बचपन की वो शामें कितनी खूबसूरत होती थीं न? जब हम अपने परिवार के साथ मेले की तरफ बढ़ते थे। रंग-बिरंगे खिलौने, गरमा-गरम जलेबियों की सुगंध और मैदान के बीचों-बीच खड़ा कागज और लकड़ियों से बना वह विशाल रावण। जैसे ही शाम का समय होता था, प्रभु राम का तीर रावण के पुतले को छूता और देखते ही देखते वह धू-धू कर जल उठता था। पटाखों के शोर के बीच जब पूरा मैदान 'जय श्री राम' के नारों से गूंजता था, तो हमारे दिल में यह विश्वास पक्का हो जाता था कि बुराई का कद चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, सच्चाई के एक बाण के सामने उसे हार माननी ही पड़ती है। हमारी प्राचीन विरासत का यही सबसे जोशीला, गौरवशाली और उत्सवधर्मी त्योहार है दशहरा 2026 (Dussehra 2026)
शारदीय नवरात्रि की नौ दिनों की भक्ति और शक्ति साधना के ठीक अगले दिन आने वाला यह महापर्व इस वर्ष 20 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इसे पंचांग में विजयादशमी भी कहा जाता है। यह दिन केवल एक त्योहार या मेले में घूमने का जरिया नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर बैठे क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और अहंकार रूपी रावण को जलाने का आत्मिक महामुहूर्त है। आइए, एक सच्चे देशभक्त और प्राचीन मित्र की तरह दिल की गहराई से समझते हैं कि इस दिन का क्या महत्व है और घर में सुख-समृद्धि लाने की सही पूजा विधि क्या है।
यह भी पढ़ें - Shree Ram Raksha Stotra Pdf: पढ़े राम रक्षा स्तोत्र का सम्पूर्ण पाठ और जानें इसके पढ़ने के क्या लाभ है?
सनातन पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इसे 'अबूझ मुहूर्त' की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी नए कार्य, व्यापार या गृह प्रवेश की शुरुआत के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। यह पर्व दो महान दिव्य शक्तियों की विजय गाथा का प्रतीक है। पहली, जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध कर धर्म की स्थापना की। और दूसरी, जब माँ दुर्गा ने महिषासुर नाम के पराक्रमी राक्षस का वध कर देवताओं को उसका खोया हुआ स्वर्ग वापस लौटाया। यही कारण है कि इस दिन शस्त्र पूजा, शमी वृक्ष की आराधना और अपराजिता देवी के पूजन की अद्भुत परंपरा है।
इस वर्ष दशहरा 2026 (Dussehra 2026) मंगलवार के दिन आ रहा है। मंगलवार का दिन स्वयं प्रभु राम के परम भक्त और संकटमोचन हनुमान जी का दिन माना जाता है, जिससे इस महायोग का महत्व और फल कई गुना बढ़ गया है। पंचांग के अनुसार सटीक समय इस प्रकार है:
दशहरा व्रत कब है: 20 अक्टूबर 2026, दिन मंगलवारभारतीय संस्कृति में दशहरा 2026 (Dussehra 2026) पर्व का महत्व इंसान को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की सीख देता है। इसका आध्यात्मिक महत्व यह है कि जब आपके पास संसाधन कम हों (जैसे वनवास के समय श्री राम के पास कोई राजसी सेना नहीं थी), तब भी यदि आपकी नीयत साफ है और आप सच्चाई के मार्ग पर हैं, तो साक्षात ब्रह्मांड की शक्तियां (माँ दुर्गा) आपका साथ देने धरती पर आ जाती हैं।
इस दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। माना जाता है कि लंका विजय पर निकलने से पहले श्री राम ने शमी के पेड़ के सामने सिर झुकाया था। क्षत्रियों, सैनिकों और पुलिसकर्मियों के लिए अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करने का यह दिन आत्मबल और सुरक्षा का प्रतीक है।
20 अक्टूबर की पावन दोपहर और संध्या काल में आपको अपने घर में इस प्रकार पूजा विधि संपन्न करनी चाहिए:
इस पावन दिन का पूरा लाभ उठाने के लिए इन व्रत के नियम का पालन जरूर करें:
जो जातक इस दिन पूरी निष्ठा से धर्म और शक्ति की शरण में आते हैं, उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

यह भी पढ़ें - Durga Puja 2025: इस साल कब से है दुर्गा पूजा महोत्सव, जान लें सम्पूर्ण तिथियां और शुभ मुहूर्त
क्या करें:
क्या न करें:
त्रेतायुग की कथा के अनुसार, जब लंका का राजा रावण माता सीता का छल से हरण करके ले गया, तब भगवान श्री राम ने लक्ष्मण जी और हनुमान जी की वानर सेना के साथ समुद्र पर पुल बनाकर लंका पर चढ़ाई की। रावण अत्यंत बलशाली और परम शिवभक्त था, जिसे मारना आसान नहीं था।
युद्ध भूमि में रावण की मायावी शक्तियों का अंत करने के लिए प्रभु राम ने शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों तक माँ दुर्गा की कठिन उपासना की। माँ भवानी ने प्रकट होकर श्री राम को विजय का वरदान दिया। इसके बाद, आश्विन मास की दशमी तिथि के दिन भगवान राम ने अपने अमोघ बाण से रावण की नाभि में स्थित अमृत कुंड को सुखाकर उसका वध कर दिया। इसी महाविजय की खुशी में हर साल दशहरा 2026 (Dussehra 2026) मनाया जाता है, जो यह संदेश देता है कि अधर्म का साम्राज्य चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, सच्चाई की एक चिंगारी उसे भस्म कर देती है।
दशहरा 2026 (Dussehra 2026) केवल एक त्योहार की तारीख नहीं है, यह हमारे अंतर्मन को झकझोरने का दिन है। मैदान का रावण तो हर साल जलकर राख हो जाता है, लेकिन असली विजय उस दिन होगी जब हम अपने भीतर बैठे काम, क्रोध, लोभ और अहंकार के रावण को हमेशा के लिए जला देंगे। जब आप 20 अक्टूबर 2026 की शाम को रावण दहन देखने जाएं, तो भगवान राम से यही प्रार्थना कीजिएगा कि वे आपकी बुद्धि को हमेशा सच्चाई के मार्ग पर बनाए रखें। सुख, समृद्धि और साहस का यह पावन पर्व आपके पूरे परिवार को खुशियों से सराबोर रखे। आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं
यह भी पढ़ें - Shami Plant Upay: करियर और कारोबार में सफलता दिलाएगा, जरूर करें ये चमत्कारी उपाय
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.