सर्दियों की हलकी दस्तक, बाज़ारों में झिलमिलाती रंग-बिरंगी लाइटें और हर घर में उत्साह का माहौल, यह सब इशारा करता है कि खुशियों का महापर्व दिवाली आने वाला है। दिवाली के पांच दिवसीय दीपोत्सव का आगाज़ जिस पावन पर्व से होता है, उसे हम धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) कहते हैं। धनतेरस केवल नए बर्तन, सोना या चांदी खरीदने का दिन नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने का सबसे मंगलकारी अवसर है। जब घर के मुख्य द्वार पर दीये की लौ जगमगाती है, तो वह केवल अंधेरा ही दूर नहीं करती, बल्कि जीवन से असमय मृत्यु के भय को भी समाप्त कर देती है। अगर आप भी वर्ष में धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) की सही तिथि, खरीदारी के मुहूर्त और पूजा विधि की जानकारी चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
यह भी पढ़ें - Dhanteras 2025: इस साल कब है धनतेरस ? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्त्व, विधि और जरुरी नियम
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) का पर्व मनाया जाता है। इसे धन्वंतरि त्रयोदशी या धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इस दिन आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति के लिए भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही धनतेरस के दिन भगवान कुबेर, माता लक्ष्मी और यमराज की पूजा का भी विशेष विधान है। इस दिन धातु की वस्तुएं खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि ऐसा करने से घर में समृद्धि कई गुना बढ़ जाती है।
वर्ष में धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026)का पावन पर्व 06 नवंबर, शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:
धनतेरस पर्व तिथि: 06 नवंबर 2026, शुक्रवारधनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) का हमारे धार्मिक और व्यावहारिक जीवन में ग गहरा महत्व है। पहला सुख निरोगी काया माना गया है, और भगवान धन्वंतरि हमें उत्तम स्वास्थ्य का वरदान देते हैं। स्वास्थ्य के बिना संसार का कोई भी धन व्यर्थ है। वहीं भगवान कुबेर और माँ लक्ष्मी घर में धन धान्य का वास बनाए रखते हैं। इस दिन संध्या के समय यमराज के नाम का दीपक निकालने की प्राचीन परंपरा है, जिसे यमदीप दान कहा जाता है। मान्यता है कि यमदीप दान करने से परिवार के सदस्यों पर अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है और घर में सुख शांति आती है।
धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत फलदायी माना गया है। आइए जानते हैं चरणबद्ध पूजा विधि:
सफाई और तैयारी: घर की अच्छी तरह सफाई करें और मुख्य द्वार पर रंगोली व वंदनवार लगाएं। शाम को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
यह भी पढ़ें - Kuber Ji Ki Aarti: कुबेर जी की आरती करने से घर में भरा रहता है धन का भंडार
धनतेरस के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि पूजा का पूर्ण फल मिल सके:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के ठीक चौथे दिन सर्पदंश से उसकी मृत्यु हो जाएगी। जब राजकुमार का विवाह हुआ, तो उसकी बुद्धिमान पत्नी को इस योग के बारे में पता चला। उसने विवाह के चौथे दिन अपने पति को सोने न देने का निश्चय किया।
उसने शयनकक्ष के बाहर अपने सारे सोने चांदी के आभूषण और सिक्कों का ढेर लगा दिया और पूरे घर में चारों तरफ दीये जला दिए। वह अपने पति को पूरी रात पौराणिक कथाएं और मधुर गीत सुनाती रही। जब मृत्यु के देवता यमराज सर्प का रूप धारण करके राजकुमार के प्राण लेने आए, तो गहनों और दीयों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं।
यमराज उस ढेर पर बैठकर पूरी रात मधुर गीत सुनते रहे और सुबह होते ही बिना प्राण लिए चुपचाप वापस लौट गए। इस प्रकार राजकुमारी की सूझबूझ और दीपदान से उसके पति के प्राण बच गए। तभी से धनतेरस के दिन यमराज के लिए दीपदान करने की परंपरा चली आ रही है।
धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) का पावन पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सच्चा धन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और अपनों का साथ है। जब हम श्रद्धा और भक्ति के साथ अपने घर के कोने कोने को दीयों से सजाते हैं, तो माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का आगमन हमारे जीवन में होता है। वर्ष की धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) आपके और आपके पूरे परिवार के जीवन में निरोगी काया, अपार समृद्धि, सुख और शांति लेकर आए, यही हमारी मंगल कामना है।
यह भी पढ़ें - Laxmi Mantras: मां लक्ष्मी के मंत्रों का लाभ जानकर हो जाएंगे हैरान, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.