जीवन में जब संकट और चुनौतियाँ आती हैं, तो हमें एक ऐसे साथी की जरूरत होती है जो हमारा साथ दे और हमें प्रेरित करे। ऐसे में पवनपुत्र हनुमान हमारे लिए एक प्रेरणा के स्रोत हैं। कलयुग में भगवान हनुमान जी एकमात्र ऐसे जागृत देवता हैं जो अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं और उनकी मदद करते हैं।
दीपोत्सव के अवसर पर, यानी रूप चतुर्दशी और नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन महाबली हनुमान की भक्ति में डूबकर उनके चरणों में शीश झुकाने से जीवन का हर दुख, भय और संकट दूर हो जाता है। यदि आप भी वर्ष 2026 में हनुमान पूजा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि की तलाश में हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी होगा।
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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हनुमान पूजा का महापर्व मनाया जाता है। इसे छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि को माता अंजनी के गर्भ से रुद्र अवतार भगवान हनुमान का प्राकट्य हुआ था। इस दिन भक्त अपने दुखों का निवारण करने, भय से मुक्ति पाने और असीम शक्ति व भक्ति का आशीर्वाद लेने के लिए हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
वर्ष 2026 में हनुमान पूजा का यह पावन पर्व 07 नवंबर, शनिवार को पूरे देश में अपार श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त और तिथियों का विवरण इस प्रकार है:
हनुमान पूजा तिथि: 07 नवंबर 2026, शनिवारधार्मिक दृष्टिकोण से हनुमान पूजा का महत्व अत्यंत विशाल है। भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नवनिधि के दाता का वरदान प्राप्त है। कलयुग में हनुमान जी की उपासना सबसे सरल और तुरंत फल देने वाली मानी गई है। जो साधक इस दिन सच्चे मन से बजरंगबली की सेवा करता है, उसकी कुंडली के सभी ग्रह दोष विशेषकर शनि की साढ़े साती और ढैय्या का दुष्प्रभाव समाप्त हो जाता है। यह पूजा केवल बाहरी संकटों से ही रक्षा नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के भीतर छुपे भय, आलस्य और नकारात्मक विचारों का भी सर्वनाश कर देती है।

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हनुमान जी की पूजा में पवित्रता और निष्ठा का होना अत्यंत आवश्यक है। आइए जानते हैं पूजा विधि:
हनुमान जी की पूजा करते समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना अनिवार्य है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी की अर्धरात्रि को अंजनी माता के घर में भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार के रूप में हनुमान जी का जन्म हुआ था। जन्म लेते ही उन्होंने सूर्य देव को एक लाल फल समझकर निगलने के लिए आकाश में उड़ान भरी थी।
एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान राम और रावण के बीच धर्म युद्ध चल रहा था, तब रावण के भाई अहिरावण ने छल से राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया और उन्हें पाताल लोक ले गया। हनुमान जी ने पाताल लोक पहुँचकर अपने पराक्रम से पंचमुखी रूप धारण किया और अहिरावण का वध करके प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को सकुशल वापस लाया। यह विजय भी कार्तिक चतुर्दशी के आसपास ही हुई थी। इसीलिए इस दिन संकटमोचन हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है ताकि वे अपने भक्तों के हर विपत्ति रूपी अहिरावण का अंत कर सकें।
हनुमान जी केवल एक देवता नहीं हैं, वे हर भक्त के सबसे सच्चे मित्र, रक्षक और सहारा हैं। जब दुनिया के सारे सहारे छूट जाते हैं, तब बजरंगबली का हाथ साधक को संभाल लेता है। वर्ष 2026 की हनुमान पूजा आपके जीवन के सारे कष्टों को हर ले और आपके घर में सुख, शांति, समृद्धि और अपार शक्ति का संचार करे। भक्ति भाव से बोलिए, जय श्री राम! जय बजरंगबली
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Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.