जब जीवन में अधर्म का अंधकार छाने लगे और मन भय से व्याकुल हो उठे, तब भगवान शिव के उग्र एवं रक्षक स्वरूप की शरण ही हमें अभय प्रदान करती है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और संपूर्ण भारत में भगवान शिव के 'खंडोबा' स्वरूप की पूजा अत्यंत भक्तिभाव से की जाती है। इस पावन पर्व को हम चंपा षष्ठी 2026 (Champa Sashti 2026) के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं।
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चंपा षष्ठी का पवित्र महापर्व मनाया जाता है। इसे मार्तंड भैरवोत्थान के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन भगवान शिव के अवतार भगवान खंडोबा की विजय और उनके भक्तों के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक है। यदि आप भी जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, शत्रुओं के भय और कष्टों को हमेशा के लिए मिटाना चाहते हैं, तो चंपा षष्ठी 2026 (Champa Sashti 2026) की तिथि का यह पावन दिन आपके लिए बेहद फलदायी सिद्ध हो सकता है। आइए जानते हैं चंपा षष्ठी की सही तिथि, पूजा मुहूर्त, खंडोबा पूजा विधि (Khandoba Puja Vidhi) और इसका धार्मिक महत्व।
वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चंपा षष्ठी का त्यौहार मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव के स्वरूप 'खंडोबा' या 'मार्तंड भैरव' को समर्पित है।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में भगवान खंडोबा को कुलदेवता के रूप में पूजा जाता है। चंपा षष्ठी का यह उत्सव मार्गशीर्ष प्रतिपदा से शुरू होकर षष्ठी तिथि तक चलने वाले छह दिवसीय नवरात्रि उत्सव का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन भगवान खंडोबा को बैंगन की सब्जी, बाजरे की रोटी और हल्दी (भंडारा) अर्पित करके उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
चंपा षष्ठी का व्रत और पूजन सही तिथि एवं शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में चंपा षष्ठी तिथि (Champa Sashti Tithi) और शुभ मुहूर्त की तालिका नीचे दी गई है:
चंपा षष्ठी तिथि (Champa Sashti 2026 Date): 14 दिसंबर 2026, सोमवार
मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी प्रारंभ: 14 दिसंबर 2026 को प्रातः 09:12 बजे से
मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी समाप्त: 15 दिसंबर 2026 को प्रातः 09:35 बजे तक
पूजा का प्रात काल मुहूर्त: 14 दिसंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे से सुबह 10:55 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: 14 दिसंबर 2026 को दोपहर 11:55 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
उदयातिथि और षष्ठी तिथि के योग के अनुसार, चंपा षष्ठी का पावन पर्व (Champa Sashti Festival) 14 दिसंबर 2026 को ही पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा।
हिंदू धर्म में चंपा षष्ठी का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत अनोखा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने मार्तंड भैरव का रूप धारण करके दैत्यों का संहार किया था और धर्म की पुनर्स्थापना की थी।
आध्यात्मिक दृष्टि से, चंपा षष्ठी व्रत (Champa Sashti Vrat) रखने और भगवान खंडोबा की आराधना करने से व्यक्ति के भीतर छिपा भय, संकोच और नकारात्मकता खत्म होती है। जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से हल्दी और चंपा के फूल अर्पित करते हैं, उनके पाप भस्म हो जाते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों की रक्षा स्वयं महादेव हर परिस्थिति में करते हैं।

चंपा षष्ठी के पावन अवसर पर भगवान खंडोबा (शिव जी) की पूजा इस प्रकार करें:
प्रातः स्नान और शुद्धता: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे पीले या लाल वस्त्र धारण करें।
संकल्प: पूजा स्थल के सामने बैठकर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान खंडोबा का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
चौकी स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान शिव, शिवलिंग या भगवान खंडोबा की प्रतिमा स्थापित करें।
अभिषेक और शृंगार: भगवान को जल और दूध से स्नान कराएं। फिर उन्हें चंदन, कुमकुम, अक्षत, चंपा के पुष्प और शमी पत्र अर्पित करें।
भंडारा (हल्दी) अर्पण: चंपा षष्ठी की पूजा में हल्दी (भंडारा) का विशेष महत्व है। भगवान खंडोबा को हल्दी अर्पित करें और 'येडकोट येडकोट जय मल्हार' का जयकारा लगाएं।
विशेष भोग: इस दिन भगवान खंडोबा को बाजरे की रोटी, बैंगन का भर्ता (भरीत), गुड़ और खीर का भोग लगाया जाता है।
आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में धूप-दीप जलाकर भगवान शिव और खंडोबा जी की आरती करें तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
चंपा षष्ठी का व्रत रखने वाले साधक को छह दिनों तक या षष्ठी के दिन सात्विक आचरण रखना चाहिए।
इस दिन लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है।
व्रत के दौरान मन में किसी के प्रति कटु विचार न लाएं और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
शाम को पूजा के बाद सात्विक फलाहार या बाजरे की रोटी व भर्ते का प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।
शत्रु बाधा से मुक्ति: जीवन में गुप्त शत्रुओं, कोर्ट-कचहरी के मामलों और अनावश्यक बाधाओं से छुटकारा मिलता है।
पापों का नाश: जाने-अनजाने में हुए पूर्व जन्मों के पापों का क्षय होता है।
आरोग्य और शक्ति: शारीरिक बीमारियां दूर होती हैं और व्यक्ति को अद्भुत ऊर्जा प्राप्त होती है।
कुलदेवता का आशीर्वाद: परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
क्या करें:
भगवान खंडोबा को चंपा के फूल और हल्दी अवश्य अर्पित करें।
जरूरतमंदों और गरीबों को बाजरे की रोटी व भोजन का दान करें।
शिव मंदिरों में दर्शन करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जप करें।
क्या न करें:
चंपा षष्ठी के दिन घर में क्लेश या किसी का अपमान न करें।
इस दिन बैंगन और बाजरे का अनादर बिल्कुल न करें, क्योंकि इन्हें पवित्र प्रसाद माना जाता है।
तामसिक चीजों जैसे मांस या मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।
पौराणिक चंपा षष्ठी कथा (Champa Sashti Vrat Katha) के अनुसार, प्राचीन काल में मल्ल और मणि नाम के दो अत्यंत क्रूर दैत्य भाई थे। उन्होंने अपनी कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया था, जिससे वे लगभग अमर हो गए थे। अपनी शक्तियों के अहंकार में आकर वे ऋषि-मुनियों, देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार करने लगे। उन्होंने ऋषियों के आश्रमों को नष्ट कर दिया और स्वर्ग पर भी अपना अधिकार जमाने का प्रयास किया।
कांपते हुए सभी देवता और ऋषि भगवान शिव की शरण में पहुँचे। ऋषियों की करुण पुकार सुनकर महादेव का हृदय द्रवित हो उठा। दैत्यों के संहार के लिए भगवान शिव ने 'मार्तंड भैरव' (खंडोबा) का उग्र रूप धारण किया। उनके साथ उनकी शक्तियां और विशाल सेना भी थी।
मार्गशीर्ष प्रतिपदा से लेकर षष्ठी तिथि तक भगवान मार्तंड भैरव और दैत्य मल्ल-मणि के बीच भयंकर युद्ध चला। षष्ठी तिथि के दिन भगवान खंडोबा ने मल्ल दैत्य का वध कर दिया और मणि दैत्य का अहंकार चूर-चूर कर दिया। मरते समय मणि दैत्य को अपनी भूल का पश्चाताप हुआ और उसने भगवान शिव से क्षमा मांगी।
भगवान खंडोबा ने उसे क्षमा करते हुए वरदान दिया कि उसका नाम भी भगवान के साथ लिया जाएगा। दैत्यों पर विजय प्राप्त करने की इसी खुशी में देवताओं ने उन पर चंपा के फूलों और हल्दी की वर्षा की थी। तभी से मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी को 'चंपा षष्ठी' के रूप में मनाया जाने लगा।
चंपा षष्ठी का यह पावन पर्व हमें अधर्म पर धर्म की विजय और भगवान शिव की असीम करुणा का स्मरण कराता है। भगवान खंडोबा अपने भक्तों की पुकार कभी निष्फल नहीं जाने देते। यदि आप भी जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं, तो चंपा षष्ठी 2026 (Champa Sashti 2026) के इस शुभ अवसर पर पूरे भक्तिभाव से भगवान खंडोबा की पूजा करें और हल्दी अर्पित करें। महादेव की कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर होंगे और खुशहाली का आगमन होगा।
Q1: चंपा षष्ठी 2026 (Champa Sashti 2026) में कब है?
चंपा षष्ठी का पावन पर्व 14 दिसंबर 2026, सोमवार के दिन मनाया जाएगा।
Q2: चंपा षष्ठी 2026 (Champa Sashti 2026) पर किस देवता की पूजा की जाती है?
इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव के स्वरूप भगवान खंडोबा (मार्तंड भैरव) की पूजा की जाती है।
Q3: चंपा षष्ठी की पूजा में क्या विशेष रूप से चढ़ाया जाता है?
इस दिन पूजा में चंपा के फूल, हल्दी (भंडारा), बाजरे की रोटी और बैंगन का भर्ता विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।
Q4: क्या चंपा षष्ठी का व्रत रखने से शत्रुओं पर विजय मिलती है?
जी हां, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंपा षष्ठी का व्रत रखने से शत्रुओं का नाश होता है और भय से मुक्ति मिलती है।
Q5: चंपा षष्ठी का पर्व मुख्य रूप से कहां मनाया जाता है?
यह पर्व मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक और दक्षिण भारत के शिव मंदिरों में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.