सनातन परंपरा में मार्गशीर्ष का महीना भक्ति, आनंद और प्रभु के पावन प्रेम का समय माना जाता है। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कहा है कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष (अगहन) का महीना हूँ। जब इस पवित्र महीने का अंतिम दिन यानी पूर्णिमा तिथि आती है, तो धरती पर भक्ति की एक अलौकिक धारा बह निकलती है। इस पावन अवसर को हम मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2026 (Margashirsha Purnima 2026) के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का दिन केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान श्री हरि विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे पावन अवसर है। इस दिन दान, स्नान और सत्यनारायण भगवान की कथा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख-शांति, धन-धान्य और मानसिक शांति की कामना रखते हैं, तो मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 2026 (Margashirsha Purnima Vrat 2026) का यह दिन आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, सत्यनारायण पूजा विधि (Satyanarayan Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।
वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष (अगहन) माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को मार्गशीर्ष पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बहुत बड़ा महत्व है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान श्री सत्यनारायण (विष्णु जी) की पूजा, चंद्र देव को अर्घ्य अर्पण और पवित्र नदियों में मार्गशीर्ष पूर्णिमा स्नान (Margashirsha Purnima Snan) करने की परंपरा है। इसी पावन दिन दत्तात्रेय जयंती (Dattatreya Jayanti), अन्नपूर्णा जयंती और भैरवी जयंती जैसे बड़े पर्व भी मनाए जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान-पुण्य कभी व्यर्थ नहीं जाता और जातक को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति दिलाता है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत और पूजन सही तिथि, स्नान मुहूर्त और चंद्रोदय समय पर करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि (Margashirsha Purnima Tithi) और शुभ मुहूर्त की तालिका नीचे दी गई है:
मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत तिथि (Margashirsha Purnima 2026 Date): 23 दिसंबर 2026, बुधवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 23 दिसंबर 2026 को प्रातः 05:10 बजे से
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 24 दिसंबर 2026 को प्रातः 03:45 बजे तक
प्रातः स्नान और दान मुहूर्त: 23 दिसंबर 2026 को सुबह 05:25 बजे से सुबह 07:12 बजे तक
सत्यनारायण पूजा मुहूर्त: 23 दिसंबर 2026 को सुबह 07:12 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक
संध्या चंद्रोदय (अर्घ्य) समय: 23 दिसंबर 2026 को शाम 05:05 बजे (स्थान अनुसार समय में हल्का अंतर संभव)
उदयातिथि और पूर्णिमा मान के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत और स्नान-दान 23 दिसंबर 2026 को ही पूरे देश में श्रद्धापूर्वक किया जाएगा।

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हिंदू धर्मशास्त्रों में मार्गशीर्ष पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व बहुत ही अनोखा बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी) में स्नान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
चंद्रमा इस दिन अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से युक्त होता है। इसलिए इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से व्यक्ति का मानसिक तनाव दूर होता है और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जो भक्त मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत रखकर भगवान सत्यनारायण और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उनके घर में कभी दरिद्रता नहीं आती और संपूर्ण कुल में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा इस प्रकार पूरे विधि-विधान से करें:
प्रातः स्नान और संकल्प: पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
सूर्य देव को अर्घ्य: स्नान के बाद तांबे के लोटे से उगते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें।
सत्यनारायण पूजा की तैयारी: घर के मंदिर को स्वच्छ करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
अभिषेक और श्रृंगार: भगवान श्री हरि को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात उन्हें पीला चंदन, रोली, अक्षत, पीला वस्त्र और पीले गेंदे के फूल अर्पित करें।
सत्यनारायण कथा और भोग: भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ें या सुनें। उन्हें गेहूं के आटे की पंजरी, पंजीरी में तुलसी दल, केले और पंचामृत का भोग लगाएं।
चंद्र देव को अर्घ्य: शाम को चंद्रोदय होने पर तांबे या चांदी के लोटे में कच्चा दूध, जल, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
आरती और पारण: अंत में आरती उतारें, गरीबों को भोजन या मार्गशीर्ष पूर्णिमा दान (Margashirsha Purnima Daan) दें और इसके बाद सात्विक फलाहार करके व्रत का पारण करें।
इस दिन पूरे समय मन में पवित्रता बनाए रखें और किसी के प्रति मन में गलत विचार न लाएं।
व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिन भर सात्विक रहना चाहिए और अन्न का त्याग करना चाहिए।
इस दिन घर में कलह न करें और न ही किसी बुजुर्ग या अतिथि का अपमान करें।
चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता, इसलिए चंद्र दर्शन अवश्य करें।
अक्षय पुण्य और पाप मुक्ति: जाने-अनजाने में हुए पाप मिट जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
मानसिक शांति: चंद्रमा की कृपा से अवसाद, तनाव और चंचल मन को शांति मिलती है।
धन और समृद्धि: माता लक्ष्मी की कृपा से घर में आर्थिक तंगी दूर होती है और अन्न-धन का भंडार भरता है।
सत्यनारायण भगवान का आशीर्वाद: परिवार में खुशहाली बनी रहती है और संकट दूर होते हैं।
क्या करें:
घर में भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन अवश्य करें।
गरीबों या जरूरतमंदों को तिल, गुड़, गर्म कपड़े या अनाज का दान करें।
शाम को घर के मुख्य द्वार पर और मंदिर में दीपक जलाएं।
क्या न करें:
पूर्णिमा के दिन लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा जैसी तामसिक चीजों का सेवन न करें।
किसी नदी या जल स्रोत को दूषित न करें।
घर में गंदे कपड़े पहनकर पूजा न करें और न ही घर में गंदगी रहने दें।
पौराणिक मार्गशीर्ष पूर्णिमा कथा (Margashirsha Purnima Vrat Katha) के अनुसार, कांत नगर में चंद्रदेव नाम का एक अत्यंत धार्मिक राजा राज्य करता था। वह भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था और हर मार्गशीर्ष पूर्णिमा को नियमपूर्वक व्रत रखता था।
एक बार उसके राज्य में एक गरीब ब्राह्मण रहता था, जो बहुत दरिद्र था। राजा ने उस ब्राह्मण की तंगी देखकर उसे मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत और सत्यनारायण भगवान की पूजा की महिमा बताई। ब्राह्मण ने पूरी निष्ठा के साथ मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत रखा और भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी।
व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उस गरीब ब्राह्मण की दरिद्रता क्षण भर में दूर कर दी। उसे अपार धन-धान्य और मान-सम्मान की प्राप्ति हुई। अंत समय में वह ब्राह्मण और राजा दोनों ही वैकुंठ लोक को प्राप्त हुए। तभी से यह माना जाने लगा कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत करने वाले हर भक्त की दरिद्रता मिट जाती है और उसे सुख-समृद्धि मिलती है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का यह पावन पर्व हमें ईश्वर से जुड़ने, अपनी आत्मा को शुद्ध करने और दूसरों की मदद करने का संदेश देता है। जब हम निश्छल मन से प्रभु सत्यनारायण और चंद्र देव की शरण में जाते हैं, तो जीवन का हर अंधकार दूर हो जाता है। यदि आप भी अपने जीवन में शांति, सुख और समृद्धि चाहते हैं, तो मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2026 (Margashirsha Purnima 2026) पर पूरे विश्वास के साथ व्रत रखें, सत्यनारायण कथा सुनें और अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करें। श्री हरि और माता लक्ष्मी की कृपा से आपका जीवन खुशियों से महक उठेगा।
Guruvayur Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा
Q1: मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 2026 (Margashirsha Purnima Vrat 2026) में कब है?
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत 23 दिसंबर 2026, बुधवार के दिन रखा जाएगा।
Q2: मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन मुख्य रूप से भगवान श्री विष्णु (सत्यनारायण रूप), माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा की जाती है।
Q3: मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय क्या है?
23 दिसंबर 2026 को चंद्रोदय शाम लगभग 05:05 बजे होगा (स्थान अनुसार हल्का परिवर्तन संभव है)।
Q4: क्या मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दान करना शुभ होता है?
जी हां, इस दिन तिल, गुड़, कंबल, अनाज और गर्म कपड़ों का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
Q5: क्या पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण कथा कराना जरूरी है?
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा कराना या सुनना बहुत ही फलदायी माना गया है, इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.