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August 7, 2026 Blog

Lakshmi Puja 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि, महत्व और कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

दिवाली की रात में जब घर-घर में दीये जलाए जाते हैं और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, तो यह दृश्य बहुत ही अद्भुत लगता है। यह पर्व हमें धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी के महत्व को समझने का अवसर देता है। यदि आप भी वर्ष 2026 में दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।

लक्ष्मी पूजा क्या है? (Introduction)

लक्ष्मी पूजा 2026 (Lakshmi Puja 2026) कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। यह दिन दीपोत्सव यानी दिवाली का मुख्य दिन होता है। इस दिन धन की देवी लक्ष्मी जी, बुद्धि के दाता श्री गणेश जी और धन के कोषाध्यक्ष कुबेर देव की एक साथ पूजा की जाती है। यह पूजा जीवन में सकारात्मकता, शांति और आत्मिक प्रकाश लाने का माध्यम है।

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लक्ष्मी पूजा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में लक्ष्मी पूजा 2026 (Lakshmi Puja 2026) का यह महापुनीत पर्व 08 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का संपूर्ण विवरण इस प्रकार है:

लक्ष्मी पूजा तिथि: 08 नवंबर 2026, रविवार
कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर 2026 को दोपहर 03:15 बजे से
कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त: 09 नवंबर 2026 को शाम 05:20 बजे तक
लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 05:30 बजे से शाम 07:26 बजे तक
प्रदोष काल समय: शाम 05:30 बजे से रात 08:06 बजे तक
वृषभ काल समय: शाम 05:58 बजे से रात 07:54 बजे तक
लक्ष्मी पूजा निशिता काल मुहूर्त: रात 11:39 बजे से रात 12:31 बजे तक

लक्ष्मी पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

लक्ष्मी पूजा 2026 (Lakshmi Puja 2026) का महत्व केवल धन-संपत्ति अर्जित करने तक सीमित नहीं है। यह पूजा जीवन में सकारात्मकता, शांति और आत्मिक प्रकाश लाने का माध्यम है। माता लक्ष्मी जहाँ स्वच्छता और पवित्रता देखती हैं, वहीं निवास करती हैं। इस दिन श्री गणेश जी की पूजा माता लक्ष्मी के साथ इसलिए की जाती है ताकि प्राप्त धन के साथ सद्बुद्धि भी आए।

लक्ष्मी पूजा की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja ritual)

 (Lakshmi Puja 2026) festival

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दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का अनुष्ठान विधि-विधान से करने पर माँ लक्ष्मी की अटूट कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं पूजा विधि:

  • पूजा स्थल की तैयारी: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें। उस पर लाल या पीला रेशमी कपड़ा बिछाएं।
  • प्रतिमा स्थापना: चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की मूर्ति इस प्रकार रखें कि गणेश जी हमेशा लक्ष्मी जी के बायीं ओर रहें। साथ ही कुबेर देव और बही-खाते या तिजोरी की स्थापना करें।
  • कलश स्थापना: चौकी पर थोड़ा सा अनाज रखकर उस पर तांबे का कलश स्थापित करें। कलश में जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और आम के पत्ते रखकर ऊपर से नारियल रखें।
  • संकल्प और ध्यान: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत एवं पूजन का संकल्प लें। सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें, फिर माता लक्ष्मी का आह्वान करें।
  • पंचामृत और स्नान: मूर्तियों को जल और पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात स्वच्छ वस्त्र, रोली, चंदन, हल्दी, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
  • श्रृंगार और भोग: माँ लक्ष्मी को कमल का फूल, लाल वस्त्र, कलावा और इत्र अर्पित करें। भोग के रूप में बताशे, खील, कमलगट्टा, मिठाइयाँ, फल और खीर अर्पण करें।
  • धूप-दीप और आरती: देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। श्री सूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। अंत में परिवार के सभी सदस्य मिलकर माँ लक्ष्मी और गणेश जी की आरती गाएं।

लक्ष्मी पूजा और व्रत के जरूरी नियम (Rules)

लक्ष्मी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  • लक्ष्मी पूजा के समय घर का मुख्य द्वार खुला रखना चाहिए ताकि माँ लक्ष्मी का निर्बाध प्रवेश हो सके।
  • पूजा स्थल पर अँधेरा बिल्कुल न होने दें, वहाँ पूरी रात अखंड दीपक प्रज्वलित रखें।
  • इस दिन घर में पूर्ण सात्विकता बनाए रखें और किसी भी प्रकार के क्लेश या विवाद से बचें।
  • शाम की पूजा के बाद घर के हर कोने, तुलसी के पौधे और बाउंड्री पर मिट्टी के दीये रखें।

लक्ष्मी पूजा के मुख्य लाभ (Benefits)

  • अक्षय धन-धान्य की प्राप्ति: माँ लक्ष्मी के आशीर्वाद से घर में कभी तंगी या दरिद्रता नहीं आती।
  • व्यापार और करियर में उन्नति: नए कार्यों, व्यापार और खाते-बही के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना गया है।
  • पारिवारिक सुख-शांति: घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और सदस्यों के बीच आपसी प्रेम बना रहता है।
  • दुर्भाग्य से मुक्ति: जीवन की रुकावटें दूर होती हैं और सौभाग्य के नए द्वार खुलते हैं।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाएं और आम व अशोक के पत्तों का वंदनवार लगाएं।
  • पूजा में कमलगट्टे की माला, कौड़ी और गोमती चक्र का प्रयोग करें, यह माँ लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं।
  • गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दीये दान करें।

क्या न करें:

  • लक्ष्मी पूजा 2026 (Lakshmi Puja 2026) में कभी भी ताली बहुत ज़ोर से न बजाएं और न ही बहुत तेज़ आवाज़ में शोर मचाएं।
  • माँ लक्ष्मी को तुलसी दल कभी अर्पित न करें, वे विष्णुप्रिया हैं परंतु लक्ष्मी पूजा में तुलसी वर्जित है।
  • पूजा के स्थान पर या घर में कहीं भी गंदगी या जूठे बर्तन न छोड़ें।

लक्ष्मी पूजा की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण देवराज इंद्र और सभी देवता श्रीहीन यानी धन-वैभव से वंचित हो गए। स्वर्ग पर असुरों का अधिकार हो गया और तीनों लोकों में दरिद्रता छा गई। तब सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुँचे। श्री हरि विष्णु ने देवताओं को दैत्यों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने की सलाह दी।

कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को जब समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से चौदह रत्न निकले। इन्हीं रत्नों में से एक अति सुंदर स्वरूप में जगज्जननी माता लक्ष्मी अपने हाथ में कमल का पुष्प लिए प्रकट हुईं। सभी देवताओं और ऋषियों ने माँ लक्ष्मी की स्तुति की। माँ लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के वक्षस्थल में निवास किया, जिससे देवताओं को उनका खोया हुआ वैभव वापस मिल गया। तभी से कार्तिक अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के रूप में दीपोत्सव मनाकर उनकी पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।

निष्कर्ष (Conclusion)

दिवाली की यह पावन रात केवल दीयों की जगमगाहट का उत्सव नहीं है, बल्कि हमारे भीतर छिपे अंधकार को मिटाकर प्रेम, भक्ति और सद्भाव का दीपक जलाने का अवसर है। जब हम निश्छल मन और पवित्र भाव से माँ लक्ष्मी और श्री गणेश जी के आगे नतमस्तक होते हैं, तो वे हमारी झोली खुशियों से भर देती हैं। वर्ष की लक्ष्मी पूजा 2026 (Lakshmi Puja 2026) आपके घर में रिद्धि-सिद्धि, सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और अपार धन लेकर आए। जय माँ लक्ष्मी

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. लक्ष्मी पूजा 2026 (Lakshmi Puja 2026) में कब है?
    लक्ष्मी पूजा का मुख्य त्यौहार 08 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा।
  1. लक्ष्मी पूजा 2026 (Lakshmi Puja 2026)का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
    08 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ प्रदोष काल मुहूर्त शाम 05:30 बजे से शाम 07:26 बजे तक रहेगा।
  1. माँ लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है?
    गणेश जी बुद्धि के देवता हैं और लक्ष्मी जी धन की। बिना बुद्धि के धन का दुरुपयोग होता है, इसलिए धन के साथ सद्बुद्धि पाने के लिए दोनों की पूजा साथ की जाती है।
  1. लक्ष्मी पूजा में कौन सा फूल चढ़ाना चाहिए?
    लक्ष्मी पूजा में लाल कमल का फूल या लाल गुलाब चढ़ाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
  1. क्या लक्ष्मी जी को तुलसी चढ़ानी चाहिए?
    नहीं, लक्ष्मी पूजा में माता लक्ष्मी को तुलसी दल अर्पित करना वर्जित माना गया है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.