जब भक्ति में कोई साधक अपने अहंकार को भुलाकर "स्वामी शरणम अयप्पा" का जयकारा लगाता है, तो पूरा वातावरण एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है। दक्षिण भारत के विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में मनाई जाने वाली मंडाला पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि 41 दिनों की कठिन तपस्या, आत्म-नियंत्रण और ईश्वर के प्रति अटूट समर्पण का पावन महायज्ञ है। इस पावन अवसर को हम मंडाला पूजा 2026 (Mandala Pooja 2026) के रूप में मनाते हैं।
हर साल वृश्चिक माह के पहले दिन से शुरू होने वाली यह पावन मंडाला काल यात्रा धनु माह के 11वें या 12वें दिन मंडाला पूजा के साथ संपन्न होती है। यह दिन भगवान अयप्पा के दर्शन और उनके दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे पावन अवसर माना जाता है। यदि आप भी स्वामी अयप्पा की कृपा पाना चाहते हैं और अपनी आत्मिक ऊर्जा को बढ़ाना चाहते हैं, तो मंडाला पूजा 2026 की तिथि (Mandala Pooja 2026 Date) का यह अवसर आपके लिए बेहद फलदायी साबित होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, सबरीमाला मंडाला पूजा विधि (Sabarimala Mandala Pooja Vidhi) और पौराणिक कथा।
मंडाला पूजा दक्षिण भारत और विशेषकर केरल की धार्मिक परंपराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह पूजा सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा (Lord Ayyappa) को समर्पित 41 दिनों के कठिन व्रत (मंडाला कालम) के समापन का प्रतीक है।
'मंडाला' का अर्थ होता है 41 दिनों का एक पूरा चक्र। इस दौरान भक्त तुलसी या रुद्राक्ष की माला धारण करके अत्यंत कठोर नियमों का पालन करते हैं। ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन और नंगे पैर रहकर ईश्वर का ध्यान करना इस व्रत की मुख्य पहचान है। 41वें दिन भगवान अयप्पा का विशेष 'कलभाभिषेकम' और 'अभिषेकम' करके मंडाला पूजा संपन्न की जाती है। इस दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु स्वामी अयप्पा के दर्शन के लिए सबरीमाला मंदिर पहुंचते हैं।
मंडाला पूजा का मुख्य अनुष्ठान धनु माह के विशेष योग और शुभ मुहूर्त में संपन्न होता है। वर्ष 2026 में मंडाला पूजा तिथि (Mandala Pooja Tithi) और सबरीमाला मंदिर के मुख्य अनुष्ठानों की तिथियाँ नीचे दी गई हैं:
मंडाला पूजा तिथि (Mandala Pooja 2026 Date): 26 दिसंबर 2026, शनिवार
मंडाला कालम (व्रत) प्रारंभ: 16 नवंबर 2026, सोमवार (सबरीमाला मंदिर खुलने की तिथि)
मंडाला पूजा (व्रत समापन): 26 दिसंबर 2026, शनिवार
सबरीमाला मंदिर द्वार खोलने का समय: 16 नवंबर 2026 की शाम (मंडाला सीजन हेतु)
मुख्य पूजा मुहूर्त (कलभाभिषेकम व पूजा): 26 दिसंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
शास्त्रों और सबरीमाला मंदिर (ट्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड) के पारंपरिक कैलेंडर के अनुसार, 26 दिसंबर 2026 को ही मंडाला पूजा का महा अनुष्ठान पूरे भक्तिभाव से आयोजित किया जाएगा।
सनातन धर्म में मंडाला पूजा का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत अनोखा है। 41 दिनों की यह साधना इंसान के शरीर, मन और आत्मा को पूरी तरह से शुद्ध कर देती है। भगवान अयप्पा जिन्हें हरिहरपुत्र (भगवान विष्णु और भगवान शिव का संयुक्त रूप) माना जाता है, वे त्याग और परम ज्ञान के प्रतीक हैं।
इस पूजा से साधक के भीतर का अहंकार, क्रोध और लालच मिट जाता है। 41 दिनों तक कठिन नियमों का पालन करने से व्यक्ति के भीतर अपार अनुशासन और इच्छाशक्ति का विकास होता है। जो भक्त मंडाला कालम व्रत (Mandala Kalam Vrat) के दौरान स्वामी अयप्पा की शरण में जाते हैं, उनके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उन्हें मानसिक शांति प्राप्त होती है।

यदि आप सबरीमाला नहीं जा पा रहे हैं, तो अपने घर पर भी मंडाला पूजा इस प्रकार श्रद्धापूर्वक कर सकते हैं:
प्रातः स्नान और शुद्धता: पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और काले, नीले या केसरी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर को स्वच्छ करें और एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान अयप्पा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक और श्रृंगार: भगवान अयप्पा के समक्ष घी का दीपक जलाएं। उन्हें चंदन, भस्म (विभूति), अक्षत और ताजे फूल अर्पित करें।
इरुमुडी कट्टू (विशेष प्रसाद): पारंपरिक रूप से भक्त दो खानों वाली एक विशेष थैली (इरुमुडी) तैयार करते हैं, जिसमें नारियल में भरा हुआ शुद्ध घी, चावल और पूजा सामग्री होती है।
अभिषेक और भोग: भगवान अयप्पा को घी, पंचामृत और नारियल पानी से अभिषेक कराएं। तत्पश्चात उन्हें गुड़, पायसम (खीर), केला और पंचांगम का भोग लगाएं।
जयकारा और मंत्र जप: "स्वामी शरणम अयप्पा" या स्वामी शरणम अयप्पा मंत्र (Swami Saranam Ayyappa Mantra) "ॐ स्वामीये शरणम अयप्पा" का निरंतर जप करें और अयप्पा शरणम कीर्तन गाएं।
आरती और दान: कपूर से स्वामी अयप्पा की आरती उतारें और गरीबों व जरूरतमंदों में अन्न दान करें।
41 दिनों के मंडाला व्रत के दौरान पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य होता है।
इस दौरान केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें, लहसुन, प्याज और तामसिक चीजों से पूरी तरह दूर रहें।
व्रत के दौरान काले, नीले या केसरी कपड़े ही पहनें और नंगे पैर रहें।
दिन में दो बार स्नान करें और सुबह-शाम भगवान अयप्पा के नाम का स्मरण करें।
इच्छाशक्ति और अनुशासन: 41 दिनों की तपस्या से मन संयमित और मजबूत बनता है।
शनि दोष से राहत: भगवान अयप्पा की पूजा करने से शनि ग्रह के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
पापों का नाश: जाने-अनजाने में हुए कर्मों के पाप मिट जाते हैं और आत्मा निर्मल होती है।
आरोग्य और शांति: शारीरिक बीमारियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
क्या करें:
निरंतर "स्वामी शरणम अयप्पा" का जयकारा लगाते रहें।
गरीबों, भूखों और पशुओं को भोजन अवश्य कराएं।
घर में सात्विक और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें।
क्या न करें:
व्रत के दौरान शराब, धूम्रपान या मांस का सेवन भूलकर भी न करें।
किसी भी व्यक्ति का अपमान न करें और न ही किसी पर गुस्सा करें।
मंडाला कालम के दौरान बाल, दाढ़ी या नाखून न काटें।
पौराणिक मंडाला पूजा कथा (Mandala Pooja Story) के अनुसार, जब महिषासुर की बहन महिषी ने अपनी आसुरी शक्ति से तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था, तब उसका वध करने के लिए भगवान शिव और भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से एक दिव्य बालक का जन्म हुआ। उन्हें 'मणिकंदन' नाम दिया गया, जो आगे चलकर भगवान अयप्पा के नाम से प्रसिद्ध हुए।
महिषी को यह वरदान था कि उसका वध केवल शिव और विष्णु के पुत्र द्वारा ही हो सकता है। बाल अवस्था में ही मणिकंदन ने महिषी का संहार करके देवताओं और ऋषियों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया।
महिषी के वध के बाद मणिकंदन ने सबरीमाला की पहाड़ियों पर जाकर कठोर तपस्या की और धर्म शास्ता (भगवान अयप्पा) के रूप में लीन हो गए। भगवान अयप्पा ने अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त 41 दिनों तक कठिन तपस्या और ब्रह्मचर्य का पालन करके सबरीमाला आएगा, उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। उसी पौराणिक घटना की याद में हर वर्ष 41 दिनों की मंडाला पूजा आयोजित की जाती है।
मंडाला पूजा केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने भीतर छुपी ईश्वरता को पहचानने का पावन मार्ग है। जब भक्त 41 दिनों की कठिन साधना के बाद स्वामी अयप्पा के चरणों में झुकता है, तो उसका जीवन बदल जाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि भक्ति में ही सबसे बड़ी शक्ति है। यदि आप भी अपने जीवन में शांति, अनुशासन और भगवान अयप्पा का आशीर्वाद चाहते हैं, तो मंडाला पूजा 2026 (Mandala Pooja 2026) के इस शुभ अवसर पर पूरे भक्तिभाव से स्वामी शरणम अयप्पा का स्मरण करें। भगवान अयप्पा आपके जीवन के सभी दुखों को हरकर खुशियों का संचार करेंगे।
Q1: मंडाला पूजा 2026 (Mandala Pooja 2026) में कब है?
मंडाला पूजा का मुख्य अनुष्ठान 26 दिसंबर 2026, शनिवार के दिन आयोजित किया जाएगा।
Q2: मंडाला व्रत कितने दिनों का होता है?
मंडाला व्रत पूरे 41 दिनों का होता है, जो वृश्चिक माह के पहले दिन से शुरू होकर धनु माह में समाप्त होता है।
Q3: सबरीमाला में भगवान अयप्पा को क्या अर्पित किया जाता है?
सबरीमाला में भगवान अयप्पा को मुख्य रूप से नारियल में भरा हुआ शुद्ध घी (नेय्यभिषेकम) अर्पित किया जाता है।
Q4: मंडाला पूजा के दौरान कौन सा जयकारा लगाया जाता है?
मंडाला पूजा के दौरान "स्वामी शरणम अयप्पा" (Swami Saranam Ayyappa) का जयकारा सबसे प्रमुखता से लगाया जाता है।
Q5: क्या घर पर मंडाला पूजा की जा सकती है?
जी हां, यदि आप सबरीमाला मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर भगवान अयप्पा का चित्र स्थापित करके सात्विक विधि से मंडाला पूजा कर सकते हैं।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.