Desktop Special Offer Mobile Special Offer
February 24, 2026 Blog

Akshaya Tritiya 2026 Kab Hai? सोना-चांदी नहीं, तो घर लाएं ये शुभ वस्तुएं

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Akshaya Tritiya 2026: हिंदू परंपरा में अक्षय तृतीया को अत्यंत मंगलकारी और पावन पर्व के रूप में देखा जाता है। कई स्थानों पर इसे आखा तीज भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस तिथि पर किया गया शुभ कर्म कभी क्षीण नहीं होता, बल्कि समय के साथ उसका फल बढ़ता ही जाता है। यही वजह है कि लोग इस दिन सोना-चांदी खरीदना, नया व्यवसाय शुरू करना, निवेश करना या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करना बेहद शुभ मानते हैं। साथ ही दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

ऐसे में स्वाभाविक है कि हर वर्ष लोग उत्सुकता से जानना चाहते हैं कि अक्षय तृतीया कब पड़ रही है और इस दिन खरीदारी या नए कार्य के लिए कौन-सा समय सबसे उत्तम रहेगा। तो आइए विस्तार से जानते हैं कि वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया की तिथि क्या होगी, खरीदारी का शुभ मुहूर्त कब रहेगा और इस पावन दिन का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व क्या है।


अक्षय तृतीया का महत्व (Akshaya Tritiya Significance)

‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है—जो कभी समाप्त न हो, जिसका क्षय न हो। इसी कारण यह विश्वास किया जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान, जप या खरीदी गई वस्तुएं निरंतर वृद्धि और समृद्धि प्रदान करती हैं। अक्षय तृतीया को सौभाग्य, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा देने वाली तिथि के रूप में देखा जाता है।

इस दिन केवल खरीदारी ही नहीं, बल्कि जप-तप, यज्ञ, पितरों का तर्पण और दान-पुण्य करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

अक्षय तृतीया से जुड़ी अनेक पौराणिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि इसी तिथि से त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। भगवान परशुराम का जन्म भी इसी दिन माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि भगवान कृष्ण और सुदामा का मिलन अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। कुछ परंपराओं में महाभारत युद्ध की समाप्ति को भी इसी तिथि से जोड़ा जाता है।

इन सभी कारणों से अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ, पुण्य और समृद्धि प्रदान करने वाला पर्व माना जाता है।

akshaya tritiya 2026



अक्षय तृतीया 2026 तिथि (Akshaya Tritiya 2026 Date)

हिंदू पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया का पर्व हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। हालांकि ग्रेगोरियन (अंग्रेजी) कैलेंडर के अनुसार इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि अक्षय तृतीया बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में पड़ती है तो उसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया का पावन पर्व 19 अप्रैल, रविवार के दिन मनाया जाएगा।

यह दिन नए कार्यों की शुरुआत, निवेश और शुभ वस्तुओं की खरीदारी के लिए विशेष रूप से मंगलकारी माना जाता है। इस वर्ष अक्षय तृतीया और भी विशेष होने वाली है, क्योंकि इस पावन तिथि पर तीन अत्यंत दुर्लभ योगों का संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से ऐसे योग बहुत कम अवसरों पर बनते हैं, इसलिए इस दिन की आध्यात्मिक और शुभता अपने आप कई गुना बढ़ जाती है। मान्यता है कि जब किसी पर्व पर विशेष योगों का संगम होता है, तो उस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल और भी अधिक प्रभावशाली होता है।



अक्षय तृतीया 2026 के शुभ समय और योग

वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 05:52 बजे और सूर्यास्त शाम 06:49 बजे होगा। मान्यता है कि अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त होती है, इसलिए पूरा दिन ही मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, सगाई, जनेऊ संस्कार या किसी नए कार्य की शुरुआत — इन सभी के लिए यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिन विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी कई लोग शुभ समय में कार्य करना पसंद करते हैं।

अक्षय तृतीया 2026 के प्रमुख शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:23 से 05:08 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:55 से दोपहर 12:46 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:58 से 12:42 बजे तक (20 अप्रैल)
  • पूजा का विशेष समय: सुबह 10:49 से दोपहर 12:20 बजे तक
  • सोना खरीदने का शुभ समय: सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल सुबह 05:51 बजे तक

हालांकि, परंपरा के अनुसार अक्षय तृतीया का पूरा दिन ही शुभ माना जाता है, इसलिए आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय नई वस्तु खरीद सकते हैं या शुभ कार्य प्रारंभ कर सकते हैं।

अक्षय तृतीया 2026 के शुभ योग

  • त्रिपुष्कर योग: सुबह 07:10 से 10:49 बजे तक
  • आयुष्मान योग: 18 अप्रैल रात 11:55 से 19 अप्रैल रात 08:01 बजे तक
  • सौभाग्य योग: 19 अप्रैल रात 08:01 बजे से 20 अप्रैल शाम 04:11 बजे तक

इन योगों का संयोग इस दिन की शुभता को और अधिक बढ़ाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे विशेष योगों में किया गया कार्य लंबे समय तक सकारात्मक फल देता है। इसलिए यदि आप कोई नया कदम उठाने की योजना बना रहे हैं, तो अक्षय तृतीया 2026 आपके लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।


सोना-चांदी खरीदने का शुभ मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2026 Gold-Silver Buy Muhurat)

वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया के अवसर पर सोना और चांदी खरीदने का शुभ समय 19 अप्रैल, रविवार को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल 2026 की सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इस अवधि के दौरान पूरे दिन खरीदारी करना शुभ फलदायी माना जाएगा। जो लोग इस दिन निवेश या कीमती वस्तुओं की खरीदारी करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय विशेष रूप से मंगलकारी रहेगा।


अक्षय तृतीया पर क्या खरीद सकते है

अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है, अर्थात इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। यह तिथि विशेष रूप से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन घर लाई गई वस्तु में निरंतर वृद्धि होती है, इसलिए परंपरागत रूप से सोना और चांदी खरीदने की परंपरा चली आ रही है।

हालांकि आज के समय में बढ़ती कीमतों के कारण हर व्यक्ति के लिए सोना-चांदी खरीद पाना संभव नहीं होता। ऐसे में निराश होने की जरूरत नहीं है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि आप इस दिन की शुभता का लाभ लेना चाहते हैं, तो कुछ सरल और सुलभ वस्तुएं खरीदकर भी पुण्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

धार्मिक ग्रंथों जैसे भविष्य पुराण और नारद पुराण में भी अक्षय तृतीया का महत्व वर्णित है। मान्यता है कि यदि इस दिन सोना-चांदी न ले सकें, तो मिट्टी का बर्तन, कौड़ी, पीली सरसों, हल्दी की गांठ और रूई जैसी वस्तुएं खरीदना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इन वस्तुओं का संबंध न केवल समृद्धि और शुद्धता से है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी इनका संबंध विभिन्न ग्रहों और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।

अब आइए विस्तार से जानते हैं कि अक्षय तृतीया पर इन वस्तुओं को क्यों शुभ माना गया है और इनका क्या आध्यात्मिक महत्व है।


अक्षय तृतीया 2026 पर खरीदे ये 5 शुभ चीजे 

अक्षय तृतीया पर केवल सोना खरीदना ही शुभ नहीं माना जाता, बल्कि ज्योतिष दृष्टि से कुछ विशेष वस्तुओं की खरीद भी ग्रहों को मजबूत करने वाली मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन सही वस्तु का चयन करने से कुंडली में शुभ प्रभाव बढ़ सकता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं। आइए सरल शब्दों में समझते हैं कि किस वस्तु का किस ग्रह से संबंध माना जाता है।

सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सोना खरीदने में सक्षम न हो, तो अक्षय तृतीया के दिन तांबा खरीदना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। तांबा सूर्य का धातु प्रतीक माना जाता है। कुंडली में सूर्य मजबूत होने से व्यक्ति की प्रतिष्ठा, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने की संभावना भी प्रबल होती है।

शुक्र ग्रह की मजबूती के लिए
अक्षय तृतीया के दिन रूई (कपास) खरीदना भी शुभ फलदायक माना जाता है। इसका संबंध शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है, जो भौतिक सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य का कारक है। मान्यता है कि इस दिन रूई खरीदने और माता लक्ष्मी की पूजा में इसका प्रयोग करने से शुक्र ग्रह सुदृढ़ होता है। शुक्र के शुभ प्रभाव से जीवन में धन-संपन्नता और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

गुरु ग्रह के लिए लाभकारी
इस पावन तिथि पर हल्दी की गांठ खरीदना भी अत्यंत मंगलकारी माना गया है। हल्दी का संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है। यदि अक्षय तृतीया के दिन हल्दी की गांठ खरीदकर लक्ष्मी पूजन में शामिल की जाए, तो गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। इससे जीवन में स्थिरता, ज्ञान, सम्मान और भाग्य का साथ मिलता है। साथ ही समृद्धि और उन्नति के मार्ग भी प्रशस्त होते हैं।

मंगल ग्रह को बल देने के लिए
मिट्टी का बर्तन खरीदना भी इस दिन शुभ माना गया है। मिट्टी का संबंध मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है, जो साहस, ऊर्जा और पराक्रम का प्रतीक है। अक्षय तृतीया पर मिट्टी के बर्तन घर लाने से मंगल ग्रह को मजबूती मिलती है। इससे कर्ज से राहत मिलने, अनावश्यक परेशानियों में कमी आने और आत्मबल बढ़ने की मान्यता है।

दरिद्रता दूर करने के उपाय

अक्षय तृतीया के दिन पीली सरसों खरीदना भी शुभ फलदायी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और आर्थिक तंगी दूर होती है। पीली कौड़ी को भी इस दिन खरीदकर लक्ष्मी पूजन में रखना लाभकारी बताया गया है। इससे धन और वैभव में वृद्धि की कामना की जाती है।

यदि संभव हो, तो इस दिन आदि शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। विश्वास है कि इससे माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

निष्कर्ष  (Conclusion)

अक्षय तृतीया हमें यह विश्वास दिलाती है कि शुभ संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा के साथ किया गया हर प्रयास समय के साथ फलता-फूलता है। यह तिथि केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में स्थायी उन्नति और समृद्धि का संदेश देती है। जब विशेष योगों का संयोग, आस्था की शक्ति और सही दिशा में उठाया गया कदम एक साथ आते हैं, तो सफलता के मार्ग स्वतः प्रशस्त होने लगते हैं।

चाहे आप नया कार्य शुरू करना चाहें, कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना हो या दान-पुण्य के माध्यम से पुण्य अर्जित करना चाहते हों — यह दिन हर दृष्टि से मंगलकारी माना जाता है। इसलिए अक्षय तृतीया को सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के अवसर के रूप में देखें। सच्चे मन और दृढ़ विश्वास से किया गया हर शुभ कार्य ही वास्तव में अक्षय बन जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.