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October 26, 2026 Blog

Shakambhari Purnima 2027: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जब धरती सूखी पड़ जाए, नदियां थम जाएं और चारों ओर अन्न-जल का हाहाकार मच जाए, तब मां जगदम्बा अपने भक्तों की करुण पुकार सुनकर अन्न और वनस्पति की जननी बनकर प्रकट होती हैं। सनातन धर्म में पौष मास की पूर्णिमा का दिन अत्यंत पावन माना गया है, क्योंकि इसी दिन मां दुर्गा ने 'मां शाकंभरी' का रूप धारण करके पूरी सृष्टि को भीषण अकाल और भुखमरी से बचाया था। शाकंभरी पूर्णिमा 2027 (Shakambhari Purnima 2027) केवल एक धार्मिक तिथि नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, हरी सब्जियों, अन्न और मां भगवती की वात्सल्यमयी कृपा का महाउत्सव है। आइए जानते हैं कि वर्ष 2027 में शाकंभरी पूर्णिमा कब है (Shakambhari Purnima Kab Hai), इसका स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और किस विधि से पूजन करने पर मां अम्बे का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

यदि आप भी मां भगवती का असीम आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो शाकंभरी पूर्णिमा 2027 की तिथि (Shakambhari Purnima 2027 Date) का यह अवसर आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शाकंभरी पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Shakambhari Purnima Shubh Muhurat), दुर्गा पूजा विधि (Durga Puja Vidhi) और पौराणिक शाकंभरी पूर्णिमा व्रत कथा (Shakambhari Purnima Vrat Katha)।

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शाकंभरी पूर्णिमा क्या है (What is Shakambhari Purnima?)

पौष महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शाकंभरी पूर्णिमा का पर्व (Shakambhari Purnima Festival) के नाम से जाना जाता है। इस दिन पौष नवरात्रि (शाकंभरी नवरात्रि) का समापन भी होता है। 'शाकंभरी' शब्द का निर्माण दो शब्दों से हुआ है: 'शाक' यानी हरी सब्जियां या वनस्पति और 'भरी' यानी धारण करने वाली या पोषण करने वाली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां शाकंभरी की पूजा करने से घर के अन्नपूर्णा भंडार हमेशा भरे रहते हैं और परिवार में कभी भी भुखमरी, दरिद्रता या बीमारियां प्रवेश नहीं करतीं। इस पावन तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करने और मां को हरी सब्जियों व फलों का भोग लगाने की विशेष परंपरा है।

शाकंभरी पूर्णिमा 2027: तिथि और शुभ मुहूर्त (Shakambhari Purnima 2027 Date and Shubh Muhurat)

वर्ष 2027 में पौष मास की पूर्णिमा तिथि 22 जनवरी को पड़ रही है। इस दिन स्नान-दान और पूजा का विशेष महत्व होता है। शाकंभरी पूर्णिमा 2027 तिथि और मुहूर्त (Shakambhari Purnima 2027 Date and Time) की जानकारी नीचे दी गई है:

  • शाकंभरी पूर्णिमा तिथि (Shakambhari Purnima 2027 Date): 22 जनवरी 2027, शुक्रवार

  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 21 जनवरी 2027 को देर रात

  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 22 जनवरी 2027 को सायंकाल

  • स्नान और दान का शुभ मुहूर्त: 22 जनवरी 2027 को प्रातः 05:25 बजे से प्रातः 06:20 बजे तक

  • सत्यनारायण पूजा और शाकंभरी पूजन मुहूर्त: 22 जनवरी 2027 को प्रातः 07:15 बजे से दोपहर 11:15 बजे तक

  • चंद्रोदय समय: 22 जनवरी 2027 की शाम (स्थानीय पंचांग के अनुसार)

(नोट: सूर्योदय व्यापिनी पूर्णिमा तिथि के अनुसार 22 जनवरी 2027 को ही शाकंभरी पूर्णिमा का स्नान, दान और पूजन किया जाएगा।)

शाकंभरी पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Significance of Shakambhari Purnima)

शाकंभरी पूर्णिमा 2027 (Shakambhari Purnima 2027) का महत्व शास्त्रों में अत्यंत महान बताया गया है। मां शाकंभरी को सब्जियों, फलों, जड़ी-बूटियों और सभी वनस्पतियों की देवी माना गया है।

आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। जो भक्त इस दिन मां शाकंभरी की पूजा करते हैं, उनके जीवन से भुखमरी और कंगाली का नाश होता है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा और अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है। पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण कथा कराने और शाकंभरी पूर्णिमा के उपाय (Shakambhari Purnima Upay) के रूप में गरीबों को ताजा अनाज या हरी सब्जियां दान करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और घर में आरोग्य का वास होता है।

शाकंभरी पूर्णिमा की सम्पूर्ण पूजा विधि (Shakambhari Purnima Puja Vidhi)

Shakambhari Purnima 2027 festival

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मां शाकंभरी की पूजा में हरी सब्जियों और प्राकृतिक फलों का विशेष प्रयोग किया जाता है। आइए जानते हैं शाकंभरी पूर्णिमा पूजा विधि (Shakambhari Purnima Puja Vidhi) चरण-दर-चरण:

  1. प्रातः स्नान और संकल्प: पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर पर स्नान कर रहे हों तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर में उत्तर या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा या मां शाकंभरी की प्रतिमा स्थापित करें।

  3. कलश स्थापना और दीप प्रज्वलन: चौकी पर कलश रखें और शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।

  4. सब्जियों और फलों का भव्य श्रृंगार: मां शाकंभरी को ताजी हरी सब्जियां जैसे पालक, लौकी, तोरई, गाजर, गोभी, धनिया और मौसमी फल अर्पित करें।

  5. रोली, चंदन और अक्षत अर्पण: मां को रोली, लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत और लाल फूल चढ़ाएं।

  6. विशेष भोग: मां को खीर, हलवा, माखन और हरी सब्जियों के व्यंजन का भोग लगाएं।

  7. कथा और आरती: शाकंभरी पूर्णिमा कथा (Shakambhari Purnima Katha) पढ़ें या सुनें। इसके बाद शाकंभरी देवी मंत्र (Shakambhari Devi Mantra) 'ॐ श्री शाकंभरी देव्यै नमः' का 108 बार जाप करें और मां की आरती करके सभी में प्रसाद बांटें।

  8. चंद्रदेव को अर्घ्य: रात में चंद्रमा निकलने पर तांबे के लोटे में जल, दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दें।

शाकंभरी पूर्णिमा व्रत और पूजा के नियम (Shakambhari Purnima Rules)

  • पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना आवश्यक माना जाता है।

  • पूजा में मां शाकंभरी को ताजी और बिना कटी हुई हरी सब्जियां ही अर्पित करें।

  • पूरा दिन मन में सात्विक विचार रखें और किसी के प्रति क्रोध या ईर्ष्या न करें।

  • इस दिन भोजन में लहसुन, प्याज या मांसाहार का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रखें।

इस पावन पर्व से मिलने वाले लाभ (Benefits of Shakambhari Purnima)

  • अन्न और धन की प्राप्ति: शाकंभरी पूर्णिमा के फायदे (Benefits of Shakambhari Purnima) से घर में कभी भी अन्न-जल की कमी नहीं होती और रसोई घर समृद्ध रहता है।

  • आरोग्य और उत्तम स्वास्थ्य: ताजी हरी सब्जियों और वनस्पतियों की पूजा से शरीर निरोगी बनता है और बीमारियां दूर रहती हैं।

  • मानसिक शांति और सौहार्द: चंद्रदेव को अर्घ्य देने से तनाव मिटता है और परिवार में खुशहाली आती है।

  • प्रकृति दोष से मुक्ति: प्रकृति की देवी की पूजा करने से वास्तु दोष और प्राकृतिक बाधाएं दूर होती हैं।

क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)

क्या करें:

  • गरीबों और जरूरतमंदों को हरी सब्जियां, अनाज, फल और वस्त्र दान करें।

  • घर के मुख्य द्वार पर तोरण लगाएं और दीप प्रज्वलित करें।

  • गाय को हरी घास या पालक खिलाएं।

क्या न करें:

  • इस दिन हरी सब्जियों को व्यर्थ में न फेंकें और न ही उनका अपमान करें।

  • पूर्णिमा के दिन किसी निर्धन या भिक्षुक को अपने द्वार से खाली हाथ न लौटाएं।

  • घर में क्लेश या गाली-गलौज न करें।

  • तामसिक चीजों और मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।

मां शाकंभरी की पौराणिक कथा (Shakambhari Devi Story)

पौराणिक शाकंभरी पूर्णिमा व्रत कथा (Shakambhari Purnima Vrat Katha) के अनुसार, एक बार पृथ्वी पर दुर्गमासुर नाम के दैत्य ने भारी उत्पात मचाया। उसने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके चारों वेदों को चुरा लिया और अपनी शक्ति से ऐसा दुष्चक्र रचा कि धरती पर सौ वर्षों तक वर्षा ही नहीं हुई।

पूरी पृथ्वी पर भीषण अकाल पड़ गया। नदियां, तालाब और कुएं सूख गए। पेड़-पौधे और फसलें नष्ट हो गईं। जीव-जंतु, पशु-पक्षी और मनुष्य भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मरने लगे। चारों ओर केवल हाहाकार और लाचार चीत्कारें सुनाई देने लगीं।

तमाम ऋषि-मुनि और देवता एकत्र होकर शिवालिक पर्वत श्रृंखला (सहारनपुर क्षेत्र) में पहुंचे और अश्रुपूर्ण नेत्रों से भगवती जगदम्बा की आराधना करने लगे। भक्तों की करुण पुकार सुनकर मां भगवती का हृदय पसीज गया। वे अपने अनंत नेत्रों से आंसू बहाती हुई प्रकट हुईं। उनके आंसुओं से धरती पर पुनः नदियां और तालाब बहने लगे।

इसके बाद मां भगवती ने अपने शरीर से अनगिनत हरी सब्जियां, फल, जड़ी-बूटियां, कंदमूल और अनाज उत्पन्न करके पूरी दुनिया की भूख मिटाई। शाक (सब्जियां) से पूरी दुनिया का भरण-पोषण करने के कारण मां भगवती का नाम 'शाकंभरी देवी' पड़ा। इसके बाद मां ने दुर्गमासुर दैत्य का वध करके वेदों का उद्धार किया। जिस दिन मां ने यह अवतार धारण करके सृष्टि को अकाल से मुक्त किया, वह पौष मास की पूर्णिमा का दिन था।

निष्कर्ष (Conclusion)

शाकंभरी पूर्णिमा 2027 (Shakambhari Purnima 2027) का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति ही हमारी असली माता है जो हर परिस्थिति में हमारा पालन-पोषण करती है। वर्ष 2027 में 22 जनवरी को मिलने वाले इस पावन अवसर पर मां शाकंभरी का ध्यान करें, हरी सब्जियों का दान करें और प्रकृति का सम्मान करने का संकल्प लें। मां अम्बे की कृपा से आपकी झोली हमेशा अन्न, धन, स्वास्थ्य और खुशियों से भरी रहेगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: शाकंभरी पूर्णिमा 2027 (Shakambhari Purnima 2027) में कब है?

शाकंभरी पूर्णिमा का पावन पर्व 22 जनवरी 2027, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

Q2: मां शाकंभरी को किसका अवतार माना जाता है?

मां शाकंभरी को आदिशक्ति मां दुर्गा का सौम्य और वात्सल्यमयी अवतार माना जाता है।

Q3: इस दिन पूजा में कौन सी चीजें चढ़ाना विशेष माना जाता है?

इस दिन ताजी हरी सब्जियां जैसे पालक, लौकी, तोरई, गाजर, मौसमी फल और खीर का भोग चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Q4: शाकंभरी नवरात्रि कब से कब तक होती है?

पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर पौष पूर्णिमा तक शाकंभरी नवरात्रि मनाई जाती है।

Q5: इस दिन किन वस्तुओं का दान करना चाहिए?

इस दिन गरीबों को हरी सब्जियां, फल, नया अन्न, तिल, गुड़ और वस्त्र दान करना विशेष फलदायी माना गया है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.