कार्तिक मास आते ही जब शाम हवा में एक सोंधी सी ठंडक घुलने लगती है, घाटों पर गूंजते 'काँच ही बाँस के बहँगिया' के पावन लोकगीत हर दिल को भावुक कर देते हैं। छठ पूजा 2026 (Chhat Puja 2026) केवल एक पर्व या व्रत नहीं है, यह एक जीवंत भावना है जो परिवार, प्रकृति और आस्था को एक धागे में पिरोती है। डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य देकर उगते सूर्य की वंदना करना, यह आस्था का वह शिखर है जो पूरी दुनिया में केवल इसी महापर्व में दिखाई देता है। छठी मइया का कठोर व्रत रखने वाली व्रती महिलाओं का त्याग और सूर्य देव के प्रति उनका अटूट समर्पण हर भारतीय के दिल में श्रद्धा का अटूट भाव भर देता है। यदि आप भी वर्ष में छठ पूजा 2026 (Chhat Puja 2026) की सही तिथि, नहाय-खाय, खरना, अर्घ्य के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की खोज कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगा।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मुख्य रूप से मनाया जाने वाला लोक आस्था का यह महापर्व ही छठ पूजा 2026 (Chhat Puja 2026) कहलाता है। यह चार दिनों तक चलने वाला अत्यंत कठिन और पवित्र अनुष्ठान है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और समापन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है। इस व्रत में प्रत्यक्ष देवता सूर्य और उनकी बहन षष्ठी देवी यानी छठी मइया की आराधना की जाती है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों से शुरू हुआ यह महापर्व आज वैश्विक पहचान बना चुका है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र, उनके सुख-समृद्धि और परिवार के निरोगी काया के लिए रखा जाता है।
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वर्ष में छठ पूजा 2026 (Chhat Puja 2026) का चार दिवसीय अनुष्ठान 13 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और सूर्योदय-सूर्यास्त के शुभ समय का विवरण इस प्रकार है:
पहला दिन (नहाय-खाय): 13 नवंबर 2026, शुक्रवारधार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टिकोण से छठ पूजा 2026 (Chhat Puja 2026) का महत्व अद्वितीय है। सूर्य देव इस ब्रह्मांड के प्रत्यक्ष देवता हैं जो जीवन, ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत हैं। सूर्य की किरणों में स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने की अद्भुत क्षमता होती है।
छठी मइया को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन माना गया है, जो बच्चों की रक्षा करती हैं। यह पर्व हमें प्रकृति, नदियों, सरोवरों और फसलों के प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है। इसमें जाति-पात के भेद मिट जाते हैं और समाज का हर वर्ग एक साथ घाटों की सफाई और पूजा में भाग लेता है।
छठ पूजा 2026 (Chhat Puja 2026) का अनुष्ठान अत्यंत पवित्रता और कड़े अनुशासन के साथ चार दिनों में पूर्ण होता है:

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छठ पूजा 2026 (Chhat Puja 2026) में शुद्धता और नियम पालन का स्थान सर्वोपरि है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रियंवद और उनकी पत्नी मालिनी की कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिससे रानी को पुत्र प्राप्त हुआ, लेकिन वह मृत पैदा हुआ। पुत्र वियोग में राजा अपने प्राण त्यागने लगे।
तभी देवी शाकंभरी (षष्ठी देवी) प्रकट हुईं और उन्होंने राजा से कहा कि मैं ब्रह्मा की मानस पुत्री षष्ठी हूँ। मैं संसार के समस्त बालकों की रक्षा करती हूँ। देवी ने बालक पर अपना हाथ रखा और वह जीवित हो उठा। राजा ने देवी के सम्मान में कार्तिक शुक्ल षष्ठी को पूरे राज्य में व्रत और उत्सव का आयोजन किया।
एक अन्य कथा के अनुसार रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्री राम और माता सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मुद्गल ऋषि के आश्रम में सूर्य देव की उपासना की थी और व्रत रखा था।
छठ पूजा 2026 (Chhat Puja 2026) केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों, प्रकृति और संस्कृति से जुड़ने का महापर्व है। जब पूरी दुनिया डूबते हुए सूरज को भूल जाती है, तब हमारी संस्कृति डूबते सूर्य को भी प्रणाम करके यह संदेश देती है कि हर अंत के बाद एक नया सवेरा निश्चित है। छठी मइया की असीम कृपा आप सभी पर बनी रहे और आपका घर-परिवार खुशियों से भरा रहे। जय छठी मइया! जय सूर्य देव
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2. छठ पूजा का मुख्य अर्घ्य कब दिया जाएगा?
संध्या अर्घ्य 15 नवंबर 2026 (रविवार) की शाम और उषा अर्घ्य 16 नवंबर 2026 (सोमवार) की सुबह दिया जाएगा।
3. छठ पूजा का सबसे मुख्य प्रसाद क्या है?
छठ पूजा का सबसे प्रमुख और पवित्र प्रसाद गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना 'ठेकुआ' होता है।
4. क्या छठ पूजा का व्रत पुरुष भी रख सकते हैं?
जी हां, छठ पूजा का व्रत महिलाएं और पुरुष दोनों ही पूरे नियम-निष्ठा के साथ रख सकते हैं।
5. छठ पूजा में अर्घ्य किस चीज से दिया जाता है?
सूर्य देव को अर्घ्य तांबे के पात्र या सूप में गाय का कच्चा दूध और शुद्ध जल मिलाकर दिया जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.