भगवान शिव और शक्ति के अनूठे मिलन का एक पर्व है केदार गौरी व्रत। यह पर्व दिवाली के दिन मनाया जाता है, जब पूरा देश माँ लक्ष्मी की पूजा करता है। दक्षिण भारत में, विशेषकर तमिल परंपरा में, केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) का विशेष स्थान है। यह व्रत माता पार्वती के उस कठोर तप की याद दिलाता है जिसके बल पर उन्होंने भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप को प्राप्त किया था। एक स्त्री अपने सुहाग की रक्षा, परिवार की सुख-शांति और अटूट सौभाग्य के लिए जब यह उपवास रखती है, तो केदारेश्वर महादेव और गौरी माता उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक प्रभावशाली उपवास है। यह व्रत अश्विन मास के उत्तरार्ध या कार्तिक मास के अमावस्या के दिन यानी दीवाली की तिथि को संपन्न होता है। यह व्रत 21 दिनों तक चलने वाला अनुष्ठान है, जिसकी समाप्ति दिवाली के दिन भव्य पूजा के साथ होती है। हालांकि कई श्रद्धालु केवल दिवाली के दिन ही 1 दिन का केदार गौरी व्रत रखकर संपूर्ण पुण्य प्राप्त करते हैं।
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वर्ष में केदार गौरी व्रत (Kedar Gauri Vrat 2026) का मुख्य पूजन 08 नवंबर, रविवार को दिवाली के शुभ अवसर पर रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:
केदार गौरी व्रत तिथि: 08 नवंबर 2026, रविवारस्कंद पुराण में केदार गौरी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है। इस व्रत की महिमा इतनी दिव्य है कि स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव के शरीर का आधा हिस्सा प्राप्त करने के लिए यह कठिन तपस्या की थी। इस व्रत के फल स्वरूप ही संसार को भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप प्राप्त हुआ।
यह व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम, सम्मान और सामंजस्य को अटूट बनाता है। जो महिलाएं या पुरुष संपूर्ण निष्ठा से केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) रखते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता, गृह क्लेश और बीमारियां सदा के लिए दूर हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त यह व्रत अध्यात्म के मार्ग पर साधक को शिव और शक्ति की संयुक्त कृपा प्रदान करता है।

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केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) की पूजा में 21 की संख्या का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं क्रमबद्ध पूजा विधि:
केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) के दौरान कुछ कड़े नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार महर्षि भृंगी भगवान शिव के परम भक्त थे, लेकिन वे केवल शिव जी की परिक्रमा करते थे और माता पार्वती की उपेक्षा कर देते थे। इससे माता पार्वती अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गईं। उन्होंने भगवान शिव से पूछा कि वे ऐसा उपाय बताएं जिससे कोई भी भक्त शिव को शक्ति से अलग न कर सके।
तब भगवान शिव ने उन्हें महर्षि गौतम के आश्रम जाकर 21 दिनों का कठिन केदार व्रत करने की सलाह दी। माता पार्वती ने ऋषि गौतम के मार्गदर्शन में केदारेश्वर देव की 21 दिनों तक कठोर तपस्या की और 21 वस्तुओं से पूजन किया। माता गौरी के इस अटूट तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने माता पार्वती को अपने शरीर का आधा भाग दे दिया। इस प्रकार भगवान शिव 'अर्धनारीश्वर' कहलाए। तभी से इस पावन व्रत का नाम केदार गौरी व्रत 2026 (Kedar Gauri Vrat 2026) पड़ा।
केदार गौरी व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की पवित्रता और भक्ति की अनूठी मिसाल है। यह व्रत हमें सिखाता है कि सच्चे समर्पण और तपस्या से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। जब हम केदारेश्वर महादेव और माता गौरी के चरणों में अपना मन लगाते हैं, तो जीवन के सारे दुख और अंधेरे छंट जाते हैं। वर्ष के केदार गौरी व्रत (Kedar Gauri Vrat 2026) पर भगवान शिव और माता पार्वती आपकी झोली सुख, शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य से भर दें।
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Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.