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March 20, 2026 Blog

Batuk Bhairav Jayanti 2026: बटुक भैरव जयंती कब और क्यों मनाते है, जानिए महत्त्व और पूजा विधि

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Batuk Bhairav Jayanti 2026: भगवान शिव के अनेक स्वरूपों में बटुक भैरव को उनका बाल रूप होने के साथ-साथ अत्यंत उग्र और शक्तिशाली रूप भी माना जाता है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है। इस दिन भक्त विशेष श्रद्धा के साथ भगवान बटुक भैरव की पूजा-अर्चना करते हैं।

मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी उपासना करने पर जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही व्यक्ति की इच्छाएं भी पूर्ण होती हैं। वर्ष 2026 में बटुक भैरव जयंती (Batuk Bhairav Jayanti 2026 date) 29 जून को मनाई जाएगी, जिसे भक्त बड़े श्रद्धाभाव से मनाते हैं।

बटुक भैरव जयंती की पौराणिक कथा (Legend of Batuk Bhairav Jayanti)

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन समय में आपद नाम का एक अत्याचारी राक्षस था, जिसने तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। देवता, ऋषि और पृथ्वी पर रहने वाले सभी लोग उसके उत्पीड़न से परेशान हो चुके थे। उसे एक ऐसा वरदान मिला था कि कोई भी देवता या सामान्य व्यक्ति उसका वध नहीं कर सकता, केवल पाँच वर्ष का बालक ही उसे समाप्त कर सकता है।

जब स्थिति असहनीय हो गई, तब सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। देवताओं की विनती और अपनी करुणा से भगवान शिव ने एक बालक के रूप में अवतार लिया, जिन्हें बटुक भैरव कहा गया।

इस बाल रूप में भगवान शिव ने अपनी अद्भुत शक्ति से राक्षस आपद का अंत किया और तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया। तभी से बटुक भैरव को रक्षा, साहस और न्याय के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। 

batuk bhairav


बटुक भैरव जयंती पूजा विधि (Batuk Bhairav Jayanti Puja Vidhi)

बटुक भैरव जयंती के दिन भगवान शिव के बाल स्वरूप की श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना कर जीवन में सुख, सुरक्षा और शांति की कामना करते हैं।

भगवान बटुक भैरव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें सफेद फूल, मीठी खीर, लड्डू जैसे भोग अर्पित किए जाते हैं। ऐसा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मिलता है।

यदि कोई व्यक्ति शनि से जुड़ी समस्याओं से परेशान है, तो इस अवसर पर पकौड़े या पुए बनाकर जरूरतमंद लोगों को खिलाना शुभ माना जाता है। इससे शनि दोष के प्रभाव कम होते हैं।

बटुक भैरव जयंती को दुर्भाग्य दूर करने का विशेष दिन माना गया है। इस दिन रोटी पर सरसों का तेल लगाकर काले कुत्ते को खिलाने से भी नकारात्मकता कम होती है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

इस प्रकार, श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा जीवन में सकारात्मक बदलाव और ईश्वरीय कृपा लेकर आती है। 


बटुक भैरव की साधना (Sadhana of Batuk Bhairav)

बटुक भैरव की साधना को अत्यंत प्रभावशाली और कल्याणकारी माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि जो साधक सच्चे मन और नियमित रूप से उनकी उपासना करता है, उसके जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं रहती और वह सुख-संपन्न जीवन जीता है। निरंतर साधना करने पर भगवान भैरव अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य अनुभूतियां और विशेष सिद्धियां प्रदान करते हैं, जिनका उपयोग वे लोककल्याण के लिए कर सकते हैं।

भगवान भैरव अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर उन्हें बल, बुद्धि, तेज, यश, धन और अंततः मोक्ष का आशीर्वाद देते हैं। भैरव जयंती के अवसर पर अष्ट महाभैरव के दर्शन और पूजा का भी विशेष महत्व होता है, जिससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भय से मुक्ति मिलती है।


बटुक भैरव जयंती के उपाय (Remedies For Batuk Bhairav Jayanti)

बटुक भैरव जयंती के दिन प्रातःकाल गंगाजल से स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद साफ और विशेष रूप से सफेद वस्त्र धारण करें। पूजा के दौरान भगवान भैरव को सफेद फूल, केला, लड्डू, तुलसी पत्र और पंचामृत अर्पित करें। फिर श्रद्धा के साथ “ॐ बटुक भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।

इस दिन कुत्ते को दूध या भोजन खिलाना भी बहुत पुण्यदायी माना जाता है, क्योंकि इसे भैरव देव की कृपा प्राप्त करने का एक सरल उपाय माना जाता है।

श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई यह साधना जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करती है।


निष्कर्ष

बटुक भैरव जयंती (Batuk Bhairav Jayanti) भगवान शिव के उग्र लेकिन करुणामय स्वरूप की आराधना का विशेष अवसर है। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ की गई पूजा, मंत्र जप और साधना से जीवन की नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और व्यक्ति को साहस, सुरक्षा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

बटुक भैरव की उपासना न केवल भौतिक सुख-समृद्धि प्रदान करती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी खोलती है। इसलिए इस पावन दिन पर सच्चे मन से भगवान भैरव का स्मरण कर उनकी कृपा प्राप्त करना ही जीवन को सुखमय और संतुलित बनाने का सर्वोत्तम उपाय है। 

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.