या वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि अमावस्या के दिन की गई पूजा-अर्चना और दान के फल कई गुना बढ़कर मिलते हैं, जिससे घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि हर माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है, जब चंद्रमा आकाश में अदृश्य होता है। वर्ष 2026 में कुल 12 अमावस्या तिथियां पड़ेंगी, जो इस प्रकार हैं :
| तिथि (Date) | दिन (Day) | अमावस्या का नाम (Name Of Amavasya) | अमावस्या तिथि (Amavasya Tithi) |
| 18 जनवरी | रविवार | दर्श अमावस्या / माघ अमावस्या | माघ, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 17 फरवरी | मंगलवार | दर्श अमावस्या / फाल्गुन अमावस्या | फाल्गुन, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 18 मार्च | बुधवार | दर्श अमावस्या | चैत्र, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 19 मार्च | गुरुवार | चैत्र अमावस्या | चैत्र, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 17 अप्रैल | शुक्रवार | दर्श अमावस्या / वैशाख अमावस्या | वैशाख, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 16 मई | शनिवार | दर्श अमावस्या / ज्येष्ठ अमावस्या | ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 14 जून | रविवार | अधिक दर्श अमावस्या | ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 15 जून | सोमवार | ज्येष्ठ अधिक अमावस्या | ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 14 जुलाई | मंगलवार | दर्श अमावस्या / आषाढ़ अमावस्या | आषाढ़, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 12 अगस्त | बुधवार | दर्श अमावस्या / श्रावण अमावस्या | श्रावण, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 10 सितम्बर | गुरुवार | दर्श अमावस्या | भाद्रपद, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 11 सितम्बर | शुक्रवार | भाद्रपद अमावस्या | भाद्रपद, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 10 अक्टूबर | मंगलवार | दर्श अमावस्या / आश्विन अमावस्या | आश्विन, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 9 नवम्बर | रविवार | दर्श अमावस्या | कार्तिक, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 9 नवम्बर | सोमवार | कार्तिक अमावस्या | कार्तिक, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
| 8 दिसम्बर | मंगलवार | दर्श अमावस्या / मार्गशीर्ष अमावस्या | मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि |
साल में 12 अमावस्या तिथियां होती हैं, लेकिन जब अमावस्या सोमवार को आती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है, और यदि यह शनिवार को पड़े तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं। दोनों ही तिथियां अपने विशेष प्रभाव और मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
इसके अलावा, हर अमावस्या तिथि का अपना अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। वैज्ञानिक रूप से भी यह दिन खास होता है, क्योंकि इस समय चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच होने के कारण दिखाई नहीं देता। ऐसे में पृथ्वी पर चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे मानसिक और प्राकृतिक ऊर्जा पर गहरा असर पड़ता है।
अमावस्या का दिन पूर्वजों की शांति और तृप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्राद्ध कर्म, तर्पण और पितरों का स्मरण करने से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। साथ ही, कालसर्प दोष निवारण सहित कई दैविक बाधाओं के समाधान के लिए भी यह तिथि अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है।
धार्मिक ग्रंथों में भी अमावस्या की महिमा और इस दिन किए जाने वाले कर्मों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो बताता है कि यह तिथि आध्यात्मिक उन्नति और पितृ तृप्ति का महत्वपूर्ण अवसर है। अमावस्या को कई जगहों पर अमावस या अमावसी भी कहा जाता है, लेकिन नाम चाहे जो हो—इसका महत्व हर जगह समान ही रहता है।
अमावस्या पर कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है, ताकि इस दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा का पूरा लाभ मिल सके। माना जाता है कि अमावस्या की तिथि मन और वातावरण दोनों को प्रभावित करती है, इसलिए संयम और शुद्ध आचरण का पालन बहुत शुभ होता है।
इस दिन पितरों को स्मरण करना अत्यंत शुभ माना गया है। पितृ गायत्री मंत्र और पूजन मंत्रों का जप करने से आत्मिक शांति मिलती है और पितृ कृपा प्राप्त होती है—
ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्॥
ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:॥
ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्॥
ॐ पितृ देवतायै नम:॥
ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्॥
अमावस्या की यह पावन तिथि हमें आध्यात्मिकता, पितृ सम्मान और आत्मिक शुद्धि की ओर ले जाती है। अगर इसे पूरे मन से, नियमों और श्रद्धा के साथ मनाया जाए तो जीवन में सकारात्मकता, शांति और समृद्धि बढ़ती है। 2026 में आने वाली अमावस्या तिथियों और उनसे जुड़े विशेष व्रतों व त्योहारों को जानकर आप अपनी आध्यात्मिक साधना को और सशक्त बना सकते हैं।