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August 13, 2026 Blog

Labh Chaturthi 2026: जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जीवन में मेहनत और समर्पण के साथ जब ईश्वर का आशीर्वाद मिल जाता है, तो साधारण प्रयास भी असाधारण सफलता में बदल जाते हैं। दीपोत्सव के पावन दिनों के बाद जब नया कार्य, व्यापार या खाता-बही शुरू करने की बात आती है, तो सनातन परंपरा में सबसे मंगलकारी अवसर होता है लाभ चतुर्थी। इसे कई क्षेत्रों में लाभ पंचमी, सौभाग्य पंचमी या ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी और पंचमी तिथि के इस दिव्य संयोग पर मनाया जाने वाला यह पर्व केवल नया व्यापार शुरू करने का दिन नहीं है, बल्कि भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में शुभता, समृद्धि और ज्ञान का नया अध्याय खोलने का पावन समय है। यदि आप भी वर्ष में लाभ चतुर्थी (Labh Chaturthi 2026) की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि की तलाश कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक साबित होगा।

लाभ चतुर्थी क्या है? (Introduction)

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की तिथि को मनाया जाने वाला लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026) या लाभ पंचमी का पर्व भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है। दिवाली के बाद व्यापारी वर्ग अपनी दुकानों, कार्यालयों और नए व्यापारिक संस्थानों का औपचारिक शुभारंभ इसी पावन दिन से करते हैं। दिवाली पर शुरू की गई बही-खाता पूजा का यह अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस दिन प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश, धन की देवी माता लक्ष्मी और देवाधिदेव महादेव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। 'लाभ' शब्द का अर्थ ही फायदा, प्रगति और शुभता होता है। इस दिन शुरू किया गया कोई भी नया काम या व्यापार वर्ष भर अक्षय लाभ और तरक्की प्रदान करता है।

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लाभ चतुर्थी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026) का यह पावन पर्व 13 नवंबर, शुक्रवार को पूरे देश में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:

लाभ चतुर्थी पर्व तिथि: 13 नवंबर 2026, शुक्रवार
कार्तिक शुक्ल तिथि प्रारंभ: 12 नवंबर 2026 को रात 10:45 बजे से
कार्तिक शुक्ल तिथि समाप्त: 13 नवंबर 2026 को रात 08:30 बजे तक
प्रातःकाल पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:44 बजे से सुबह 10:25 बजे तक
व्यापार एवं नए काम की शुरुआत का मुहूर्त: सुबह 08:05 बजे से सुबह 11:46 बजे तक

लाभ चतुर्थी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026) का दिन हर प्रकार के मांगलिक कार्य और व्यवसायिक शुरुआत के लिए अत्यंत सिद्ध माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026) के दिन निष्ठापूर्वक भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, आलस्य और आर्थिक तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

जैन परंपरा में इस पर्व को ज्ञान की उपासना के रूप में मनाया जाता है, जहाँ धार्मिक ग्रंथों और माँ सरस्वती की पूजा करके ज्ञान की याचना की जाती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि वास्तविक 'लाभ' केवल धन कमाना नहीं है, बल्कि धर्म और सत्य के मार्ग पर चलकर समाज का कल्याण करना भी है।

लाभ चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

  • लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026) की पूजा और व्यापारिक खातों के शुभारंभ की प्रक्रिया अत्यंत पवित्रता के साथ की जाती है। 
  • प्रातः स्नान और संकल्प: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल की तैयारी: घर या अपनी दुकान/दफ्तर के पूजा गृह को साफ करें। एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
  • बही-खाता और कलम की स्थापना: अपने नए बही-खाते, चोपड़ा, बही या डायरी और कलम को पूजा की चौकी पर रखें।
  • स्वास्तिक और शुभ-लाभ लेखन: नए बही-खाते के पहले पन्ने पर रोली व कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं और उसके दोनों ओर 'शुभ' और 'लाभ' लिखें। साथ ही बीच में 'श्री' लिखें।
  • रोली और अक्षत अर्पण: भगवान गणेश, माँ लक्ष्मी और अपने बही-खातों पर रोली, चंदन, कुमकुम और अक्षत लगाएं।
  • पुष्प और भोग अर्पण: देवी-देवताओं को लाल पुष्प, मोदक, दुर्वा, सफेद मिठाई और फल अर्पित करें।
  • धूप-दीप और आरती: देसी घी का दीपक जलाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' और 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करें। अंत में आरती गाकर प्रसाद बांटें।

लाभ चतुर्थी व्रत और पूजा के जरूरी नियम (Rules)

Labh Chaturthi 2026 Festival

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लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026) पर पूजा और नया कार्य शुरू करते समय कुछ शास्त्रीय नियमों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

  • इस दिन व्यापार या कार्यस्थल पर अपनी नई कलम से पहला शब्द 'श्री' या भगवान का नाम ही लिखें।
  • जो साधक व्रत रख रहे हैं, वे पूरे दिन सात्विक रहें और शाम को पूजा के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • अपनी दुकान या व्यापारिक संस्थान में इस दिन किसी भी ग्राहक या व्यक्ति से कटु वचन न बोलें।
  • पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों में मिठाई व अनाज का दान अवश्य करें।

लाभ चतुर्थी पूजन के मुख्य लाभ (Benefits)

  • व्यापार में अक्षय लाभ: कारोबार में लगातार वृद्धि होती है और आर्थिक नुकसान के योग टल जाते हैं।
  • दरिद्रता का नाश: माता लक्ष्मी की कृपा से घर और दुकान में सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति: भगवान गणेश की कृपा से कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं और सद्बुद्धि मिलती है।
  • सौभाग्य में वृद्धि: जीवन के सभी अटके हुए काम पूरे होने लगते हैं और परिवार में शांति आती है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • अपनी दुकान, ऑफिस या दफ्तर के मुख्य द्वार पर रोली से स्वास्तिक और 'शुभ-लाभ' लिखें।
  • विद्यार्थियों को इस दिन अपनी किताबों और कलम का पूजन करना चाहिए।
  • घर के बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें।

क्या न करें:

  • इस पावन दिन किसी के प्रति मन में द्वेष, लालच या छल की भावना न रखें।
  • अपनी बही या खातों में कोई झूठी या गलत एंट्री न करें।
  • घर या दुकान में गंदगी न छोड़ें और न ही किसी भिक्षुक को खाली हाथ लौटाएं।

लाभ चतुर्थी की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्री गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि के साथ हुआ, तो उनके घर में दो दिव्य पुत्रों का जन्म हुआ। एक पुत्र का नाम 'शुभ' रखा गया और दूसरे का नाम 'लाभ'।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की इस पावन तिथि को ही भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और रिद्धि-सिद्धि ने 'लाभ' जी का विशेष अभिनंदन किया था। तभी से इस दिन को 'लाभ चतुर्थी' और 'लाभ पंचमी' के रूप में मनाया जाने लगा। मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त भगवान गणेश के पुत्र 'लाभ' और 'शुभ' का नाम लेकर अपने नए कार्य की शुरुआत करता है, उसके घर और व्यापार में शुभता तथा लाभ का स्थाई वास हो जाता है।

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी तिथि पर उन्हें संपूर्ण सिद्धियों और सौभाग्य का वरदान दिया था, इसलिए इसे 'सौभाग्य चतुर्थी' या 'सौभाग्य पंचमी' भी कहा जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026) का यह पावन पर्व हमें यह संदेश देता है कि ईमानदारी और ईश्वर पर विश्वास रखकर शुरू किया गया हर कार्य हमेशा फलदायी होता है। यह दिन हमें नए संकल्प लेने और अपने जीवन में ज्ञान, कर्म और भक्ति का सही संतुलन बनाने की प्रेरणा देता है। जब हम निश्छल भाव से भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी के आगे शीश झुकाते हैं, तो वे हमारी झोली समृद्धि और खुशियों से भर देती हैं। वर्ष की लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026) आपके व्यापार, करियर और परिवार के जीवन में अपार सफलता, अक्षय लाभ, शांति और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. लाभ चतुर्थी 2026 (Labh Chaturthi 2026)  में कब है?
    लाभ चतुर्थी का पावन पर्व 13 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

  2. लाभ चतुर्थी पर नया काम शुरू करने का क्या महत्व है?
      मान्यता है कि लाभ चतुर्थी अत्यंत सिद्ध तिथि है, इस दिन शुरू किए गए व्यापार या काम में कभी रुकावट
      नहीं आती और वर्ष भर लाभ होता रहता है।

  3. लाभ चतुर्थी पर किस देवी-देवता की पूजा की जाती है?
       इस दिन भगवान श्री गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और गणेश जी के पुत्र 'लाभ' की विशेष पूजा की जाती है।

  4. लाभ चतुर्थी को सौभाग्य पंचमी क्यों कहा जाता है?
      इस दिन पूजा करने से घर में सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि होती है, इसलिए इसे सौभाग्य पंचमी या सौभाग्य चतुर्थी भी कहते हैं।

  5. लाभ चतुर्थी पर बही-खाते पर क्या लिखना चाहिए?
      बही-खाते के पहले पन्ने पर रोली से स्वास्तिक बनाकर 'शुभ', 'लाभ' और बीच में 'श्री' लिखना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.