सर्द हवाओं की नरमी, गगन में तैरती रंग-बिरंगी पतंगें और घर-घर में तिल-गुड़ की भीनी-भीनी खुशबू, यह इशारा है कि वर्ष का सबसे पावन और उमंग से भरा पर्व आ चुका है। मकर संक्रांति केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की आत्मा है जो प्रकृति, सूर्यदेव और मनुष्य के अटूट रिश्ते को दर्शाती है। यह वह पावन समय है जब भगवान सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं और दुनिया को अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इस पावन अवसर को हम मकर संक्रांति 2027 (Makar Sankranti 2027) के रूप में मनाते हैं।
यदि आप भी सूर्यदेव और शनिदेव की असीम कृपा पाना चाहते हैं, तो मकर संक्रांति 2027 की तिथि (Makar Sankranti 2027 Date) का यह दिन आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति की सही तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, सूर्य देव पूजा विधि (Surya Dev Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।
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सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना संक्रांति कहलाता है। जब प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे मकर संक्रांति का पर्व (Makar Sankranti Festival) कहा जाता है। इस दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है। मकर संक्रांति के साथ ही सभी तरह के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन संस्कार पुनः आरंभ हो जाते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे उत्तरायण, पोंगल, बिहू और खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है।
वर्ष 2027 में मकर संक्रांति का पावन पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। संक्रांति के दिन पुण्य काल और महा पुण्य काल में किए गए स्नान और दान का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti Shubh Muhurat) की जानकारी नीचे दी गई है:
मकर संक्रांति तिथि (Makar Sankranti 2027 Date): 15 जनवरी 2027, शुक्रवार
मकर संक्रांति का क्षण: 14 जनवरी 2027 को देर रात / 15 जनवरी को तड़के
मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त (Makar Sankranti Punya Kaal): 15 जनवरी 2027 को प्रातः 07:15 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
मकर संक्रांति महा पुण्य काल मुहूर्त (Makar Sankranti Maha Punya Kaal): 15 जनवरी 2027 को प्रातः 07:15 बजे से प्रातः 09:00 बजे तक
(नोट: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के समय के अनुसार 15 जनवरी 2027 को उदयातिथि में ही सूर्य देव का पूजन, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का कार्य श्रेष्ठ माना जाएगा।)
मकर संक्रांति का पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने स्वेच्छा से अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की ही प्रतीक्षा की थी, क्योंकि मान्यता है कि उत्तरायण में प्राण त्यागने से आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है।
इस दिन पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा जी में स्नान करने से जन्म जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। तिल दान (Sesame Donation) और गुड़ का दान करने से शनिदेव और सूर्यदेव दोनों प्रसन्न होते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जिस तरह गुड़ तिल से मिलकर मिठास घोलता है, उसी तरह हमें भी अपने व्यवहार में मिठास और कड़वाहट से दूरी बनानी चाहिए।

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मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य की विशेष कृपा पाने के लिए पूरे विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण पूजा विधि:
पवित्र स्नान: मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि नदी जाना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें。
सूर्य देव को अर्घ्य: स्नान के बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल, अक्षत, रोली, लाल फूल और थोड़ा तिल डालकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र (Surya Mantra) 'ॐ सूर्याय नमः' या गायत्री मंत्र का जाप करें。
पूजा स्थल की सफाई: घर के मंदिर में दीपक जलाएं और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करें。
भोग अर्पित करें: सूर्य देव और श्री हरि को तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और फल का भोग लगाएं。
दान का संकल्प: पूजा के बाद तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र, उड़द दाल और चावल का स्पर्श करके दान करने का संकल्प लें और किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को दें。
संक्रांति के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठना आवश्यक माना जाता है。
इस दिन भोजन में तिल और उड़द दाल की खिचड़ी का सेवन करना शुभ होता है。
पूरा दिन मन में सात्विक विचार रखें और सत्य बोलने का प्रयास करें。
बिना स्नान किए किसी भी वस्तु का सेवन न करें और न ही दान सामग्री को बिना स्पर्श किए दें。
आरोग्य और तेज की प्राप्ति: सूर्यदेव प्रत्यक्ष देवता हैं, उनकी उपासना से शरीर के रोग दूर होते हैं और चेहरे पर तेज आता है。
शनि दोष से मुक्ति: तिल का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और कुंडली से साढ़ेसाती व ढैय्या का प्रभाव कम होता है。
पुण्य और मोक्ष: संक्रांति पर किया गया दान कभी समाप्त नहीं होता, इसका फल पीढ़ियों तक प्राप्त होता है。
सुख और समृद्धि: घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं रहती, व्यापार और नौकरी में उन्नति होती है。
क्या करें:
घर के सभी लोग तिल और गुड़ का सेवन अवश्य करें。
गरीबों, असहायों और गाय को तिल, गुड़ व हरा चारा खिलाएं。
घर की छत पर पतंग उड़ाकर इस पर्व का आनंद लें और खुशियां बांटें。
क्या न करें:
मकर संक्रांति के दिन लहसुन, प्याज या मांसाहार का सेवन भूलकर भी न करें。
इस दिन किसी भिक्षुक या गरीब को अपने द्वार से खाली हाथ न लौटाएं。
घर में कलह, गाली-गलौज या किसी का अपमान न करें。
तुलसी पत्र को संक्रांति के दिन न तोड़ें。
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान सूर्य और उनके पुत्र शनिदेव के बीच कड़वाहट थी। शनिदेव के काले रंग और स्वभाव के कारण सूर्यदेव उनसे अप्रसन्न रहते थे, जिसके कारण उन्होंने शनिदेव और उनकी माता छाया को अपने से अलग कर दिया था। इससे क्रुद्ध होकर शनिदेव ने सूर्यदेव को कुष्ठ रोग का शाप दे दिया था।
बाद में सूर्यदेव की दूसरी पत्नी के पुत्र संज्ञा पुत्र ने सूर्यदेव को रोगमुक्त किया। तब सूर्यदेव ने क्रोध में आकर शनिदेव का घर (कुंभ राशि) जला दिया। जब सूर्यदेव बाद में अपने पुत्र शनि के घर पहुंचे, तो देखा कि वहां सब कुछ जलकर राख हो चुका था, केवल काले तिल बचे थे।
शनिदेव ने अपने पिता सूर्यदेव का स्वागत उसी काले तिल और जल से किया। शनिदेव के इस भक्तिभाव से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने उन्हें गले से लगा लिया और आशीर्वाद दिया कि जब भी वे मकर राशि (शनि की राशि) में आएंगे, तो उनका घर धन-धान्य से भर जाएगा। सूर्यदेव ने कहा कि इस दिन जो भी मुझे तिल अर्पित करेगा, उसे जीवन में कभी कष्ट नहीं होगा। तभी से मकर संक्रांति पर तिल से पूजा और दान की परंपरा चली आ रही है।
मकर संक्रांति का यह पावन पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर जाने, दिलों की कड़वाहट मिटाने और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश देता है। वर्ष 2027 में 15 जनवरी को मिलने वाला यह शुभ अवसर आपके जीवन में नई उमंग, अच्छा स्वास्थ्य और अपार समृद्धि लेकर आए। आइए, इस दिन हम सब सूर्यदेव की उपासना करें, तिल-गुड़ की मिठास बांटे और अपनों के साथ मकर संक्रांति 2027 (Makar Sankranti 2027) को धूमधाम से मनाएं।
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Q1: मकर संक्रांति 2027 (Makar Sankranti 2027) में कब है?
मकर संक्रांति का पावन पर्व 15 जनवरी 2027, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
Q2: मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी क्यों खाई जाती है?
खिचड़ी में चावल (सूर्य), उड़द दाल (शनि), हल्दी (गुरु) और घी (शुक्र) का मिश्रण होता है, जिससे सभी ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है और पाचन स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।
Q3: संक्रांति पर तिल का क्या महत्व है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई थी। तिल का दान करने से शनि दोष दूर होता है और आरोग्य मिलता है।
Q4: क्या मकर संक्रांति पर गंगा स्नान जरूरी है?
यदि गंगा जी जाना संभव न हो, तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान करने से समान पुण्य फल मिलता है।
Q5: मकर संक्रांति पर किन वस्तुओं का दान करना चाहिए?
इस दिन तिल, गुड़, कंबल, नए वस्त्र, खिचड़ी सामग्री, घी और तांबे के बर्तन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.