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March 5, 2026 Blog

Shani Jayanti 2026: शनि जयंती कब है , शनि देव को प्रश्न करने के लिए करे इस विधि से पूजा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Shani Jayanti 2026: धार्मिक मान्यताओं में सूर्य पुत्र शनि देव का विशेष स्थान बताया गया है। शनि देव को कर्मों का न्याय करने वाला देवता माना जाता है। मान्यता है कि वे हर व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर ही फल प्रदान करते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी भी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति जीवन में बड़े उतार-चढ़ाव और महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। इसलिए शनि के प्रभाव को समझना और उसके अनुसार अपने कर्मों को सुधारना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

हिंदू परंपरा के अनुसार शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को हुआ था। इसी कारण हर वर्ष इस दिन शनि जयंती (Shani Jayanti) मनाई जाती है। यह दिन दान-पुण्य, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शनि देव की पूजा करने से शनि से जुड़े दोषों का प्रभाव कम हो सकता है।

कहा जाता है कि जो लोग सत्य और अच्छे कर्मों का पालन करते हैं, उन पर शनि देव की विशेष कृपा बनी रहती है, जबकि गलत कर्म करने वालों को उनके दंड का सामना करना पड़ता है। इसलिए शनि जयंती (Shani Jayanti 2026) के दिन पूजा-पाठ के साथ अच्छे कर्म करने और जरूरतमंदों की सहायता करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उस पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव बढ़ रहा है, तो किसी जानकार ज्योतिषी से परामर्श लेकर उचित उपाय करना लाभकारी माना जाता है।


शनि जयंती 2026 तिथि (Shani Jayanti 2026 Date & Time)

वर्ष 2026 में शनि जयंती (Shani Jayanti 2026 date) 16 मई, शनिवार को मनाई जाएगी। यह दिन ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के अवसर पर आता है, जिसे शनि देव के जन्मदिन के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 15 मई 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से प्रारंभ होगी और 16 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 16 मई  को शनि जयंती का व्रत और पूजा करना शुभ माना जाएगा।

ज्योतिष मान्यता के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के वैवाहिक जीवन या रिश्तों पर शनि का प्रभाव महसूस हो रहा हो, तो कुंडली मिलान या ज्योतिषीय परामर्श लेना लाभकारी माना जाता है, जिससे उचित उपाय और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।

shani jayanti 2026


शनि जयंती का महत्त्व (Importance Of Shani Jayanti)

अक्सर शनि देव को कठोर या क्रूर देवता के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में वे न्याय और कर्म के देवता माने जाते हैं। वे हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। जो लोग मेहनत, अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलते हैं, शनि देव उन्हें अच्छे परिणाम देते हैं, जबकि गलत कर्म करने वालों को उनके कर्मों का दंड भी मिलता है। ज्योतिष के अनुसार शनि ग्रह की चाल सबसे धीमी होती है, इसलिए यह धैर्य, परिश्रम और लंबे समय में मिलने वाले फल का प्रतीक माना जाता है।

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साढ़े साती से राहत:
शनि जयंती के दिन शनि देव की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से शनि की साढ़े साती के दौरान आने वाली कठिनाइयों में कमी आ सकती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।

कर्मों का शुद्धिकरण:
इस दिन प्रार्थना, दान और पूजा करने से व्यक्ति अपने पुराने नकारात्मक कर्मों से मुक्ति पाने की दिशा में आगे बढ़ता है और मन में शांति का अनुभव करता है।

सफलता और समृद्धि:
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति अनुकूल हो, तो वह जीवन में धन, प्रतिष्ठा, अधिकार और सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


शनि जयंती पर क्या न करें (What not to do on Shani Jayanti)

  • इस दिन बाल या नाखून काटने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता।
  • मंदिर में शनि देव की पूजा करते समय सीधे उनकी आंखों में देखने के बजाय श्रद्धा से उनके चरणों की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • शनि जयंती (Shani Jayanti) के दिन बड़े-बुजुर्गों का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनका सम्मान करना शनि देव को प्रिय माना गया है।
  • इस दिन शमी या पीपल के वृक्ष को किसी भी प्रकार की हानि पहुंचाने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना अशुभ माना जाता है।

श्रद्धा और अच्छे कर्मों के साथ किए गए ये छोटे-छोटे उपाय शनि देव की कृपा प्राप्त करने में सहायक माने जाते हैं।

शनि जयंती पर शनि देव की पूजा कैसे करें? (How to worship Shani Dev on Shani Jayanti?)

शनि जयंती भगवान शनि के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है। पंचांग के अनुसार यह ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आता है। वर्ष 2026 में शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनि, सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र हैं तथा यमराज और यमुना उनके भाई-बहन माने जाते हैं। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शनि देव की पूजा करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।

शनि जयंती (Shani Jayanti Puja) के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा के लिए एक चौकी पर काला वस्त्र बिछाकर उस पर शनि देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा की शुरुआत करते हुए शनि देव के सामने घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।

इसके बाद शनि देव की प्रतिमा को पंचामृत, पंचगव्य या सुगंधित जल से स्नान कराएं। फिर उन्हें कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल और पुष्प अर्पित करें। भगवान शनि को प्रसाद के रूप में इमरती या तेल में बनी मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

पूजा के दौरान पंचोपचार विधि से शनि देव की आराधना करें और शनि मंत्र (Shani Mantra) का जप करें। इसके बाद श्रद्धा से शनि चालीसा का पाठ करें। अंत में शनि देव की आरती करके उनसे सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रकार विधिपूर्वक पूजा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयों में राहत मिलती है। 

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शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय (How to Please Lord Shani)

ज्योतिष शास्त्र में पीपल के वृक्ष को शनि देव से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करने और वहां दीपक जलाने से शनि से जुड़े कई कष्टों में कमी आती है। साथ ही पीपल का पौधा लगाना भी शुभ माना जाता है, इससे शनि देव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इस दिन काले तिल, काले वस्त्र और सरसों के तेल जैसी वस्तुओं का दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव भगवान शिव के भक्त माने जाते हैं। इसलिए शनि की पूजा के साथ भगवान शिव का भी अभिषेक करना शुभ माना जाता है, विशेष रूप से काले तिल मिले जल से। इसके अलावा हनुमान जी की आराधना भी शनि देव को प्रसन्न करने का एक प्रभावी उपाय माना जाता है। इस दिन शनि चालीसा का पाठ करने से भी सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है।


शनि दोष से राहत पाने के उपाय (Remedies to get relief from Shani Dosha)

  • शनि जयंती (Shani Jayanti) के दिन शनि शांति हवन या पूजा करवाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे शनि दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है।
  • ज्योतिषीय सलाह लेने के बाद ही नीलम रत्न की अंगूठी धारण करनी चाहिए। उचित विधि से पहना गया नीलम शनि ग्रह को अनुकूल बनाने में सहायक माना जाता है।
  • नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान हनुमान के भक्तों पर शनि देव की विशेष कृपा रहती है।
  • प्रत्येक शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होने लगती हैं।


निष्कर्ष

शनि जयंती का पर्व (Shani Jayanti Festival) भगवान शनि देव की आराधना और आत्मचिंतन का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ, दान-पुण्य तथा अच्छे कर्म करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई उपासना जीवन की बाधाओं को कम करती है और व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इसलिए शनि जयंती के दिन संयम, सेवा और सद्कर्म अपनाकर भगवान शनि का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और संतुलन बना रहे।


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Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.