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July 21, 2026 Blog

Aparajita Jayanti 2026: 20 अक्टूबर को है अपराजिता जयंती, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और हर कार्य में विजय पाने की पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जीवन में कभी-कभी ऐसे मोड़ आते हैं जब हमें लगता है कि सभी रास्ते बंद हो गए हैं। हमारी मेहनत और साफ नीयत के बावजूद, किस्मत हमें हर मोड़ पर धोखा देती है। ऐसे समय में, सनातन धर्म हमें एक ऐसी दिव्य शक्ति की ओर ले जाता है जिसे कोई भी पराजित नहीं कर सकता - माँ अपराजिता 2026 (Aparajita Jayanti 2026) । माँ अपराजिता का नाम ही स्पष्ट करता है कि वे अजेय हैं। हम दशहरे के दौरान रावण दहन का जश्न मनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी पावन दिन एक गुप्त और फलदायी महाशक्ति का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है? यह दिन हमारे जीवन की दिशा बदल सकता है और हमें अपराजिता जयंती 2026 (Aparajita Jayanti 2026) के रूप में जाना जाता है। इस वर्ष, अपराजिता जयंती 2026 (Aparajita Jayanti 2026) 20 अक्टूबर को आ रही है। यह दिन न केवल एक धार्मिक तिथि है, बल्कि यह हमारे भीतर छिपे आत्मबल को जगाने, शत्रुओं के भय को मिटाने, और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाने का महायोग है। आइए, एक सच्चे साधक की तरह दिल की गहराई से समझते हैं कि इस पावन दिवस का क्या महत्व है और माँ अपराजिता की कृपा पाने की सही पूजा विधि क्या है।

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अपराजिता जयंती क्या है? (What is Aparajita Jayanti?)

अपराजिता जयंती 2026 (Aparajita Jayanti 2026) अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, माँ अपराजिता साक्षात आदि शक्ति माँ दुर्गा का ही एक स्वरूप हैं, जो देवताओं को असुरों पर विजय दिलाने और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए प्रकट हुई थीं। दशहरे के दिन जहाँ भगवान राम की पूजा होती है, वहीं अपराह्न काल में माँ अपराजिता की विशेष पूजा का विधान है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा युद्ध पर जाने से पहले माँ अपराजिता का आशीर्वाद लेते थे ताकि वे अजेय रह सकें।

अपराजिता जयंती 2026: तिथि और विजय मुहूर्त (Date and time)

साल में अपराजिता जयंती 2026 (Aparajita Jayanti 2026) मंगलवार को आ रही है, जो हनुमान जी का दिन है। शिव, राम, और शक्ति के इस त्रिवेणी योग में, पंचांग के अनुसार सटीक समय इस प्रकार है:

व्रत कब है / जयंती कब है: 20 अक्टूबर 2026, दिन मंगलवार
दशमी तिथि का प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 12:44 AM से
दशमी तिथि का समापन: 21 अक्टूबर 2026 को रात 02:44 AM तक
अपराजिता जयंती मुख्य पूजा मुहूर्त: दोपहर 01:18 PM से दोपहर 03:35 PM तक
सर्वश्रेष्ठ पूजन अवधि: 2 घंटे 17 मिनट

विशेष: माँ अपराजिता की पूजा हमेशा दोपहर के उत्तरार्ध में ही फलदायी मानी जाती है। इसलिए 20 अक्टूबर की दोपहर का यह समय साधना के लिए सर्वोत्तम है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

सनातन परंपरा में इस पावन दिवस का महत्व मनुष्य के भीतर छुपे भय और निराशा को समूल नष्ट करना है। माँ अपराजिता की साधना का यह महत्व है कि यह कुंडली के बड़े से बड़े पितृदोष, राहु-केतु के कुप्रभाव, और जीवन में चल रही भीषण मंदी को काट देती है। आध्यात्मिक रूप से, माँ अपराजिता का स्वरूप हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपका संकल्प शुद्ध है, तो जीत आपकी ही होगी। प्रभु श्री राम ने भी रावण का वध करने से ठीक पहले माँ अपराजिता का पूजन किया था, जिसके बाद उन्हें अमोघ शक्ति प्राप्त हुई।

माँ अपराजिता की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

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  • 20 अक्टूबर की पावन दोपहर में अपने घर के ईशान कोण में इस प्रकार सात्विक पूजा विधि संपन्न करें: 
  • स्थान की शुद्धि और रंगोली: दोपहर के मुहूर्त से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के उत्तर-पूर्व हिस्से को साफ करके वहां चंदन और कुमकुम से एक सुंदर अष्टदल कमल बनाएं।
  • माँ की स्थापना: उस अष्टदल कमल के बीच में माँ अपराजिता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि चित्र न हो, तो साक्षात माँ दुर्गा का ध्यान करते हुए संकल्प लें।
  • नीले फूलों का अर्पण: माँ अपराजिता को नीले रंग की वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। उन्हें नीले रंग का अपराजिता फूल या नीले फूल की माला अवश्य अर्पित करें।
  • मूर्तिकला और रक्षा सूत्र: माँ को रोली, अक्षत, और सिंदूर का तिलक लगाएं। एक साफ पीले धागे में माँ का मंत्र पढ़ते हुए तीन गांठें लगाएं और उसे माँ के चरणों में रख दें (पूजा के बाद इसे दाहिने हाथ पर बांधा जाता है)।
  • नैवेद्य भोग: माँ को बेसन के लड्डू, ऋतु फल या मखाने की खीर का भोग लगाएं।
  • स्तोत्र पाठ और आरती: इस दिन 'अपराजिता स्तोत्र' का पाठ करना जीवन की दिशा बदल सकता है। अंत में शुद्ध घी का दीपक जलाकर माँ की आरती करें।

पूजा और साधना के जरूरी नियम (Rules)

इस पावन व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए इन नियमों का आचरण जरूर करें:

  • दिशा की मर्यादा: माँ अपराजिता की पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर ही होना चाहिए।
  • पूर्ण सात्विकता: दशहरे का दिन होने के कारण घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें। तामसिक भोजन रसोई में बिल्कुल न बने।
  • मन का संयम: किसी के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या दुर्भावना मन में न लाएं, क्योंकि माँ न्याय और धर्म की अधिष्ठात्री हैं।

अपराजिता जयंती व्रत और पूजन के महालाभ (Benefits)

जो श्रद्धालु पूरी निष्ठा से इस दिन माँ अपराजिता की शरण में आते हैं, उन्हें निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • अदालती मामलों में विजय: यदि आपका कोई मुकदमा या कोर्ट केस लंबे समय से अटका हुआ है, तो उसमें सफलता का महा लाभ मिलता है।
  • गुप्त शत्रुओं का नाश: कार्यक्षेत्र या व्यापार में आपके खिलाफ साजिश रचने वाले शत्रु स्वतः ही शांत हो जाते हैं।
  • नौकरी और व्यापार में तरक्की: रुके हुए प्रमोशन और व्यापार की मंदी हमेशा के लिए दूर होती है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • पूजा संपन्न होने के बाद माँ के चरणों में रखा रक्षा सूत्र अपने दाहिने हाथ की कलाई पर बांधें, यह हर संकट से आपकी रक्षा करेगा।
  • इस दिन अपने घर के मुख्य द्वार पर एक नीले रंग के फूल का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

क्या न करें:

  • इस पावन दिन भूलकर भी किसी असहाय, कमजोर व्यक्ति या पशु को कष्ट न पहुँचाएं।
  • दोपहर के मुख्य पूजा मुहूर्त के समय सोने से पूरी तरह बचें।

पौराणिक व्रत कथा: देवताओं की पराजय और माँ का अवतरण (Story)

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, एक बार असुरों के राजा महिषासुर और शुंभ-निशुंभ ने अपनी मायावी शक्तियों से देवताओं को बुरी तरह पराजित कर दिया। इंद्र देव सहित सभी देवता अपना राजपाठ छोड़कर जंगलों में छिपने को मजबूर हो गए। जब देवताओं का अहंकार पूरी तरह टूट गया, तब उन्होंने आश्विन शुक्ल दशमी के दिन सामूहिक रूप से परम शक्ति का आह्वान किया।

देवताओं की व्याकुल पुकार सुनकर साक्षात ज्योतिपुंज से माँ अपराजिता प्रकट हुईं। उनका रूप इतना भव्य और अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित था कि उन्हें देखकर ही असुर सेना कांप उठी। माँ अपराजिता ने देवताओं को अभयदान दिया और युद्ध भूमि में अकेले ही करोड़ों असुरों का समूल नाश कर दिया। माँ की इसी महाविजय की स्मृति में देवताओं ने इस दिन को अपराजिता जयंती 2026 (Aparajita Jayanti 2026) के रूप में अमर कर दिया।

निष्कर्ष: माँ का साथ ही हमारी सबसे बड़ी जीत है (Conclusion)

अपराजिता जयंती 2026 (Aparajita Jayanti 2026) हमें सिखाता है कि हार तब तक अंतिम नहीं होती, जब तक आप प्रयास करना नहीं छोड़ते। दुनिया आपको हरा सकती है, लेकिन यदि आपके सिर पर माँ अपराजिता का हाथ है, तो आपको कोई परास्त नहीं कर सकता। जब आप 20 अक्टूबर 2026 की दोपहर को माँ के सामने बैठें, तो अपनी सारी परेशानियां और हार उन्हें सौंप दीजिएगा। विश्वास रखिए, माँ की करुणा आपके जीवन में विजय का नया सवेरा जरूर लेकर आएगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. वर्ष में अपराजिता जयंती 2026 (Aparajita Jayanti 2026) कब मनाई जाएगी?
    साल में अपराजिता जयंती 2026 (Aparajita Jayanti 2026) 20 अक्टूबर, दिन मंगलवार को विजयादशमी के पावन अवसर पर मनाई जाएगी।
  1. माँ अपराजिता को कौन सा फूल सबसे प्रिय है?
    माँ अपराजिता को नीले रंग का अपराजिता फूल सबसे प्रिय है।
  1. अपराजिता पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त क्या है?
    20 अक्टूबर की दोपहर 01:18 PM से दोपहर 03:35 PM के बीच का अपराह्न काल इस पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
  1. क्या यह व्रत शत्रु बाधा दूर करने के लिए रखा जाता है?
    जी हाँ, शास्त्रों के अनुसार गुप्त शत्रुओं, कोर्ट-कचहरी के मामलों और जीवन की असफलताओं से मुक्ति पाने के लिए यह पूजा अचूक मानी गई है।
  1. पूजा के बाद रक्षा सूत्र का क्या करना चाहिए?
    पूजा के बाद माँ के चरणों से स्पर्श कराकर उस पीले धागे को अपने दाहिने हाथ की कलाई पर बांधना चाहिए, यह हर मोड़ पर आपकी रक्षा करता है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.