हमारे जीवन में हर एक काम का हिसाब रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की पूजा दिवाली के पांच दिनों के बाद यम द्वितीया के दिन की जाती है। यह दिन हमें सच्चाई और ईमानदारी की याद दिलाता है। कायस्थ समाज, व्यापारी और शिक्षा से जुड़े लोग इस दिन भगवान चित्रगुप्त और उनकी कलम की पूजा करते हैं।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026) मनाई जाती है। यह कायस्थ जयंती या कलम दवात पूजा के नाम से भी जानी जाती है। भगवान चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की काया से प्रकट हुए थे, इसलिए उन्हें कायस्थों का जनक माना जाता है। वे यमराज के दरबार में मनुष्यों के पाप और पुण्य का हिसाब रखते हैं। इस दिन साधक नई कलम, दवात और बही-खातों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन चित्रगुप्त जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में बुद्धि, विद्या और व्यवसाय में उन्नति मिलती है।
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वर्ष में चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026)11 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:
चित्रगुप्त पूजा तिथि: 11 नवंबर 2026, बुधवारचित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026) का आध्यात्मिक संदेश बहुत गहरा है। भगवान चित्रगुप्त मनुष्य के मन में उठने वाले हर विचार और उसके कर्मों को अपनी लेखनी से दर्ज करते हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति में ईमानदारी और न्यायप्रियता का भाव जागृत होता है।
कलम और कागज की पूजा हमें यह सिखाती है कि विद्या और ज्ञान ही समाज का असली मार्गदर्शन करते हैं। कायस्थ समाज के लिए यह दिन अपनी उत्पत्ति का उत्सव है, वहीं व्यापारियों के लिए अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में सत्य निष्ठा बनाए रखने की प्रेरणा का पर्व है।
चित्रगुप्त पूजा और कलम पूजन की प्रक्रिया अत्यंत सात्विक और अनुशासित होती है। आइए जानते हैं पूजा विधि:

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इस पावन पूजन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने यमराज को जीवों को उनके कर्मों के आधार पर न्याय करने का दायित्व सौंपा। यमराज ने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की कि प्रभु, इतने सारे जीवों के कर्मों का हिसाब अकेले याद रखना असंभव है। इसलिए मुझे एक ऐसे सहायक की आवश्यकता है जो अत्यंत बुद्धिमान और न्यायप्रिय हो।
ब्रह्मा जी यमराज की बात सुनकर ध्यान में लीन हो गए। हजारों वर्षों की कठिन तपस्या के बाद ब्रह्मा जी की काया से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुए, जिनके एक हाथ में कलम और दूसरे हाथ में दवात थी। ब्रह्मा जी ने उन्हें अपनी काया से उत्पन्न होने के कारण 'कायस्थ' कहा और गुप्त रूप से सभी जीवों के कर्मों का चित्र रखने के कारण उनका नाम 'चित्रगुप्त' रखा।
भगवान चित्रगुप्त को यमराज का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। तभी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन चित्रगुप्त जी का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है और उनकी कृपा पाने के लिए कलम दवात की पूजा की जाती है।
चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026) केवल एक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का बही-खाता साफ रखने का एक पावन अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारा हर एक कर्म ईश्वर की दृष्टि में अंकित हो रहा है, इसलिए हमें हमेशा सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए। जब हम अपनी कलम का सही उपयोग करते हैं, तो समाज का कल्याण होता है। वर्ष की चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026) आपके जीवन में ज्ञान, विद्या, व्यापारिक सफलता और उत्तम बुद्धि लेकर आए। भगवान चित्रगुप्त महाराज की जय
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2. चित्रगुप्त पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
11 नवंबर 2026 को पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर 01:10 बजे से दोपहर 03:18 बजे तक रहेगा।
3. चित्रगुप्त पूजा में किसकी पूजा मुख्य रूप से होती है?
इस दिन भगवान चित्रगुप्त, यमराज और कलम-दवात की मुख्य रूप से पूजा की जाती है।
4. कायस्थ समाज के लिए चित्रगुप्त पूजा का क्या महत्व है?
भगवान चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की काया से प्रकट हुए थे, इसलिए कायस्थ समाज उन्हें अपना मूल
पुरुष मानता है और इस दिन अपनी उत्पत्ति का उत्सव मनाता है।
5. चित्रगुप्त पूजा में सादे कागज पर क्या लिखा जाता है?
सादे कागज पर स्वास्तिक बनाकर 'श्री गणेशाय नमः' और चित्रगुप्त जी का ध्यान मंत्र लिखा जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.