जब जीवन में निराशा और असफलता का अंधेरा छा जाता है, तब भगवती कमला का नाम ही जीवन में प्रकाश की किरण बनकर आता है। दस महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या के रूप में पूजित देवी कमला तंत्र और भक्ति मार्ग दोनों में ही सर्वोपरि स्थान रखती हैं। दिवाली की पावन तिथि यानी कार्तिक अमावस्या के दिन जब पूरा संसार दीप जलाकर समृद्धि की प्रार्थना करता है, उसी पावन अवसर पर कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) का महान पर्व मनाया जाता है। माँ कमला अपने भक्तों के जीवन से दरिद्रता, दुख और भय को जड़ से मिटाकर उन्हें असीम सुख, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करती हैं।
कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को माँ कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) मनाई जाती है। दस महाविद्याओं में माँ कमला अंतिम और अत्यंत सौम्य महाविद्या मानी जाती हैं। वे कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं और चार हाथियों द्वारा उनका स्वर्ण कलशों से अभिषेक किया जाता है। इस पावन दिन साधक तांत्रिक और सात्विक दोनों विधियों से माँ कमला की आराधना करते हैं। माना जाता है कि कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) के दिन व्रत रखकर भगवती की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन की बड़ी से बड़ी आर्थिक तंगी समाप्त हो जाती है और उसे राजा के समान वैभव प्राप्त होता है।
वर्ष में कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026)का महापर्व 08 नवंबर, रविवार को दिवाली के दिन ही मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण इस प्रकार है:
कमला जयंती तिथि: 08 नवंबर 2026, रविवारधार्मिक और तंत्र शास्त्रों में कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026)का महत्व अत्यंत विलक्षण बताया गया है। तंत्र साधना में माँ कमला को सौंदर्य, समृद्धि, कला और भौतिक सुखों की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। जो साधक महाविद्या साधना में संलग्न होते हैं, वे इस रात्रि को सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं।
सामान्य गृहस्थों के लिए माँ कमला साक्षात कल्याणकारी जगज्जननी हैं जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर तुरंत फल देती हैं। इस दिन किया गया जप, तप और दान अक्षय रहता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में धन और समृद्धि का उद्देश्य केवल उपभोग नहीं बल्कि धर्म की रक्षा और समाज का कल्याण करना होना चाहिए।
कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) के दिन साधना और पूजा पूर्ण पवित्रता के साथ करनी चाहिए। आइए जानते हैं चरणबद्ध पूजा विधि:

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माँ कमला की कृपा पाने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार जब दैत्यों और देवताओं के बीच भीषण संग्राम चल रहा था और देवता असुरों से पराजित होकर अपना वैभव खो चुके थे, तब उन्होंने भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की शरण ली। देवताओं के कष्ट को दूर करने के लिए समुद्र मंथन का निर्णय लिया गया।
कार्तिक अमावस्या के शुभ दिन जब समुद्र का मंथन हो रहा था, तब क्षीरसागर के जल से एक दिव्य और अलौकिक कांति वाली देवी प्रकट हुईं। वे हाथ में खिला हुआ कमल लिए हुए थीं और कमल के विशाल पुष्प पर विराजमान थीं। उनके प्रकट होते ही चारों दिशाओं के गजों (हाथियों) ने अपने सुवर्ण कलशों से उन पर पवित्र जल उड़ेलकर उनका अभिषेक किया। यह दिव्य स्वरूप महाविद्या माँ कमला का था। माँ कमला के आगमन से दसों दिशाएं आलोकित हो गईं और देवताओं को उनका खोया हुआ राजपाट व समृद्धि पुनः प्राप्त हो गई। तभी से इस पावन तिथि को कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026)के रूप में मनाया जाने लगा।
माँ कमला की भक्ति केवल सांसारिक धन पाने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर के अभाव और दरिद्रता को मिटाकर आत्मिक पूर्णता पाने का मार्ग है। जब एक साधक सच्चे मन और निश्छल भाव से भगवती कमला के चरणों में समर्पित होता है, तो माँ उसके जीवन की सारी कठिनाइयों को हर लेती हैं। वर्ष की कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) आपके जीवन में अपार समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और भगवती का अलौकिक आशीर्वाद लेकर आए। जय माँ कमला
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Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.