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August 7, 2026 Blog

Kedar Gauri Vrat 2026: जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

भगवान शिव और शक्ति के अनूठे मिलन का एक पर्व है केदार गौरी व्रत। यह पर्व दिवाली के दिन मनाया जाता है, जब पूरा देश माँ लक्ष्मी की पूजा करता है। दक्षिण भारत में, विशेषकर तमिल परंपरा में, केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) का विशेष स्थान है। यह व्रत माता पार्वती के उस कठोर तप की याद दिलाता है जिसके बल पर उन्होंने भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप को प्राप्त किया था। एक स्त्री अपने सुहाग की रक्षा, परिवार की सुख-शांति और अटूट सौभाग्य के लिए जब यह उपवास रखती है, तो केदारेश्वर महादेव और गौरी माता उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।

केदार गौरी व्रत क्या है? (Introduction)

केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक प्रभावशाली उपवास है। यह व्रत अश्विन मास के उत्तरार्ध या कार्तिक मास के अमावस्या के दिन यानी दीवाली की तिथि को संपन्न होता है। यह व्रत 21 दिनों तक चलने वाला अनुष्ठान है, जिसकी समाप्ति दिवाली के दिन भव्य पूजा के साथ होती है। हालांकि कई श्रद्धालु केवल दिवाली के दिन ही 1 दिन का केदार गौरी व्रत रखकर संपूर्ण पुण्य प्राप्त करते हैं।

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केदार गौरी व्रत 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में केदार गौरी व्रत (Kedar Gauri Vrat 2026) का मुख्य पूजन 08 नवंबर, रविवार को दिवाली के शुभ अवसर पर रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:

केदार गौरी व्रत तिथि: 08 नवंबर 2026, रविवार
कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर 2026 को दोपहर 03:15 बजे से
कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त: 09 नवंबर 2026 को शाम 05:20 बजे तक
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 05:30 बजे से शाम 07:26 बजे तक
वृषभ काल समय: शाम 05:58 बजे से रात 07:54 बजे तक
निशिता काल मुहूर्त: रात 11:39 बजे से रात 12:31 बजे तक

केदार गौरी व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

स्कंद पुराण में केदार गौरी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है। इस व्रत की महिमा इतनी दिव्य है कि स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव के शरीर का आधा हिस्सा प्राप्त करने के लिए यह कठिन तपस्या की थी। इस व्रत के फल स्वरूप ही संसार को भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप प्राप्त हुआ।

यह व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम, सम्मान और सामंजस्य को अटूट बनाता है। जो महिलाएं या पुरुष संपूर्ण निष्ठा से केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) रखते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता, गृह क्लेश और बीमारियां सदा के लिए दूर हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त यह व्रत अध्यात्म के मार्ग पर साधक को शिव और शक्ति की संयुक्त कृपा प्रदान करता है।

केदार गौरी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja ritual)

Kedar Gauri Vrat 2026 festival

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केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) की पूजा में 21 की संख्या का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं क्रमबद्ध पूजा विधि:

  • प्रातः स्नान और संकल्प: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान केदारेश्वर और माता गौरी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल की स्थापना: घर के पूजा गृह को साफ करके एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। साथ ही एक कलश में जल भरकर उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें।
  • 21 धागों का सूत्र (धागा): इस व्रत में 21 गाठों वाला पवित्र सूती धागा तैयार किया जाता है। इसे केदार सूत कहा जाता है। इस धागे को पूजा स्थान पर रखकर कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
  • 21 वस्तुओं का अर्पण: शिव-पार्वती को 21 फल, 21 फूल, 21 पान के पत्ते, 21 सुपारी और 21 मीठे पकवान (जैसे मोदक या नैवेद्य) अर्पित किए जाते हैं।
  • कथा और आरती: धूप-दीप प्रज्वलित करके केदार गौरी व्रत कथा का श्रवण करें। अंत में कर्पूर से आरती गाएं और 21 गाठों वाला धागा पुरुषों को अपने दाहिने हाथ में और महिलाओं को अपने बाएं हाथ में बांधना चाहिए।

केदार गौरी व्रत के जरूरी नियम (Rules)

केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) के दौरान कुछ कड़े नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है:

  • यदि आप 21 दिनों का व्रत रख रहे हैं, तो प्रतिदिन केवल एक बार सात्विक आहार लें।
  • केवल 1 दिन का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को दीवाली के दिन प्रदोष काल की पूजा के बाद ही फलाहार या अन्न ग्रहण करना चाहिए।
  • पूजा में अर्पित किया जाने वाला 21 गांठों का पवित्र धागा पूजा के बाद हाथ पर धारण करना अनिवार्य है।
  • पूरे दिन मन में शिव और शक्ति के मंत्रों का निरंतर जप करते रहें।

केदार गौरी व्रत रखने के मुख्य लाभ (Benefits)

  • अखंड सौभाग्य की प्राप्ति: सुहागिन महिलाओं के पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है।
  • अर्धनारीश्वर कृपा: पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट खत्म होती है और अटूट प्रेम स्थापित होता है।
  • संतान और धन सुख: घर में रिद्धि-सिद्धि और योग्य संतान का आगमन होता है।
  • समस्त पापों से मुक्ति: जीवन में जाने-अनजाने हुए बुरे कर्मों का नाश होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • पूजा के समय भोलेनाथ को बेलपत्र, धतूरा और माता गौरी को लाल चुनरी व श्रृंगार सामग्री अवश्य चढ़ाएं।
  • घर के मुख्य द्वार पर मिट्टी के दीये जलाएं और केदारेश्वर का ध्यान करें।
  • पूजा के बाद 21 मिठाइयों में से कुछ हिस्सा गरीबों में दान करें।

क्या न करें:

  • व्रत वाले दिन घर में किसी भी प्रकार का विवाद न करें और न ही किसी पर गुस्सा करें।
  • काले वस्त्र पहनकर पूजा में शामिल न हों।
  • तामसिक भोजन, लहसुन और प्याज का प्रयोग घर में पूरी तरह वर्जित रखें।

केदार गौरी व्रत की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार महर्षि भृंगी भगवान शिव के परम भक्त थे, लेकिन वे केवल शिव जी की परिक्रमा करते थे और माता पार्वती की उपेक्षा कर देते थे। इससे माता पार्वती अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गईं। उन्होंने भगवान शिव से पूछा कि वे ऐसा उपाय बताएं जिससे कोई भी भक्त शिव को शक्ति से अलग न कर सके।

तब भगवान शिव ने उन्हें महर्षि गौतम के आश्रम जाकर 21 दिनों का कठिन केदार व्रत करने की सलाह दी। माता पार्वती ने ऋषि गौतम के मार्गदर्शन में केदारेश्वर देव की 21 दिनों तक कठोर तपस्या की और 21 वस्तुओं से पूजन किया। माता गौरी के इस अटूट तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने माता पार्वती को अपने शरीर का आधा भाग दे दिया। इस प्रकार भगवान शिव 'अर्धनारीश्वर' कहलाए। तभी से इस पावन व्रत का नाम केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) पड़ा।

निष्कर्ष (Conclusion)

केदार गौरी व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की पवित्रता और भक्ति की अनूठी मिसाल है। यह व्रत हमें सिखाता है कि सच्चे समर्पण और तपस्या से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। जब हम केदारेश्वर महादेव और माता गौरी के चरणों में अपना मन लगाते हैं, तो जीवन के सारे दुख और अंधेरे छंट जाते हैं। वर्ष के केदार गौरी व्रत (Kedar Gauri Vrat 2026) पर भगवान शिव और माता पार्वती आपकी झोली सुख, शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य से भर दें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) में कब है?
    केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) का मुख्य पूजन 08 नवंबर 2026, रविवार को दिवाली के दिन संपन्न होगा।
  1. केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) में किस भगवान की पूजा होती है?
    इस व्रत में भगवान शिव (केदारेश्वर स्वरूप) और माता पार्वती (गौरी स्वरूप) की संयुक्त पूजा की जाती है।
  1. केदार गौरी व्रत में 21 की संख्या का क्या महत्व है?
    माता पार्वती ने 21 दिनों तक 21 वस्तुओं को अर्पित करके यह तपस्या की थी, इसलिए इस पूजा में 21 की संख्या बेहद शुभ मानी जाती है।
  1. क्या केदार गौरी व्रत केवल 1 दिन रखा जा सकता है?
    जी हां, जो लोग 21 दिनों का अनुष्ठान नहीं कर सकते, वे दिवाली के दिन 1 दिन का व्रत रखकर पूजा कर सकते हैं।
  1. 21 गाठों वाला धागा किस हाथ में बांधना चाहिए?
    पूजा के बाद यह पवित्र धागा पुरुषों को अपने दाहिने हाथ में और महिलाओं को अपने बाएं हाथ में बांधना चाहिए।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.