जब समाज में अधर्म, अन्याय और अत्याचार का अंधकार गहराने लगा था, तब एक ऐसी दिव्य आत्मा का अवतरण हुआ जिसने शोषितों को साहस और निर्भयता का पाठ पढ़ाया। 'चिड़ियों से मैं बाज़ लड़ाऊं, गीदड़ों को मैं शेर बनाऊं' का उद्घोष करने वाले सिखों के दसवें गुरु, संत-सिपाही गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती न केवल सिख समुदाय बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन त्याग, धर्म, सत्य और वीरता की अनूठी मिसाल है। इस पावन पर्व को हम गुरु गोबिंद सिंह जयंती 2027 (Guru Gobind Singh Jayanti 2027) के रूप में मनाते हैं।
यदि आप भी गुरु साहिब के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारना चाहते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं, तो गुरु गोबिंद सिंह जयंती 2027 की तिथि (Guru Gobind Singh Jayanti 2027 Date) का यह प्रकाश पर्व आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन प्रकाश पर्व की सही तिथि, शुभ समय, गुरु गोबिंद सिंह जी प्रकाश पर्व (Guru Gobind Singh Prakash Parv) का महत्व और उनकी पौराणिक गाथा।
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सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्मदिवस को गुरुपर्व (Gurpurab) या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म पौष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पटना साहिब में हुआ था। उन्होंने मात्र 9 वर्ष की आयु में गुरु गद्दी संभाली थी। गुरु गोबिंद सिंह जी एक महान योद्धा, कवि, ज्ञानी और आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे। उन्होंने ही वर्ष 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना (Khalsa Panth Sthapana) की थी और सिखों को 'पांच ककार' (केश, कड़ा, कृपाण, कंगा और कच्छा) धारण करने का नियम दिया था। उन्होंने गुरु परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी' को सिखों के शाश्वत गुरु के रूप में घोषित किया।
वर्ष 2027 में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा। प्रकाश पर्व शुभ मुहूर्त (Prakash Parv Shubh Muhurat) और तिथियों की जानकारी नीचे दी गई है:
गुरु गोबिंद सिंह जयंती तिथि (Guru Gobind Singh Jayanti 2027 Date): 15 जनवरी 2027, शुक्रवार
पौष शुक्ल सप्तमी तिथि प्रारम्भ: 14 जनवरी 2027 को देर रात
पौष शुक्ल सप्तमी तिथि समाप्त: 15 जनवरी 2027 को संध्या काल में
प्रकाश पर्व पर प्रभात फेरी और दीवान समय: 15 जनवरी 2027 को प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ
(नोट: नानकशाही कैलेंडर और नानकशाही पंचांग के अनुसार 15 जनवरी 2027 को ही पूरे देश और दुनिया में गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व मनाया जाएगा।)
गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन हमें सिखाता है कि धर्म और सत्य की रक्षा के लिए बड़े से बड़े त्याग से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने चारों पुत्रों (साहिबजादों) और पिता गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान दे दिया, लेकिन कभी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया।
इस पावन दिन पर गुरुद्वारों में विशेष पाठ, कीर्तन और नगर कीर्तन (Nagar Kirtan) निकाले जाते हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी ने समाज से ऊंच-नीच, जाति-पाति और भेदभाव को समाप्त कर समानता का संदेश दिया। इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व यह है कि यह हमारे भीतर के भय को दूर कर सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति और प्रेरणा देता है।

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प्रकाश पर्व के दिन गुरु गोबिंद सिंह जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु विशेष सेवा और अरदास करते हैं। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण विधि:
प्रातः स्नान और स्वच्छता: प्रकाश पर्व के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें。
गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकना: पास के गुरुद्वारा साहिब जाएं, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष श्रद्धापूर्वक माथा टेकें और परिक्रमा करें。
अखंड पाठ और गुरबाणी श्रवण: इस दिन गुरुद्वारों में हो रहे 'श्री अखंड पाठ साहिब' का विश्राम होता है। शबद कीर्तन और गुरबाणी मन लगाकर सुनें。
कढ़ा प्रसाद ग्रहण करना: गुरु घर का पवित्र कढ़ा प्रसाद (Kada Prasad) दोनों हाथों को जोड़कर श्रद्धा से ग्रहण करें。
सेवा और लंगर: गुरुद्वारे में लंगर पकाने, परोसने या बर्तन धोने की सेवा करें। गुरु का लंगर (Guru Ka Langar) में सभी के साथ एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद छकें。
घर पर दीप प्रज्वलन: शाम के समय अपने घर में दीये जलाएं, 'जाप साहिब' या 'चौपई साहिब' का पाठ करें और वाहेगुरु का नाम जपें。
हमेशा निष्काम भाव से दूसरों की सेवा करें और किसी के प्रति मन में भेदभाव न रखें。
अपनी कमाई का दशमेश यानी 10 प्रतिशत हिस्सा जरूरतमंदों की मदद और धार्मिक कार्यों में दान करें。
वाणी में नम्रता रखें और किसी भी असहाय व्यक्ति पर हो रहे अत्याचार का विरोध करें。
गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दी गई शिक्षाओं का पालन करते हुए सात्विक और अनुशासित जीवन जिएं。
आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि: गुरु साहिब की जीवनी पढ़ने और उनके विचारों को अपनाने से जीवन की कठिन परिस्थितियों से लड़ने का अटूट साहस मिलता है。
मानसिक शांति और भक्ति: गुरबाणी और कीर्तन सुनने से मन के सारे तनाव दूर होते हैं और आत्मिक शांति मिलती है。
अहंकार का नाश: गुरुद्वारे में निष्काम सेवा करने से मनुष्य का अहंकार समाप्त होता है और विनम्रता आती है。
सद्भावना और भाईचारा: लंगर और संगत में शामिल होने से समाज में एकता और प्रेम का भाव बढ़ता है。
क्या करें:
गुरुद्वारा साहिब जाते समय अपना सिर कपड़े या रुमाल से ढककर रखें。
जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन और शिक्षण सामग्री का दान करें。
'वाहेगुरु' नाम का जाप करें और गुरु साहिब की वाणी का अध्ययन करें。
क्या न करें:
गुरुद्वारा साहिब परिसर के भीतर या आसपास नशा या नशीले पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें。
इस पावन दिन पर क्रोध, अहंकार या किसी के प्रति कटु शब्दों का प्रयोग न करें。
लंगर में भोजन का अपमान न करें और उतना ही लें जितना खा सकें。
गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन की सबसे महान घटना आनंदपुर साहिब में पांच प्यारे (Panj Pyare) और खालसा पंथ की स्थापना थी। वर्ष 1699 में बैसाखी के दिन गुरु साहिब ने एक बड़ा दरबार सजाया। हजारों की संख्या में संगत उपस्थित थी। अचानक गुरु साहिब हाथ में नंगी तलवार लेकर मंच पर आए और कड़कती आवाज में बोले, "मुझे धर्म की रक्षा के लिए एक शीश चाहिए, कौन अपना शीश देने को तैयार है?"
सभा में सन्नाटा छा गया। लेकिन तभी एक दयाराम नाम के सिख उठे और बोले, "सच्चे पातशाह, मेरा शीश हाजिर है।" गुरु साहिब उन्हें तंबू के भीतर ले गए और थोड़ी देर में खून से सनी तलवार लेकर बाहर आए। उन्होंने पुनः दूसरे शीश की मांग की। इस प्रकार एक-एक करके धर्मदास, हिम्मत राय, मोहकम चंद और साहब चंद आगे आए।
गुरु साहिब ने तंबू से उन पांचों को सुंदर पोशाक और शस्त्रों से सजाकर बाहर लाया। इन्हें 'पांच प्यारे' कहा गया। गुरु साहिब ने लोहे के बाटे में जल और पताशे डालकर अपनी तलवार से हिलाते हुए 'अमृत' तैयार किया। उन्होंने पहले पांच प्यारों को अमृत छकाया और फिर स्वयं उनके हाथों से अमृत छककर कहा, "वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह।" यह घटना सिखाती है कि धर्म और कर्तव्य से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं है।
गुरु गोबिंद सिंह जी केवल एक इतिहास पुरुष नहीं, बल्कि युगों-युगों तक मानवता को सही मार्ग दिखाने वाले ज्ञान के पुंज हैं। उनका जीवन हमें विषम परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों पर अडिग रहना सिखाता है। वर्ष 2027 में 15 जनवरी को मनाए जाने वाले इस गुरु गोबिंद सिंह प्रकाश पर्व (Guru Gobind Singh Prakash Parv 2027) पर आइए हम गुरु साहिब के चरणों में नमन करें, उनके बताए सत्य, सेवा और त्याग के रास्ते पर चलने का संकल्प लें और अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
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Q1: गुरु गोबिंद सिंह जयंती 2027 (Guru Gobind Singh Jayanti 2027) में कब है?
गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती 15 जनवरी 2027, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
Q2: खालसा पंथ की स्थापना किसने और कब की थी?
खालसा पंथ की स्थापना सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने वर्ष 1699 में बैसाखी के दिन की थी।
Q3: पांच ककार कौन-कौन से हैं?
पांच ककार हैं: केश, कड़ा, कृपाण, कंगा और कच्छा। इन्हें धारण करना हर खालसा सिख के लिए अनिवार्य है।
Q4: गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म कहाँ हुआ था?
गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म बिहार के पटना साहिब में पौष शुक्ल सप्तमी तिथि को हुआ था।
Q5: प्रकाश पर्व के दिन गुरुद्वारे में क्या विशेष होता है?
इस दिन तड़के नगर कीर्तन, प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं, अखंड पाठ साहिब का भोग पड़ता है, विशेष शबद कीर्तन होता है और विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.