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September 10, 2026 Blog

Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

संसार के इस मायावी चक्र में फंसा हर इंसान अंततः शांति और मुक्ति की तलाश करता है। जब जीवन की आपाधापी में मन थकने लगता है, तब भगवान श्री हरि विष्णु के पावन धाम 'वैकुंठ' की स्मृतियां हृदय में सुकून का संचार करती हैं। सनातन परंपरा में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अति प्रिय है, परंतु दक्षिण भारतीय एवं उत्तर भारतीय परंपराओं के संगम में वैकुंठ मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026) का स्थान सर्वोपरि माना गया है।

यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि स्वयं के साथ-साथ अपने पितरों को भी जन्म-मरण के सांसारिक बंधनों से मुक्त कराकर सीधे श्री हरि के चरणों में स्थान दिलाने वाली दिव्य बेला है। ऐसा माना जाता है कि इस पावन दिन वैकुंठ धाम के द्वार स्वयं प्रभु श्री हरि विष्णु अपने भक्तों के लिए खोल देते हैं। यदि आप भी अपने जीवन के कष्टों का अंत करके परम गति पाना चाहते हैं, तो वैकुंठ मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026) की तिथि का यह अवसर आपके लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा। आइए जानते हैं इस पावन व्रत की तिथि, मुहूर्त, वैकुंठ एकादशी पूजा विधि (Vaikuntha Ekadashi Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।

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वैकुंठ मोक्षदा एकादशी क्या है? (What is Vaikuntha Mokshada Ekadashi?)

वैदिक पंचांग और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को वैकुंठ मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। दक्षिण भारत में इसे वैकुंठ एकादशी (Vaikuntha Ekadashi) तथा उत्तर भारत में 'मोक्षदा एकादशी' के नाम से पूजा जाता है।

यह तिथि इसलिए भी खास है क्योंकि इसी दिन वैकुंठ धाम में 'वैकुंठ द्वार' (परमपद का द्वार) खुलता है। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध विष्णु मंदिरों जैसे श्रीरंगम और तिरुपति में इस दिन विशेष 'वैकुंठ द्वारम' उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी पावन तिथि पर कुरुक्षेत्र की भूमि पर योगेश्वर श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर उपदेश भी दिया था। इसलिए इस दिन श्री हरि की उपासना से साधक के सभी पाप भस्म हो जाते हैं।

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त (Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी का व्रत सही तिथि, उत्तम पूजा मुहूर्त और पारण समय पर करना ही सबसे अधिक फलदायी माना गया है। वर्ष में वैकुंठ मोक्षदा एकादशी (Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026) तिथि और शुभ मुहूर्त की तालिका नीचे दी गई है:

  • वैकुंठ मोक्षदा एकादशी तिथि (Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026 Date): 20 दिसंबर 2026, रविवार

  • मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी प्रारंभ: 19 दिसंबर 2026 को रात 10:45 बजे से

  • मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी समाप्त: 20 दिसंबर 2026 को रात 11:20 बजे तक

  • पूजा का उत्तम मुहूर्त: 20 दिसंबर 2026 को सुबह 08:30 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक

  • वैकुंठ एकादशी व्रत पारण समय (Vaikuntha Ekadashi Parana Time): 21 दिसंबर 2026 को सुबह 07:10 बजे से सुबह 09:15 बजे तक

उदयातिथि और एकादशी मान के अनुसार, वैकुंठ मोक्षदा एकादशी का व्रत (Vaikuntha Mokshada Ekadashi Vrat) 20 दिसंबर 2026 को ही पूरे देश में श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा।

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Significance of Vaikuntha Mokshada Ekadashi)

शास्त्रों में वैकुंठ मोक्षदा एकादशी को सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार, जो मनुष्य इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के वैकुंठ द्वार से होकर दर्शन करता है या घर पर ही भावपूर्ण पूजन करता है, उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन अपनी आत्मा को निर्मल बनाने और सांसारिक मोह-माया को त्यागने का अवसर है। जो भक्त इस दिन निर्जला या फलाहार रहकर भगवान दामोदर की आराधना करते हैं, उनके कुल के पितरों को भी नरक की यातनाओं से मुक्ति मिल जाती है और उन्हें वैकुंठ लोक में स्थान मिलता है।

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी पूजा विधि (Vaikuntha Mokshada Ekadashi Puja Vidhi)

Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026 FESTIVAL

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वैकुंठ मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा इस प्रकार पूरे विधि-विधान से करें:

  1. प्रातः स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और पीले वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर श्री हरि के सामने व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा स्थल की स्थापना: मंदिर की सफाई करें और एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।

  3. उत्तर द्वार की रचना: यदि संभव हो तो घर के पूजा स्थल पर उत्तर दिशा की ओर एक छोटा प्रतीकात्मक 'वैकुंठ द्वार' बनाएं या सजाएं और उस द्वार से भगवान की प्रतिमा को विराजमान करें।

  4. अभिषेक और श्रृंगार: भगवान श्री हरि को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात उन्हें पीला चंदन, रोली, अक्षत, पीला वस्त्र और पीले गेंदे के फूल अर्पित करें।

  5. भोग अर्पण: भगवान को तुलसी पत्र, मखाना, फल, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाएं। याद रखें कि विष्णु जी के भोग में तुलसी का पत्ता होना बेहद अनिवार्य है।

  6. गीता पाठ और मंत्र जप: इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के 11वें और 15वें अध्याय का पाठ करें। साथ ही "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।

  7. आरती और प्रार्थना: धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें और अपने जाने-अनजाने हुए पापों के लिए क्षमा मांगते हुए मोक्ष की प्रार्थना करें।

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी व्रत के जरूरी नियम (Vaikuntha Mokshada Ekadashi Vrat Rules)

  • दशमी तिथि की शाम से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

  • एकादशी के दिन पूर्ण रूप से फलाहार रहें या जलाहार पर व्रत रखें।

  • इस दिन क्रोध, असत्य, बुराई और किसी की चुगली करने से पूरी तरह दूर रहें।

  • द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देने के बाद ही व्रत का पारण करें।

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी व्रत के अद्भुत लाभ (Benefits of Vaikuntha Mokshada Ekadashi)

  • वैकुंठ धाम की प्राप्ति: जीवन के अंत में आत्मा को श्री हरि के चरणों में वैकुंठ लोक प्राप्त होता है।

  • पितरों को सद्गति: यातनाएं भोग रहे पूर्वजों को तुरंत मुक्ति मिलती है और वे देवलोक चले जाते हैं।

  • समस्त पापों का नाश: जन्म-जन्मांतर के जाने-अनजाने में हुए पाप मिट जाते हैं।

  • मानसिक शांति और समृद्धि: जीवन में चल रही आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियां दूर होती हैं।

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी: क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)

क्या करें:

  • भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।

  • श्रीमद्भगवद्गीता का दान करें और गरीबों को वस्त्र या भोजन भेंट करें।

  • रात्रि में जागरण करके प्रभु के भजनों और कीर्तन का आनंद लें।

क्या न करें:

  • एकादशी के दिन चावल का सेवन भूलकर भी न करें।

  • घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें।

  • इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें, एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

  • किसी भी बुजुर्ग, असहाय या जीव-जंतु का अपमान न करें।

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा (Vaikuntha Mokshada Ekadashi Story)

पौराणिक वैकुंठ मोक्षदा एकादशी कथा (Vaikuntha Mokshada Ekadashi Vrat Katha) के अनुसार, प्राचीन काल में चंपक नगर में वैखानस नाम का एक अत्यंत धार्मिक और प्रजापालक राजा राज्य करता था। एक रात राजा ने स्वप्न में देखा कि उनके पिता नरक की भीषण यातनाएं भोग रहे हैं और कष्ट में चिल्ला रहे हैं। अपने पिता की ऐसी दयनीय दशा देखकर राजा व्याकुल हो उठे।

अगले ही दिन राजा पर्वत मुनि के आश्रम पहुँचे और अश्रुपूरित नेत्रों से अपने पिता के कष्टों का निवारण पूछा। पर्वत मुनि ने अपने दिव्य ज्ञान से देखकर बताया कि राजा के पूर्व जन्म के पापों के कारण उनके पिता नरक में यातना भोग रहे हैं।

मुनि ने राजा को मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (वैकुंठ मोक्षदा एकादशी) का विधि-विधान से व्रत करने और उसका संपूर्ण फल अपने पिता को दान करने की सलाह दी। राजा ने पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया और इसका पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से राजा के पिता के सभी पाप तुरंत भस्म हो गए, नरक के द्वार खुल गए और वे दिव्य देह धारण करके सीधे वैकुंठ धाम चले गए।

निष्कर्ष (Conclusion)

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य सांसारिक सुख पाना नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को शुद्ध करके ईश्वर के चरणों में स्थान पाना है। यह व्रत न केवल हमारे पापों को हरता है, बल्कि हमारे पूर्वजों को भी मुक्ति दिलाता है। यदि आप भी अपने जीवन में शांति, सुख और मरणोपरांत मोक्ष की कामना करते हैं, तो वैकुंठ मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026) पर पूरे विश्वास के साथ व्रत रखें और श्री हरि के चरणों में अपना जीवन समर्पित करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: वैकुंठ मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaikuntha Mokshada Ekadashi 2026) में कब है?

वैकुंठ मोक्षदा एकादशी का व्रत 20 दिसंबर 2026, रविवार के दिन रखा जाएगा।

Q2: क्या वैकुंठ एकादशी और मोक्षदा एकादशी एक ही है?

जी हां, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को उत्तर भारत में मोक्षदा एकादशी और दक्षिण भारत में वैकुंठ एकादशी के नाम से जाना जाता है।

Q3: वैकुंठ मोक्षदा एकादशी का पारण कब करना चाहिए?

व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि (21 दिसंबर 2026) को सुबह 07:10 बजे से सुबह 09:15 बजे के बीच करना चाहिए।

Q4: क्या इस दिन वैकुंठ द्वार खुलता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु के धाम वैकुंठ का द्वार खुलता है, इसलिए इस दिन पूजन से मोक्ष मिलता है।

Q5: वैकुंठ मोक्षदा एकादशी की पूजा में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि" मंत्र का जप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.