जीवन में ज्ञान का प्रकाश जब फैलता है, तो अज्ञानता का अंधेरा अपने आप दूर हो जाता है। दिवाली की पावन रात केवल धन की देवी माँ लक्ष्मी का स्वागत करने का दिन नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी माँ शारदा का आशीर्वाद पाने का भी सबसे अच्छा मौका है। गुजरात, राजस्थान और देश के कई हिस्सों में दिवाली के दिन चोपड़ा पूजन यानी शारदा पूजा करने की पुरानी परंपरा है। व्यापारी अपने बही-खातों और नए व्यापार की शुरुआत माँ शारदा के चरणों में शीश झुकाकर करते हैं, वहीं विद्यार्थी और साधक अच्छी बुद्धि व विवेक की कामना करते हैं। यदि आप भी वर्ष में शारदा पूजा (Sharada Puja 2026) की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि की तलाश में हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।
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कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को यानी दिवाली के मुख्य दिन माता शारदा (ज्ञान की देवी माँ सरस्वती) की विशेष आराधना की जाती है, जिसे शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) कहते हैं। व्यापारी वर्ग इस दिन अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करते हैं और अपने नए बही-खातों, कलम तथा व्यापारिक खातों का पूजन करते हैं। इसे गुजराती और मारवाड़ी परंपरा में चोपड़ा पूजन भी कहा जाता है। माना जाता है कि बिना ज्ञान और बुद्धि के धन का कोई मूल्य नहीं रहता, इसलिए दिवाली की रात धन लक्ष्मी के साथ-साथ विद्या लक्ष्मी यानी माँ शारदा की पूजा करने का विधान है ताकि जीवन में विवेक और ज्ञान बना रहे।
वर्ष में शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) का यह पावन पर्व 08 नवंबर, रविवार को पूरे देश में बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का संपूर्ण विवरण नीचे दिया गया है:
शारदा पूजा तिथि: 08 नवंबर 2026, रविवारधार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माँ शारदा ही इस सृष्टि में ज्ञान, वाणी, संगीत और बुद्धि की जननी हैं। धनतेरस और दिवाली के समय जब लोग धन की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं, तो शारदा पूजा हमें याद दिलाती है कि धन का सही उपयोग करने के लिए सद्बुद्धि की आवश्यकता होती है। जो व्यापारी अपने नए खातों पर 'शुभ' और 'लाभ' लिखकर माँ शारदा का पूजन करते हैं, उनके व्यापार में वर्ष भर बरकत रहती है और कभी भी छल या हानि का सामना नहीं करना पड़ता। विद्यार्थियों के लिए यह दिन एकाग्रता और ज्ञान वृद्धि का वरदान लेकर आता है।
शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) या चोपड़ा पूजन की प्रक्रिया बहुत सात्विक और अनुशासित होती है। आइए जानते हैं चरणबद्ध पूजा विधि:

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इस पावन पूजन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की, तो चारों ओर एक अजीब सा सन्नाटा और उदासी छाई हुई थी। नदियां बह रही थीं, हवाएं चल रही थीं, लेकिन कहीं कोई ध्वनि या ज्ञान का संचार नहीं था। इस नीरसता को देखकर ब्रह्मा जी अत्यंत दुखी हुए। उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का, जिससे एक अत्यंत तेजस्वी देवी प्रकट हुईं। उनके हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और वरद मुद्रा थी।
ब्रह्मा जी के अनुरोध पर देवी ने जैसे ही अपनी वीणा के तारों को छेड़ा, पूरी सृष्टि में एक मधुर वाणी और संगीत की तरंगे गूंज उठीं। संसार के समस्त जीवों को ज्ञान, वाणी और बुद्धि प्राप्त हो गई। ब्रह्मा जी ने उन्हें माँ शारदा और सरस्वती का नाम दिया। मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या के दिन ही देवी शारदा ने ज्ञान का प्रकाश फैलाकर संसार को अज्ञान के अंधकार से मुक्त किया था। तभी से दिवाली के दिन धन लक्ष्मी के साथ-साथ ज्ञान की देवी माँ शारदा की पूजा करने का विधान चला आ रहा है।
शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) हमें यह संदेश देती है कि धन और संपत्ति तभी सार्थक हैं जब हमारे पास उन्हें संभालने के लिए ज्ञान और विवेक हो। जब हम सच्चे मन से माँ शारदा के चरणों में अपना शीश झुकाते हैं, तो वे हमारी बुद्धि को शुद्ध करके सही मार्ग दिखाती हैं। वर्ष 2026 की शारदा पूजा आपके व्यापार में अक्षय लाभ, आपके बच्चों को उत्तम विद्या और आपके घर में ज्ञान व सुख का असीम प्रकाश लेकर आए। जय माँ शारदा
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.