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August 13, 2026 Blog

Chitragupta Puja 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

हमारे जीवन में हर एक काम का हिसाब रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की पूजा दिवाली के पांच दिनों के बाद यम द्वितीया के दिन की जाती है। यह दिन हमें सच्चाई और ईमानदारी की याद दिलाता है। कायस्थ समाज, व्यापारी और शिक्षा से जुड़े लोग इस दिन भगवान चित्रगुप्त और उनकी कलम की पूजा करते हैं।

चित्रगुप्त पूजा क्या है? (Introduction)

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026) मनाई जाती है। यह कायस्थ जयंती या कलम दवात पूजा के नाम से भी जानी जाती है। भगवान चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की काया से प्रकट हुए थे, इसलिए उन्हें कायस्थों का जनक माना जाता है। वे यमराज के दरबार में मनुष्यों के पाप और पुण्य का हिसाब रखते हैं। इस दिन साधक नई कलम, दवात और बही-खातों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन चित्रगुप्त जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में बुद्धि, विद्या और व्यवसाय में उन्नति मिलती है।

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चित्रगुप्त पूजा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and Time)

वर्ष में चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026)11 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:

चित्रगुप्त पूजा तिथि: 11 नवंबर 2026, बुधवार
कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि प्रारंभ: 10 नवंबर 2026 को शाम 04:10 बजे से
कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि समाप्त: 11 नवंबर 2026 को दोपहर 02:42 बजे तक
चित्रगुप्त पूजा का शुभ मुहूर्त: दोपहर 01:10 बजे से दोपहर 03:18 बजे तक
पूजा की कुल अवधि: 02 घंटे 08 मिनट

चित्रगुप्त पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026) का आध्यात्मिक संदेश बहुत गहरा है। भगवान चित्रगुप्त मनुष्य के मन में उठने वाले हर विचार और उसके कर्मों को अपनी लेखनी से दर्ज करते हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति में ईमानदारी और न्यायप्रियता का भाव जागृत होता है।

कलम और कागज की पूजा हमें यह सिखाती है कि विद्या और ज्ञान ही समाज का असली मार्गदर्शन करते हैं। कायस्थ समाज के लिए यह दिन अपनी उत्पत्ति का उत्सव है, वहीं व्यापारियों के लिए अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में सत्य निष्ठा बनाए रखने की प्रेरणा का पर्व है।

चित्रगुप्त पूजा की संपूर्ण विधि (Pooja rituals)

चित्रगुप्त पूजा और कलम पूजन की प्रक्रिया अत्यंत सात्विक और अनुशासित होती है। आइए जानते हैं पूजा विधि:

  • सफाई और स्थापना: घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें। एक चौकी पर पूर्व या उत्तर दिशा में लाल कपड़ा बिछाकर भगवान चित्रगुप्त और यमराज का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।
  • कलम और दवात की स्थापना: चौकी पर नई कलम, दवात और नया सादा कागज या बही-खाता रखें।
  • तिलक और श्रृंगार: भगवान चित्रगुप्त, यमराज और अपनी कलम पर रोली, कुमकुम, चंदन और अक्षत लगाएं।
  • कागज पर श्री और मंत्र लिखना: एक सादे सफेद कागज पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। फिर उस पर 'श्री गणेशाय नमः' और 'ॐ मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्। लेखनीकटिनीहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्॥' मंत्र लिखें।
  • भोग और आरती: भगवान को फल, मिठाई, गुड़, पंचामृत और पान-सुपारी अर्पित करें। इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती गाएं और विद्या व सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

चित्रगुप्त पूजा और व्रत के जरूरी नियम (Rules)

Chitragupta Puja 2026 festival

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इस पावन पूजन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  • चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026) के दिन अपनी नई कलम से पहला शब्द भगवान का नाम ही लिखें।
  • इस दिन कायस्थ समाज के लोग और लेखाकार अपने काम से विश्राम लेते हैं और कलम का पूजन करके कुछ समय के लिए लिखना-पढ़ना स्थगित रखते हैं।
  • जो साधक व्रत रख रहे हैं, वे पूरे दिन सात्विक रहें और शाम को पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
  • अपने बही-खातों में किसी भी प्रकार का गलत या झूठा हिसाब न लिखें।

चित्रगुप्त पूजा के मुख्य लाभ (Benefits)

  • विद्या और सद्बुद्धि की प्राप्ति: विद्यार्थियों और लेखकों को एकाग्रता और तीक्ष्ण बुद्धि प्राप्त होती है।
  • कर्म दोषों से मुक्ति: अनजाने में हुए पापों से राहत मिलती है और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
  • व्यापार में सफलता: कारोबार में पारदर्शिता आती है और नए कार्यों में उन्नति होती है।
  • यमलोक के भय से मुक्ति: जीवन के अंत में यमदूतों का भय समाप्त होकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • पूजा में प्रयुक्त की गई नई कलम को पूरे वर्ष अपने मुख्य और शुभ कार्यों के लिए ही संभाल कर रखें।
  • किसी गरीब बच्चे को पढ़ाई की सामग्री जैसे कॉपी, पेन या किताबें दान करें।
  • अपने मन में सभी जीवों के प्रति दया और न्याय का भाव रखें।

क्या न करें:

  • पूजा के दिन किसी के खिलाफ झूठी गवाही न दें और न ही कागजों पर झूठे हस्ताक्षर करें।
  • कलम या कागज का अनादर न करें और न ही उन्हें ज़मीन पर गिरने दें।
  • घर में किसी से विवाद या कटु शब्दों का प्रयोग न करें।

चित्रगुप्त पूजा की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने यमराज को जीवों को उनके कर्मों के आधार पर न्याय करने का दायित्व सौंपा। यमराज ने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की कि प्रभु, इतने सारे जीवों के कर्मों का हिसाब अकेले याद रखना असंभव है। इसलिए मुझे एक ऐसे सहायक की आवश्यकता है जो अत्यंत बुद्धिमान और न्यायप्रिय हो।

ब्रह्मा जी यमराज की बात सुनकर ध्यान में लीन हो गए। हजारों वर्षों की कठिन तपस्या के बाद ब्रह्मा जी की काया से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुए, जिनके एक हाथ में कलम और दूसरे हाथ में दवात थी। ब्रह्मा जी ने उन्हें अपनी काया से उत्पन्न होने के कारण 'कायस्थ' कहा और गुप्त रूप से सभी जीवों के कर्मों का चित्र रखने के कारण उनका नाम 'चित्रगुप्त' रखा।

भगवान चित्रगुप्त को यमराज का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। तभी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन चित्रगुप्त जी का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है और उनकी कृपा पाने के लिए कलम दवात की पूजा की जाती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

चित्रगुप्त पूजा 2026  (Chitragupta Pooja 2026) केवल एक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का बही-खाता साफ रखने का एक पावन अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारा हर एक कर्म ईश्वर की दृष्टि में अंकित हो रहा है, इसलिए हमें हमेशा सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए। जब हम अपनी कलम का सही उपयोग करते हैं, तो समाज का कल्याण होता है। वर्ष की चित्रगुप्त पूजा 2026 (Chitragupta Pooja 2026) आपके जीवन में ज्ञान, विद्या, व्यापारिक सफलता और उत्तम बुद्धि लेकर आए। भगवान चित्रगुप्त महाराज की जय

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. चित्रगुप्त पूजा 2026  (Chitragupta Pooja 2026) में कब है?
    चित्रगुप्त पूजा 11 नवंबर 2026, बुधवार को भैया दूज के दिन मनाई जाएगी।

   2. चित्रगुप्त पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
       11 नवंबर 2026 को पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर 01:10 बजे से दोपहर 03:18 बजे तक रहेगा।

  3. चित्रगुप्त पूजा में किसकी पूजा मुख्य रूप से होती है?
      इस दिन भगवान चित्रगुप्त, यमराज और कलम-दवात की मुख्य रूप से पूजा की जाती है।

  4. कायस्थ समाज के लिए चित्रगुप्त पूजा का क्या महत्व है?
      भगवान चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की काया से प्रकट हुए थे, इसलिए कायस्थ समाज उन्हें अपना मूल
      पुरुष मानता है और इस दिन अपनी उत्पत्ति का उत्सव मनाता है।

   5. चित्रगुप्त पूजा में सादे कागज पर क्या लिखा जाता है?
       सादे कागज पर स्वास्तिक बनाकर 'श्री गणेशाय नमः' और चित्रगुप्त जी का ध्यान मंत्र लिखा जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.