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March 6, 2026 Blog

Padmini Ekadashi 2026: क्या है पद्मिनी एकादशी तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व और आध्यात्मिक लाभ

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Padmini Ekadashi 2026: पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म में आने वाली सबसे दुर्लभ और पवित्र एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह एकादशी अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के शुक्ल पक्ष में पड़ती है, जो लगभग 32 महीनों में एक बार आता है। इसी कारण इस व्रत का महत्व अन्य एकादशियों की तुलना में बहुत अधिक माना जाता है।

इस दिन भगवान श्री विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति पद्मिनी एकादशी का व्रत नियम और भक्ति के साथ करता है, उसे अनेक तीर्थ यात्राओं के समान पुण्य प्राप्त होता है।

साल 2026 में पद्मिनी एकादशी अधिक ज्येष्ठ मास में आएगी और यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस लेख में आप पद्मिनी एकादशी 2026 (Padmini Ekadashi 2026 Date) की सही तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा, नियम, महत्व और आध्यात्मिक लाभ को सरल और आसान भाषा में जानेंगे।


पद्मिनी एकादशी क्या है? (What is Padmini Ekadashi)

पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और दुर्लभ एकादशी मानी जाती है। इसे कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी केवल अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के शुक्ल पक्ष में आती है। अधिक मास लगभग 32 महीनों में एक बार आता है, इसलिए यह व्रत भी बहुत दुर्लभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम के साथ पद्मिनी एकादशी का व्रत करता है, उसे अनेक तीर्थों की यात्रा के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जीवन के पाप दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सनातन परंपरा में यह दिन भक्ति, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। कई लोग इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और रात्रि में जागरण भी करते हैं।

2026 में पद्मिनी एकादशी कब है? (When is Padmini Ekadashi in 2026)

 वर्ष 2026 में पद्मिनी एकादशी अधिक ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आएगी। इस बार यह बुधवार के दिन पड़ रही है। 

अधिक मास के कारण यह एकादशी सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक पवित्र मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साल 2026 में पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi 2026 Date) का व्रत बुधवार , 27 मई 2026 को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत का पालन करते हैं।

व्रत का पारण अर्थात व्रत खोलने का शुभ समय 28 मई 2026 की सुबह 05:40 बजे से 08:25 बजे तक रहेगा। वहीं हरि वासर की समाप्ति 28 मई को सुबह 10:15 बजे होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार हरि वासर के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है। 

Padmini Ekadashi 2026


पद्मिनी एकादशी का महत्व  (Importance Of Padmini Ekadashi)

पद्मिनी एकादशी का महत्व हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों में विस्तार से बताया गया है। विशेष रूप से स्कंद पुराण में इस व्रत की महिमा का उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस एकादशी के व्रत, नियम और इसके आध्यात्मिक लाभों के बारे में बताया था।

मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले राजा कार्तवीर्य की पत्नी रानी पद्मिनी ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ किया था। उनकी गहरी आस्था से प्रसन्न होकर इस एकादशी का नाम पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi) पड़ा। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के वर्तमान और पिछले जन्मों के पापों का नाश होता है। साथ ही, भक्त को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और अंत में उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। 


पद्मिनी एकादशी व्रत की विधि (Padmini Ekadashi Vrat Vidhi)

पद्मिनी एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करना चाहिए। सही विधि से किया गया व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है।

दशमी तिथि की तैयारी

व्रत की तैयारी एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से शुरू हो जाती है।

इस दिन व्यक्ति को सात्विक भोजन करना चाहिए। जौ, चावल और अधिक नमक वाले भोजन से बचना चाहिए। रात में जमीन पर सोना और ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।

एकादशी के दिन क्या करें

एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो नदी या पवित्र जल में स्नान करना अधिक पुण्यदायी माना जाता है।

  • इसके बाद घर के पूजा स्थान को साफ करके चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
  • फिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • घी का दीपक जलाएं और तुलसी पत्र, फूल, चंदन तथा केसर मिश्रित जल से भगवान का अभिषेक करें।
  • इस दिन विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा और एकादशी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • रात में भगवान के भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करने की परंपरा भी है।
द्वादशी तिथि पर व्रत पारण
  • व्रत का समापन द्वादशी तिथि में किया जाता है। इसे पारण कहा जाता है।
  • इस दिन सुबह पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन और दान देना शुभ माना जाता है।
  • इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का समापन किया जाता है।

व्रत के नियम और सावधानियां (Padmini Ekadashi Vrat Rules and precautions )

  • पद्मिनी एकादशी का व्रत करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
  • एकादशी के दिन चावल और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। कई लोग इस दिन केवल फलाहार करते हैं।
  • इस दिन तुलसी को जल अर्पित नहीं किया जाता क्योंकि मान्यता है कि तुलसी माता भी इस दिन व्रत रखती हैं।
  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करना चाहिए।
  • क्रोध, चुगली और बुरे विचारों से दूर रहना चाहिए।
  • रात्रि में जागरण करना शुभ माना जाता है और दिन में अधिक सोने से बचना चाहिए।

पद्मिनी एकादशी की पौराणिक कथा (The Legend of Padmini Ekadashi)

पद्मिनी एकादशी की कथा (Padmini Ekadashi ki katha) भविष्योत्तर पुराण में वर्णित है। यह कथा त्रेता युग की है।

उस समय हैहय वंश के राजा कृतवीर्य महिष्मती नगरी पर शासन करते थे। राजा बहुत शक्तिशाली और समृद्ध थे, लेकिन उनकी एक बड़ी चिंता थी—उनकी कोई संतान नहीं थी जो आगे चलकर उनके राज्य की जिम्मेदारी संभाल सके।

राजा की कई रानियाँ थीं, लेकिन उन्हें पुत्र प्राप्ति नहीं हो रही थी। राजा ने संतान प्राप्ति के लिए देवताओं की पूजा, यज्ञ और कई उपाय किए, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

अंत में राजा कृतवीर्य ने तपस्या करने का निर्णय लिया। उनकी प्रमुख रानी पद्मिनी, जो राजा हरिश्चंद्र की पुत्री थीं, अपने पति के साथ वन में तपस्या करने के लिए तैयार हो गईं।

राजा और रानी दोनों ने अपना राजसी जीवन छोड़कर गंधमादन पर्वत पर कठोर तपस्या शुरू कर दी।

रानी पद्मिनी की भक्ति और तपस्या (Devotion and penance of Queen Padmini)

कहा जाता है कि राजा कृतवीर्य ने दस हजार वर्षों तक कठोर तपस्या की, लेकिन फिर भी भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट नहीं हुए।

अपने पति को निराश देखकर रानी पद्मिनी बहुत दुखी हुईं। तब उन्होंने महर्षि अत्रि की पत्नी देवी अनुसूया से मार्गदर्शन मांगा।

देवी अनुसूया ने रानी पद्मिनी को अधिक मास के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह मास अत्यंत पवित्र होता है और इस दौरान किए गए व्रत और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

उन्होंने रानी को सलाह दी कि वे अधिक मास के शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी का व्रत (Padmini Ekadashi vrat) रखें और पूरे श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की पूजा करें।

भगवान विष्णु का आशीर्वाद
  • देवी अनुसूया के बताए मार्ग का पालन करते हुए रानी पद्मिनी ने पद्मिनी एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ किया।
  • उन्होंने पूरे दिन उपवास रखा, भगवान विष्णु की पूजा की और रात भर जागरण करते हुए भक्ति में लीन रहीं।
  • रानी की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा।
  • रानी पद्मिनी ने भगवान से एक ऐसे पुत्र की कामना की जो तीनों लोकों में प्रसिद्ध और अजेय हो।
  • भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि उनके घर एक महान और पराक्रमी पुत्र का जन्म होगा।
कार्तवीर्य अर्जुन का जन्म
  • भगवान विष्णु के आशीर्वाद से रानी पद्मिनी के गर्भ से महान योद्धा कार्तवीर्य अर्जुन का जन्म हुआ।
  • उन्हें सहस्रार्जुन भी कहा जाता है क्योंकि उनके पास असाधारण शक्ति और पराक्रम था।
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार वे इतने शक्तिशाली थे कि तीनों लोकों में उनके समान कोई दूसरा योद्धा नहीं था। कहा जाता है कि वे ही ऐसे वीर थे जो रावण को भी परास्त करने की क्षमता रखते थे।
  • इस प्रकार पद्मिनी एकादशी के व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।

पद्मिनी एकादशी के आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits of Padmini Ekadashi)

पद्मिनी एकादशी का व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिलती है।
  • जो दंपति संतान सुख की कामना करते हैं उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
  • इसके अलावा इस व्रत को करने से जीवन में यश, वैभव और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • कहा जाता है कि इस व्रत का पालन करने वाले भक्त को अंत में वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

पद्मिनी एकादशी के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits of Padmini Ekadashi)

  • पद्मिनी एकादशी का व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
  • उपवास करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर को डिटॉक्स होने का अवसर मिलता है।
  • इस दिन सात्विक भोजन और ध्यान करने से मानसिक शांति बढ़ती है और तनाव कम होता है।
  • व्रत रखने से व्यक्ति में आत्म-नियंत्रण और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
  • कई लोग मानते हैं कि नियमित रूप से एकादशी व्रत करने से शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बेहतर रहता है।

निष्कर्ष (conclusion)

पद्मिनी एकादशी सनातन धर्म की सबसे पवित्र और दुर्लभ एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह केवल अधिक मास में ही आती है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

भगवान विष्णु की भक्ति, व्रत और पूजा के माध्यम से यह दिन भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया पद्मिनी एकादशी का व्रत (Padmini Ekadashi Vrat) न केवल धार्मिक पुण्य देता है बल्कि व्यक्ति के जीवन में संतुलन, संयम और भक्ति की भावना भी विकसित करता है।