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July 9, 2026 Blog

Navpatrika Puja 2026: 17 अक्टूबर को है नवपत्रिका पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, नौ पौधों की पूजा विधि और पौराणिक महत्व

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

क्या आपने कभी सोचा है कि जब हमारे घर में कोई बड़ा त्योहार होता है, तो हम अपने घर को आम के पत्तों, फूलों और बंदनवार से क्यों सजाते हैं? हमारी पारंपरिक संस्कृति की यह सबसे सुंदर बात है कि हम भगवान को सिर्फ मंदिरों में नहीं, बल्कि पेड़-पौधों, नदियों और प्रकृति में भी देखते हैं। शारदीय नवरात्रि के दौरान जब पंडालों में ढाक की थाप सुनाई देती है, तो महासप्तमी की सुबह एक बहुत ही भावुक और अलौकिक दृश्य देखने को मिलता है। एक ऐसा दृश्य जहाँ नौ अलग-अलग पौधों को मिलाकर 'नवदुर्गा' के रूप में तैयार किया जाता है और उन्हें एक नई दुल्हन की तरह साड़ी पहनाकर माँ के दरबार में लाया जाता है। इसे ही हम कहते हैं नवपत्रिका पूजा 2026 (Navpatrika Puja 2026)।

इस साल नवपत्रिका पूजा 2026 (Navpatrika Puja 2026) 17 अक्टूबर को है। यह सिर्फ एक बंगाली परंपरा नहीं है, बल्कि जीवन में प्रकृति के प्रति प्रेम और आभार प्रकट करने का एक तरीका है। अगर आप भी माँ दुर्गा की कृपा, सौभाग्य और अन्न-धन का वरदान चाहते हैं, तो इस पावन परंपरा के महत्व और इसकी सही पूजा विधि को जानना आपके लिए जरूरी है। आइए, इसे सरल और आत्मीय तरीके से समझते हैं।

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नवपत्रिका पूजा क्या है? (What is Navapatrika Puja?)

शारदीय दुर्गा पूजा के महासप्तमी पर्व की शुरुआत नवपत्रिका पूजा 2026 (Navpatrika Puja 2026) से होती है। 'नव' का अर्थ है नौ और 'पत्रिका' का अर्थ है पत्ते या पौधे। यह नौ अलग-अलग औषधीय पौधों का एक समूह है, जो माँ दुर्गा के नौ रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसे 'कोला बौ' या 'केले की दुल्हन' भी कहा जाता है। महासप्तमी की सुबह इन नौ पौधों को पवित्र नदी में स्नान कराकर, लाल रंग की साड़ी पहनाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा के दाहिनी ओर स्थापित किया जाता है।

नवपत्रिका पूजा 2026: तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त (Date and time)

शास्त्रों के अनुसार, नवपत्रिका प्रवेश और पूजा महासप्तमी की सुबह के शुभ मुहूर्त में ही की जानी चाहिए। साल 2026 में इसका सटीक समय इस प्रकार है:

पूजा कब है: 17 अक्टूबर 2026, दिन शनिवार
अश्विन मास की महासप्तमी तिथि प्रारंभ: 17 अक्टूबर 2026 को दोपहर 11:15 AM से
नवपत्रिका स्नान और प्रवेश मुहूर्त (सुबह का समय): सुबह 06:23 AM से 08:35 AM तक
शनिवार के दिन महासप्तमी की सुबह इस पावन पूजा का संयोग होने से जातकों को शनि दोष से मुक्ति और कृषि व व्यापार में लाभ का महासंयोग मिल रहा है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

Navpatrika Puja 2026 festival

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सनातन परंपरा में नवपत्रिका पूजा 2026 (Navpatrika Puja 2026) का महत्व बहुत है। प्राचीन काल में जब मूर्तियां नहीं बनाई जाती थीं, तब हमारे पूर्वज प्रकृति के इन नौ पौधों के माध्यम से ही नवदुर्गा की पूजा करते थे। इन नौ पौधों में से प्रत्येक में एक विशिष्ट देवी का वास माना जाता है:

केला (ब्रह्माणी), हल्दी (दुर्गा), बेल (शिवा), अनार (रक्तदंतिका), अशोक (शोकरहिता), मानक (चामुंडा), धान (लक्ष्मी), ककड़ी (सावित्री) और अमलतास (कार्तिकी)।

इसका आध्यात्मिक महत्व यह है कि माँ प्रकृति ही हमारी असली रक्षक हैं। जब हम इन नौ पौधों की पूजा करते हैं, तो हम अपनी फसलों, औषधियों और पर्यावरण की सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। मान्यता है कि जिस घर में नवपत्रिका का प्रवेश होता है, वहां से हर प्रकार की बीमारी और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

नौ देवियों की सरल पूजा विधि (Pooja rituals)

17 अक्टूबर की पावन सुबह आपको अपने घर या पंडाल में इस प्रकार पूजा विधि संपन्न करनी चाहिए:

  • नवपत्रिका का निर्माण: सप्तमी की सुबह सूर्योदय से पहले नौ पौधों को एक साथ सफेद सूत से बांध लें।
  • पवित्र स्नान (महास्नान): शुभ मुहूर्त में इस नवपत्रिका को किसी पवित्र नदी, तालाब या घर पर ही गंगाजल मिले पानी से शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच स्नान कराएं।
  • श्रृंगार (कोला बौ रूप): स्नान के बाद नवपत्रिका को एक सुंदर लाल बॉर्डर वाली साड़ी पहनाएं। इसके पत्तों पर सिंदूर और कुमकुम का तिलक लगाएं।
  • गृह प्रवेश और स्थापना: अब इस सजी हुई नवपत्रिका को आदरपूर्वक मुख्य पूजा स्थल पर लाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा के दाहिनी ओर, भगवान गणेश की मूर्ति के पास स्थापित करें।
  • षोडशोपचार पूजा: नवपत्रिका को धूप-दीप दिखाएं, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
  • नैवेद्य भोग: माँ को ताजे फल, मिठाई और विशेष रूप से नारियल का भोग लगाएं।

इस पावन व्रत के नियम (Rules)

इस दिव्य अनुष्ठान का पूर्ण फल पाने के लिए इन व्रत के नियम का पालन जरूर करें:

  • दिशा का ध्यान: नवपत्रिका को हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही स्थापित करें।
  • पूर्ण पवित्रता: जब तक नवपत्रिका का प्रवेश और स्थापना न हो जाए, तब तक कुछ भी ग्रहण न करें।
  • अखंड मौन या कीर्तन: स्थापना के समय फालतू बातें न करें, मन में 'महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र' का पाठ करें।

नवपत्रिका पूजा के चमत्कारी लाभ (Benefits)

जो भक्त इस पावन दिन पूरी निष्ठा से नवपत्रिका को अपने घर लाते हैं, उन्हें ये लाभ मिलते हैं:

  • अन्न-धन की प्रचुरता: चूंकि इसमें 'धान' (लक्ष्मी) का वास है, इसलिए घर में कभी अनाज और पैसों की कमी नहीं होती।
  • आरोग्य का वरदान: इसमें शामिल सभी नौ पौधे औषधीय गुणों से भरपूर हैं, जिससे घर के सदस्यों को गंभीर बीमारियों से मुक्ति का लाभ मिलता है।
  • अखंड सौभाग्य: सुहागिन महिलाओं का सुहाग हमेशा सुरक्षित रहता है और घर का क्लेश शांत होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)

क्या करें:

  • नवपत्रिका प्रवेश के समय घर की महिलाओं को शंखध्वनि और 'उलूध्वनि' अवश्य करनी चाहिए।
  • स्थापना के बाद सुहागिन महिलाएं कोला बौ को सिंदूर जरूर अर्पित करें।

क्या न करें?

  • पूजा के बाद इन नौ पौधों के पत्तों को भूलकर भी इधर-उधर न फेंकें और न ही उन पर पैर लगने दें।
  • इस पावन दिन घर की रसोई में लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन बिल्कुल न बनाएं।

पौराणिक इतिहास और कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, जब महिषासुर का अत्याचार तीनों लोकों में बहुत बढ़ गया, तब माँ दुर्गा ने उसे युद्ध के लिए ललकारा। यह युद्ध नौ दिनों तक चला। युद्ध के दौरान माँ दुर्गा को असीम शक्ति और ऊर्जा की आवश्यकता थी। तब प्रकृति ने स्वयं आगे बढ़कर माँ की सहायता की।

धरती माता ने माँ दुर्गा को नौ अलग-अलग औषधीय पौधों के रूप में अपनी शक्तियां सौंप दीं, जिन्हें ग्रहण करके माँ दुर्गा ने महिषासुर की मायावी सेना का समूल नाश कर दिया। महासप्तमी के दिन ही माँ ने इन नौ शक्तियों को अपने भीतर समाहित किया था, इसीलिए तब से प्रकृति के प्रति सम्मान और विजय के प्रतीक के रूप में नवपत्रिका पूजा 2026 (Navpatrika Puja 2026) की यह अद्भुत परंपरा अनादि काल से चली आ रही है।

निष्कर्ष: प्रकृति और परमात्मा का मिलन (Conclusion)

नवपत्रिका पूजा 2026 (Navpatrika Puja 2026) हमें याद दिलाती है कि भगवान हमसे दूर किसी सातवें आसमान पर नहीं हैं, वे हमारे आस-पास के हरे-भरे पेड़ों और पौधों में ही सांस ले रहे हैं। जब आप 17 अक्टूबर 2026 की पावन सुबह अपनी 'कोला बौ' का स्वागत करेंगे, तो मन में यह भाव रखिएगा कि आप साक्षात प्रकृति माँ का स्वागत कर रहे हैं। माँ दुर्गा की अनुकंपा आपके जीवन को हमेशा खुशियों से भर दे। जय माता दी

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. वर्ष में नवपत्रिका पूजा 2026 (Navpatrika Puja 2026) किस तारीख को है?
    साल 2026 में नवपत्रिका पूजा 17 अक्टूबर, दिन शनिवार को महासप्तमी के पावन अवसर पर मनाई जाएगी।
  1. नवपत्रिका में कौन-कौन से नौ पौधे शामिल होते हैं?
    इसमें केला, हल्दी, बेल, अनार, अशोक, धान, मानक, ककड़ी और अमलतास के पौधे शामिल होते हैं।
  1. नवपत्रिका को 'कोला बौ' क्यों कहा जाता है?
    बांग्ला परंपरा में केले के पौधे को मुख्य रूप से साड़ी पहनाकर दुल्हन का रूप दिया जाता है, इसीलिए इसे 'कोला बौ' (केले की दुल्हन) कहा जाता है।
  1. नवपत्रिका पूजा (Navpatrika Puja 2026) का सबसे शुभ समय क्या है?
    17 अक्टूबर की सुबह 06:23 AM से 08:35 AM के बीच का समय नवपत्रिका स्नान और स्थापना के लिए सर्वोत्तम है।
  1. क्या नवपत्रिका को भगवान गणेश की पत्नी माना जाता है?
    यह एक आम लोक मान्यता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार नवपत्रिका साक्षात माँ दुर्गा के नौ रूपों (प्रकृति स्वरूपा नवदुर्गा) का प्रतीक है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.