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February 3, 2026 Blog

Chaitra Navratri 2026: इस साल क्या है चैत्र नवरात्रि की कलश स्थापना का मुहूर्त और पूजा विधि

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Chaitra Navratri 2026: वैदिक पंचांग के मुताबिक 04 मार्च से चैत्र माह का आरंभ हो रहा है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पावन माना गया है। इसी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) का शुभ आरंभ होता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की विशेष आराधना, पूजा-पाठ और व्रत का विधान है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का संचार करता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की भक्ति और साधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि इन दिनों का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। ऐसे में आइए जानते हैं चैत्र नवरात्र 2026 की तिथियां और इससे जुड़े शुभ मुहूर्त।


चैत्र नवरात्रि 2026 तिथि (Chaitra Navratri 2026 Date)

वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (Chaitra Navratri 2026 Date) 19 मार्च को पड़ रही है। इसी शुभ तिथि से चैत्र नवरात्र का आरंभ होगा, जो पूरे नौ दिनों तक चलकर 27 मार्च को संपन्न होंगे। इन दिनों मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत का विशेष महत्व माना गया है।


चैत्र नवरात्रि 2026 घटस्थापना शुभ मुहूर्त  (Chaitra Navratri 2026 Auspicious Time For Ghatsthapana)

चैत्र नवरात्र के पहले दिन विधि-विधान के साथ कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष 19 मार्च को घटस्थापना की जाएगी। श्रद्धालु इस दिन शुभ समय में कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान कर सकते हैं।


घटस्थापना के शुभ समय (Ghatasthapana Auspicious Time)

  • घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:52 से 07:46 बजे तक
  • अभिजीत घटस्थापना मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:52 बजे तक

इसके अलावा पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दिन में कई अन्य शुभ मुहूर्त भी उपलब्ध रहेंगे—

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 से 05:59 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:18 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:29 से 06:53 बजे तक

इन शुभ कालों में पूजा करने से साधना अधिक फलदायी मानी जाती है।

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चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा पर सर्वार्थ सिद्धि योग (Sarvartha Siddhi Yoga on the first day of Chaitra Navratri)

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर बेहद शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिसे हर प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही शुक्ल योग और ब्रह्म योग का संयोग भी रहेगा। शुक्ल योग सुबह से लेकर रात 01:17 बजे तक रहेगा, इसके बाद ब्रह्म योग प्रभावी होगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग 20 मार्च को सुबह 04:05 बजे से 06:25 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस शुभ योग में की गई कलश स्थापना और पूजा विशेष फल प्रदान करती है। इसी कारण इस वर्ष कलश स्थापना शुक्ल योग में करना अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन राहुकाल (Rahukaal On the First Day Of Chaitra Navratri)

चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को राहुकाल दोपहर 02:00 बजे से 03:30 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। ऐसे में कलश स्थापना और पूजा राहुकाल से पहले या बाद में करना अधिक शुभ फलदायी रहेगा।


चैत्र नवरात्र का धार्मिक महत्व  (The Religious significance of Chaitra Navratri)

चैत्र नवरात्र केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हिंदू नववर्ष की पावन शुरुआत का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन से सृष्टि की रचना का कार्य भगवान ब्रह्मा द्वारा आरंभ किया गया था। इस कारण चैत्र नवरात्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है।

इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है और श्रद्धालु व्रत रखकर मां की उपासना करते हैं। विश्वास है कि नवरात्र का व्रत रखने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख, शांति व सकारात्मकता का वास होता है।

चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि (Chaitra Navratri Navami Tithi) भगवान श्रीराम के जन्म दिवस के रूप में भी मनाई जाती है, जिसे राम नवमी कहा जाता है। इसी कारण इस नवरात्र का महत्व और भी बढ़ जाता है। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष विधान है, जिसमें कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर आदरपूर्वक पूजन किया जाता है।

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कलश स्थापना का महत्व और विधि (Importance and Method of Kalash Installation)

हिंदू परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है, लेकिन नवरात्रि में देवी दुर्गा की उपासना के लिए कलश स्थापना को विशेष रूप से अनिवार्य माना गया है। बहुत से लोग यह प्रश्न करते हैं कि देवी पूजा में कलश का इतना महत्व क्यों है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण मां दुर्गा की आराधना से पहले कलश की विधिवत स्थापना (Chaitra Navratri Puja Vidhi) और पूजा की जाती है, ताकि साधना सफल और फलदायी हो।

कलश स्थापना (Kalash Sthapana) से पूर्व पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है और वातावरण को पवित्र किया जाता है। इसके बाद मंत्रों के साथ सभी देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है। कलश को आम, अशोक या अन्य पवित्र वृक्षों के पाँच पत्तों से सजाया जाता है। इसके अंदर हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा जैसी शुभ वस्तुएँ रखी जाती हैं। कलश के नीचे बालू या मिट्टी की एक वेदी बनाई जाती है, जिसमें जौ बोए जाते हैं। जौ बोने की परंपरा देवी अन्नपूर्णा से जुड़ी मानी जाती है, जिन्हें अन्न, धन और समृद्धि की देवी कहा गया है।

पूजा स्थल के केंद्र में मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। उनका श्रृंगार रोली, अक्षत, सिंदूर, पुष्प, माला, चुनरी, साड़ी और सुहाग की वस्तुओं से किया जाता है। साथ ही अखंड दीप प्रज्वलित किया जाता है, जिसे पूरे नवरात्रि काल तक जलाए रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। कलश स्थापना के बाद भगवान गणेश और मां दुर्गा की आरती की जाती है और इसी के साथ नौ दिनों की उपासना और व्रत का शुभारंभ होता है।

नवरात्रि के दौरान भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखते हैं। नवमी तिथि (Navami Tithi) को कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका आदरपूर्वक पूजन किया जाता है, उन्हें भोजन कराया जाता है और दक्षिणा दी जाती है।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा गुप्त नवरात्रि भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तंत्र साधना से जुड़ी होती है। सामान्य भक्त भले ही इससे कम परिचित हों, लेकिन साधक और तांत्रिक इन दिनों देवी की गहन साधना कर विशेष सिद्धि और कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।


निष्कर्ष (Conclusion)

चैत्र नवरात्रि 2026 (Chaitra Navratri 2026) श्रद्धा, आस्था और आत्मिक शुद्धि का पावन अवसर लेकर आती है। यह नौ दिवसीय पर्व न केवल मां दुर्गा की उपासना का समय है, बल्कि आत्मसंयम, सकारात्मक ऊर्जा और नवजीवन की शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है। कलश स्थापना, व्रत, पूजा और कन्या पूजन के माध्यम से भक्त मां शक्ति की कृपा प्राप्त करते हैं और अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करने का संकल्प लेते हैं।

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2026) का संबंध हिंदू नववर्ष और प्रभु श्रीराम के जन्म से होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। यदि इन पावन दिनों में श्रद्धा, नियम और विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की आराधना की जाए, तो सुख-समृद्धि, शांति और सफलता की प्राप्ति होती है। ऐसे में चैत्र नवरात्रि 2026 को एक नई शुरुआत, आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के पर्व के रूप में मनाना अत्यंत शुभ और फलदायी सिद्ध हो सकता है।

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Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.