जीवन के इस सांसारिक चक्र में हर मनुष्य की यही अंतिम इच्छा होती है कि उसे जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति मिले और प्रभु के चरणों में स्थान प्राप्त हो। हमारे सनातन धर्म में एकादशी के व्रत को भगवान श्री हरि विष्णु की भक्ति का सबसे सुंदर माध्यम माना गया है। परंतु मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि का स्थान अत्यंत निराला है। इसे हम मोक्षदा एकादशी 2026 (Mokshada Ekadashi 2026) के नाम से जानते हैं।
यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि स्वयं के साथ-साथ अपने पूर्वजों और पितरों को भी नरक की यातनाओं से मुक्त कराकर मोक्ष की ओर ले जाने वाला एक दिव्य द्वार है। इसी पावन तिथि पर भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि पर अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर संदेश दिया था। यदि आप भी अपने जीवन के पापों का क्षय करके मोक्ष की प्राप्ति चाहते हैं, तो मोक्षदा एकादशी 2026 (Mokshada Ekadashi 2026) की तिथि का यह अवसर आपके लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा। आइए जानते हैं इस पावन व्रत की तिथि, मुहूर्त, विष्णु पूजा विधि (Vishnu Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।
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वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, मोक्षदा का अर्थ है 'मोक्ष प्रदान करने वाली'।
मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही, यदि आपके पितर या पूर्वज अपने कर्मों के कारण नरक या कष्टदायी योनियों में भटक रहे हों, तो इस व्रत का पुण्य उन्हें समर्पित करने से वे तुरंत मोक्ष को प्राप्त होते हैं। इसी दिन गीता जयंती (Gita Jayanti) भी मनाई जाती है, जिससे इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
मोक्षदा एकादशी का व्रत और पूजन सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण काल में करना अत्यंत आवश्यक होता है। वर्ष में मोक्षदा एकादशी 2026 (Mokshada Ekadashi 2026) तिथि और शुभ मुहूर्त की तालिका नीचे दी गई है:
मोक्षदा एकादशी तिथि (Mokshada Ekadashi 2026 Date): 19 दिसंबर 2026, शनिवार
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी प्रारंभ: 19 दिसंबर 2026 को प्रातः 07:40 बजे से
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी समाप्त: 20 दिसंबर 2026 को प्रातः 08:15 बजे तक
पूजा का शुभ मुहूर्त: 19 दिसंबर 2026 को सुबह 08:25 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
मोक्षदा एकादशी व्रत पारण समय (Mokshada Ekadashi Parana Time): 20 दिसंबर 2026 को सुबह 08:16 बजे से सुबह 10:15 बजे तक
उदयातिथि और एकादशी तिथि के मान के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत (Mokshada Ekadashi Vrat) 19 दिसंबर 2026 को ही रखा जाएगा।
शास्त्रों में मोक्षदा एकादशी को चिंतामणि के समान फल देने वाला बताया गया है। भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा था कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी पाप भस्म हो जाते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से, यह दिन अपनी आत्मा को शुद्ध करने और सांसारिक मोह-माया के बंधनों से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। जो भक्त इस दिन पूरी लगन से भगवान दामोदर (श्री विष्णु) का पूजन करते हैं और रात्रि में जागरण करते हैं, उन्हें वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। अपने पितरों की सद्गति के लिए इससे बड़ा कोई अन्य मार्ग नहीं है।

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मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे श्रद्धाभाव के साथ इस प्रकार करें:
प्रातः स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल की तैयारी: मंदिर की सफाई करें और एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पास ही पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता को भी विराजमान करें।
अभिषेक और श्रृंगार: भगवान श्री हरि को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात उन्हें चंदन, रोली, अक्षत, पीला वस्त्र और पीले फूल अर्पित करें।
भोग अर्पण: भगवान को तुलसी पत्र, मखाना, फल, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाएं। याद रखें कि विष्णु जी के भोग में तुलसी का पत्ता होना अनिवार्य है।
गीता पाठ और मंत्र जप: इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें या कम से कम 11वें व 15वें अध्याय का पाठ अवश्य करें। साथ ही "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
आरती और प्रार्थना: धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें और अपने पापों की क्षमा मांगते हुए पितरों के कल्याण की प्रार्थना करें।
दशमी तिथि की शाम से ही सात्विक जीवन शैली अपनाएं और हल्का भोजन करें।
एकादशी के दिन पूर्ण रूप से फलाहार रहें या निर्जला व्रत रखें।
इस दिन क्रोध, असत्य, बुराई और काम-वासना से दूर रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करें।
द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में ही ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देने के बाद व्रत का पारण करें।
पितरों को मोक्ष: कष्ट झेल रहे पूर्वजों को यातनाओं से मुक्ति मिलती है और वे देवलोक चले जाते हैं।
पाप-ताप का नाश: साधक के इस जन्म और पूर्व जन्म के सभी पाप मिट जाते हैं।
मानसिक शांति और ज्ञान: श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ से मन को असीम शांति और सही मार्गदर्शन मिलता है।
वैकुंठ धाम की प्राप्ति: जीवन के अंतिम समय में व्यक्ति को श्री हरि की शरण मिलती है।
क्या करें:
भगवान विष्णु को पीले फूल और तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
गीता का दान करें और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल भेंट करें।
रात्रि में जागरण करके प्रभु के भजनों का कीर्तन करें।
क्या न करें:
एकादशी के दिन चावल का सेवन भूलकर भी न करें।
घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें।
इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें, एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
किसी भी व्यक्ति, बुजुर्ग या असहाय का अपमान न करें।
पौराणिक मोक्षदा एकादशी कथा (Mokshada Ekadashi Story) के अनुसार, प्राचीन काल में चंपक नगर में वैखानस नाम का एक प्रजापालक और धार्मिक राजा राज्य करता था। राजा के राज्य में सभी प्रजा सुखी थी। एक रात राजा वैखानस ने स्वप्न में देखा कि उनके पिता नरक की भीषण यातनाएं भोग रहे हैं और अत्यंत कष्ट में चिल्ला रहे हैं। अपने पिता की ऐसी दयनीय दशा देखकर राजा की नींद उड़ गई और वे अत्यंत दुखी हुए।
अगले ही दिन राजा अपने राज्य के ज्ञानी ऋषियों और पर्वत मुनि के आश्रम पहुँचे। राजा ने अश्रुपूरित नेत्रों से मुनि को अपना स्वप्न सुनाया और अपने पिता को नरक से उबारने का मार्ग पूछा। पर्वत मुनि ने अपने दिव्य ज्ञान से देखकर बताया कि राजा के पिता ने अपने पूर्व जन्म में एक बहुत बड़ा पाप किया था, जिसके फलस्वरुप वे नरक में कष्ट भोग रहे हैं।
राजा ने व्याकुल होकर इसका उपाय पूछा। तब पर्वत मुनि ने कहा कि आप मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का पूरे विधि-विधान से व्रत रखें और उस व्रत का संपूर्ण पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दें। राजा ने मुनि की आज्ञानुसार पूरे भक्तिभाव से मोक्षदा एकादशी का व्रत किया और उसका फल अपने पिता को दान कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से राजा के पिता के सभी पाप भस्म हो गए और वे दिव्य देह धारण करके सीधे स्वर्ग लोक चले गए। जाते-जाते उन्होंने अपने पुत्र को आशीर्वाद दिया।
मोक्षदा एकादशी का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि सनातन धर्म में केवल अपने सुख की चिंता नहीं की जाती, बल्कि अपने पूर्वजों और संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की भावना रखी जाती है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और मरणोपरांत मोक्ष की कामना करते हैं, तो मोक्षदा एकादशी 2026 (Mokshada Ekadashi 2026) पर पूरे विश्वास के साथ व्रत रखें, गीता का पाठ करें और श्री हरि के चरणों में अपना जीवन समर्पित करें। भगवान विष्णु आपकी हर मनोकामना पूर्ण करेंगे।
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Q1: मोक्षदा एकादशी 2026 (Mokshada Ekadashi 2026) में कब है?
मोक्षदा एकादशी का व्रत 19 दिसंबर 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा।
Q2: क्या मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती एक ही दिन होती है?
जी हां, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था, इसलिए मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती एक ही दिन मनाई जाती हैं।
Q3: मोक्षदा एकादशी 2026 (Mokshada Ekadashi 2026) व्रत का पारण कब करना चाहिए?
मोक्षदा एकादशी का पारण अगले दिन यानी 20 दिसंबर 2026 को सुबह 08:16 बजे से सुबह 10:15 बजे के बीच किया जाना चाहिए।
Q4: क्या इस व्रत से पितरों को मोक्ष मिलता है?
जी हां, इस व्रत का पुण्य फल अपने मृत पितरों को समर्पित करने से उन्हें नरक की यातनाओं से तुरंत मुक्ति मिल जाती है।
Q5: मोक्षदा एकादशी की पूजा में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
मोक्षदा एकादशी के दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "हरे कृष्ण" महामंत्र का जप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.