योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi 2026) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को नियम और श्रद्धा के साथ करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।
यह व्रत खासतौर पर विवाहित महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि जो महिलाएं इसे सच्चे मन से करती हैं, उनके वैवाहिक जीवन में प्रेम, समझ और स्थिरता बढ़ती है।
साल 2026 में योगिनी एकादशी शुक्रवार, 10 जुलाई को मनाई जाएगी।
तिथि और समय (Date and Time)
ध्यान रखें: हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है।
कुछ परंपराओं में गौण योगिनी एकादशी भी मनाई जाती है, जिसमें पारण 12 जुलाई को सुबह 05:32 बजे से 08:18 बजे के बीच किया जाता है। इस दिन द्वादशी जल्दी समाप्त होती है, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi 2026) साल में आने वाली 24 एकादशियों में से एक प्रमुख एकादशी है। यह भगवान विष्णु की भक्ति के लिए रखी जाती है और इसे अत्यंत पुण्य देने वाला व्रत माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और सच्चे मन से पूजा करने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त होता है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खुलता है।
यह व्रत केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी व्यक्ति को मजबूत बनाता है। इससे मन शांत रहता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi 2026) का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से आत्मा शुद्ध होती है और पुराने पाप समाप्त होते हैं।
यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। जो लोग नियमित रूप से एकादशी का पालन करते हैं, उनके जीवन में संतुलन बना रहता है।
इसके साथ ही, यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खोलने वाला भी माना जाता है और मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक होता है।

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इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और उन्हें फूल, फल तथा तुलसी अर्पित करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें। फल, दूध, सूखे मेवे तथा साबूदाना या कुट्टू का आटा लिया जा सकता है।
इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूरा फल मिलता है।
पुराणों में योगिनी एकादशी की एक प्रसिद्ध कथा मिलती है। हेमामाली नाम का एक सेवक कुबेर के यहां कार्य करता था, लेकिन वह अपने काम में लापरवाही करता था और भगवान शिव की पूजा भी नहीं करता था।
इसके कारण उसे श्राप मिला और वह गंभीर रूप से बीमार हो गया। दुखी होकर वह ऋषि मार्कंडेय के पास गया और उनसे समाधान मांगा।
ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। हेमामाली ने पूरे नियम और श्रद्धा के साथ व्रत किया। इसके प्रभाव से उसका श्राप समाप्त हो गया और वह फिर से स्वस्थ जीवन जीने लगा।
यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चे मन से किया गया व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
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इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गरीबों को भोजन कराना, मंदिर में दान देना और जरूरतमंदों की सहायता करना इस व्रत का महत्वपूर्ण भाग है।
ISKCON जैसे मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा, भजन और कीर्तन आयोजित किए जाते हैं। व्रत के बाद प्रसाद वितरण भी किया जाता है, जिससे भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस दिन सुबह और शाम भगवान विष्णु की आरती करना बहुत शुभ माना जाता है। भजन-कीर्तन करने से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।
मंदिर जाकर सामूहिक पूजा में भाग लेने से मन को शांति और आध्यात्मिक संतोष मिलता है।
योगिनी एकादशी का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इसे करने से पति की आयु लंबी होती है और पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और विश्वास बढ़ता है।
यह व्रत घर में सुख-शांति बनाए रखने और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही, यह आर्थिक स्थिति सुधारने और संतान सुख प्राप्त करने में भी सहायक माना जाता है।
इसके अलावा, यह मानसिक तनाव को कम करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भाग्य मजबूत होता है।
योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi 2026) एक पवित्र व्रत है, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला माना जाता है। खासकर विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत वैवाहिक जीवन को मजबूत और सुखद बनाने में सहायक होता है।
यदि आप इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करती हैं, तो भगवान विष्णु की कृपा से आपके जीवन में शांति, समृद्धि और खुशियां अवश्य आती हैं।
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Q1. योगिनी एकादशी 2026 कब है?
यह 10 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।
Q2. पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित समय के भीतर पारण करना शुभ होता है।
Q3. क्या महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?
हां, महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं और यह उनके लिए लाभकारी माना जाता है।
Q4. क्या बिना पानी के व्रत जरूरी है?
नहीं, आप फलाहार व्रत भी रख सकती हैं।
Q5. इस व्रत से क्या लाभ मिलता है?
इससे वैवाहिक सुख, धन, संतान सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है।