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March 5, 2026 Blog

Vat Savitri Vrat 2026: तिथि, पूजा विधि, कथा और सम्पूर्ण जानकारी

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Vat Savitri Vrat 2026:  हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक पर्व है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि के लिए श्रद्धा के साथ मनाती हैं। यह व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि अटूट प्रेम, विश्वास और निष्ठा का प्रतीक है। सावित्री और सत्यवान की कथा इस व्रत की आत्मा है, जो सिखाती है कि सच्ची भक्ति और दृढ़ संकल्प से कठिन से कठिन परिस्थिति भी बदली जा सकती है।
वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को और दूसरा ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रखा जाता है। इन दोनों तिथियों के बीच लगभग 15 दिनों का अंतर होता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ करती हैं। यह व्रत पातिव्रत्य, समर्पण और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है तथा स्त्री की शक्ति और धर्म के प्रति उसकी आस्था को दर्शाता है।

वट सावित्री व्रत 2026 कब है? (When is Vat Savitri Vrat 2026?)

साल 2026 में यह व्रत दो तिथियों पर मनाया जाएगा, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अमावस्या और पूर्णिमा दोनों दिन रखा जाता है। साल 2026 में वट सावित्री अमावस्या (Vat Savitri Vrat 2026 Date) 16 मई को मनाई जाएगी, जबकि वट सावित्री पूर्णिमा 29 जून 2026 को पड़ेगी। इस पावन दिन वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर धागा बांधकर उसकी पूजा करती हैं और अपने पति के सुखी, स्वस्थ और लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।
  • वट सावित्री अमावस्या – शनिवार, 16 मई 2026
  • वट पूर्णिमा व्रत – रविवार, 28 जून 2026

अमावस्या तिथि 15 मई 2026 की शाम 7:41 बजे से शुरू होकर 16 मई 2026 की शाम 4:00 बजे तक रहेगी।

पूजा का सबसे शुभ समय सूर्योदय के बाद का प्रातःकाल माना जाता है। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहता है।

वट सावित्री व्रत का महत्व (Importance of Vat Savitri Vrat)

बरगद का पेड़, जिसे वट वृक्ष कहा जाता है, दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक है। इसकी जड़ें और शाखाएं दूर तक फैलती हैं, इसलिए इसे अमरता का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस वृक्ष की पूजा करके अपने पति के जीवन में भी ऐसी ही लंबी उम्र और मजबूती की कामना करती हैं।

यह व्रत हमें यह भी सिखाता है कि विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संबंध है, जिसमें प्रेम, धैर्य और विश्वास की बड़ी भूमिका होती है।

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वट सावित्री व्रत 2026 की पूजा सामग्री (Worship materials for Vat Savitri Vrat 2026)

पूजा को सही तरीके से करने के लिए निम्न सामग्री तैयार रखें:

  • जल से भरा कलश
  • रोली, हल्दी, सिंदूर और अक्षत
  • मोली या कच्चा सूत (लाल या सफेद धागा)
  • भीगा हुआ काला चना
  • फल (आम, लीची आदि)
  • मिठाई और पूड़ी
  • फूल, माला, अगरबत्ती और दीया
  • सावित्री-सत्यवान की फोटो या मूर्ति
  • बांस का पंखा और टोकरी (परंपरा अनुसार)


वट सावित्री व्रत पूजा विधि (Vat Savitri Vrat Puja Vidhi)

1. सुबह की तैयारी

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, पारंपरिक वस्त्र पहनें। विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं।

2. वट वृक्ष की पूजा

पास के बरगद के पेड़ के पास जाएं। यदि संभव न हो तो घर में उसकी टहनी या प्रतीकात्मक रूप में पूजा की जा सकती है।

पेड़ को जल अर्पित करें और रोली, हल्दी, फूल चढ़ाएं।

3. परिक्रमा और धागा बांधना

वट वृक्ष के तने के चारों ओर 7 या 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटें। यह सुरक्षा और अटूट बंधन का प्रतीक है।

4. कथा श्रवण

सावित्री और सत्यवान की कथा श्रद्धा से सुनें या पढ़ें।

5. आरती और भोग

भीगे चने, फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में आरती करें।

6. व्रत खोलना

पूजा के बाद जल और भीगे हुए चने का सेवन करके व्रत पूरा करें और बड़ों का आशीर्वाद लें।

सावित्री और सत्यवान की कथा (The story of Savitri and Satyavan)

बहुत समय पहले मद्र देश में अश्वपति नाम के एक राजा रहते थे। उनके पास सब कुछ था, लेकिन संतान नहीं थी। उन्होंने कठोर तप किया और उन्हें एक सुंदर पुत्री का आशीर्वाद मिला, जिसका नाम सावित्री रखा गया।

सावित्री बड़ी होकर अत्यंत गुणवान और बुद्धिमान बनीं। विवाह योग्य होने पर उन्होंने स्वयं अपने जीवनसाथी की खोज की। जंगल में उनकी मुलाकात सत्यवान से हुई, जो एक वनवासी जीवन जी रहे थे, लेकिन स्वभाव से बहुत सज्जन और धर्मनिष्ठ थे।

जब ऋषि नारद ने बताया कि सत्यवान की आयु केवल एक वर्ष शेष है, तब भी सावित्री अपने निर्णय से नहीं डिगीं। उन्होंने सत्यवान से विवाह किया और ससुराल में साधारण जीवन अपनाया।

एक दिन जब सत्यवान लकड़ी काटने जंगल गए, तभी उनकी मृत्यु का समय आ गया। यमराज उनकी आत्मा लेने आए। सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ीं।

सावित्री ने पूरे रास्ते यमराज से धर्म और भक्ति की बातें कीं। उनकी बुद्धिमानी और निष्ठा से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिए। सावित्री ने पहले अपने ससुर की आंखों की रोशनी और राज्य की वापसी मांगी। फिर संतान का वरदान मांगा।

जब यमराज ने यह वरदान दे दिया, तो उन्हें समझ आया कि बिना सत्यवान के संतान कैसे होगी। इस प्रकार उन्हें सत्यवान का जीवन वापस देना पड़ा।

इस तरह सावित्री की अटूट भक्ति ने मृत्यु को भी पराजित कर दिया।

वट सावित्री व्रत रखने के आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits of Observing Vat Savitri Vrat)

  • पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना
  • दांपत्य जीवन में प्रेम और स्थिरता
  • परिवार में सुख और समृद्धि
  • संतान के लिए मंगलकामना
  • मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि

आधुनिक समय में वट सावित्री व्रत का महत्व (Significance of Vat Savitri Vrat 2026 in modern times)

आज के समय में भी यह व्रत उतना ही प्रासंगिक है। यह केवल परंपरा निभाने का दिन नहीं, बल्कि रिश्तों को समझने और मजबूत बनाने का अवसर है।

तेजी से बदलती जीवनशैली में यह व्रत हमें धैर्य, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों की याद दिलाता है। यह पर्व बताता है कि सच्चा रिश्ता केवल साथ रहने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के लिए खड़े रहने से मजबूत होता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2026) केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अटूट निष्ठा का उत्सव है। सावित्री और सत्यवान की कथा हमें यह सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और सच्ची भक्ति से असंभव भी संभव हो सकता है।

यह व्रत विवाह की पवित्रता और जीवनसाथी के प्रति समर्पण को सम्मान देने का दिन है। हर वर्ष की तरह 2026 में भी यह पर्व महिलाओं के लिए आस्था, शक्ति और प्रेम का प्रतीक बनकर आएगा, और हमें याद दिलाएगा कि सच्चे रिश्ते विश्वास और त्याग पर टिके होते हैं।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.