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September 15, 2026 Blog

Dattatreya Jayanti 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जीवन के इस असीम सफर में जब भी हम दिशाहीन महसूस करने लगते हैं, तब ज्ञान और विवेक का प्रकाश ही हमें सही मार्ग दिखाता है। सनातन संस्कृति में भगवान दत्तात्रेय को ज्ञान, गुरु तत्व और अलौकिक शक्तियों का परम स्रोत माना गया है। वे कोई साधारण अवतार नहीं, बल्कि त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त रूप हैं। इस पावन पर्व को हम दत्तात्रेय जयंती 2026 (Dattatreya Jayanti 2026) के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं।

मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि वह पावन दिन है, जब अनसूया और महर्षि अत्रि के तप से प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने एक रूप धारण कर जन्म लिया था। यदि आप भी अपने जीवन में मानसिक शांति, आध्यात्मिक प्रगति, सद्बुद्धि और गुरु कृपा चाहते हैं, तो दत्तात्रेय जयंती 2026 (Dattatreya Jayanti 2026) की तिथि का यह अवसर आपके लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की तिथि, शुभ मुहूर्त, दत्तात्रेय पूजा विधि (Dattatreya Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।

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दत्तात्रेय जयंती क्या है? (What is Dattatreya Jayanti?)

वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष (अगहन) माह की पूर्णिमा तिथि को भगवान दत्तात्रेय (Lord Dattatreya) का प्राकट्य दिवस यानी दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। भगवान दत्तात्रेय गुरु वंश के प्रथम गुरु माने जाते हैं।

उनकी मूर्ति में तीन सिर और छह भुजाएं होती हैं, जो त्रिदेवों के प्रतीक हैं। उनके साथ चार कुत्ते (जो चारों वेदों के प्रतीक हैं) और एक गाय (जो कामधेनु या पृथ्वी माता की प्रतीक है) दिखाई देती है। भगवान दत्तात्रेय ने प्रकृति, पशु-पक्षी और प्रकृति के तत्वों से 24 गुरु बनाए थे, जो यह संदेश देते हैं कि इंसान अगर चाहे तो दुनिया की हर चीज से सीख ले सकता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में दत्तात्रेय जयंती का पर्व अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

दत्तात्रेय जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त (Dattatreya Jayanti 2026 Date and Shubh Muhurat)

भगवान दत्तात्रेय की पूजा पूर्णिमा तिथि पर प्रदोष काल या संध्या समय में करना अति शुभ फलदायी माना जाता है। वर्ष में दत्तात्रेय जयंती 2026 (Dattatreya Jayanti 2026) तिथि और शुभ मुहूर्त की तालिका नीचे दी गई है:

  • दत्तात्रेय जयंती तिथि (Dattatreya Jayanti 2026 Date): 23 दिसंबर 2026, बुधवार

  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 23 दिसंबर 2026 को प्रातः 05:10 बजे से

  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि समाप्त: 24 दिसंबर 2026 को प्रातः 03:45 बजे तक

  • पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रातः काल): 23 दिसंबर 2026 को सुबह 07:12 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक

  • प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: 23 दिसंबर 2026 को शाम 05:31 बजे से रात 08:15 बजे तक

उदयातिथि और पूर्णिमा तिथि के मान के अनुसार, दत्तात्रेय जयंती 2026 (Dattatreya Jayanti 2026) का पावन पर्व  23 दिसंबर 2026 को ही मनाया जाएगा।

दत्तात्रेय जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Significance of Dattatreya Jayanti)

हिंदू धर्म में दत्तात्रेय जयंती का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। भगवान दत्तात्रेय सहज ज्ञान, त्याग और योग के प्रतीक हैं। ऐसा माना जाता है कि जो साधक किसी गुरु की तलाश में हैं, यदि वे इस दिन निष्ठापूर्वक भगवान दत्तात्रेय का पूजन करते हैं, तो उन्हें स्वयं जगद्गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

इस दिन पूजा और दत्तात्रेय जयंती 2026 (Dattatreya Jayanti 2026) व्रत करने से साधक को त्रिदेवों (सृष्टि, पालन और संहार के स्वामियों) का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो जाता है। जो लोग मानसिक अशांति, तंत्र-मंत्र के भय या पितृ दोष से पीड़ित हैं, उनके लिए भगवान दत्तात्रेय की उपासना एक अचूक औषधि के समान काम करती है।

दत्तात्रेय जयंती पूजा विधि (Dattatreya Jayanti Puja Vidhi)

Dattatreya Jayanti 2026 festival

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दत्तात्रेय जयंती के दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा पूरे विधि-विधान से इस प्रकार करें:

  1. प्रातः स्नान और संकल्प: पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ सफेद या पीले वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर को स्वच्छ करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  3. अभिषेक और श्रृंगार: भगवान दत्तात्रेय को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात उन्हें चंदन, रोली, अक्षत, हल्दी और पीले पुष्प अर्पित करें।

  4. भोग अर्पण: भगवान को बेसन के लड्डू, पंचामृत, फल और खीर का भोग लगाएं।

  5. मंत्र जप और पाठ: भगवान दत्तात्रेय के दत्तात्रेय मंत्र (Dattatreya Mantra) "ॐ दं दत्तात्रेयाय नमः" या "दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा" का कम से कम 108 बार जप करें। इस दिन दत्तात्रेय स्तोत्र का पाठ करना बहुत शुभ होता है।

  6. आरती और प्रार्थना: धूप-दीप जलाकर भगवान दत्तात्रेय की आरती उतारें और अपने परिवार के कल्याण व सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

दत्तात्रेय जयंती व्रत के जरूरी नियम (Dattatreya Jayanti Vrat Rules)

  • इस दिन पूरे समय मन में सात्विकता बनाए रखें और किसी के प्रति कटु शब्द न बोलें।

  • भोजन में सेंधा नमक या फलाहार का प्रयोग करें, अन्न ग्रहण करने से बचें।

  • अपने आसपास के जीवों, विशेषकर कुत्तों और गायों को भोजन अवश्य कराएं।

  • घर में शांति का माहौल रखें और शाम को दीपक जलाकर पूजा करें।

दत्तात्रेय जयंती व्रत के अद्भुत लाभ (Benefits of Dattatreya Jayanti)

  • गुरु कृपा और ज्ञान की प्राप्ति: बुद्धि और ज्ञान में अपार वृद्धि होती है, सही मार्ग मिलता है।

  • त्रिदेवों का आशीर्वाद: एक साथ ब्रह्मा, विष्णु और महेश की कृपा प्राप्त होती है।

  • भय और बाधाओं का नाश: नकारात्मक ऊर्जा, पितृ दोष और मानसिक तनाव दूर होते हैं।

  • सुख और समृद्धि: परिवार में शांति का वातावरण रहता है और सुख-समृद्धि आती है।

दत्तात्रेय जयंती: क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • स्ट्रीट डॉग्स (श्वानों) और गायों को रोटी या बिस्कुट अवश्य खिलाएं।

  • जरूरतमंदों को पीले वस्त्र, अन्न या धार्मिक पुस्तकें दान करें।

  • 'अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त' नाम का निरंतर स्मरण करें।

क्या न करें:

  • इस दिन लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा जैसी तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।

  • किसी पशु या जीव को चोट न पहुँचाएं, क्योंकि वे दत्तात्रेय जी के प्रतीक माने जाते हैं।

  • किसी का अपमान न करें और न ही अहंकार भाव रखें।

दत्तात्रेय जयंती की पौराणिक कथा (Dattatreya Jayanti Story)

पौराणिक दत्तात्रेय जयंती कथा (Dattatreya Jayanti Vrat Katha) के अनुसार, महर्षि अत्रि की पत्नी माता अनसूया अपने पतिव्रता धर्म के लिए तीनों लोकों में प्रसिद्ध थीं। उनकी परीक्षा लेने के लिए माता सरस्वती, माता लक्ष्मी और माता पार्वती के कहने पर त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) साधु का वेश धारण करके महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे।

उस समय महर्षि अत्रि आश्रम में नहीं थे। साधुओं ने माता अनसूया से भिक्षा मांगी, लेकिन एक कठिन शर्त रख दी। उन्होंने कहा कि माता आपको बिना वस्त्र धारण किए ही हमें भोजन कराना होगा। माता अनसूया अपनी तपोबल से समझ गईं कि ये कोई साधारण साधु नहीं हैं।

माता अनसूया ने अपने पतिव्रता धर्म और तपोबल के प्रभाव से तीनों देवों को अबोध शिशु बना दिया और उन्हें वात्सल्य भाव से भोजन कराया व पालने में झुलाने लगीं। जब तीनों देवियों को यह बात पता चली, तो वे व्याकुल होकर आश्रम पहुँचीं और माता अनसूया से क्षमा मांगी।

माता अनसूया ने त्रिदेवों को उनके वास्तविक रूप में लौटा दिया। प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने माता अनसूया को एक दिव्य वरदान दिया। तीनों देवों के अंश से मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन एक पुत्र का प्राकट्य हुआ, जिन्हें 'दत्तात्रेय' कहा गया। इस प्रकार त्रिदेवों के एकीकृत स्वरूप में भगवान दत्तात्रेय का अवतार हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion)

दत्तात्रेय जयंती का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि ज्ञान किसी सीमा में बंधा नहीं होता, यदि हमारे मन में सीखने की सच्ची चाह हो तो हम हर परिस्थिति से कुछ न कुछ सीख सकते हैं। भगवान दत्तात्रेय साक्षात ज्ञान और गुरु कृपा के प्रतीक हैं। यदि आप भी अपने जीवन से अज्ञानता के अंधकार को मिटाना चाहते हैं, तो दत्तात्रेय जयंती 2026 (Dattatreya Jayanti 2026) पर पूरे विश्वास के साथ उनकी पूजा करें और जीवों की सेवा करें। भगवान दत्तात्रेय आपके जीवन को ज्ञान, शांति और सिद्धि से भर देंगे।

Ahoi Ashtami 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और नियम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: दत्तात्रेय जयंती 2026 (Dattatreya Jayanti 2026) में कब है?

दत्तात्रेय जयंती 23 दिसंबर 2026, बुधवार के दिन मनाई जाएगी।

Q2: भगवान दत्तात्रेय किसके अवतार माने जाते हैं?

भगवान दत्तात्रेय त्रिदेवों यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों के संयुक्त अवतार माने जाते हैं।

Q3: दत्तात्रेय जयंती 2026 (Dattatreya Jayanti 2026) के दिन किस मंत्र का जप करना चाहिए?

इस दिन "ॐ दं दत्तात्रेयाय नमः" या "दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा" मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ होता है।

Q4: भगवान दत्तात्रेय के कितने गुरु थे?

भगवान दत्तात्रेय ने प्रकृति, पशु-पक्षी और मानवीय व्यवहार से सीख लेकर 24 गुरु बनाए थे।

Q5: इस दिन कुत्तों को भोजन क्यों कराया जाता है?

भगवान दत्तात्रेय के साथ सदैव चार कुत्ते रहते हैं जो चारों वेदों के प्रतीक माने जाते हैं, इसलिए इस दिन श्वानों की सेवा करने से विशेष फल मिलता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.