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August 4, 2026 Blog

Radha Kund Snan 2026: जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

एक माँ के दिल की सबसे बड़ी लालसा यही होती है कि उसकी सूनी गोद में भी किसी नन्हे शिशु की किलकारियाँ गूंज उठें। भगवान कृष्ण और श्री राधा रानी की कृपा से दुनिया में कोई भी इच्छा अधूरी नहीं रहती। उत्तर प्रदेश के पावन ब्रज क्षेत्र स्थित गोवर्धन पर्वत की तलहटी में बना राधा कुंड एक ऐसा दिव्य स्थान है जहाँ की भक्ति में स्वयमेव चमत्कार बसता है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी यानी अहोई अष्टमी की पावन रात्रि को जब लाखों श्रद्धालु यहाँ एकत्रित होते हैं, तो हर दिल में बस एक ही आस होती है कि राधा रानी और कन्हैया का वरदान उन्हें मिल जाए। यदि आप भी वर्ष में राधा कुंड स्नान 2026 (Radha Kund Snan 2026) के पावन अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण और सच्ची जानकारी लेकर आया है।

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राधा कुंड स्नान क्या है? (What is the Radha Kund Snan?)

अहोई अष्टमी के दिन मथुरा के गोवर्धन स्थित राधा कुंड में अर्धरात्रि स्नान करने की सदियों पुरानी परंपरा है। इसे राधा कुंड स्नान 2026 (Radha Kund Snan 2026) कहा जाता है। मान्यता है कि जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना के साथ अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि को यहाँ स्नान करते हैं, उनकी मनोकामना श्री राधा रानी और भगवान कृष्ण शीघ्र ही पूर्ण कर देते हैं। यहाँ राधा कुंड और श्याम कुंड दो अत्यंत पवित्र जलकुंड अगल बगल बने हुए हैं, जिनमें स्नान करने से केवल संतान सुख ही नहीं बल्कि जीवन भर की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

राधा कुंड स्नान 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में राधा कुंड स्नान (Radha Kund Snan 2026) का पवित्र पर्व 01 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। तिथियों और मध्यरात्रि स्नान के शुभ समय का विवरण इस प्रकार है:

राधा कुंड स्नान तिथि: 01 नवंबर 2026, रविवार
कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि प्रारंभ: 01 नवंबर 2026 को दोपहर 02:51 बजे से
अष्टमी तिथि की समाप्ति: 02 नवंबर 2026 को दोपहर 01:10 बजे तक
मध्यरात्रि स्नान का शुभ मुहूर्त: 01 नवंबर की रात 11:39 बजे से रात 12:31 बजे तक
विशेष अर्घ्य देने का समय: मध्यरात्रि के बाद

राधा कुंड स्नान का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राधा कुंड भगवान कृष्ण और श्री राधा रानी के प्रेम का साक्षात प्रतीक है। माना जाता है कि कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को जल रूप में राधा जी और कृष्ण जी का मिलन होता है। पद्म पुराण और गर्ग संहिता के अनुसार इस पावन रात्रि को ब्रज मंडल के सभी पवित्र तीर्थ, नदियाँ और सरोवर अपना सूक्ष्म रूप धारण करके राधा कुंड में समाहित हो जाते हैं। जो दंपत्ति निसंतान हैं, वे यदि निष्ठा भाव से यहाँ मध्यरात्रि को एक साथ डुबकी लगाते हैं, तो अहोई माता और श्री राधा रानी की असीम अनुकंपा से उनके घर में सुयोग्य संतान का जन्म होता है। इसके अलावा यहाँ स्नान करने से भक्ति भाव का प्रसार होता है और पुराने सभी पापों का क्षय हो जाता है।

राधा कुंड स्नान की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

Radha Kund Snan 2026 festival

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राधा कुंड में स्नान और पूजा करने के लिए एक विशेष शास्त्रीय क्रम का पालन किया जाता है:

संध्या पूजन और तैयारी: स्नान करने से पूर्व संध्या के समय राधा कुंड के तट पर दीपदान करें।
संपादित संकल्प: मध्यरात्रि मुहूर्त से कुछ समय पहले दंपत्ति हाथ जोड़कर श्री राधा-कृष्ण और अहोई माता का ध्यान करें और संतान प्राप्ति या मनोकामना पूर्ति का संकल्प लें।
मध्यरात्रि स्नान: निशिता काल मुहूर्त में यानी रात 11:39 बजे के बाद दंपत्ति को एक साथ राधा कुंड के जल में प्रवेश करके भक्तिपूर्वक डुबकी लगानी चाहिए।
सफेद कद्दू का दान: स्नान के बाद जल में एक पेठा अर्पित किया जाता है।
राधा कृष्ण मंदिर दर्शन: स्नान के उपरांत कुंड के किनारे स्थित श्री राधा कुंडेश्वर महादेव और राधा रानी के प्राचीन मंदिर में जाकर दर्शन एवं प्रणाम करें।

व्रत और स्नान के जरूरी नियम (Rules)

यदि आप इस पावन अवसर पर व्रत रख रहे हैं और स्नान करने गोवर्धन जा रहे हैं, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  • स्नान करने वाले दंपत्ति को इस दिन पूर्ण रूप से सात्विक रहना चाहिए और अहोई अष्टमी का उपवास रखना चाहिए।
  • स्नान के समय मन में पूरी तरह भक्ति भाव होना चाहिए, किसी भी तरह का अहंकार या शंका मन में न लाएं।
  • स्नान के पश्चात गीले कपड़ों में ही राधा रानी से प्रार्थना करें और फिर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इस दिन पूरे मार्ग में श्री राधा या हरे कृष्ण महामंत्र का जप करते रहना चाहिए।

राधा कुंड स्नान के मुख्य लाभ (Benefits)

  • निसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्ति: यह स्नान संतान हीन दंपत्तियों के लिए वरदान के समान माना जाता है।
  • पारिवारिक सुख और शांति: राधा रानी के आशीर्वाद से पति पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास मजबूत होता है।
  • पापमुक्ति और भक्ति का फल: कार्तिक मास में राधा कुंड में स्नान करने से हजारों तीर्थों के स्नान के बराबर पुण्य मिलता है।
  • बच्चों की दीर्घायु: जिन माताओं के बच्चों का स्वास्थ्य खराब रहता है, उनके लिए भी यह स्नान फलदायी होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • गोवर्धन पहुँचकर परिक्रमा का लाभ अवश्य लें और राधा कुंड के साथ श्याम कुंड के भी दर्शन करें।
  • स्नान के बाद स्थानीय साधु संतों और निर्धनों को सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा और वस्त्र भेंट करें।
  • कुंड के जल की स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें।

क्या न करें:

  • स्नान करते समय किसी भी प्रकार के साबुन, शैम्पू या रसायनों का उपयोग कुंड के जल में न करें।
  • कुंड के तट पर गंदगी या प्लास्टिक कचरा बिल्कुल न फैलाएं।
  • क्रोध या किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति ईर्ष्या भाव से मन को दूषित न होने दें।

पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार कंस ने भगवान श्रीकृष्ण का वध करने के लिए अरिष्टासुर नामक दानव को भेजा। अरिष्टासुर ने एक विशाल बैल का रूप धारण किया था। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन क्षेत्र में उस बैल रूपी दानव का वध कर दिया। जब राधा रानी ने यह देखा तो उन्होंने कन्हैया से कहा कि आपने एक गोवंश का वध किया है, इसलिए आप पर गौहत्या का पाप लग गया है। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए आपको संसार के सभी पवित्र तीर्थों में स्नान करना होगा।

तब भगवान कृष्ण ने अपनी बंसी से पृथ्वी पर आघात किया और एक कुंड का निर्माण किया, जिसमें सभी नदियों और तीर्थों का जल आमंत्रित किया। इसे श्याम कुंड कहा गया। जब कृष्ण ने उसमें स्नान कर लिया, तो उन्होंने राधा जी से भी स्नान करने को कहा। तब श्री राधा रानी ने अपने कंगन से पास ही एक और कुंड खोदा, जिसे देखकर कृष्ण जी ने अपने कुंड से पावन जल उसमें प्रवाहित किया। वही स्थान राधा कुंड कहलाया। प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि जो भी कार्तिक अष्टमी की मध्यरात्रि को इस कुंड में स्नान करेगा, उसे राधा जी की सर्वोपरि भक्ति और संतान सुख की प्राप्ति होगी।

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निष्कर्ष (Conclusion)

राधा कुंड स्नान 2026 (Radha Kund Snan 2026) केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास और भक्ति की पराकाष्ठा है। जब एक माँ और पिता संतान की कामना लेकर श्री राधा रानी के इस पावन सरोवर में उतरते हैं, तो उनकी पुकार सीधे ब्रज की स्वामिनी तक पहुँचती है। वर्ष 2026 की अहोई अष्टमी पर राधा कुंड जाने की योजना बना रहे सभी श्रद्धालुओं पर राधा-कृष्ण का असीम आशीर्वाद बना रहे और सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हों।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


  1. राधा कुंड स्नान 2026 (Radha Kund Snan 2026) में कब है?
    राधा कुंड स्नान 2026 (Radha Kund Snan 2026) 01 नवंबर, रविवार की मध्यरात्रि को होगा।

  1. राधा कुंड में किस समय स्नान करना सबसे शुभ माना जाता है?
    अहोई अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि यानी निशिता काल मुहूर्त के दौरान स्नान करना सबसे फलदायी माना जाता है।

  1. क्या केवल वही लोग स्नान कर सकते हैं जिन्हें संतान चाहिए?
    नहीं, कोई भी श्रद्धालु भक्ति, आध्यात्मिक शांति और राधा रानी की कृपा पाने के लिए यहाँ स्नान कर सकता है।

  1. राधा कुंड कहाँ स्थित है?
    राधा कुंड उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में गोवर्धन पर्वत के पास स्थित है।

  1. क्या स्नान के बाद कोई विशेष दान किया जाता है?
    हाँ, स्नान के बाद सफेद कद्दू का दान या जल में अर्पण करना बहुत शुभ माना जाता है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.