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July 21, 2026 Blog

Ashwina Purnima Vrat 2026: 25 अक्टूबर को है आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा), जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

बचपन की वे यादगार रातें कौन भूल सकता है? जब दादी माँ घर की छत पर चाँद की चमकती रोशनी में एक बड़े बर्तन में खीर रख देती थीं। सुबह उठने पर सबसे पहले हमें वही ठंडी और मीठी खीर का प्रसाद मिलता था। बड़े-बुजुर्ग कहते थे कि इस रात आसमान से भगवान का आशीर्वाद बरसता है। हमारी पारंपरिक मान्यता में प्रकृति के हर सुंदर रूप को भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। आश्विन मास में आने वाली यह रात सामान्य नहीं है; यह वह जादुई रात है जब चंद्रमा अपनी पूरी चमक से धरती को देखता है। इस पवित्र समय को हम आश्विन पूर्णिमा 2026 (Ashwina Purnima Vrat 2026) या 'शरद पूर्णिमा' के नाम से जानते हैं। इस साल आश्विन पूर्णिमा 2026 (Ashwina Purnima Vrat 2026) का व्रत 25 अक्टूबर को है। लोग मानते हैं कि इसी रात को धन की देवी महालक्ष्मी धरती पर घूमती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है और उनका स्मरण कर रहा है। यह सिर्फ एक धार्मिक उपवास नहीं, बल्कि आपके जीवन की आर्थिक तंगी को दूर करने और घर में सुख-समृद्धि लाने का दिन है। आइए, इस रात के महत्व को समझते हैं और लक्ष्मी जी की कृपा पाने की पूजा विधि जानते हैं।


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आश्विन पूर्णिमा व्रत क्या है? (What is Ashwin Purnima fast?)

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को आश्विन पूर्णिमा 2026 (Ashwina Purnima Vrat 2026) कहते हैं। इसे उत्तर भारत में शरद पूर्णिमा और पूर्वी भारत में 'कोजागरी पूर्णिमा' या 'लक्खी पूजा' के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन से शरद ऋतु की शुरुआत होती है। इस तिथि पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु, माता महालक्ष्मी, और चंद्रमा देवता की पूजा का विधान है।

आश्विन पूर्णिमा व्रत 2026: शुभ तिथि और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (Date and time)

साल में आश्विन पूर्णिमा 2026 (Ashwina Purnima Vrat 2026) का व्रत रविवार को है। पूर्णिमा तिथि 24 अक्टूबर की रात 10:15 PM से शुरू होगी और 25 अक्टूबर की रात 09:30 PM तक रहेगी। लक्ष्मी पूजा और अमृत वर्षा का मुख्य समय रात 11:40 PM से रात 12:30 AM तक है। चंद्रोदय का समय 25 अक्टूबर की शाम 05:18 PM पर है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

आश्विन पूर्णिमा 2026 (Ashwina Purnima Vrat 2026) का महत्व मानसिक शांति और भौतिक समृद्धि से जुड़ा है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है और अपनी पूरी चमक से किरणें बिखेरता है। इन किरणों में विशेष औषधीय गुण होते हैं, जो सीधे हमारे मस्तिष्क और फेफड़ों को स्वस्थ रखते हैं।

माँ लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा विधि (Pooja Rituals)

 Ashwin Purnima fast 2026 festival

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25 अक्टूबर की पावन तिथि पर सुख-समृद्धि स्थापित करने के लिए इस प्रकार पूजा विधि का पालन करें:

  • प्रातः काल का स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें। नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें।
  • सत्यनारायण कथा: दोपहर या शाम के समय घर में भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें। उन्हें पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाएं।
  • महालक्ष्मी पूजन: शाम के समय पूजा घर में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर माँ लक्ष्मी और श्री हरि विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। उन्हें रोली, कुमकुम, अक्षत का तिलक लगाएं। माँ लक्ष्मी को मखाने, कमल का फूल और इत्र अर्पित करें।
  • खीर का निर्माण: गाय के दूध में चावल, चीनी और मखाने डालकर स्वादिष्ट खीर तैयार करें।
  • अमृत वर्षा के लिए खीर रखना: रात को चंद्रोदय के बाद, इस खीर को महीन कपड़े या जाली से ढककर अपने घर की छत या बालकनी में रखें जहाँ चंद्रमा की रोशनी सीधे उस पर पड़े।
  • चंद्र देव को अर्घ्य: मध्यरात्रि में तांबे या चांदी के लोटे में जल, दूध और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • प्रसाद ग्रहण: रात को 12 बजे के बाद या अल सुबह उस खीर के बर्तन को नीचे लाएं। पहले माँ लक्ष्मी को भोग लगाएं और फिर पूरा परिवार इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करे।

शरद पूर्णिमा व्रत के नियम (Rules)

इस व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए इन नियमों का पालन करना जरूरी है:

  • मिट्टी या चांदी के बर्तनों का प्रयोग: खीर को प्लास्टिक या लोहे के बर्तन में न रखें। कांच, चांदी या मिट्टी का बर्तन सबसे अच्छा माना जाता है।
  • पूर्ण सात्विकता: पूर्णिमा के दिन घर में प्याज, लहसुन या तामसिक भोजन न बनाएं।
  • रात्रि जागरण का नियम: इस रात को सोने के बजाय माँ लक्ष्मी के मंत्रों का जाप या भजन-कीर्तन करें।

आश्विन पूर्णिमा व्रत रखने के लाभ (Benefits)

जो श्रद्धालु पूरे नियम और विश्वास से इस पावन तिथि पर व्रत और पूजन करते हैं, उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

  • आर्थिक तंगी से मुक्ति: माँ लक्ष्मी की कृपा से व्यापार में मंदी दूर होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
  • आरोग्य और मानसिक शांति: चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर खाने से दमा, मानसिक तनाव और त्वचा के रोग शांत होते हैं।
  • वैवाहिक सुख: पति-पत्नी के बीच आपसी मतभेद खत्म होते हैं और घर में प्रेम बढ़ता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • इस दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि सफेद रंग चंद्रमा और शांति का प्रतीक है।
  • पूर्णिमा के दिन जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्र का दान करें।

क्या न करें:

  • इस पावन रात को किसी व्यक्ति से लड़ाई-झगड़ा या अपशब्द न बोलें, अन्यथा माँ लक्ष्मी घर की दहलीज से लौट जाती हैं।
  • चंद्र देव को अर्घ्य देते समय जल की बूंदें पैरों पर न गिरें, इसका विशेष ध्यान रखें।

पौराणिक व्रत कथा: दो बहनों की कहानी और भाग्य का उदय (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर में एक साहूकार की दो बेटियां रहती थीं। दोनों बहनें हर महीने आने वाली पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। बड़ी बेटी धार्मिक थी और वह पूरे नियमों के साथ पूर्ण व्रत रखती थी, जबकि छोटी बेटी चंचल स्वभाव की थी और वह व्रत तो रखती थी, लेकिन नियमों की अनदेखी कर देती थी।

समय बीतने पर दोनों बहनों की शादियां हुईं। बड़ी बेटी के घर सुंदर और स्वस्थ संतान ने जन्म लिया, लेकिन छोटी बेटी की संतान पैदा होते ही मर जाती थी। व्याकुल होकर छोटी बेटी एक पहुंचे हुए साधु के पास गई। साधु ने दिव्य दृष्टि से देखकर बताया "बेटी, तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत रखती थी, जिसके कारण तुम्हारे पुण्यों की कमी से ऐसा हो रहा है। यदि तुम आश्विन पूर्णिमा का पूर्ण व्रत पूरे नियमों के साथ रखोगी, तो तुम्हारी संतान जीवित रहेगी।"

छोटी बेटी ने साधु के कहे अनुसार पूरी निष्ठा से आश्विन पूर्णिमा का व्रत रखा। माँ लक्ष्मी और चंद्र देव की कृपा से उसके मरे हुए बच्चे में भी प्राण वापस आ गए। यह कथा हमें सिखाती है कि ईश्वर की भक्ति में नियमों का पालन और पूर्ण श्रद्धा होना कितना जरूरी है।

निष्कर्ष: चाँद की शीतल छांव में छिपी सुख की चाबी (Conclusion)

आश्विन पूर्णिमा व्रत 2026 (Ashwina Purnima Vrat 2026) सिर्फ एक व्रत या परंपरा नहीं, यह प्रकृति के सुंदर बदलाव और ईश्वर की असीम दया को महसूस करने की एक भावुक बेला है। जब आप 25 अक्टूबर 2026 की रात को ठंडी चांदनी के नीचे खड़े होकर अपनी खीर का कटोरा रखेंगे, तो मन में यह विश्वास रखिएगा कि साक्षात लक्ष्मी माता आपकी झोली भरने आ रही हैं। चंद्रमा की यह शीतलता आपके जीवन के हर तनाव और दुख को सोख ले, यही हमारी मंगल कामना है।


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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. वर्ष में आश्विन पूर्णिमा 2026 (Ashwina Purnima Vrat 2026) कब है?
    साल में आश्विन पूर्णिमा 2026 (Ashwina Purnima Vrat 2026) का पावन व्रत 25 अक्टूबर, दिन रविवार को रखा जाएगा।
  1. खीर को छत पर कितने समय तक रखना चाहिए?
    खीर को रात को चंद्रोदय के बाद (लगभग 8 या 9 बजे) छत पर रख देना चाहिए और मध्यरात्रि 12 बजे के बाद या सुबह होने से पहले नीचे लाकर प्रसाद रूप में बांटना चाहिए।
  1. कोजागरी पूर्णिमा का क्या अर्थ होता है?
    'कोजागरी' बंगाली शब्द 'को जागति' से बना है, जिसका अर्थ है—"कौन जाग रहा है?” मान्यता है कि इस रात माँ लक्ष्मी धरती पर आकर देखती हैं कि कौन सा भक्त जागकर उनकी साधना कर रहा है।
  1. क्या इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा करना जरूरी है?
    अनिवार्य नहीं है, लेकिन पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने से व्रत का महत्व और उसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
  1. क्या शरद पूर्णिमा की खीर बीमार व्यक्ति को दी जा सकती है?
    हाँ, शास्त्रों और आयुर्वेद के अनुसार इस रात की खीर औषधीय गुणों से भरपूर होती है, जो विशेष रूप से सांस के रोगियों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए लाभकारी मानी गई है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.