Ganga Aarti: वाराणसी में हर शाम दशाश्वमेध घाट सहित गंगा तट के कई प्रमुख घाटों पर गंगा आरती का भव्य आयोजन किया जाता है। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी और आध्यात्मिक अनुभव से भरपूर होता है। आरती के दौरान पुजारी क्रमबद्ध तरीके से बहुस्तरीय दीपों को प्रज्वलित कर माँ गंगा की आराधना करते हैं। साथ ही शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और मंत्रोच्चार पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।
इस दिव्य अनुष्ठान को देखने के लिए घाटों पर और नदी में खड़ी नावों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक एकत्रित होते हैं। गंगा आरती (Banaras Ganga Aarti) केवल एक पूजा नहीं, बल्कि गंगा के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा की अभिव्यक्ति है। इसे जीवन, आस्था और पवित्रता के स्रोत के रूप में माँ गंगा को समर्पित किया जाता है, जो वहां उपस्थित सभी लोगों के बीच भक्ति और एकता का अद्भुत माहौल बना देती है।
माँ गंगा की प्रतिदिन आरती (ganga aarti) करने से जीवन में सकारात्मकता, शांति और समृद्धि का संचार होता है। ऐसा विश्वास है कि श्रद्धा भाव से गंगाजल से स्नान करने पर मन और कर्मों की शुद्धि होती है तथा देवी का आशीर्वाद सदैव बना रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ गंगा का संबंध भगवान विष्णु के चरणों से और भगवान शिव की जटाओं से जोड़ा जाता है। वे स्वर्ग से धरती पर आकर मानव जीवन का कल्याण करती हैं और भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
आइए श्रद्धा और भक्ति के साथ माँ गंगा की महिमा का गुणगान करें —“ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता…”
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हर संध्या जब सूर्य की अंतिम किरणें माँ गंगा के विस्तृत जल पर पड़ती हैं, तब भक्तजन गंगा आरती के लिए एकत्रित होते हैं। यह दिव्य प्रकाश का समारोह भजन, मंत्रोच्चार, प्रार्थना और गहरी आध्यात्मिक अनुभूति से भरपूर होता है।
आरती में घी से प्रज्वलित बहुस्तरीय दीपक भगवान को अर्पित किया जाता है। इस अनुष्ठान का मूल भाव कृतज्ञता है। पूरे दिन हमें सूर्य का प्रकाश, जीवन का प्रकाश और ईश्वर की कृपा का प्रकाश प्राप्त होता है। आरती वह पावन क्षण है जब हम अपने प्रेम, श्रद्धा और आभार का प्रकाश ईश्वर को समर्पित करते हैं।
‘आरती’ शब्द का एक अर्थ “दुखों को दूर करने वाली” भी माना जाता है। यह किसी एक रूप तक सीमित नहीं है, बल्कि उस दिव्य शक्ति को समर्पित है जो हमारे जीवन के अंधकार और कष्टों को दूर करती है।
गंगा आरती (Ganga Aarti) हमें दैनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव से कुछ क्षण दूर होकर शांति और आनंद का अनुभव करने का अवसर देती है। जब डूबते सूर्य की सुनहरी आभा गंगा के जल में प्रतिबिंबित होती है, तो मन श्रद्धा, सुकून और गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव से भर उठता है।
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गंगा आरती वैदिक और आगमिक परंपराओं में प्रशिक्षित युवा पुरोहितों द्वारा अत्यंत अनुशासन और सामंजस्य के साथ संपन्न की जाती है। केसरिया और क्रीम रंग के पारंपरिक वस्त्रों में सजे ये पुरोहित एक समान लय में खड़े होकर बड़े बहुस्तरीय पीतल के दीप, धूपदान और शंख धारण करते हैं। आरंभ शंखनाद से होता है, जो वातावरण को पवित्र बना देता है। इसके बाद मंत्रोच्चार, घंटियों की मधुर ध्वनि और अग्नि, पुष्प व कपूर की अर्पणा की जाती है। हर क्रिया का अपना प्रतीकात्मक अर्थ है—अग्नि शुद्धि का, फूल श्रद्धा का और धूप दिव्य सुगंध व सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार का संकेत देती है।
सबसे प्रसिद्ध और भव्य गंगा आरती (Ganga Aarti Varanasi) दशाश्वमेध घाट पर होती है, लेकिन आज यह अनुष्ठान वाराणसी के कई घाटों पर नियमित रूप से आयोजित किया जाता है।
यह दर्शाता है कि माँ गंगा के प्रति श्रद्धा किसी एक स्थान तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे काशी में समान भाव से प्रवाहित होती है।
गंगा आरती (Ganga ji ki Aarti) सामान्यतः सूर्यास्त के बाद आरंभ होती है और लगभग 45 मिनट तक चलती है। लोग पहले से ही घाट की सीढ़ियों पर बैठकर स्थान सुरक्षित कर लेते हैं, जबकि कई श्रद्धालु नाव से इस दृश्य को निहारना पसंद करते हैं। जब दीपों की पंक्तियाँ गंगा की लहरों पर प्रतिबिंबित होती हैं, तो पूरा वातावरण अलौकिक प्रतीत होता है। यह अनुभव मन को गहराई से स्पर्श करता है और अनेक लोगों के लिए आध्यात्मिक जागृति जैसा अनुभव देता है।
गंगा आरती (Ganga Mata Ki aarti) केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की जीवंत परंपरा है। यह आस्था, संगीत और भक्ति का अद्भुत संगम है। माँ गंगा को यहाँ केवल एक नदी नहीं, बल्कि पालनहार, पवित्र करने वाली और मोक्षदायिनी माता के रूप में देखा जाता है। भक्तों के लिए यह आरती आशीर्वाद और आंतरिक शांति का स्रोत है, वहीं पर्यटकों के लिए यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अविस्मरणीय अनुभव बन जाती है।
संध्या की शांत बेला में जब गंगा तट दीपों की ज्योति से आलोकित होता है, तब यह अनुभव केवल एक अनुष्ठान नहीं रह जाता, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है। गंगा आरती (Ganga Maiya Ki aarti) आस्था, परंपरा और भक्ति का ऐसा संगम है, जो काशी और माँ गंगा के बीच के शाश्वत संबंध को जीवंत कर देता है।
मंत्रों की गूंज, शंखनाद और जल पर झिलमिलाती लौ मन को गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। यह पावन क्षण हमें कृतज्ञता, आत्मचिंतन और दिव्य शक्ति से जुड़ने का अवसर देता है। श्रद्धालु हों या पर्यटक, गंगा आरती (Ganga Aarti) का दर्शन हर किसी के लिए एक अविस्मरणीय और आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।
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Kartik Sharma, with 8 years’ experience in Vedic chanting, curates authentic Aartis, Chalisas, and Mantras, offering devotees accurate lyrics, meanings, and spiritual depth for devotional practice.