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July 22, 2026 Blog

Karwa Chauth 2026: 29 अक्टूबर को है करवा चौथ, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और सही विधि

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

हाथों में रची पिया के नाम की मेहंदी, खनकती हुई चूड़ियाँ, माथे पर सजा सिंदूर और दिल में अपने जीवनसाथी के लिए दुआएं... यही तो है करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026) की वो सुबह, जिसका हर सुहागिन को सालभर इंतजार रहता है। भोर की पहली किरण से पहले सास के हाथों से मिली सरगी का आशीर्वाद और दिनभर बिना पानी की एक बूंद पिए चेहरे पर खिली मुस्कान, भारतीय नारी के त्याग और प्रेम की मिसाल है। जब रात के सन्नाटे में छत पर शंख की ध्वनि गूंजती है और चांद को छलनी की ओट से निहारा जाता है, तो ऐसा लगता है मानो सारा प्रेम उस एक पल में सिमट आया हो। इस वर्ष करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026)29 अक्टूबर को आ रहा है। यह केवल एक पारंपरिक उपवास नहीं है, बल्कि दो आत्माओं के बीच के विश्वास का जश्न है जो समय की सीमाओं को भी लांघ जाता है। आइए, एक साथी की तरह समझते हैं कि इस साल यह पावन व्रत कब है, इसका महत्व क्या है और माँ गौरी को रिझाने की पूजा विधि क्या है।

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करवा चौथ व्रत क्या है? (What is the Karwa Chauth fast?)

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा उत्सव है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, स्वामी कार्तिकेय और गणेश जी की पूजा की जाती है। रात में जब चंद्रमा उदित होते हैं, तब उन्हें अर्घ्य देकर और पति के हाथों से जल ग्रहण करके ही यह व्रत संपन्न माना जाता है।

करवा चौथ 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय (Date and time)

साल में करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026)का व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है। गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है, जो वैवाहिक जीवन और सौभाग्य के कारक माने जाते हैं। ऐसे में इस साल व्रत रखने से सुहागिनों को सुखद दांपत्य का विशेष लाभ मिलेगा। पंचांग के अनुसार सही समय इस प्रकार है:

करवा चौथ व्रत की तारीख: 29 अक्टूबर 2026, दिन गुरुवार
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 07:42 AM से
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि समापन: 30 अक्टूबर 2026 को सुबह 06:15 AM तक
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:38 PM से शाम 06:56 PM तक
करवा चौथ 2026 चंद्रोदय (चांद निकलने) का समय: रात 07:54 PM पर (स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है)

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

भारतीय संस्कृति में करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026) का महत्व केवल सजने-संवरने तक सीमित नहीं है, इसका आध्यात्मिक आधार बेहद मजबूत है। शास्त्रों के अनुसार, जब कोई स्त्री सच्चे मन और पूर्ण समर्पण के साथ अपने पति की रक्षा का संकल्प लेती है, तो उसके सतीत्व के आगे यमराज को भी झुकना पड़ता है।

इस व्रत का यह महत्व भी है कि यह आधुनिक दौर की भागदौड़ में उलझे पति-पत्नी के रिश्ते में एक नई ताजगी और आत्मीयता भर देता है। मिट्टी के 'करवे' से पानी पीना और उसे आपस में बदलना इस बात का प्रतीक है कि दोनों का सुख-दुख एक है। माँ पार्वती की आराधना करने से घर की कलह शांत होती है और परिवार पर आ रहे संकट टल जाते हैं।

चौथ माता और शिव परिवार की पूजा विधि (Pooja rituals)

29 अक्टूबर की पावन संध्या को अपने घर में इस प्रकार सात्विक पूजा विधि संपन्न करें:

  • सरगी का सेवन: सुबह सूर्योदय से पहले (लगभग 4 से 5 बजे के बीच) सास द्वारा दी गई सरगी खाएं, जिसमें सूखे मेवे, फल और मिठाई शामिल हो। माँ गौरी को प्रणाम कर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  • शाम का दिव्य श्रृंगार: दोपहर के बाद स्नान करके लाल, गुलाबी या पीले रंग के सुंदर पारंपरिक वस्त्र पहनें और सोलाह श्रृंगार करें।
  • पूजा स्थल की तैयारी: दीवार पर करवा चौथ का कैलेंडर लगाएं या गेरू से ऐपन बनाएं। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर शिव परिवार की मूर्ति स्थापित करें।
  • करवा सजाना: मिट्टी के दो करवे लें। एक में पानी और दूसरे में बूंदी या अनाज भरें। करवे के कंठ पर मौली (कलावा) बांधें और रोली से स्वास्तिक बनाएं।
  • कथा श्रवण: शाम के शुभ मुहूर्त (05:38 PM) में एकत्रित होकर करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा ध्यान से सुनें। हाथ में गेहूं के दाने और फूल रखकर कथा सुननी चाहिए।
  • चंद्र दर्शन और पारण: रात को 07:54 PM पर चांद निकलने के बाद छत पर जाएं। दीपक जलाकर पहले चंद्रमा को छलनी से देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा निहारें। चंद्र देव को जल, अक्षत और दूध मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर अपना व्रत खोलें।

करवा चौथ के नियम (Rules)

इस पावन व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए इन नियम का पालन जरूर करें:

  • निर्जला उपवास का नियम: सूर्योदय के बाद से लेकर रात को चंद्र दर्शन तक पानी की एक बूंद भी गले से नीचे नहीं उतरनी चाहिए। स्वास्थ्य खराब होने पर ही नियमों में ढील दी जा सकती है।
  • दान का नियम: पूजा के बाद अपने करवे और सुहाग की सामग्री (बायना) अपनी सास या घर की किसी बुजुर्ग महिला को देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेना अनिवार्य है।
  • सफेद वस्तुओं का निषेध: इस दिन किसी को भी सफेद कपड़ा, सफेद दूध या चूना जैसी चीजें दान में न दें।

करवा चौथ व्रत रखने के लाभ (Benefits)

Karwa Chauth 2026 festival

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जो महिलाएं पूरी निष्ठा से इस पावन तिथि पर उपवास रखती हैं, उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

  • अखंड सौभाग्य का वरदान: पति की अकाल मृत्यु और गंभीर बीमारियों से रक्षा होती है।
  • दांपत्य जीवन में अटूट प्रेम: पति-पत्नी के बीच आपसी तालमेल मजबूत होता है और कड़वाहट दूर होने का लाभ मिलता है।
  • संतान सुख की प्राप्ति: माँ गौरी की कृपा से संतान दीर्घायु और संस्कारी बनती है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • पूजा के समय अपनी सासु माँ या किसी सुहागिन स्त्री को आदरपूर्वक सुहाग पिटारी भेंट करें।
  • चाँद को अर्घ्य देते समय मन ही मन अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना दोहराएं।

क्या न करें:

  • इस पावन दिन भूलकर भी काले, नीले या भूरे रंग के वस्त्र न पहनें, क्योंकि ये रंग शुभ नहीं माने जाते।
  • सुई, कैंची या धारदार चीजों का इस्तेमाल इस दिन करने से पूरी तरह बचें।
  • दिनभर में किसी भी व्यक्ति का दिल न दुखाएं और न ही अपशब्द बोलें।

पौराणिक व्रत कथा: वीरावती और सात भाइयों का स्नेह (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, वीरावती नाम की एक इकलौती और बेहद लाडली बहन थी, जिसके सात भाई थे। विवाह के बाद जब वह अपने मायके आई, तो उसने अपनी भाभियों के साथ करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026)का व्रत रखा। लेकिन भूख-प्यास के कारण वह शाम होते-होते बेहोश होकर गिर पड़ी। अपनी प्यारी बहन की यह दशा भाइयों से देखी नहीं गई। उन्होंने दूर जंगल में एक पेड़ पर दीपक जलाकर और आगे छलनी रखकर एक नकली चांद का आभास कराया और वीरावती से कहा "देखो बहन, चांद निकल आया है, अर्घ्य देकर भोजन कर लो।” वीरावती ने भाइयों की बात मानकर नकली चांद को अर्घ्य देकर जैसे ही भोजन का पहला निवाला मुंह में डाला, उसे अपने पति की मृत्यु का दुखद समाचार मिला। वीरावती रोती हुई अपने ससुराल भागी। रास्ते में उसे माता पार्वती मिलीं, जिन्होंने उसे बताया कि उसने अनजाने में भाइयों के स्नेह वश नकली चांद देखकर व्रत तोड़ दिया था, जिससे माँ रुष्ट हो गईं। वीरावती ने रोते हुए माँ से क्षमा मांगी। माँ पार्वती ने दया कर कहा "तुम अगले वर्ष पूरे नियमों के साथ पुनः निर्जला व्रत रखो।” वीरावती ने अगले साल पूरी निष्ठा से करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026) का व्रत किया। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर माँ गौरी ने उसके पति को पुनः जीवित कर दीर्घायु का वरदान दिया।

निष्कर्ष: सिंदूर का विश्वास और युगों-युगों का साथ (Conclusion)

करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026) केवल एक दिन भूखे रहने की रस्म नहीं है, यह एक पत्नी के उस अटूट विश्वास का उत्सव है जो हर मुश्किल घड़ी में अपने जीवनसाथी की ढाल बनकर खड़ी रहती है। जब आप 29 अक्टूबर 2026 की रात को सांवरिया चांद को अर्घ्य देंगी, तो अपने दिल की सारी पवित्रता अपने साथी के नाम कर दीजिएगा। चौथ माता और भगवान भोलेनाथ की असीम अनुकंपा आपके वैवाहिक जीवन को हमेशा खुशियों, आपसी तालमेल और अटूट प्रेम से महकाती रहे। 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. वर्ष 2026 में करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026) का व्रत किस तारीख को है?
    साल में करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026)का पावन व्रत 29 अक्टूबर, दिन गुरुवार को पूरे देश में मनाया जाएगा।
  1. करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026) को चांद निकलने का सटीक समय क्या है?
    29 अक्टूबर 2026 की रात को चंद्रोदय का मुख्य समय रात 07:54 PM है। मौसम साफ रहने पर इसी समय चांद के दर्शन होंगे।
  1. क्या कुंवारी लड़कियां भी करवा चौथ 2026 (Karwa Chauth 2026) का व्रत रख सकती हैं?
    जी हाँ, कुंवारी कन्याएं मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत रख सकती हैं। वे चांद के बजाय तारों को देखकर अपना व्रत खोलती हैं।
  1. करवा चौथ पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त क्या है?
    इस साल पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 05:38 PM से शाम 06:56 PM तक रहेगा, इसी समय व्रत कथा सुनना सबसे फलदायी है।
  1. अगर रात को बादल होने के कारण चांद न दिखे तो व्रत कैसे खोलें?
    ऐसी स्थिति में भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान करके, या किसी बुजुर्ग के सुहाग चिन्ह को देखकर पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जा सकता है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.