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September 3, 2026 Blog

Bala Jayanti 2026: जानिए सही तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि, महत्व और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

संसार में माता का प्रेम सबसे पवित्र और निश्छल माना गया है। जब कोई भक्त देवी भगवती के बाल रूप की आराधना करता है, तो माँ अपने संतान पर वात्सल्य की अमृत वर्षा कर देती हैं। दसों महाविद्याओं में से एक माता त्रिपुर सुंदरी का ही बाल रूप माँ बाला सुंदरी के नाम से जाना जाता है। इस पावन पर्व को हम बाला जयंती 2026 (Bala Jayanti 2026) के रूप में मनाते हैं।

हर वर्ष मार्गशीर्ष माह में आने वाली बाला जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि माता रानी के दिव्य वात्सल्य को महसूस करने का एक अनुपम अवसर है। यदि आप भी जीवन में आत्मिक शांति, वाक्-सिद्धि, ज्ञान और समृद्धि की चाह रखते हैं, तो बाला जयंती 2026 की तिथि (Bala Jayanti 2026) का यह पावन दिन आपके लिए बहुत शुभ फल लेकर आ रहा है। आइए जानते हैं बाला जयंती की सही तिथि, पूजा मुहूर्त, बाला सुंदरी पूजा विधि (Bala Sundari Puja Vidhi) और इसका पौराणिक महत्व।

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बाला जयंती क्या है? (What is Bala Jayanti?)

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शक्ति स्वरूपा माँ बाला सुंदरी (Maa Bala Sundari) का प्राकट्य दिवस यानी बाला जयंती मनाई जाती है। शक्ति साधना और तंत्र मार्ग में माता बाला सुंदरी की आराधना का विशेष स्थान है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता बाला सुंदरी भगवान श्री हरि विष्णु की योगमाया का ही एक दिव्य स्वरूप हैं। इन्हें 16 वर्षों की एक नन्हीं और दिव्य कन्या के रूप में पूजा जाता है। जो साधक या भक्त सच्चे मन से इस दिन माँ बाला सुंदरी की शरण में जाता है, उसे भय, कष्ट और अज्ञानता से मुक्ति मिलती है तथा मनचाही विद्या और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

बाला जयंती 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Bala Jayanti 2026 Date and Shubh Muhurat)

बाला जयंती का पर्व सही तिथि और शुभ मुहूर्त में मनाना बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है। वर्ष में बाला जयंती 2026 (Bala Jayanti 2026) तिथि और शुभ मुहूर्त की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:

  • बाला जयंती तिथि (Bala Jayanti 2026 Date): 07 दिसंबर 2026, सोमवार

  • मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी प्रारंभ: 06 दिसंबर 2026 को रात 03:22 बजे से

  • मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी समाप्त: 07 दिसंबर 2026 को रात 01:10 बजे तक

  • पूजा का शुभ मुहूर्त: 07 दिसंबर 2026 को सुबह 07:01 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक

  • संध्या पूजा मुहूर्त: 07 दिसंबर 2026 को शाम 05:24 बजे से रात 07:05 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार, बाला जयंती का पावन पर्व (Bala Jayanti Festival) 07 दिसंबर 2026 को ही पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा।

बाला जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Significance of Bala Jayanti)

सनातन धर्म में माता बाला सुंदरी की उपासना को ज्ञान, बुद्धि और शक्ति का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। ललिता सहस्रनाम में भी देवी बाला के अद्भुत पराक्रम और वात्सल्य का वर्णन मिलता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, माँ बाला की साधना से व्यक्ति का आज्ञा चक्र और विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है, जिससे वाणी में मधुरता और आकर्षण आता है। जो लोग तंत्र साधना, संगीत, साहित्य, भाषण या कला के क्षेत्र से जुड़े हैं, उनके लिए यह दिन माँ भगवती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर होता है।

बाला जयंती पूजा विधि (Bala Jayanti Puja Vidhi)

Bala Jayanti 2026 festival

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बाला जयंती 2026 (Bala Jayanti 2026) के दिन माँ बाला सुंदरी की पूजा सात्विक और भक्तिभाव के साथ इस प्रकार करें:

  1. प्रातः स्नान और शुद्धता: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या गुलाबी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. संकल्प: पूजा स्थान पर बैठकर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर माता बाला सुंदरी का ध्यान करते हुए बाला जयंती व्रत (Bala Jayanti Vrat) का संकल्प लें।

  3. चौकी स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माता बाला सुंदरी या माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें।

  4. अभिषेक और श्रृंगार: माता की प्रतिमा पर गंगाजल का छिड़काव करें। उन्हें लाल चुनरी, रोली, अक्षत, कुमकुम और लाल गेंदे या गुड़हल का फूल अर्पित करें।

  5. विशेष भोग: माँ बाला सुंदरी को खीर, हलवा, अनार, बताशे और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं।

  6. मंत्र जप: लाल चंदन की माला से बाला सुंदरी मंत्र (Bala Sundari Mantra) "ॐ ऐं क्लीं सौः बाला सुंदर्यै नमः" का कम से कम 108 बार जप करें।

  7. कन्या पूजन और आरती: पूजा के बाद छोटी कन्याओं को भोजन कराएं या उपहार दें। अंत में कपूर जलाकर माता रानी की आरती करें।

बाला जयंती व्रत के नियम (Bala Jayanti Vrat Rules)

  • इस दिन पूरे समय मन में सात्विकता और शांति बनाए रखें।

  • व्रत के दौरान क्रोध, अहंकार और कटु वचनों से दूर रहें।

  • भोजन में सेंधा नमक और फलाहार का प्रयोग करें।

  • महिलाओं और नन्हीं कन्याओं का विशेष आदर-सम्मान करें।

बाला जयंती व्रत के अद्भुत लाभ (Benefits of Bala Jayanti)

  • वाग्मी और वाक्-सिद्धि: माँ बाला की कृपा से वाणी में सम्मोहन और विद्या में सफलता मिलती है।

  • संतान सुख की प्राप्ति: जिन लोगों को संतान सुख में बाधा आ रही है, उन्हें माँ का वात्सल्य प्राप्त होता है।

  • भय और बाधाओं का नाश: जीवन में छिपे हुए शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

  • अखंड सौभाग्य: सुहागिन महिलाओं के पति की आयु लंबी होती है और घर में खुशहाली आती है।

बाला जयंती: क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)

क्या करें:

  • छोटी कन्याओं को लाल वस्त्र, फल या भोजन भेंट करें।

  • घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं और तोरण लगाएं।

  • श्री सूक्त या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

क्या न करें:

  • इस दिन लहसुन, प्याज या तामसिक चीजों का सेवन न करें।

  • किसी नन्हीं बालिका का दिल न दुखाएं और न ही उसे डांटें।

  • घर में गंदगी न रहने दें, विशेषकर पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।

बाला जयंती की पौराणिक कथा (Bala Jayanti Story)

पौराणिक बाला जयंती कथा (Bala Jayanti Story) के अनुसार, जब भंडासुर नामक क्रूर दैत्य ने अपनी आसुरी शक्ति से तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था, तब सभी देवताओं की पुकार सुनकर भगवती ललिता महात्रिपुर सुंदरी प्रकट हुईं।

जब देवी और भंडासुर का भीषण युद्ध चल रहा था, तब भंडासुर के तीस पुत्रों ने भी युद्ध क्षेत्र में तबाही मचानी शुरू कर दी। उन असुरों का पराक्रम देखकर माता ललिता सुंदरी के हृदय से एक 9 वर्ष की नन्हीं कन्या के रूप में माँ बाला सुंदरी का प्राकट्य हुआ।

माता बाला सुंदरी ने अपने माता-पिता से युद्ध में जाने की आज्ञा मांगी। नन्हीं बालिका के रूप में होते हुए भी उन्होंने अपनी असीम शक्ति से भंडासुर के सभी तीस पुत्रों का एक ही झटके में संहार कर दिया। उनके इस अद्भुत पराक्रम को देखकर देवताओं ने उन पर पुष्प वर्षा की। तभी से माता का यह बाल स्वरूप 'बाला सुंदरी' के नाम से संसार में पूजा जाने लगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

माँ बाला सुंदरी अपने भक्तों की हर पुकार को एक माँ की भांति सुनती हैं। बाला जयंती 2026 (Bala Jayanti 2026) का यह पावन अवसर हमें अपने अंदर के अहंकार को मिटाकर एक निश्छल बालक की भांति माँ के चरणों में समर्पित होने का संदेश देता है। यदि आप भी जीवन में ज्ञान, सफलता और शांति की कामना रखते हैं, तो इस बाला जयंती पर माँ बाला सुंदरी की उपासना करें और उनके असीम वात्सल्य के भागीदार बनें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: बाला जयंती 2026 (Bala Jayanti 2026) में कब है?

बाला जयंती 07 दिसंबर 2026, सोमवार के दिन मनाई जाएगी।

Q2: माँ बाला सुंदरी किसकी अवतार हैं?

माँ बाला सुंदरी दसों महाविद्याओं में प्रमुख माता त्रिपुर सुंदरी (ललिता देवी) का ही बाल स्वरूप हैं।

Q3: बाला जयंती पर कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

बाला जयंती के दिन "ॐ ऐं क्लीं सौः बाला सुंदर्यै नमः" मंत्र का जप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

Q4: बाला जयंती 2026 (Bala Jayanti 2026) की पूजा में क्या अर्पित करना चाहिए?

माँ बाला को लाल फूल, लाल चुनरी, खीर, अनार और दूध से बने मिष्ठान अर्पित करने चाहिए।

Q5: क्या इस दिन कन्या पूजन करना जरूरी है?

जी हां, माता बाला सुंदरी कन्या रूप में ही प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन नन्हीं बालिकाओं को भोजन कराना या उपहार देना अति शुभ माना जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.