भाई दूज मूल रूप से भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व है। ‘दूज’ शब्द हिंदू पंचांग की द्वितीया तिथि को दर्शाता है। साल में दो बार भाई दूज मनाई जाती है—एक दिवाली के दो दिन बाद, जो सबसे ज्यादा प्रचलित है, और दूसरी होली भाई दूज(Holi Bhai Dooj), जिसे कुछ खास क्षेत्रों में मनाया जाता है। भले ही होली भाई दूज दिवाली वाले भाई दूज जितनी प्रसिद्ध न हो, लेकिन इसका भाव और महत्व उतना ही पवित्र माना जाता है। उल्लेखनीय है कि धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु और व्रतराज जैसे प्रमुख हिंदू ग्रंथों में इसका विशेष वर्णन नहीं मिलता।
इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर टीका लगाकर उसकी लंबी उम्र, सुख और सफलता की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति स्नेह और संरक्षण का भाव प्रकट करते हैं। इस तरह होली भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते को और गहराई व मजबूती देने वाला सुंदर पर्व माना जाता है।
साल 2026 में भाई दूज का पावन पर्व बृहस्पतिवार, मार्च 5, 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
भाई दूज का तिलक करने के लिए अपराह्न काल को सबसे शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में यह शुभ समय दोपहर 1 बजकर 17 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 2 घंटे 13 मिनट की होगी।
पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि की शुरुआत शाम 04 मार्च, 2026 को 04 बजकर 48 मिनट से होगी और यह 05 मार्च, 2026 शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर भाई दूज का पर्व (Bhai Dooj Festival 2026) 5 मार्च , दिन गुरुवार को मनाना उत्तम माना जाएगा।
पूजा के समय भाई-बहन उत्तर या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठते हैं। सबसे पहले भगवान गणेश और भगवान विष्णु का स्मरण कर उनसे शुभता और मंगलकामना की प्रार्थना की जाती है। फिर शुभ मुहूर्त में बहन भाई को चौक या आसन पर बैठाकर रोली और चावल से तिलक करती है।
तिलक के बाद बहन भाई को पान, सुपारी, बताशे, फूल और नारियल अर्पित करती है और उसके सुखी, स्वस्थ और सफल जीवन की कामना करती है। बदले में भाई बहन को उपहार देता है और जीवन भर उसकी रक्षा और साथ निभाने का वचन देता है।
यह सरल-सी पूजा विधि भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, विश्वास और अपनापन और भी गहरा कर देती है।
यह भी पढ़ें - Holika Dahan 2026: होलिका दहन के समय बन रहा है चंद्र ग्रहण , जाने कब करेंगे होलिका दहन
दूसरी लोकप्रिय लोककथा यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है। कहा जाता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर आए थे। यमुना ने स्नेहपूर्वक उनका स्वागत किया, उन्हें स्वादिष्ट भोजन कराया और माथे पर तिलक लगाया। बहन के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा। यमुना ने वर मांगा कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर आकर तिलक करवाए और भोजन करे, उसे अकाल मृत्यु का भय न हो। यमराज ने यह वरदान स्वीकार किया और तभी से भाई दूज की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
एक अन्य कथा जैन परंपरा से जुड़ी है। जब जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया, तो उनके भाई राजा नंदीवर्धन शोक में डूब गए। उस समय उनकी बहन सुदर्शन ने उन्हें सांत्वना दी और मानसिक संबल दिया। इसी स्मृति में भाई दूज के दिन बहनों के सम्मान और भाई-बहन के स्नेह को विशेष महत्व दिया जाता है।
इन सभी कथाओं का सार यही है कि भाई दूज (Bhai Dooj ) भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव का पावन पर्व है।
यह पूरा अनुष्ठान भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प और बहन द्वारा भाई को दिए जाने वाले आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। यदि कोई बहन किसी कारणवश अपने भाई से दूर रहती है और उसके घर नहीं जा पाती, तो भी वह पूरे मन से उसके लिए मंगलकामनाएं करती है। बदले में भाई भी अपनी बहन के प्रति स्नेह और जिम्मेदारी जताते हुए उसे उपहार देते हैं।
इस तरह होली भाई दूज (Holi Bhai Dooj ) का पर्व रिश्तों में अपनापन, सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा करता है।
यह भी पढ़ें - Holi 2026 : चंद्रग्रहण के चलते इस साल कब खेली जाएगी होली, जानिए सही तिथि
होली भाई दूज (Holi Bhai Dooj 2026) का पर्व भाई-बहन के रिश्ते में छिपे प्रेम, विश्वास और आपसी जिम्मेदारी को खूबसूरती से उजागर करता है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि रिश्तों की असली ताकत भावनाओं, आशीर्वाद और साथ निभाने के संकल्प में होती है। बहन की प्रार्थनाएं और भाई का संरक्षण भाव इस दिन को विशेष बनाते हैं। भले ही यह पर्व हर जगह समान रूप से प्रसिद्ध न हो, लेकिन जहां भी इसे मनाया जाता है, वहां यह पारिवारिक रिश्तों में मिठास, अपनापन और सौहार्द बढ़ाने का काम करता है। होली भाई दूज वास्तव में रंगों के इस मौसम में रिश्तों को प्रेम और स्नेह के रंगों से भर देने का पर्व है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.