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March 10, 2026 Blog

Maa Sheetala Chalisa : यहाँ पढ़े शीतला माता चालीसा के बोल और जाने इसका महत्त्व एवं लाभ

BY : Kartik Sharma – Vedic Chanting Expert & Content Curator

Sheetala Mata Chalisa: शीतला चालीसा का पाठ विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में बहुत लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से शरीर को बीमारियों से बचाव मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ मन को शांति देता है और परिवार के लिए मंगलकारी माना जाता है।

शीतला चालीसा के बारे में (About Sheetala Chalisa)

शीतला चालीसा (Sheetala Mata Chalisa) माता शीतला की स्तुति में रचित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्तोत्र है। हिंदू परंपरा में माता शीतला को चेचक, बुखार और त्वचा से जुड़ी बीमारियों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। भक्तजन उनकी आराधना करके अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की सुरक्षा की कामना करते हैं।

!! शीतला माता चालीसा !!

!! Sheetala Mata Chalisa !!

॥ दोहा॥

जय जय माता शीतला , तुमहिं धरै जो ध्यान ।

होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धी बल ज्ञान ॥

घट-घट वासी शीतला, शीतल प्रभा तुम्हार ।

शीतल छइयां में झुलई, मइयां पलना डार ॥

॥ चौपाई ॥

जय-जय-जय श्री शीतला भवानी ।

जय जग जननि सकल गुणधानी ॥

गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित ।

पूरण शरदचंद्र समसाजित ॥


विस्फोटक से जलत शरीरा ।

शीतल करत हरत सब पीड़ा ॥


मात शीतला तव शुभनामा ।

सबके गाढे आवहिं कामा ॥4॥


sheetala mata chalisa

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शोक हरी शंकरी भवानी ।

बाल-प्राणक्षरी सुख दानी ॥


शुचि मार्जनी कलश करराजै ।

मस्तक तेज सूर्य सम साजै ॥


चौसठ योगिन संग में गावैं ।

वीणा ताल मृदंग बजावै ॥


नृत्य नाथ भैरौं दिखलावैं ।

सहज शेष शिव पार ना पावैं ॥8॥


धन्य धन्य धात्री महारानी ।

सुरनर मुनि तब सुयश बखानी ॥


ज्वाला रूप महा बलकारी ।

दैत्य एक विस्फोटक भारी ॥


घर घर प्रविशत कोई न रक्षत ।

रोग रूप धरी बालक भक्षत ॥


हाहाकार मच्यो जगभारी ।

सक्यो न जब संकट टारी ॥12॥


तब मैंय्या धरि अद्भुत रूपा ।

कर में लिये मार्जनी सूपा ॥


विस्फोटकहिं पकड़ि कर लीन्हो ।

मूसल प्रमाण बहुविधि कीन्हो ॥


बहुत प्रकार वह विनती कीन्हा ।

मैय्या नहीं भल मैं कछु कीन्हा ॥


अबनहिं मातु काहुगृह जइहौं ।

जहँ अपवित्र वही घर रहि हो ॥16॥


अब भगतन शीतल भय जइहौं ।

विस्फोटक भय घोर नसइहौं ॥


श्री शीतलहिं भजे कल्याना ।

वचन सत्य भाषे भगवाना ॥


पूजन पाठ मातु जब करी है ।

भय आनंद सकल दुःख हरी है ॥


विस्फोटक भय जिहि गृह भाई ।

भजै देवि कहँ यही उपाई ॥20॥


कलश शीतलाका सजवावै ।

द्विज से विधीवत पाठ करावै ॥


तुम्हीं शीतला, जगकी माता ।

तुम्हीं पिता जग की सुखदाता ॥


तुम्हीं जगद्धात्री सुखसेवी ।

नमो नमामी शीतले देवी ॥


नमो सुखकरनी दु:खहरणी ।

नमो- नमो जगतारणि धरणी ॥24॥


नमो नमो त्रलोक्य वंदिनी ।

दुखदारिद्रक निकंदिनी ॥


श्री शीतला , शेढ़ला, महला ।

रुणलीहृणनी मातृ मंदला ॥


हो तुम दिगम्बर तनुधारी ।

शोभित पंचनाम असवारी ॥


रासभ, खर , बैसाख सुनंदन ।

गर्दभ दुर्वाकंद निकंदन ॥28॥


सुमिरत संग शीतला माई,

जाही सकल सुख दूर पराई ॥


गलका, गलगन्डादि जुहोई ।

ताकर मंत्र न औषधि कोई ॥


एक मातु जी का आराधन ।

और नहिं कोई है साधन ॥


निश्चय मातु शरण जो आवै ।

निर्भय मन इच्छित फल पावै ॥32॥


कोढी, निर्मल काया धारै ।

अंधा, दृग निज दृष्टि निहारै ॥


बंध्या नारी पुत्र को पावै ।

जन्म दरिद्र धनी होइ जावै ॥


मातु शीतला के गुण गावत ।

लखा मूक को छंद बनावत ॥


यामे कोई करै जनि शंका ।

जग मे मैया का ही डंका ॥36॥


भगत ‘कमल’ प्रभुदासा ।

तट प्रयाग से पूरब पासा ॥


ग्राम तिवारी पूर मम बासा ।

ककरा गंगा तट दुर्वासा ॥


अब विलंब मैं तोहि पुकारत ।

मातृ कृपा कौ बाट निहारत ॥


पड़ा द्वार सब आस लगाई ।

अब सुधि लेत शीतला माई ॥40॥


॥ दोहा ॥

यह चालीसा शीतला, पाठ करे जो कोय ।

सपनें दुख व्यापे नही, नित सब मंगल होय ॥

बुझे सहस्र विक्रमी शुक्ल, भाल भल किंतू ।

जग जननी का ये चरित, रचित भक्ति रस बिंतू ॥

॥ इति श्री शीतला चालीसा ॥

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शीतला चालीसा का महत्व (Importance Of Sheetala Chalisa)

  • माता शीतला की कृपा से रोगों और कष्टों से बचाव होने की मान्यता है।
  • इसका पाठ करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।
  • परिवार में सुख, समृद्धि और आरोग्य का वातावरण बना रहता है।
  • गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियों से राहत पाने के लिए भी इसका पाठ लाभकारी माना जाता है।

शीतला चालीसा के लाभ (Benefits Of Sheetala Chalisa)

  • रोगों और महामारी जैसी समस्याओं से रक्षा की भावना को मजबूत करता है।
  • परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य और सुख-शांति के लिए शुभ माना जाता है।
  • गर्मियों में शरीर और मन को संतुलित रखने में आध्यात्मिक सहारा देता है।
  • नकारात्मक विचारों को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।

शीतला चालीसा पाठ का शुभ दिन और समय (Auspicious Day and Time for reciting Sheetala Chalisa)

  • शुक्रवार का दिन माता शीतला की उपासना के लिए विशेष शुभ माना जाता है।
  • शीतला अष्टमी के दिन इसका पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद शांत मन से पाठ करना श्रेष्ठ रहता है।
  • पाठ करते समय स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।


शीतला चालीसा पाठ के नियम (Rules for reciting Shitala Chalisa)

  • पाठ से पहले स्थान और मन दोनों को शुद्ध और शांत रखें।
  • माता शीतला का ध्यान करते हुए चालीसा का स्पष्ट और सही उच्चारण करें।
  • एकाग्रता और श्रद्धा के साथ पाठ करना अधिक फलदायी माना जाता है।
  • यदि संभव हो तो किसी जानकार पंडित या गुरु से पूजा-पाठ की सही विधि भी जान सकते हैं।


निष्कर्ष

शीतला माता चालीसा (Sheetala Mata Chalisa) का पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और रोगों से सुरक्षा की भावना प्राप्त होती है। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में माता शीतला की आराधना का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से माता अपने भक्तों को स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इसलिए नियमित रूप से शीतला माता चालीसा का पाठ कर उनके प्रति अपनी भक्ति और आस्था प्रकट करना जीवन में शुभता और संतुलन लाने में सहायक माना जाता है। 

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Author: Kartik Sharma – Vedic Chanting Expert & Content Curator

Kartik Sharma, with 8 years’ experience in Vedic chanting, curates authentic Aartis, Chalisas, and Mantras, offering devotees accurate lyrics, meanings, and spiritual depth for devotional practice.