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August 5, 2026 Blog

Dhanteras 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, खरीदारी का समय, पूजा विधि और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

सर्दियों की हलकी दस्तक, बाज़ारों में झिलमिलाती रंग-बिरंगी लाइटें और हर घर में उत्साह का माहौल, यह सब इशारा करता है कि खुशियों का महापर्व दिवाली आने वाला है। दिवाली के पांच दिवसीय दीपोत्सव का आगाज़ जिस पावन पर्व से होता है, उसे हम धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) कहते हैं। धनतेरस केवल नए बर्तन, सोना या चांदी खरीदने का दिन नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने का सबसे मंगलकारी अवसर है। जब घर के मुख्य द्वार पर दीये की लौ जगमगाती है, तो वह केवल अंधेरा ही दूर नहीं करती, बल्कि जीवन से असमय मृत्यु के भय को भी समाप्त कर देती है। अगर आप भी वर्ष में धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) की सही तिथि, खरीदारी के मुहूर्त और पूजा विधि की जानकारी चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

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धनतेरस क्या है? (Introduction)

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026)  का पर्व मनाया जाता है। इसे धन्वंतरि त्रयोदशी या धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इस दिन आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति के लिए भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही धनतेरस के दिन भगवान कुबेर, माता लक्ष्मी और यमराज की पूजा का भी विशेष विधान है। इस दिन धातु की वस्तुएं खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि ऐसा करने से घर में समृद्धि कई गुना बढ़ जाती है।

धनतेरस 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026)का पावन पर्व 06 नवंबर, शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:

धनतेरस पर्व तिथि: 06 नवंबर 2026, शुक्रवार
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 06 नवंबर 2026 को दोपहर 12:18 बजे से
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि समाप्त: 07 नवंबर 2026 को दोपहर 02:27 बजे तक
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 05:32 बजे से शाम 07:28 बजे तक
प्रदोष काल समय: शाम 05:32 बजे से रात 08:08 बजे तक
वृषभ काल समय: शाम 06:01 बजे से रात 07:57 बजे तक
खरीदारी का शुभ समय: 06 नवंबर को दोपहर 12:20 बजे से रात 10:30 बजे तक

धनतेरस का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) का हमारे धार्मिक और व्यावहारिक जीवन में ग गहरा महत्व है। पहला सुख निरोगी काया माना गया है, और भगवान धन्वंतरि हमें उत्तम स्वास्थ्य का वरदान देते हैं। स्वास्थ्य के बिना संसार का कोई भी धन व्यर्थ है। वहीं भगवान कुबेर और माँ लक्ष्मी घर में धन धान्य का वास बनाए रखते हैं। इस दिन संध्या के समय यमराज के नाम का दीपक निकालने की प्राचीन परंपरा है, जिसे यमदीप दान कहा जाता है। मान्यता है कि यमदीप दान करने से परिवार के सदस्यों पर अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है और घर में सुख शांति आती है।

धनतेरस की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत फलदायी माना गया है। आइए जानते हैं चरणबद्ध पूजा विधि:

सफाई और तैयारी: घर की अच्छी तरह सफाई करें और मुख्य द्वार पर रंगोली व वंदनवार लगाएं। शाम को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
चौकी स्थापना: उत्तर या उत्तर पूर्व दिशा में एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान धन्वंतरि, कुबेर देव और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
रोली और अक्षत का तिलक: सभी देवी देवताओं को रोली, चंदन, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
खरीदी गई वस्तु की पूजा: धनतेरस पर खरीदी गई नई वस्तु, सोना, चांदी या बर्तन को पूजा स्थल पर रखें और उस पर भी तिलक लगाएं।
भोग और पुष्प अर्पण: भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई, तुलसी दल और औषधि अर्पित करें। माँ लक्ष्मी और कुबेर जी को कमलगट्टा, धनिया के बीज और गुड़ का भोग लगाएं।
धूप दीप और आरती: घी का दीपक और धूप जलाकर धन्वंतरि स्तोत्र, कुबेर मंत्र का जाप करें और आरती गाएं।
यमदीप दान: रात्रि के समय परिवार का मुख्य दीपक जलाएं। यह चार मुख वाला चौमुखी दीपक होता है, जिसमें सरसों का तेल और कौड़ी डालकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दें।

धनतेरस व्रत और पूजा के जरूरी नियम (Rules)

Dhanteras 2026 festival

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धनतेरस के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि पूजा का पूर्ण फल मिल सके:

  • इस दिन किसी को भी उधार धन न दें और न ही किसी से उधार लें।
  • यम का दीपक जलाते समय परिवार के सभी सदस्य घर के भीतर होने चाहिए और दीपक रखने के बाद उसे पीछे मुड़कर न देखें।
  • खरीदारी करते समय ध्यान रखें कि कोई भी नुकीली, धारदार या प्लास्टिक की वस्तु न खरीदें।
  • पूजा में धनिया के बीजों का उपयोग अवश्य करें और पूजा के बाद इन्हें गमले या तिजोरी में रख दें।

धनतेरस के मुख्य लाभ (Benefits)

  • आरोग्य की प्राप्ति: भगवान धन्वंतरि की कृपा से पुरानी बीमारियों से राहत मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है।
  • धन-धान्य में वृद्धि: कुबेर देव और लक्ष्मी जी की कृपा से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और रुका हुआ धन वापस मिलता है।
  • अकाल मृत्यु से सुरक्षा: यमदेव का दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
  • व्यापार में उन्नति: नए व्यवसाय की शुरुआत या खाता बही खरीदने के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है।

क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • झाड़ू अवश्य खरीदें, क्योंकि झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
  • पीतल, तांबा, सोना या चांदी के बर्तन व आभूषण खरीदें।
  • घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ दीपक जलाएं और उत्तर दिशा को साफ रखें।

क्या न करें:

  • लोहा, एल्युमिनियम, कांच या काले रंग की वस्तुएं इस दिन न खरीदें।
  • घर में कलह, गुस्सा या किसी भी बुजुर्ग का निरादर न करें।
  • यमदीप दान के बाद दीपक को दोबारा घर के अंदर न लाएं।

धनतेरस की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के ठीक चौथे दिन सर्पदंश से उसकी मृत्यु हो जाएगी। जब राजकुमार का विवाह हुआ, तो उसकी बुद्धिमान पत्नी को इस योग के बारे में पता चला। उसने विवाह के चौथे दिन अपने पति को सोने न देने का निश्चय किया।

उसने शयनकक्ष के बाहर अपने सारे सोने चांदी के आभूषण और सिक्कों का ढेर लगा दिया और पूरे घर में चारों तरफ दीये जला दिए। वह अपने पति को पूरी रात पौराणिक कथाएं और मधुर गीत सुनाती रही। जब मृत्यु के देवता यमराज सर्प का रूप धारण करके राजकुमार के प्राण लेने आए, तो गहनों और दीयों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं।

यमराज उस ढेर पर बैठकर पूरी रात मधुर गीत सुनते रहे और सुबह होते ही बिना प्राण लिए चुपचाप वापस लौट गए। इस प्रकार राजकुमारी की सूझबूझ और दीपदान से उसके पति के प्राण बच गए। तभी से धनतेरस के दिन यमराज के लिए दीपदान करने की परंपरा चली आ रही है।

निष्कर्ष (Conclusion)

धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) का पावन पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सच्चा धन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और अपनों का साथ है। जब हम श्रद्धा और भक्ति के साथ अपने घर के कोने कोने को दीयों से सजाते हैं, तो माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का आगमन हमारे जीवन में होता है। वर्ष की धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) आपके और आपके पूरे परिवार के जीवन में निरोगी काया, अपार समृद्धि, सुख और शांति लेकर आए, यही हमारी मंगल कामना है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) में कब है?
    धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) का त्यौहार 06 नवंबर , शुक्रवार को मनाया जाएगा।
  1. धनतेरस पर खरीदारी का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
    06 नवंबर 2026 को दोपहर 12:20 बजे से लेकर रात 10:30 बजे तक खरीदारी के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त है।
  1. धनतेरस के दिन क्या खरीदना सबसे शुभ माना जाता है?
    धनतेरस के दिन झाड़ू, सोने-चांदी के सिक्के, पीतल व तांबे के बर्तन और साबुत धनिया खरीदना बेहद शुभ माना जाता है।
  1. यम का दीपक किस दिशा में रखा जाता है?
    यम का दीपक हमेशा घर के बाहर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके रखा जाता है।
  1. धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) के दिन किसकी पूजा की जाती है?
    इस दिन भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर, माता लक्ष्मी और यमराज की पूजा की जाती है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.