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April 1, 2026 Blog

Vikata Sankashti Chaturthi 2026: व्रत, पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 क्या है?(What is Vikat Sankashti Chaturthi 2026?)

वैशाख मास की विकट संकष्टी (Vikata Sankashti Chaturthi 2026) भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के दुख, बाधाएं और संकट दूर होते हैं। वैशाख महीने में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधि-पूर्वक पूजा करने से सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होने का धार्मिक महत्व बताया गया है।

विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है (When is Vikat Sankashti Chaturthi in 2026?)

साल 2026 में वैशाख मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल रविवार को शुरू होगी।
यह तिथि 6 अप्रैल दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल को रखा जाएगा और रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त (Auspicious Time for Worship)

विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा के लिए कई शुभ समय माने गए हैं।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 से 05:21 तक
  • पूजा का सामान्य मुहूर्त: सुबह 07:41 से दोपहर 12:24 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:59 से 12:49 तक
  • लाभ मुहूर्त: 09:15 से 10:50 तक
  • अमृत मुहूर्त: 10:50 से 12:24 तक

इन मुहूर्त में भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है।

विकट संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व (The Religious Significance of Vikat Sankashti Chaturthi)

धार्मिक मान्यता के अनुसार संकष्टी चतुर्थी (Vikata Sankashti Chaturthi 2026) का व्रत करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन से संकट दूर करते हैं। जो लोग नौकरी, व्यापार, शिक्षा, विवाह या जीवन की किसी समस्या से परेशान होते हैं, उन्हें यह व्रत विशेष रूप से करना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है और रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं।

व्रत रखने के नियम (Rules for Observing a Fast)

संकष्टी चतुर्थी (Vikata Sankashti Chaturthi 2026) का व्रत नियम और श्रद्धा से रखा जाता है।

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • पूरे दिन व्रत रखें
  • फलाहार या निर्जला व्रत रखा जा सकता है
  • भगवान गणेश की पूजा करें
  • रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें
  • व्रत के दिन झूठ, क्रोध और बुरे विचारों से दूर रहें
  • विकट संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष विधि से की जाती है। (On this day, Lord Ganesha is worshipped according to a special ritual)

सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान गणेश के सामने व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या फोटो स्थापित करें।

फिर गंगाजल या साफ जल से गणेश जी का अभिषेक करें। इसके बाद सिंदूर, अक्षत, लाल फूल और दूर्वा अर्पित करें।
गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
फिर “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
इसके बाद संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में गणेश जी की आरती करें।
गणेश जी के ज्योतिष मंत्र
विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के जाप के मंत्र अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

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प्रमुख मंत्र

  • ॐ गं गनपति नमः
  • गणेश गायत्री श्लोक
  • ॐ एकदन्ताय नमः
  • वक्रतुण्डाय ध्यानामहे
  • तन्नो दन्ति प्रचोदयुष्ट।
  • संकट समाप्ति मंत्र
  • वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समानप्रभ
  • निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सदा विभवम्
  • विकट संकष्टी चतुर्थी के फायदे
  • इस व्रत को करने से अनेक आध्यात्मिक लाभ बताए गए हैं।
  • जीवन की परेशानियाँ समाप्त होती हैं
  • धन और वैभव आते हैं
  • काम और व्यवसाय में सफलता प्राप्त होती है।
  • घर में सुख और शांति होती है।
  • विवाह में आई कठिनाइयां समाप्त होती हैं।
  • शिक्षा में सफलता प्राप्त होती है।
  • दान का मूल्य
  • इस दिन दान देने को बहुत अच्छा समझा जाता है।

आप इस दिन यह दान कर सकते हैं:

  • गुड़
  • तिल
  • भोजन
  • वस्त्र
  • लड्डु
  • नारियल
  • दान करने से शुभता मिलती है।


Vikat Sankashti Chaturthi 2026

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विकट संकष्टी चतुर्थी तथा चंद्रमा का महत्व (Significance of Vikat Sankashti Chaturthi and Moon)


  • संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा की विशेषता होती है। इस दिन व्रति तभी खोली जाती है जब चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
  • चंद्रमा को फूल, अक्षत, दूध और जल चढ़ाए जाते हैं। इससे व्रत सफल होता है और भगवान गणेश खुश होते हैं।
  • घर पर आसान पूजा कैसे करें
  • यदि आप मंदिर नहीं जा सकते हैं तो आप घर पर पूजा कर सकते हैं।
  • सुबह में स्नान करें
  • गणेश जी की तस्वीर या प्रतिमा रखें।
  • दीप जलाएं
  • फूल और घास चढ़ाएं
  • मोदक या लड्डू की पूजा करें।
  • मंत्र का जाप करें
  • आरती करना
  • रात में चाँद को अर्घ्य अर्पित करें

चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि (The Method of Offering Arghya to the Moon)

संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूरा माना जाता है।
रात में चंद्रमा निकलने पर एक लोटे में जल लें और उसमें थोड़ा दूध, अक्षत और फूल डालें।
चंद्रमा को अर्घ्य दें और भगवान गणेश से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
इसके बाद व्रत खोलें और प्रसाद ग्रहण करें।

चंद्र उदय समय 2026 (Moonrise Time 2026)

विकट संकष्टी (Vikata Sankashti Chaturthi 2026) चतुर्थी 2026 में चंद्रमा का उदय रात 9 बजकर 58 मिनट पर होगा।
इस समय चंद्र दर्शन करके अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।

निष्कर्ष ( Conclusion )

विकट संकष्टी (Vikata Sankashti Chaturthi 2026) चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का बहुत शुभ दिन माना जाता है। इस दिन विधि-पूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सफलता के रास्ते खुलते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है। इसलिए भक्तों को इस दिन नियमपूर्वक गणेश जी की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य अवश्य देना चाहिए।

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FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1. विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?

उत्तर: साल 2026 में विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल, रविवार को रखा जाएगा। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाएगा।

प्रश्न 2. संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे रखा जाता है?

उत्तर: इस दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूरे दिन उपवास रखा जाता है, जो फलाहार या निर्जला हो सकता है। भगवान गणेश की पूजा की जाती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।

प्रश्न 3. विकट संकष्टी चतुर्थी का क्या महत्व है?

उत्तर: धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और जीवन के सभी संकट, बाधाएं और दुख दूर करते हैं। यह व्रत सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।

प्रश्न 4. चंद्रमा को अर्घ्य देना क्यों जरूरी है?

उत्तर: संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। चंद्रमा को जल, दूध, फूल और अक्षत अर्पित करने से व्रत सफल होता है और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।

प्रश्न 5. विकट संकष्टी चतुर्थी पर क्या दान करना चाहिए?

उत्तर: इस दिन गुड़, तिल, भोजन, वस्त्र, लड्डू और नारियल का दान करना शुभ माना जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.