Vat Savitri Vrat 2026: हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक पर्व है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि के लिए श्रद्धा के साथ मनाती हैं। यह व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि अटूट प्रेम, विश्वास और निष्ठा का प्रतीक है। सावित्री और सत्यवान की कथा इस व्रत की आत्मा है, जो सिखाती है कि सच्ची भक्ति और दृढ़ संकल्प से कठिन से कठिन परिस्थिति भी बदली जा सकती है।
वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को और दूसरा ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रखा जाता है। इन दोनों तिथियों के बीच लगभग 15 दिनों का अंतर होता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ करती हैं। यह व्रत पातिव्रत्य, समर्पण और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है तथा स्त्री की शक्ति और धर्म के प्रति उसकी आस्था को दर्शाता है।
अमावस्या तिथि 15 मई 2026 की शाम 7:41 बजे से शुरू होकर 16 मई 2026 की शाम 4:00 बजे तक रहेगी।
पूजा का सबसे शुभ समय सूर्योदय के बाद का प्रातःकाल माना जाता है। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहता है।
बरगद का पेड़, जिसे वट वृक्ष कहा जाता है, दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक है। इसकी जड़ें और शाखाएं दूर तक फैलती हैं, इसलिए इसे अमरता का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस वृक्ष की पूजा करके अपने पति के जीवन में भी ऐसी ही लंबी उम्र और मजबूती की कामना करती हैं।
यह व्रत हमें यह भी सिखाता है कि विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संबंध है, जिसमें प्रेम, धैर्य और विश्वास की बड़ी भूमिका होती है।
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पूजा को सही तरीके से करने के लिए निम्न सामग्री तैयार रखें:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, पारंपरिक वस्त्र पहनें। विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं।
पास के बरगद के पेड़ के पास जाएं। यदि संभव न हो तो घर में उसकी टहनी या प्रतीकात्मक रूप में पूजा की जा सकती है।
पेड़ को जल अर्पित करें और रोली, हल्दी, फूल चढ़ाएं।
वट वृक्ष के तने के चारों ओर 7 या 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटें। यह सुरक्षा और अटूट बंधन का प्रतीक है।
सावित्री और सत्यवान की कथा श्रद्धा से सुनें या पढ़ें।
भीगे चने, फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में आरती करें।
पूजा के बाद जल और भीगे हुए चने का सेवन करके व्रत पूरा करें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
बहुत समय पहले मद्र देश में अश्वपति नाम के एक राजा रहते थे। उनके पास सब कुछ था, लेकिन संतान नहीं थी। उन्होंने कठोर तप किया और उन्हें एक सुंदर पुत्री का आशीर्वाद मिला, जिसका नाम सावित्री रखा गया।
सावित्री बड़ी होकर अत्यंत गुणवान और बुद्धिमान बनीं। विवाह योग्य होने पर उन्होंने स्वयं अपने जीवनसाथी की खोज की। जंगल में उनकी मुलाकात सत्यवान से हुई, जो एक वनवासी जीवन जी रहे थे, लेकिन स्वभाव से बहुत सज्जन और धर्मनिष्ठ थे।
जब ऋषि नारद ने बताया कि सत्यवान की आयु केवल एक वर्ष शेष है, तब भी सावित्री अपने निर्णय से नहीं डिगीं। उन्होंने सत्यवान से विवाह किया और ससुराल में साधारण जीवन अपनाया।
एक दिन जब सत्यवान लकड़ी काटने जंगल गए, तभी उनकी मृत्यु का समय आ गया। यमराज उनकी आत्मा लेने आए। सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ीं।
सावित्री ने पूरे रास्ते यमराज से धर्म और भक्ति की बातें कीं। उनकी बुद्धिमानी और निष्ठा से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिए। सावित्री ने पहले अपने ससुर की आंखों की रोशनी और राज्य की वापसी मांगी। फिर संतान का वरदान मांगा।
जब यमराज ने यह वरदान दे दिया, तो उन्हें समझ आया कि बिना सत्यवान के संतान कैसे होगी। इस प्रकार उन्हें सत्यवान का जीवन वापस देना पड़ा।
इस तरह सावित्री की अटूट भक्ति ने मृत्यु को भी पराजित कर दिया।
आज के समय में भी यह व्रत उतना ही प्रासंगिक है। यह केवल परंपरा निभाने का दिन नहीं, बल्कि रिश्तों को समझने और मजबूत बनाने का अवसर है।
तेजी से बदलती जीवनशैली में यह व्रत हमें धैर्य, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों की याद दिलाता है। यह पर्व बताता है कि सच्चा रिश्ता केवल साथ रहने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के लिए खड़े रहने से मजबूत होता है।
वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2026) केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अटूट निष्ठा का उत्सव है। सावित्री और सत्यवान की कथा हमें यह सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और सच्ची भक्ति से असंभव भी संभव हो सकता है।
यह व्रत विवाह की पवित्रता और जीवनसाथी के प्रति समर्पण को सम्मान देने का दिन है। हर वर्ष की तरह 2026 में भी यह पर्व महिलाओं के लिए आस्था, शक्ति और प्रेम का प्रतीक बनकर आएगा, और हमें याद दिलाएगा कि सच्चे रिश्ते विश्वास और त्याग पर टिके होते हैं।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.