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August 11, 2026 Blog

Kamala Jayanti 2026: जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जब जीवन में निराशा और असफलता का अंधेरा छा जाता है, तब भगवती कमला का नाम ही जीवन में प्रकाश की किरण बनकर आता है। दस महाविद्याओं में दसवीं महाविद्या के रूप में पूजित देवी कमला तंत्र और भक्ति मार्ग दोनों में ही सर्वोपरि स्थान रखती हैं। दिवाली की पावन तिथि यानी कार्तिक अमावस्या के दिन जब पूरा संसार दीप जलाकर समृद्धि की प्रार्थना करता है, उसी पावन अवसर पर कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) का महान पर्व मनाया जाता है। माँ कमला अपने भक्तों के जीवन से दरिद्रता, दुख और भय को जड़ से मिटाकर उन्हें असीम सुख, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करती हैं।

कमला जयंती क्या है? (Introduction)

कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को माँ कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) मनाई जाती है। दस महाविद्याओं में माँ कमला अंतिम और अत्यंत सौम्य महाविद्या मानी जाती हैं। वे कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं और चार हाथियों द्वारा उनका स्वर्ण कलशों से अभिषेक किया जाता है। इस पावन दिन साधक तांत्रिक और सात्विक दोनों विधियों से माँ कमला की आराधना करते हैं। माना जाता है कि कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) के दिन व्रत रखकर भगवती की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन की बड़ी से बड़ी आर्थिक तंगी समाप्त हो जाती है और उसे राजा के समान वैभव प्राप्त होता है।

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कमला जयंती 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026)का महापर्व 08 नवंबर, रविवार को दिवाली के दिन ही मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण इस प्रकार है:

कमला जयंती तिथि: 08 नवंबर 2026, रविवार
कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर 2026 को दोपहर 03:15 बजे से
कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त: 09 नवंबर 2026 को शाम 05:20 बजे तक
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 05:30 बजे से शाम 07:26 बजे तक
वृषभ काल समय: शाम 05:58 बजे से रात 07:54 बजे तक
साधना एवं तांत्रिक पूजा मुहूर्त (निशिता काल): रात 11:39 बजे से रात 12:31 बजे तक

कमला जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

धार्मिक और तंत्र शास्त्रों में कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026)का महत्व अत्यंत विलक्षण बताया गया है। तंत्र साधना में माँ कमला को सौंदर्य, समृद्धि, कला और भौतिक सुखों की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। जो साधक महाविद्या साधना में संलग्न होते हैं, वे इस रात्रि को सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं।

सामान्य गृहस्थों के लिए माँ कमला साक्षात कल्याणकारी जगज्जननी हैं जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर तुरंत फल देती हैं। इस दिन किया गया जप, तप और दान अक्षय रहता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में धन और समृद्धि का उद्देश्य केवल उपभोग नहीं बल्कि धर्म की रक्षा और समाज का कल्याण करना होना चाहिए।

कमला जयंती की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) के दिन साधना और पूजा पूर्ण पवित्रता के साथ करनी चाहिए। आइए जानते हैं चरणबद्ध पूजा विधि:

  • सफाई और संकल्प: सुबह स्नान करके लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर माँ कमला के व्रत व पूजन का संकल्प लें।
  • पूजा वेदी की स्थापना: घर के पूजा गृह या साधना कक्ष में उत्तर या पूर्व दिशा की ओर एक चौकी रखें। उस पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ कमला का चित्र, यंत्र या मूर्ति स्थापित करें।
  • कलश पूजन: चौकी पर थोड़ा सा चावल रखकर तांबे का कलश स्थापित करें। कलश में जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें।
  • पंचामृत स्नान व तिलक: माँ कमला की प्रतिमा को पंचामृत व जल से स्नान कराएं। तत्पश्चात कुमकुम, रोली, चंदन और अक्षत का तिलक लगाएं।
  • श्रृंगार और पुष्प अर्पण: माता को गुलाबी या लाल कमल के फूल, पंखुड़ियाँ, कमलगट्टा और लाल चुनरी अर्पित करें।
  • मंत्र जप और भोग: माता के समक्ष घी का दीपक जलाएं और 'ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं कमलवासिन्यै नमः' मंत्र का कमलगट्टे की माला से जप करें। भोग में मखाने की खीर, बताशे और मेवे अर्पित करें।
  • आरती और क्षमा याचना: अंत में माँ कमला की आरती गाएं और पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

कमला जयंती व्रत और साधना के जरूरी नियम (Rules)

Kamala Jayanti 2026 festival

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माँ कमला की कृपा पाने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:

  • इस दिन साधक को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और क्रोध व अहंकार से दूर रहना चाहिए।
  • जो भक्त व्रत रख रहे हैं, वे पूरे दिन निराहार या फलाहार रहें और रात्रि पूजा के बाद सात्विक आहार लें।
  • साधना के समय मन को एकाग्र रखें और किसी भी प्रकार की नकारात्मक सोच को पास न फटकने दें।
  • पूजा के बाद माता को अर्पित किए गए कमलगट्टों को अपनी तिजोरी में संभाल कर रखें।

कमला जयंती व्रत के मुख्य लाभ (Benefits)

  • अक्षय धन और वैभव: जीवन से स्थायी रूप से दरिद्रता दूर होती है और धन के नए स्रोत खुलते हैं।
  • सौंदर्य और आकर्षण: साधक के व्यक्तित्व में निखार आता है और समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
  • ग्रह दोषों से शांति: विशेष रूप से शुक्र और चंद्रमा ग्रह से जुड़े दोषों का निवारण होता है।
  • मनोकामना पूर्ति: जीवन की सभी भौतिक और आध्यात्मिक इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • पूजा में लाल कमल के फूल और कमलगट्टे की माला का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
  • रात्रि के समय कनकधारा स्तोत्र या श्री सूक्त का पाठ करें।
  • किसी निर्धन महिला या कन्या को लाल वस्त्र और भोजन दान करें।

क्या न करें:

  • घर के किसी भी कोने में अँधेरा या गंदगी बिल्कुल न रहने दें।
  • इस पावन दिन किसी स्त्री का अपमान न करें और न ही कटु वचन बोलें।
  • पूजा में काले रंग के कपड़े या बासी फूलों का उपयोग न करें।

कमला जयंती की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार जब दैत्यों और देवताओं के बीच भीषण संग्राम चल रहा था और देवता असुरों से पराजित होकर अपना वैभव खो चुके थे, तब उन्होंने भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की शरण ली। देवताओं के कष्ट को दूर करने के लिए समुद्र मंथन का निर्णय लिया गया।

कार्तिक अमावस्या के शुभ दिन जब समुद्र का मंथन हो रहा था, तब क्षीरसागर के जल से एक दिव्य और अलौकिक कांति वाली देवी प्रकट हुईं। वे हाथ में खिला हुआ कमल लिए हुए थीं और कमल के विशाल पुष्प पर विराजमान थीं। उनके प्रकट होते ही चारों दिशाओं के गजों (हाथियों) ने अपने सुवर्ण कलशों से उन पर पवित्र जल उड़ेलकर उनका अभिषेक किया। यह दिव्य स्वरूप महाविद्या माँ कमला का था। माँ कमला के आगमन से दसों दिशाएं आलोकित हो गईं और देवताओं को उनका खोया हुआ राजपाट व समृद्धि पुनः प्राप्त हो गई। तभी से इस पावन तिथि को कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026)के रूप में मनाया जाने लगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

माँ कमला की भक्ति केवल सांसारिक धन पाने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर के अभाव और दरिद्रता को मिटाकर आत्मिक पूर्णता पाने का मार्ग है। जब एक साधक सच्चे मन और निश्छल भाव से भगवती कमला के चरणों में समर्पित होता है, तो माँ उसके जीवन की सारी कठिनाइयों को हर लेती हैं। वर्ष की कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) आपके जीवन में अपार समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और भगवती का अलौकिक आशीर्वाद लेकर आए। जय माँ कमला

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. कमला जयंती 2026 (Kamala Jayanti 2026) में कब है?
    कमला जयंती 08 नवंबर 2026, रविवार को दिवाली के दिन मनाई जाएगी।
  1. माँ कमला और माँ लक्ष्मी में क्या अंतर है?
    माँ कमला दस महाविद्याओं में से दसवीं महाविद्या हैं, जो तांत्रिक और सात्विक दोनों रूपों में पूजी जाती हैं। वे लक्ष्मी जी का ही महाविद्या स्वरूप हैं।
  1. कमला जयंती पर किस मंत्र का जप करना चाहिए?
    कमला जयंती पर 'ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं कमलवासिन्यै नमः' या 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गजलक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जप करना चाहिए।
  1. माँ कमला को कौन सा फूल सबसे प्रिय है?
    माँ कमला को लाल या गुलाबी कमल का फूल अत्यंत प्रिय है।
  1. क्या कमला जयंती पर व्रत रखना जरूरी है?
    यदि संभव हो तो व्रत रखें, अन्यथा सच्चे मन से पूजा-अर्चना और मंत्र जप करने से भी पूर्ण फल प्राप्त होता है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.