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August 10, 2026 Blog

Sharada Puja 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जीवन में ज्ञान का प्रकाश जब फैलता है, तो अज्ञानता का अंधेरा अपने आप दूर हो जाता है। दिवाली की पावन रात केवल धन की देवी माँ लक्ष्मी का स्वागत करने का दिन नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी माँ शारदा का आशीर्वाद पाने का भी सबसे अच्छा मौका है। गुजरात, राजस्थान और देश के कई हिस्सों में दिवाली के दिन चोपड़ा पूजन यानी शारदा पूजा करने की पुरानी परंपरा है। व्यापारी अपने बही-खातों और नए व्यापार की शुरुआत माँ शारदा के चरणों में शीश झुकाकर करते हैं, वहीं विद्यार्थी और साधक अच्छी बुद्धि व विवेक की कामना करते हैं। यदि आप भी वर्ष में शारदा पूजा  (Sharada Puja 2026) की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि की तलाश में हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।

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शारदा पूजा क्या है? (Introduction)

कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को यानी दिवाली के मुख्य दिन माता शारदा (ज्ञान की देवी माँ सरस्वती) की विशेष आराधना की जाती है, जिसे शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) कहते हैं। व्यापारी वर्ग इस दिन अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करते हैं और अपने नए बही-खातों, कलम तथा व्यापारिक खातों का पूजन करते हैं। इसे गुजराती और मारवाड़ी परंपरा में चोपड़ा पूजन भी कहा जाता है। माना जाता है कि बिना ज्ञान और बुद्धि के धन का कोई मूल्य नहीं रहता, इसलिए दिवाली की रात धन लक्ष्मी के साथ-साथ विद्या लक्ष्मी यानी माँ शारदा की पूजा करने का विधान है ताकि जीवन में विवेक और ज्ञान बना रहे।

शारदा पूजा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) का यह पावन पर्व 08 नवंबर, रविवार को पूरे देश में बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का संपूर्ण विवरण नीचे दिया गया है:

शारदा पूजा तिथि: 08 नवंबर 2026, रविवार
कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर 2026 को दोपहर 03:15 बजे से
कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त: 09 नवंबर 2026 को शाम 05:20 बजे तक
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 05:30 बजे से शाम 07:26 बजे तक
वृषभ काल समय: शाम 05:58 बजे से रात 07:54 बजे तक
चौघड़िया शुभ मुहूर्त (अपरान्ह/शाम): शाम 05:30 बजे से रात 08:06 बजे तक

शारदा पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माँ शारदा ही इस सृष्टि में ज्ञान, वाणी, संगीत और बुद्धि की जननी हैं। धनतेरस और दिवाली के समय जब लोग धन की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं, तो शारदा पूजा हमें याद दिलाती है कि धन का सही उपयोग करने के लिए सद्बुद्धि की आवश्यकता होती है। जो व्यापारी अपने नए खातों पर 'शुभ' और 'लाभ' लिखकर माँ शारदा का पूजन करते हैं, उनके व्यापार में वर्ष भर बरकत रहती है और कभी भी छल या हानि का सामना नहीं करना पड़ता। विद्यार्थियों के लिए यह दिन एकाग्रता और ज्ञान वृद्धि का वरदान लेकर आता है।

शारदा पूजा की संपूर्ण विधि (Pooja rituals)

शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) या चोपड़ा पूजन की प्रक्रिया बहुत सात्विक और अनुशासित होती है। आइए जानते हैं चरणबद्ध पूजा विधि:

  • पूजा स्थल की सफाई: पूजा घर या अपने कार्यालय/दुकान की गद्दी को अच्छी तरह साफ करके लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
  • प्रतिमा व बही-खाता स्थापना: चौकी पर माँ शारदा (सरस्वती), माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। साथ ही अपने नए बही-खाते, चोपड़ा, डायरी या कलम को पूजा स्थल पर रखें।
  • स्वास्तिक और शुभ-लाभ लेखन: नए बही-खातों या चोपड़ों पर रोली और कुमकुम से स्वास्तिक (साथिया) का चिह्न बनाएं और उसके दोनों ओर 'शुभ' और 'लाभ' लिखें।
  • सप्तधान्य और कलश: चौकी पर थोड़ा सा अनाज रखकर तांबे का कलश स्थापित करें। कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखें।
  • रोली और अक्षत अर्पण: माँ शारदा, श्री गणेश और अपने बही-खातों पर चंदन, रोली, कुमकुम और अक्षत लगाएं।
  • पुष्प और श्रृंगार: माँ शारदा को सफेद या पीले रंग के फूल, कलम, सफेद वस्त्र और अक्षत अर्पित करें।
  • भोग और आरती: माता को सफेद मिठाई, मखाने, पंचामृत और फलों का भोग लगाएं। इसके बाद 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' मंत्र का जप करें और अंत में घी के दीपक से आरती गाएं।

शारदा पूजा व्रत और पूजा के जरूरी नियम (Rules)

Sharada Puja 2026 festival

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इस पावन पूजन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  • पूजा के समय अपने मन में किसी के प्रति छल, कपट या लालच की भावना न रखें।
  • व्यापारी अपने खातों का पूजन करते समय पहली प्रविष्टि या शुरुआत भगवान के नाम से ही करें।
  • जो साधक इस दिन व्रत रखते हैं, वे दिन भर सात्विक रहें और शाम को पूजा के पश्चात ही भोजन ग्रहण करें।
  • पूजा में प्रयुक्त की गई नई कलम का उपयोग वर्ष भर अपने मुख्य कार्यों के लिए ही करें।

शारदा पूजा के मुख्य लाभ (Benefits)

  • सद्बुद्धि और विवेक: जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है और वाणी में मधुरता आती है।
  • व्यापार में शुभता और लाभ: कारोबार में लगातार प्रगति होती है और धन का कभी नुकसान नहीं होता।
  • शिक्षा में सफलता: विद्यार्थियों को विद्या अध्ययन में अपार सफलता और एकाग्रता प्राप्त होती है।
  • मानसिक शांति: मन से अज्ञात भय और नकारात्मक विचार दूर होकर शांति का संचार होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • अपने बच्चों की किताबें और पेन भी पूजा स्थल पर रखें ताकि उन पर माँ शारदा की कृपा बनी रहे।
  • पूजा के बाद किसी गरीब बच्चे को पाठ्य सामग्री जैसे कॉपी, किताब या पेन दान करें।
  • अपने बही-खातों पर रोली से श्री लिखकर ही नए वर्ष का काम शुरू करें।

क्या न करें:

  • पूजा के स्थान पर कोई भी पुरानी, फटी या जर्जर किताब न रखें।
  • इस दिन पुस्तकों, बही-खातों या किसी भी पन्ने का अनादर न करें और न ही उन पर पैर लगने दें।
  • घर या दफ्तर में किसी के साथ कटु शब्दों का प्रयोग न करें।

शारदा पूजा की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की, तो चारों ओर एक अजीब सा सन्नाटा और उदासी छाई हुई थी। नदियां बह रही थीं, हवाएं चल रही थीं, लेकिन कहीं कोई ध्वनि या ज्ञान का संचार नहीं था। इस नीरसता को देखकर ब्रह्मा जी अत्यंत दुखी हुए। उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का, जिससे एक अत्यंत तेजस्वी देवी प्रकट हुईं। उनके हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और वरद मुद्रा थी।

ब्रह्मा जी के अनुरोध पर देवी ने जैसे ही अपनी वीणा के तारों को छेड़ा, पूरी सृष्टि में एक मधुर वाणी और संगीत की तरंगे गूंज उठीं। संसार के समस्त जीवों को ज्ञान, वाणी और बुद्धि प्राप्त हो गई। ब्रह्मा जी ने उन्हें माँ शारदा और सरस्वती का नाम दिया। मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या के दिन ही देवी शारदा ने ज्ञान का प्रकाश फैलाकर संसार को अज्ञान के अंधकार से मुक्त किया था। तभी से दिवाली के दिन धन लक्ष्मी के साथ-साथ ज्ञान की देवी माँ शारदा की पूजा करने का विधान चला आ रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion)

शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) हमें यह संदेश देती है कि धन और संपत्ति तभी सार्थक हैं जब हमारे पास उन्हें संभालने के लिए ज्ञान और विवेक हो। जब हम सच्चे मन से माँ शारदा के चरणों में अपना शीश झुकाते हैं, तो वे हमारी बुद्धि को शुद्ध करके सही मार्ग दिखाती हैं। वर्ष 2026 की शारदा पूजा आपके व्यापार में अक्षय लाभ, आपके बच्चों को उत्तम विद्या और आपके घर में ज्ञान व सुख का असीम प्रकाश लेकर आए। जय माँ शारदा

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) में कब है?
    शारदा पूजा 08 नवंबर 2026, रविवार को दिवाली के दिन मनाई जाएगी।
  1. शारदा पूजा और चोपड़ा पूजन में क्या अंतर है?
    दोनों एक ही हैं। गुजरात और महाराष्ट्र में दिवाली पर बही-खातों की पूजा को चोपड़ा पूजन कहा जाता है, जो वस्तुतः माँ शारदा (सरस्वती) की ही आराधना है।
  1. शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
    08 नवंबर 2026 को शारदा पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:30 बजे से शाम 07:26 बजे तक (प्रदोष काल) रहेगा।
  1. क्या केवल व्यापारी ही शारदा पूजा कर सकते हैं?
    नहीं, व्यापारी अपने बही-खातों की पूजा करते हैं, जबकि विद्यार्थी और आम लोग ज्ञान, बुद्धि और एकाग्रता पाने के लिए माँ शारदा की पूजा कर सकते हैं।
  1. शारदा पूजा 2026 (Sharada Puja 2026) में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
    शारदा पूजा के दौरान 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' या 'ॐ शारदा दैव्यै नमः' मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.