Purnima 2026

Purnima Tithi 2026 (पूर्णिमा तिथि 2026)

हिंदू पंचांग में पूर्णिमा का अपना अलग ही महत्व है। हर महीने शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन आने वाली यह तिथि वह समय होता है जब चंद्रमा अपनी पूरी चमक के साथ आकाश में सबसे अधिक उज्ज्वल दिखाई देता है। धार्मिक आस्था के अनुसार, पूर्णिमा का दिन पूजा-पाठ, ध्यान, जप और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कर्म कई गुना फल देते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से भी पूर्णिमा का संबंध प्रकृति से गहराई से जुड़ा है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक-दूसरे के ठीक सामने होते हैं, जिससे उनके गुरुत्वाकर्षण का संयुक्त प्रभाव पृथ्वी पर अधिक महसूस होता है। इसी कारण समुद्र में ऊँचे ज्वार देखने को मिलते हैं। आयुर्वेद भी यह मानता है कि पूर्णिमा का समय मन, शरीर और आत्मिक ऊर्जा को संतुलित करने के लिए बेहद अनुकूल होता है।

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस तिथि को अलग-अलग नामों से जाना जाता है—कहीं इसे पूर्णिमा कहा जाता है, तो कहीं पूर्णमासी। नाम चाहे जो भी हो, लेकिन इसका महत्व पूरे देश में समान ही माना जाता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है।

Purnima Tithi 2026

List Of Purnima Tithi 2026 (पूर्णिमा तिथि सूची 2026)

सनातन धर्म में पूर्णिमा ऐसा दिन है जो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। इस अवसर पर अनेक लोग व्रत रखते हैं और पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान, दान और व्रत मनुष्य के जीवन में धन, अन्न और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। आइए, पूर्णिमा तिथि 2026 (Purnima Tithi 2026) के बारे में विस्तार से जानते हैं।

तिथि (Date)

दिन (Day)

पूर्णिमा का नाम (Name Of Purnima)

3 जनवरी

शनिवार

पौष, शुक्ल पूर्णिमा

1 फरवरी

रविवार

माघ, शुक्ल पूर्णिमा

3 मार्च

मंगलवार

फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा

1 अप्रैल

बुधवार

चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा

2 अप्रैल

गुरुवार

चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा

1 मई

शुक्रवार

वैशाख, शुक्ल पूर्णिमा

30 मई

शनिवार

ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा

31 मई

रविवार

ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा

29 जून

सोमवार

ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा

29 जुलाई

बुधवार

आषाढ़, शुक्ल पूर्णिमा

27 अगस्त

गुरुवार

श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा

28 अगस्त

शुक्रवार

श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा

26 सितम्बर

शनिवार

भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा

25 अक्टूबर

रविवार

आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा

26 अक्टूबर

सोमवार

आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा

24 नवम्बर

मंगलवार

कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा

23 दिसम्बर

बुधवार

मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा


पूर्णिमा तिथि का महत्व (Significance of Purnima Tithi 2026)

पूर्णिमा को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र तिथि माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। इसलिए पूर्णिमा के दिन व्रत रखना, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना, तथा सत्यनारायण कथा सुनना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना जाता है।

इस दिन किए गए अच्छे कर्म का फल कई गुना बढ़कर मिलता है—चाहे वह दान हो, पूजा हो या जप। धन-समृद्धि, सौभाग्य और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए भी यह तिथि उत्तम मानी जाती है। पूर्णिमा प्रकृति के चमत्कार को भी दर्शाती है। इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा के साथ चमकता है और सूर्य–चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से समुद्र में ऊँचे ज्वार आते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक स्पष्टता और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है।

पूर्णिमा पर क्या न करें (What to Avoid on Purnima 2026)

पूर्णिमा का दिन पवित्र माना जाता है, इसलिए कुछ कार्यों को करने से परहेज़ करना चाहिए:

  1. तामसिक भोजन: मांस, शराब या किसी भी प्रकार के तामसिक आहार से दूर रहें।
  2. कठोर या अभद्र भाषा: इस दिन वाणी में मधुरता बनाए रखें और किसी को भी कठोर शब्द न कहें।
  3. बड़ों का अनादर: माता-पिता, गुरुओं और बुजुर्गों का अपमान करने से माता लक्ष्मी अप्रसन्न हो सकती हैं।
  4. अनावश्यक खर्च: अर्थहीन खर्च और धन की बर्बादी से बचना शुभ माना गया है।

माता लक्ष्मी के मंत्र (Mantras for Maa Lakshmi)

पूर्णिमा पर लक्ष्मी मंत्रों का जाप विशेष पुण्यदायी माना जाता है। कुछ महत्वपूर्ण मंत्र इस प्रकार हैं—

  1. या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
    या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
    या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
    सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती॥
  2. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय,
    प्रचुर धनं देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
  3. ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे,
    विष्णु पत्न्यै च धीमहि,
    तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

पूर्णिमा तिथि केवल पूजा और व्रत का दिन ही नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत, त्योहारों और आध्यात्मिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। दीपावली, रक्षाबंधन, होली जैसे कई प्रमुख त्योहार भी पूर्णिमा से जुड़े होने के कारण विशेष महत्व रखते हैं।

पूर्णिमा को समझना हमें धर्म, प्रकृति और परिवार से जोड़ता है। 2026 के सभी हिंदू त्योहारों की विस्तृत जानकारी आप हिन्दू फेस्टिवल कैलेंडर 2026 में भी देख सकते हैं।