जब धर्म पर अधर्म का साया गहराने लगता है और आसुरी शक्तियाँ बेकसूरों को पीड़ित करने लगती हैं, तब भगवान शिव के दिव्य अंश भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) अपने हाथ में 'वेल' (भाला) धारण करके बुराई का सर्वनाश करने उतरते हैं। दक्षिण भारत में तमिल समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला 'सूरा संहारम' 2026 (Soora Samharam 2026) केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की शाश्वत विजय का अलौकिक प्रतीक है। स्कंद षष्ठी उत्सव का अंतिम और सबसे भव्य पड़ाव माना जाने वाला सूरा संहारम 2026 (Soora Samharam 2026) हमें यह विश्वास दिलाता है कि जब तक भक्ति और आस्था जीवित है, तब तक कोई भी बुराई हमारा बाल भी बाँका नहीं कर सकती। यदि आप वर्ष में सूरा संहारम 2026 (Soora Samharam 2026) की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि की जानकारी तलाश रहे हैं, तो यह लेख आपके भक्ति मार्ग को आलोकित करेगा।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला महान पर्व ही सूरा संहारम कहलाता है। इसे तमिल में सूरसमहारम भी कहा जाता है। यह छह दिवसीय स्कंद षष्ठी उत्सव का सबसे मुख्य दिन होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र स्वामी मुरुगन (कार्तिकेय) ने भयंकर असुर सूरापद्मन का वध करके तीनों लोकों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। विशेष रूप से तमिलनाडु के तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर में इस दिन विशाल नाटक और लीला का आयोजन किया जाता है, जहाँ लाखों श्रद्धालु समुद्र तट पर एकत्रित होकर भगवान मुरुगन के विजय पर्व का साक्षी बनते हैं।
वर्ष में सूरा संहारम 2026 (Soora Samharam 2026) का यह पावन पर्व 15 नवंबर, रविवार को पूरे भक्ति भाव और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का संपूर्ण विवरण इस प्रकार है:
सूरा संहारम तिथि: 15 नवंबर 2026, रविवारधार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूरा संहारम 2026 (Soora Samharam 2026) का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशाल है। भगवान मुरुगन ज्ञान, साहस, विजय और शक्ति के प्रतीक हैं। जो भाला (वेल) उनके हाथ में सुशोभित होता है, वह ज्ञान की तीक्ष्णता को दर्शाता है जो हमारे अज्ञान और भय को काट फेंकता है।
असुर सूरापद्मन वास्तव में हमारे भीतर छिपे अहंकार, काम, क्रोध और लोभ जैसी बुराइयों का प्रतीक है। जब हम सूरा संहारम 2026 (Soora Samharam 2026) का व्रत और पूजन करते हैं, तो स्वामी मुरुगन हमारे भीतर की इन आंतरिक बुराइयों का संहार करके हमें मानसिक शांति, साहस और आध्यात्मिक जागृति प्रदान करते हैं।

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सूरा संहारम के कठिन व्रत को पूर्ण करने के लिए शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं:
क्या करें:
क्या न करें:
स्कंद पुराण के अनुसार प्राचीन काल में सूरापद्मन नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली दानव था। उसने कठिन तपस्या करके भगवान शिव से यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि भगवान शिव के अपने अंश के अतिरिक्त कोई भी उसका वध न कर सके। वरदान के अहंकार में अंधा होकर सूरापद्मन ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया और देवताओं को बंदी बनाकर उन पर अत्याचार करने लगा।
दुखी होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुँचे। तब भगवान शिव के तीसरे नेत्र से छह दिव्य दिव्य ज्योतियाँ निकलीं, जिनसे भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) का जन्म हुआ। माता पार्वती ने अपने पुत्र मुरुगन को सभी आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए अपनी संपूर्ण शक्ति से युक्त एक अमोघ अस्त्र 'वेल' (भाला) प्रदान किया।
भगवान मुरुगन ने अपनी सेना के साथ असुरों से छह दिनों तक भयंकर युद्ध किया। छठे दिन यानी कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मुरुगन ने अपने 'वेल' से सूरापद्मन के दो टुकड़े कर दिए। सूरापद्मन का एक आधा हिस्सा मयूर (मोर) बन गया, जिसे भगवान मुरुगन ने अपना वाहन बनाया और दूसरा हिस्सा कुक्कुट (मुर्गा) बन गया, जिसे उन्होंने अपने ध्वज पर स्थान दिया। इस प्रकार स्वामी मुरुगन ने बुराई का अंत करके धर्म की पुनः स्थापना की।
सूरा संहारम 2026 (Soora Samharam 2026) का यह महान पर्व केवल एक इतिहास या पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के हर कठिन संघर्ष में साहस बनाए रखने की प्रेरणा है। जब जब हमारे जीवन में दुख, भय और बाधाओं का असुर हावी होने लगता है, तब स्वामी मुरुगन का स्मरण मात्र हमारे भीतर एक नई ऊर्जा और विजय का विश्वास भर देता है। वर्ष के सूरा संहारम 2026 (Soora Samharam 2026) पर भगवान मुरुगन का दिव्य आशीर्वाद आपके जीवन के समस्त दुखों का संहार करे और आपको सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे। स्वामी मुरुगन की जय
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Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.