January 15, 2026 Blog

Mahashivratri 2026: जानिए महाशिवरात्रि व्रत की सही तिथि, मुहूर्त , पूजा विधि और महत्त्व

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पवित्र पर्व हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पूरे श्रद्धा-भाव और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव की विशेष आराधना करते हैं, व्रत रखते हैं और भोलेनाथ का आशीर्वाद पाने की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि (Mahashivratri) पर शिवलिंग का जल, दूध और अन्य पवित्र सामग्री से अभिषेक किया जाता है। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही शिव मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं और पूरा दिन शिव भक्ति में डूबा रहता है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, जप और रुद्राभिषेक करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है, मानसिक शांति मिलती है और कई तरह के ग्रह दोषों से भी राहत मिलती है। इसे फाल्गुन मास की शिवरात्रि भी कहा जाता है, जिसका आध्यात्मिक महत्व बेहद खास माना गया है। ऐसे में भक्तों के लिए यह जानना जरूरी होता है कि महाशिवरात्रि की सही तिथि क्या है, पूजा का शुभ समय कौन-सा रहेगा और इस पर्व का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व क्या है।

महाशिवरात्रि 2026 शुभ तिथि (Mahashivratri 2026 Date & Time)

साल 2026 में महाशिवरात्रि का पवित्र पर्व फरवरी महीने में ही मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 04 मिनट से प्रारंभ होगी और 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि चतुर्दशी तिथि का आरंभ रविवार के दिन हो रहा है, इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026, रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि की पूजा (Mahashivratri Puja) निशिता काल में करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यही भगवान शिव की विशेष आराधना का उत्तम समय होता है। वर्ष 2026 में निशिता काल रात 11 बजकर 55 मिनट से लेकर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं महाशिवरात्रि व्रत का पारण 16 फरवरी 2026 को सुबह 6 बजकर 42 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक किया जा सकेगा। इस प्रकार भक्तों के लिए 15 फरवरी 2026 का दिन शिव पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना जाएगा।


महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजा का समय  (Mahashivratri 2026 Four Prahar Puja Timings)

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव की आराधना रात्रि के चार प्रहरों में की जाती है, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि भक्त चारों प्रहर में विधि-विधान से शिव पूजन करते हैं तो भोलेनाथ उनकी सभी कामनाएं पूर्ण करते हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का वरदान देते हैं। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहरों की पूजा के शुभ समय इस प्रकार रहेंगे—

पहला प्रहर 15 फरवरी 2026 को शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक,
दूसरा प्रहर रात 9 बजकर 23 मिनट से अर्धरात्रि 12 बजकर 36 मिनट तक,
तीसरा प्रहर देर रात 12 बजकर 36 मिनट से सुबह 3 बजकर 47 मिनट तक और
चौथा प्रहर 16 फरवरी 2026 को सुबह 3 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

इन शुभ कालों में शिवलिंग का अभिषेक और पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

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महाशिवरात्रि पर्व का महत्त्व (Significance Of Mahashivratri Festival)

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक पर्व माना जाता है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। इस दिन से जुड़ी कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि इसी पावन रात्रि में भगवान शिव ने सृष्टि के कल्याण हेतु तांडव नृत्य किया था, वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। यही कारण है कि महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के पवित्र मिलन का प्रतीक माना जाता है और इस अवसर पर भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी विशेष पूजा की जाती है।

धार्मिक विश्वास है कि महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखकर शिव पूजन तथा रुद्राभिषेक करने से जीवन में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है। इस व्रत से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वैवाहिक व पारिवारिक जीवन में प्रेम, संतुलन और सौहार्द बना रहता है। साथ ही मानसिक तनाव, रोग, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलने की भी मान्यता है। कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन और पूर्ण आस्था के साथ इस दिन भगवान शिव की आराधना करता है, उस पर भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर अपने आशीर्वाद से जीवन को सुख-समृद्धि और आनंद से भर देते हैं।


महाशिवरात्रि व्रत की सरल और श्रद्धापूर्ण पूजा विधि (Mahashivratri Worship Method)

महाशिवरात्रि के दिन पूजा के लिए पहले से पुष्प, भांग, धतूरा, बेलपत्र, बेर, गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, गंगाजल, कपूर, धूप, रुई, चंदन, पंचमेवा, जनेऊ और दक्षिणा जैसी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें। व्रत के दिन प्रातःकाल उठकर स्वच्छ जल से स्नान करें, साफ वस्त्र धारण करें और पूरे मन से व्रत व पूजा का संकल्प लें। इसके बाद घर या मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर गंगाजल या पंचामृत से अभिषेक करें और श्रद्धा भाव से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें।

अभिषेक के पश्चात भगवान शिव को पुष्प, भांग, धतूरा, बेर, बेलपत्र, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, चंदन, धूप, दीप, पंचमेवा और जनेऊ क्रमशः अर्पित करें। इसके बाद भोलेनाथ को धूप-दीप दिखाकर कपूर से आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित करें। रात्रि में चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा और शिव जागरण करें। अगले दिन प्रातःकाल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर विधिपूर्वक व्रत का पारण करें। मान्यता है कि इस विधि से किया गया महाशिवरात्रि व्रत (Mahashivratri Vrat) भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है।

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महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है – पौराणिक कथा (Why is Mahashivratri celebrated – Mythology)

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव से जुड़ी पवित्र कथाओं और गहरी आस्था का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ रात्रि में भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इस दिन भोलेनाथ ने अपना तपस्वी और वैराग्यपूर्ण जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन को अपनाया, इसलिए महाशिवरात्रि (Mahashivratri Vrat Katha) को शिव–शक्ति के पावन मिलन के रूप में मनाया जाता है।

एक अन्य प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव ने पहली बार शिवलिंग के रूप में स्वयं को प्रकट किया था। कहा जाता है कि उस समय शिवलिंग अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे, जिनका न कोई आदि था और न ही अंत। इसी दिव्य स्वरूप को ‘ज्योतिर्लिंग’ कहा गया। मान्यता है कि भगवान शिव 64 स्थानों पर ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे, हालांकि वर्तमान में 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व बताया गया है।

ये 12 ज्योतिर्लिंग हैं—सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर। इन पावन स्थलों की यात्रा और महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजन करने से भक्तों को विशेष पुण्य, आध्यात्मिक शांति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

महाशिवरात्रि का पावन पर्व शिवभक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर प्रदान करता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को शांति मिलती है। शिवलिंग का अभिषेक, मंत्र जाप, चार प्रहर पूजा और शिव जागरण भक्त को भगवान शिव के और अधिक निकट ले जाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई महाशिवरात्रि की पूजा (Mahashivratri Puja) से कष्टों का नाश होता है और सुख, समृद्धि व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसलिए यह पर्व केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और जीवन को संतुलित करने का एक पवित्र माध्यम भी है।

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Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.