जीवन में कभी-कभी ऐसे समय आते हैं जब हमें लगता है कि हमारे सारे दुखों का कोई समाधान नहीं है। ऐसे में हमें भगवान श्री गणेश की याद आती है, जो न केवल बुद्धि के दाता हैं बल्कि हमारे जीवन के सारे विघ्नों को दूर करने वाले भी हैं। महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026 (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) एक ऐसा ही अवसर है जब आप अपने जीवन के सारे दुखों को भूलकर भगवान गणेश की शरण में जा सकते हैं।
भाद्रपद मास की यह चतुर्थी बहुत ही पवित्र मानी जाती है। आइए जानते हैं इस पावन दिन के महत्व और पूजा की गहराइयों को।
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को 'संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है। लेकिन जब यह चतुर्थी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आती है, तो इसे विशेष रूप से 'महा संकष्टी हरा चतुर्थी' या 'हेरम्ब संकष्टी' के नाम से जाना जाता है। 'संकष्टी हरा' का अर्थ है— संकटों को दूर करने वाली। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गणपति की आराधना करने से न केवल छोटे-मोटे विघ्न टलते हैं, बल्कि बड़े से बड़े कष्टों का भी समूल नाश हो जाता है।
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31 अगस्त 2026 को बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए आप इस विधि का पालन कर सकते हैं:
ब्रह्म मुहूर्त में जागें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें।
संकल्प: भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें— “हे गणपति, मैं अपने सभी संकटों की मुक्ति हेतु आज आपकी शरण में हूँ।"
स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
अभिषेक: बप्पा को जल और गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं क्योंकि सिंदूर गणेश जी को अत्यंत प्रिय है।
अर्पण: बप्पा को 21 दूर्वा (हरी घास) की गांठें चढ़ाएं। इसके साथ ही लाल फूल और अक्षत अर्पित करें।
भोग: मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
आरती: धूप-दीप जलाकर गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती गाएं।
चंद्र दर्शन: रात को चंद्रमा निकलने पर उन्हें दूध और जल से अर्घ्य दें और फिर फलाहार ग्रहण करें।
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026 (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) एक बार देवताओं पर भारी विपदा आई और वे अपनी रक्षा के लिए भगवान शिव के पास गए। शिव जी ने कार्तिकेय और गणेश जी से पूछा कि आप में से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है। तब भगवान गणेश ने अपनी बुद्धि और शक्ति का परिचय देते हुए सभी संकटों को पल भर में दूर कर दिया। तभी से उन्हें 'संकटहर्ता' कहा जाने लगा। भाद्रपद की यह चतुर्थी उसी दिव्य शक्ति का उत्सव है जिसने देवताओं के भी संकट हर लिए थे।
महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026 (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) केवल एक उपवास नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अहंकार को मिटाकर ईश्वर के प्रति पूरी तरह समर्पित होने का दिन है। 31 अगस्त को जब आप बप्पा की पूजा करें, तो विश्वास रखें कि वे आपकी हर पुकार सुन रहे हैं। विघ्नहर्ता आपके जीवन के सभी कांटों को हटाकर सुखों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
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यह व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
आप शाम की पूजा के बाद सेंधा नमक (Rock Salt) का उपयोग कर सकते हैं।
गणेश जी को हमेशा 21 दूर्वा की गांठें चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
नई दिल्ली में चंद्रोदय का समय रात 09:05 बजे है। स्थानीय पंचांग के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
यह व्रत जीवन की कठिन से कठिन बाधाओं को दूर करने और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.