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July 17, 2026 Blog

Dussehra 2026: 20 अक्टूबर को है दशहरा, जानें रावण दहन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक महत्व

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

बचपन की वो शामें कितनी खूबसूरत होती थीं न? जब हम अपने परिवार के साथ मेले की तरफ बढ़ते थे। रंग-बिरंगे खिलौने, गरमा-गरम जलेबियों की सुगंध और मैदान के बीचों-बीच खड़ा कागज और लकड़ियों से बना वह विशाल रावण। जैसे ही शाम का समय होता था, प्रभु राम का तीर रावण के पुतले को छूता और देखते ही देखते वह धू-धू कर जल उठता था। पटाखों के शोर के बीच जब पूरा मैदान 'जय श्री राम' के नारों से गूंजता था, तो हमारे दिल में यह विश्वास पक्का हो जाता था कि बुराई का कद चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, सच्चाई के एक बाण के सामने उसे हार माननी ही पड़ती है। हमारी प्राचीन विरासत का यही सबसे जोशीला, गौरवशाली और उत्सवधर्मी त्योहार है दशहरा 2026 (Dussehra 2026)

शारदीय नवरात्रि की नौ दिनों की भक्ति और शक्ति साधना के ठीक अगले दिन आने वाला यह महापर्व इस वर्ष 20 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इसे पंचांग में विजयादशमी भी कहा जाता है। यह दिन केवल एक त्योहार या मेले में घूमने का जरिया नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर बैठे क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और अहंकार रूपी रावण को जलाने का आत्मिक महामुहूर्त है। आइए, एक सच्चे देशभक्त और प्राचीन मित्र की तरह दिल की गहराई से समझते हैं कि इस दिन का क्या महत्व है और घर में सुख-समृद्धि लाने की सही पूजा विधि क्या है।

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दशहरा क्या है? (What is Dussehra?)

सनातन पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इसे 'अबूझ मुहूर्त' की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी नए कार्य, व्यापार या गृह प्रवेश की शुरुआत के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। यह पर्व दो महान दिव्य शक्तियों की विजय गाथा का प्रतीक है। पहली, जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध कर धर्म की स्थापना की। और दूसरी, जब माँ दुर्गा ने महिषासुर नाम के पराक्रमी राक्षस का वध कर देवताओं को उसका खोया हुआ स्वर्ग वापस लौटाया। यही कारण है कि इस दिन शस्त्र पूजा, शमी वृक्ष की आराधना और अपराजिता देवी के पूजन की अद्भुत परंपरा है।

दशहरा 2026: शुभ तिथि और रावण दहन मुहूर्त (Date and time)

इस वर्ष दशहरा 2026 (Dussehra 2026) मंगलवार के दिन आ रहा है। मंगलवार का दिन स्वयं प्रभु राम के परम भक्त और संकटमोचन हनुमान जी का दिन माना जाता है, जिससे इस महायोग का महत्व और फल कई गुना बढ़ गया है। पंचांग के अनुसार सटीक समय इस प्रकार है:

दशहरा व्रत कब है: 20 अक्टूबर 2026, दिन मंगलवार
दशमी तिथि का प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 12:44 AM से (19 अक्टूबर की मध्यरात्रि के बाद)
दशमी तिथि का समापन: 21 अक्टूबर 2026 को रात 02:44 AM तक
विजयादशमी (दशहरा) पूजा मुहूर्त: दोपहर 01:18 PM से दोपहर 03:35 PM तक
शस्त्र पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय: दोपहर 01:42 PM से दोपहर 02:28 PM तक (अभिजीत मुहूर्त)
श्रद्धेय रावण दहन का समय (प्रदोष काल): शाम 05:45 PM से रात 08:15 PM तक
विशेष: जो श्रद्धालु पूरे नौ दिनों का नवरात्रि उपवास रखते हैं, वे 20 अक्टूबर की सुबह नवमी तिथि के उत्तरार्ध में माँ दुर्गा के विसर्जन के बाद दशमी लगते ही सात्विक पारण कर सकते हैं।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

भारतीय संस्कृति में दशहरा 2026 (Dussehra 2026) पर्व का महत्व इंसान को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की सीख देता है। इसका आध्यात्मिक महत्व यह है कि जब आपके पास संसाधन कम हों (जैसे वनवास के समय श्री राम के पास कोई राजसी सेना नहीं थी), तब भी यदि आपकी नीयत साफ है और आप सच्चाई के मार्ग पर हैं, तो साक्षात ब्रह्मांड की शक्तियां (माँ दुर्गा) आपका साथ देने धरती पर आ जाती हैं।

इस दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। माना जाता है कि लंका विजय पर निकलने से पहले श्री राम ने शमी के पेड़ के सामने सिर झुकाया था। क्षत्रियों, सैनिकों और पुलिसकर्मियों के लिए अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करने का यह दिन आत्मबल और सुरक्षा का प्रतीक है।

शस्त्र और शमी वृक्ष की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

20 अक्टूबर की पावन दोपहर और संध्या काल में आपको अपने घर में इस प्रकार पूजा विधि संपन्न करनी चाहिए:

  • प्रातः काल की शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें। मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं और रंगोली बनाएं। पवित्र स्नान कर साफ वस्त्र पहनें।
  • अपराजिता पूजन: दोपहर के शुभ मुहूर्त में घर की उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर माँ अपराजिता की स्थापना करें। उन्हें चंदन, रोली, अक्षत और नीले फूल अर्पित करें।
  • शस्त्र पूजा (आयुध पूजा): आपके घर में जो भी लोहे के औजार, वाहन, कलम, चाकू या रक्षा के उपकरण (लाइसेंसी शस्त्र) हों, उन्हें साफ करके गंगाजल छिड़कें। उन पर हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाएं और कलावा बांधें।
  • शमी वृक्ष की आराधना: शाम के समय घर के पास किसी शमी के पेड़ के पास जाएं। उसकी जड़ में जल अर्पित करें, घी का दीपक जलाएं और पेड़ की मिट्टी को मस्तक पर लगाएं। उसकी सात परिक्रमा करें।
  • भोग और आरती: भगवान राम, लक्ष्मण जी और माता सीता की आरती गाएं। उन्हें बूंदी के लड्डू या जलेबी का भोग लगाएं।

दशहरा पर्व के जरूरी नियम (Rules)

इस पावन दिन का पूरा लाभ उठाने के लिए इन व्रत के नियम का पालन जरूर करें:

  • सात्विकता का संकल्प: भले ही यह उल्लास का दिन हो, लेकिन घर में किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा) का प्रयोग बिल्कुल वर्जित रखें।
  • अहंकार का विसर्जन: रावण सर्वज्ञानी था, लेकिन उसके पतन का कारण उसका घमंड बना। इसलिए इस दिन अपने पद, धन या ज्ञान का अहंकार किसी के सामने न दिखाएं।
  • क्षमा भाव: अपने मन से किसी के प्रति पुराना बैर या कड़वाहट निकाल दें।


दशहरा मनाने के चमत्कारी लाभ (Benefits)

जो जातक इस दिन पूरी निष्ठा से धर्म और शक्ति की शरण में आते हैं, उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

  • शत्रु बाधा से मुक्ति: जीवन में चल रहे मुकदमों, अदालती मामलों और गुप्त शत्रुओं पर विजय का महा लाभ मिलता है।
  • व्यापार में तरक्की: इस अबूझ मुहूर्त में शुरू किया गया कोई भी नया काम या व्यावसायिक डील कभी घाटे में नहीं जाती।
  • भय का नाश: मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)

Dussehra 2026 festival

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क्या करें:

  • इस दिन अपने माता-पिता, गुरुओं और घर के बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद अवश्य लें।
  • शाम को पूजा के बाद शमी के पत्ते (जिन्हें 'सोना' कहा जाता है) अपने मित्रों और रिश्तेदारों को देकर गले मिलें और पुरानी कड़वाहट भुलाएं।

क्या न करें:

  • इस पावन दिन किसी भी पेड़-पौधे को नुकसान न पहुँचाएं और न ही बिना वजह पत्तियां तोड़ें।
  • किसी भी महिला या कमजोर व्यक्ति का अपमान न करें, क्योंकि रावण के विनाश की नींव माता सीता के अपमान से ही पड़ी थी।

पौराणिक व्रत कथा: अधर्म पर धर्म की महाविजय (Story)

त्रेतायुग की कथा के अनुसार, जब लंका का राजा रावण माता सीता का छल से हरण करके ले गया, तब भगवान श्री राम ने लक्ष्मण जी और हनुमान जी की वानर सेना के साथ समुद्र पर पुल बनाकर लंका पर चढ़ाई की। रावण अत्यंत बलशाली और परम शिवभक्त था, जिसे मारना आसान नहीं था।

युद्ध भूमि में रावण की मायावी शक्तियों का अंत करने के लिए प्रभु राम ने शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों तक माँ दुर्गा की कठिन उपासना की। माँ भवानी ने प्रकट होकर श्री राम को विजय का वरदान दिया। इसके बाद, आश्विन मास की दशमी तिथि के दिन भगवान राम ने अपने अमोघ बाण से रावण की नाभि में स्थित अमृत कुंड को सुखाकर उसका वध कर दिया। इसी महाविजय की खुशी में हर साल दशहरा 2026 (Dussehra 2026) मनाया जाता है, जो यह संदेश देता है कि अधर्म का साम्राज्य चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, सच्चाई की एक चिंगारी उसे भस्म कर देती है।

निष्कर्ष: हमारे भीतर के राम को जगाने की बेला (Conclusion)

दशहरा 2026 (Dussehra 2026) केवल एक त्योहार की तारीख नहीं है, यह हमारे अंतर्मन को झकझोरने का दिन है। मैदान का रावण तो हर साल जलकर राख हो जाता है, लेकिन असली विजय उस दिन होगी जब हम अपने भीतर बैठे काम, क्रोध, लोभ और अहंकार के रावण को हमेशा के लिए जला देंगे। जब आप 20 अक्टूबर 2026 की शाम को रावण दहन देखने जाएं, तो भगवान राम से यही प्रार्थना कीजिएगा कि वे आपकी बुद्धि को हमेशा सच्चाई के मार्ग पर बनाए रखें। सुख, समृद्धि और साहस का यह पावन पर्व आपके पूरे परिवार को खुशियों से सराबोर रखे। आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. वर्ष में दशहरा 2026 (Dussehra 2026) किस तारीख को है?
    साल 2026 में दशहरा का महापर्व 20 अक्टूबर, दिन मंगलवार को देश भर में मनाया जाएगा।
  1. दशहरे के दिन शस्त्र पूजा क्यों की जाती है?
    यह परंपरा प्राचीन काल से राजाओं और सैनिकों द्वारा शुरू की गई थी, ताकि उनके कर्म और रक्षा के साधन (शस्त्र) पूरे वर्ष अजेय रहें और देश व धर्म की रक्षा कर सकें।
  1. रावण दहन का सबसे शुभ समय (प्रदोष काल) क्या है?
    20 अक्टूबर 2026 को शाम 05:45 PM से रात 08:15 PM के बीच का समय रावण दहन के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
  1. दशहरे पर शमी पूजा का क्या महत्व है?
    मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ में ही छुपाए थे और श्री राम ने भी लंका विजय से पहले इसकी पूजा की थी, इसलिए यह पेड़ समृद्धि और विजय देता है।
  1. क्या दशहरे के दिन नया वाहन या सोना खरीदना शुभ होता है?
    जी हाँ, दशहरे को सनातन धर्म में एक 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, इसलिए इस दिन वाहन, भूमि, सोना खरीदना या नया व्यापार शुरू करना अत्यंत फलदायी होता है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.