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February 5, 2026 Blog

Ram Navami 2026: इस साल राम नवमी कब मनाई जाएगी, जानिए इसकी पूजा तिथि, मुहूर्त और विधि

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Ram Navami 2026: वैदिक पंचांग के अनुसार, हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन पूरे देश में भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान श्रीराम ने माता कौशल्या के घर जन्म लेकर धरती पर अवतार लिया था। यही कारण है कि इस दिन को प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। राम नवमी के अवसर पर श्रीराम की विधिपूर्वक पूजा, व्रत और दान करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, इसी दिन चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri Navami Tithi) का भी विधिवत समापन होता है।


राम नवमी 2026 तिथि और समय (Ram Navami 2026 Date and Time)

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट से आरंभ होगी और 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए राम नवमी का पर्व (Ram Navami Festival 2026) 26 मार्च 2026 को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।

राम नवमी पूजा मुहूर्त (Ram Navami 2026 Puja Timings)

राम नवमी 2026 पर पूजा और शुभ कार्यों के लिए दिनभर कई श्रेष्ठ मुहूर्त बन रहे हैं। भगवान श्रीराम की पूजा के लिए मध्याह्न काल सबसे उत्तम माना जाता है, जो इस दिन सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक रहेगा। वहीं, जो भक्त प्रातःकाल पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:44 बजे से 5:30 बजे तक रहेगा।

इसके अलावा, किसी शुभ या विजयदायक कार्य के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 2:20 बजे से 3:19 बजे तक रहेगा। संध्या पूजा और दीपदान के लिए गोधूलि मुहूर्त शाम 6:35 बजे से 5:58 बजे तक रहेगा। इस दिन रवि योग पूरे दिन बना रहेगा, जो हर कार्य को शुभ फल देने वाला माना जाता है। साथ ही, विशेष कृपा प्राप्ति के लिए अमृत काल दोपहर 1:05 बजे से 2:38 बजे तक रहेगा।

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राम नवमी का महत्त्व (Importance Of Ram Navami )

भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में महाराज दशरथ और माता कौशल्या के घर हुआ था। उनका संपूर्ण जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग और कर्तव्य का अनुपम संदेश देता है। अधर्म के विरुद्ध रावण का वध कर उन्होंने यह सिखाया कि सच्चाई और धर्म की अंततः विजय होती है। राम नवमी का पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का अवसर भी है। इस दिन श्रीराम की उपासना करने से कई प्रकार के सकारात्मक लाभ माने जाते हैं—
  • नकारात्मकता से मुक्ति: श्रद्धा से “राम” नाम का स्मरण करने से मन की अशांति दूर होती है और पुराने नकारात्मक संस्कार कमजोर पड़ते हैं।
  • पारिवारिक सुख-शांति: भगवान राम को आदर्श पुत्र, पति और भ्राता माना जाता है। उनकी आराधना से परिवार में प्रेम, समझ और आपसी तालमेल बढ़ता है।
  • कठिनाइयों पर विजय: जैसे श्रीराम ने अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की, वैसे ही उनके आशीर्वाद से भक्तों को जीवन की बाधाओं से लड़ने की शक्ति और मार्गदर्शन मिलता है।
इस तरह राम नवमी आत्मिक शुद्धि और जीवन में संतुलन लाने का पर्व माना जाता है।


राम नवमी की पूजा विधि (Ram Navami Puja Vidhi)

राम नवमी के दिन पूजा का उद्देश्य विधि से अधिक श्रद्धा और भाव होता है। यदि मन शुद्ध हो, तो सरल तरीके से की गई पूजा भी पूर्ण फल देती है। राम नवमी की पूजा इस प्रकार की जा सकती है—

  1. पवित्रता से शुरुआत करें
    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान श्रीराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाकर मन को शांत करें।

  2. पूजन सामग्री तैयार रखें
    पूजा में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि तुलसी भगवान राम को अत्यंत प्रिय है। साथ ही कमल का फूल, चंदन, अक्षत, धूप और दीप का भी उपयोग करें।

  3. विधिपूर्वक पूजन करें
    श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की षोडशोपचार विधि से पूजा करें। इस दौरान राम नाम का जप या “श्रीराम जय राम जय जय राम” मंत्र का स्मरण करें।

  4. भोग और प्रसाद अर्पित करें
    खीर, फल, पंचामृत या सात्विक मिठाई का भोग लगाएं। माना जाता है कि इस दिन सात्विक और सरल भोजन ही श्रेष्ठ फल देता है।

  5. आरती और राम कथा का पाठ
    पूजा के बाद श्रीराम की आरती करें और यदि संभव हो तो रामचरितमानस के बालकांड या सुंदरकांड का पाठ करें। इससे घर का वातावरण सकारात्मक बनता है।

  6. तिलक और प्रसाद वितरण
    परंपरा अनुसार, घर की सबसे छोटी महिला या कन्या सभी को तिलक लगाती है। इसके बाद प्रसाद सभी में बांटा जाता है।

  7. दान-पुण्य करें
    पूजा के पश्चात जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें। इससे पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

राम नवमी की पूजा (Ram Navami Puja) हमें मर्यादा, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इस दिन श्रद्धा और प्रेम के साथ की गई साधना जीवन में शांति और सकारात्मकता लेकर आती है।

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राम नवमी के दिन अवश्य करें ये शुभ कार्य (Ram Navami Auspicious Activities)

राम नवमी का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे शुभ कार्य भी बड़ा पुण्य प्रदान करते हैं। मान्यता है कि यदि श्रद्धा और नियम से ये उपाय किए जाएं, तो जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है—

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और उगते सूर्य को जल अर्पित करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • पूजा स्थल पर देसी घी का दीपक जलाएं और पूरे मन से भगवान श्रीराम का स्मरण करें।
  • पूजा के समय रामायण या रामचरितमानस के किसी एक अध्याय का पाठ अवश्य करें।
  • राम चालीसा का पाठ करें या “श्रीराम” मंत्र का जप करें, इससे मन शांत और एकाग्र रहता है।
  • अंत में किसी मंदिर में या जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल या मिठाई का दान करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राम नवमी (Ram Navami) के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और भगवान श्रीराम की विशेष कृपा भक्त पर बनी रहती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

राम नवमी 2026 (Ram Navami 2026) केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का पावन अवसर है। यह दिन हमें सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। विधि-विधान से पूजा, व्रत, जप और दान करने से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन की नकारात्मकता भी दूर होती है। राम नवमी के साथ ही चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri Navami Tithi) का समापन भी होता है, जिससे यह पर्व और अधिक पुण्यदायी बन जाता है। यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दिन भगवान श्रीराम की आराधना की जाए, तो उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन बना रहता है। जय श्रीराम 

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Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.