November 4, 2024 Blog

Aarti Kunj Bihari ki Lyrics: भक्ति भाव से जुड़ी श्रीकृष्ण की आरती के सम्पूर्ण बोल हिंदी में

BY : STARZSPEAK

Aarti Kunj Bihari ki Lyrics: "आरती कुंजबिहारी की” एक प्रसिद्ध आरती है, जो भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इसमें उनकी दिव्यता, बाल-लीलाओं और अद्भुत सौंदर्य की स्तुति की जाती है। इसे हिंदू परिवारों और मंदिरों में विशेष रूप से भगवान कृष्ण की पूजा के समय गाया जाता है, ताकि भगवान की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके। श्रीकृष्ण को यहाँ  कुंजबिहारी यानी "वनों में क्रीड़ा करने वाले" के रूप में संबोधित किया गया है।

इस आरती में कृष्ण के विभिन्न रूपों का वर्णन किया गया है - उनके सिर पर मोर पंख का मुकुट, उनके हाथ में बांसुरी, और उनकी वह मोहक छवि, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह उनके बाल सखा रूप, प्रेममयी लीलाओं और भक्तों की रक्षा करने वाले स्वरूप का प्रतीक है। हर पंक्ति भक्तों के मन में भगवान कृष्ण की मुरलीधारी छवि प्रस्तुत करती है, जिसमें वे वृंदावन में राधा और गोपियों के साथ लीलाएं करते हुए दिखाई देते हैं।

“आरती कुंजबिहारी की” (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics)  का गायन करने से मन को शांति, घर में सुख-समृद्धि और भगवान की कृपा का अनुभव होता है। यह आरती भक्तों को भगवान के स्नेह और दयालुता से जोड़ती है, जिससे उनके मन में भक्ति, आनंद और आंतरिक शांति का संचार होता है। कृष्ण भक्ति का यह सुंदर माध्यम भगवान के प्रेममय स्वरूप का स्मरण दिलाता है।


Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics


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आरती कुंजबिहारी की 

Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics 


आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
 
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
 
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंज बिहारी करने के लाभ (Benefits Of Aarti Kunj Bihari Ki)

“आरती कुंजबिहारी की” (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) का नियमित रूप से पाठ करने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे साधक के जीवन में खुशियाँ, सफलता, और समृद्धि का प्रवाह होने लगता है। इस आरती के माध्यम से भक्त की सभी इच्छाएँ पूरी होने लगती हैं। यदि आरती के साथ राधा-कृष्ण कवच भी धारण किया जाए, तो साधक को सुख का अनुभव होता है और उसके जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।

कृष्ण गुटिका का भी विशेष महत्व है। इसे धारण करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम और समझ बढ़ती है, जिससे दांपत्य जीवन में खुशियाँ और शांति बनी रहती हैं। यदि आरती का पाठ करते समय श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने बैठा जाए, तो जीवन की कई कठिनाइयों से मुक्ति मिल सकती है। साथ ही, कृष्ण माला धारण करने से साधक अपने भीतर साहस और आत्मविश्वास महसूस करता है और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है, जो उसे हर चुनौती का सामना करने की शक्ति देती है।


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