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May 25, 2026 Blog

Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026: महा संकष्टी हरा चतुर्थी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और बप्पा को प्रसन्न करने के उपाय

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

महर्षि संकष्टी हरा चतुर्थी 2026: भगवान गणेश की कृपा से दूर होंगे जीवन के सारे संकट (Maharishi Sankashti Hara Chaturthi 2026: With the blessings of Lord Ganesha, all the troubles of life will be removed.)

 

जीवन में कभी-कभी ऐसे समय आते हैं जब हमें लगता है कि हमारे सारे दुखों का कोई समाधान नहीं है। ऐसे में हमें भगवान श्री गणेश की याद आती है, जो न केवल बुद्धि के दाता हैं बल्कि हमारे जीवन के सारे विघ्नों को दूर करने वाले भी हैं। महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026  (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) एक ऐसा ही अवसर है जब आप अपने जीवन के सारे दुखों को भूलकर भगवान गणेश की शरण में जा सकते हैं।

भाद्रपद मास की यह चतुर्थी बहुत ही पवित्र मानी जाती है। आइए जानते हैं इस पावन दिन के महत्व और पूजा की गहराइयों को।

महा संकष्टी हरा चतुर्थी क्या है? (What is Maha Sankashti Hara Chaturthi?)

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को 'संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है। लेकिन जब यह चतुर्थी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आती है, तो इसे विशेष रूप से 'महा संकष्टी हरा चतुर्थी' या 'हेरम्ब संकष्टी' के नाम से जाना जाता है। 'संकष्टी हरा' का अर्थ है— संकटों को दूर करने वाली। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गणपति की आराधना करने से न केवल छोटे-मोटे विघ्न टलते हैं, बल्कि बड़े से बड़े कष्टों का भी समूल नाश हो जाता है।

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महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

साल 2026 में यह पावन व्रत अगस्त के आखिरी दिन पड़ रहा है, जो इसे और भी विशेष बनाता है।
व्रत की तिथि: 31 अगस्त 2026, सोमवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2026, रात 11:20 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026, रात 09:45 बजे तक
चंद्रोदय का समय: रात 09:05 बजे (नई दिल्ली के अनुसार)
विशेष टिप: संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है। इसलिए चंद्रोदय के समय का विशेष ध्यान रखें।


धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Religious and spiritual significance)

महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026  (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) का महत्व स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया था।
पापों का नाश: यह व्रत पिछले जन्मों के पापों के प्रभाव को कम करने की शक्ति रखता है।
सफलता का मार्ग: यदि आपके व्यापार या नौकरी में बार-बार रुकावटें आ रही हैं, तो यह व्रत 'विघ्नहर्ता' की विशेष कृपा दिलाता है।
मानसिक शांति: आज के तनावपूर्ण जीवन में, बप्पा का यह व्रत मन को स्थिरता और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।


विस्तृत पूजा विधि (pooja rituals)

maha sangda hara chaturthi 2026

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31 अगस्त 2026 को बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए आप इस विधि का पालन कर सकते हैं:
ब्रह्म मुहूर्त में जागें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें।
संकल्प: भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें— “हे गणपति, मैं अपने सभी संकटों की मुक्ति हेतु आज आपकी शरण में हूँ।"
स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
अभिषेक: बप्पा को जल और गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं क्योंकि सिंदूर गणेश जी को अत्यंत प्रिय है।
अर्पण: बप्पा को 21 दूर्वा (हरी घास) की गांठें चढ़ाएं। इसके साथ ही लाल फूल और अक्षत अर्पित करें।
भोग: मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
आरती: धूप-दीप जलाकर गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती गाएं।
चंद्र दर्शन: रात को चंद्रमा निकलने पर उन्हें दूध और जल से अर्घ्य दें और फिर फलाहार ग्रहण करें।

व्रत के नियम (fasting rules)

  • इस व्रत में दिन भर निराहार रहना सबसे उत्तम है, लेकिन स्वास्थ्य ठीक न हो तो दूध या फल ले सकते हैं।
  • व्रत के दौरान सात्विकता का पालन करें और किसी की निंदा न करें।
  • ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
  • अन्न का सेवन रात में चंद्र दर्शन के बाद ही करें।

व्रत के लाभ (Benefits)

  • यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख और उनकी उन्नति के लिए फलदायी है।
  • घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
  • करियर में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
  • असाध्य रोगों और भय से मुक्ति मिलती है।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)


क्या करें:

  • 'ॐ गं गणपतये नमः' का निरंतर जाप करें।
  • जरूरतमंदों को फल या अनाज का दान दें।
  • शाम की पूजा में गणेश जी को जनेऊ अर्पित करें।
  • बप्पा को लाल चंदन का तिलक लगाएं।

क्या न करें:

  • गणेश पूजन में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें।
  • पूजा के दौरान काले वस्त्र पहनने से बचें।
  • किसी भी पशु (विशेषकर चूहे) को कष्ट न पहुंचाएं।
  • चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत का पारण न करें।

पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथाओं के अनुसार,  महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026  (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) एक बार देवताओं पर भारी विपदा आई और वे अपनी रक्षा के लिए भगवान शिव के पास गए। शिव जी ने कार्तिकेय और गणेश जी से पूछा कि आप में से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है। तब भगवान गणेश ने अपनी बुद्धि और शक्ति का परिचय देते हुए सभी संकटों को पल भर में दूर कर दिया। तभी से उन्हें 'संकटहर्ता' कहा जाने लगा। भाद्रपद की यह चतुर्थी उसी दिव्य शक्ति का उत्सव है जिसने देवताओं के भी संकट हर लिए थे।

निष्कर्ष (Conclusion)

महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026  (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) केवल एक उपवास नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अहंकार को मिटाकर ईश्वर के प्रति पूरी तरह समर्पित होने का दिन है। 31 अगस्त को जब आप बप्पा की पूजा करें, तो विश्वास रखें कि वे आपकी हर पुकार सुन रहे हैं। विघ्नहर्ता आपके जीवन के सभी कांटों को हटाकर सुखों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026 (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) में कब है?

      यह व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा।

  1. क्या  महा संकष्टी हरा चतुर्थी 2026 (Maha Sankashti Hara Chaturthi 2026) में नमक खा सकते हैं?

     आप शाम की पूजा के बाद सेंधा नमक (Rock Salt) का उपयोग कर सकते हैं।

  1. गणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ानी चाहिए?

     गणेश जी को हमेशा 21 दूर्वा की गांठें चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  1. 31 अगस्त 2026 को चंद्रोदय का समय क्या है?

      नई दिल्ली में चंद्रोदय का समय रात 09:05 बजे है। स्थानीय पंचांग के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

  1. इस व्रत का मुख्य लाभ क्या है?

      यह व्रत जीवन की कठिन से कठिन बाधाओं को दूर करने और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम है।



Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.