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October 15, 2026 Blog

Lohri 2027: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और दुल्ला भट्टी की कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

सर्द रातों की ठिठुरन के बीच जब ढोल की थाप गूंजती है और आग की लपटें गगन छूने लगती हैं, तो समझ जाइए कि खुशियों का पावन पर्व लोहड़ी आ गया है। मूंगफली की सोंधी खुशबू, रेवड़ी और गजक की मिठास और अपनों का साथ इस त्यौहार में चार चांद लगा देता है। मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा का यह प्रमुख पर्व केवल फसल पकने की खुशी मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह परिवार को एक सूत्र में बांधने और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनुपम जरिया है। इस पावन अवसर को हम लोहड़ी 2027 (Lohri 2027) के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं।

यदि आप भी अपने जीवन में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली चाहते हैं, तो लोहड़ी 2027 की तिथि (Lohri 2027 Date) का यह दिन आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, लोहड़ी पूजा विधि (Lohri Puja Vidhi) और दुल्ला भट्टी की कथा।

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लोहड़ी क्या है (What is Lohri?)

लोहड़ी का त्यौहार (Lohri Festival) पौष मास के अंतिम दिन और मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। यह पर्व नई फसल के आने और रबी की फसल (विशेषकर गेहूं और सरसों) के पकने की खुशी में मनाया जाता है। किसान अपनी मेहनत की फसल को देखकर ईश्वर को धन्यवाद देते हैं। शाम के समय चौपाल या घर के आंगन में लकड़ी और उपलों की पवित्र अग्नि जलाई जाती है। लोग उस अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, उसमें रेवड़ी, मूंगफली, तिल और मक्का अर्पित करते हैं और ढोल की धुन पर भांगड़ा और गिद्दा करके अपनी खुशी जाहिर करते हैं।

लोहड़ी 2027: तिथि और शुभ मुहूर्त (Lohri 2027 Date and Shubh Muhurat)

वर्ष 2027 में मकर संक्रांति की तिथि के अनुसार लोहड़ी की सही तारीख तय की गई है। इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई पूजा परिवार में सुख-समृद्धि लाती है। लोहड़ी मुहूर्त (Lohri Muhurat) की तालिका नीचे दी गई है:

  • लोहड़ी तिथि (Lohri 2027 Date): 14 जनवरी 2027, गुरुवार

  • लोहड़ी संक्रांति का क्षण: 14 जनवरी 2027 को दोपहर बाद

  • लोहड़ी प्रज्वलन और पूजा का शुभ मुहूर्त (Lohri Puja Timing): 14 जनवरी 2027 की शाम 05:45 बजे से रात 08:15 बजे तक

  • पूजा अवधि: लगभग 2 घंटे 30 मिनट

(नोट: कई बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को होने पर लोहड़ी 14 जनवरी को मनाई जाती है, वर्ष 2027 में संक्रांति काल 14 जनवरी को होने से यह पर्व इसी दिन धूमधाम से मनाया जाएगा।)

लोहड़ी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Significance of Lohri)

Lohri 2027 festival

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धार्मिक दृष्टिकोण से लोहड़ी की अग्नि को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह अग्नि भगवान सूर्य और अग्निदेव का प्रतीक है। सर्द मौसम के खत्म होने और उत्तरायण सूर्य के आगमन का यह पर्व जीवन में नए प्रकाश का संदेश देता है।

आध्यात्मिक रूप से मान्यता है कि पवित्र लोहड़ी की अग्नि में तिल, गुड़ और मूंगफली समर्पित करने से घर की दरिद्रता दूर होती है। नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए यह पर्व बहुत शुभ माना जाता है। उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए अग्निदेव से प्रार्थना की जाती है। यह पर्व मन के अहंकार और द्वेष को भस्म कर रिश्तों में मिठास घोलने का संदेश देता है।

लोहड़ी की सम्पूर्ण पूजा विधि (Lohri Puja Vidhi)

लोहड़ी की शाम को विधि-विधान से पूजा करने से घर में खुशहाली आती है। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण पूजा विधि:

  1. स्थान की सफाई और सजावट: शाम को घर के आंगन या खुली जगह को साफ करें और वहां गोबर के उपले, सूखी लकड़ी और तिल के पौधे (तिलकुट) से लोहड़ी की ढेरी बनाएं。

  2. अग्नि प्रज्वलन: शुभ मुहूर्त में परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर पवित्र अग्नि प्रज्वलित करें。

  3. भगवान का ध्यान: हाथ जोड़कर अग्निदेव, सूर्यदेव और माता लोहड़ी का ध्यान करें और सुख-शांति की प्रार्थना करें。

  4. अग्नि की परिक्रमा: पवित्र अग्नि के चारों ओर 3, 7 या 11 बार परिक्रमा (प्रदक्षिणा) करें。

  5. अर्घ्य और आहुति: परिक्रमा के दौरान अग्नि में रेवड़ी, गजक, मूंगफली, खील, मक्का (पॉपकॉर्न) और तिल अर्पित करें。

  6. भोग और प्रसाद वितरण: पूजा के बाद घर में बने सरसों के साग, मक्के की रोटी और खीर का भोग लगाएं और सभी में प्रसाद बांटें。

लोहड़ी पूजा और उत्सव के नियम (Lohri Rules)

  • लोहड़ी के दिन घर में सात्विक और शुद्ध भोजन ही बनाना चाहिए。

  • पवित्र अग्नि में अर्पित की जाने वाली सामग्री ताजी और स्वच्छ होनी चाहिए。

  • नवविवाहित जोड़ों को लोहड़ी की अग्नि के फेरे लेते समय बड़ों का आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए。

  • पूरा दिन घर में उत्सव का माहौल रखें और किसी के प्रति कटु विचार न लाएं。

लोहड़ी के पावन पर्व से मिलने वाले लाभ (Benefits of Lohri)

  • पारिवारिक एकजुटता: यह पर्व बिखरे हुए परिवारों को करीब लाता है और रिश्तों में मिठास बढ़ाता है。

  • सकारात्मक ऊर्जा: घर के बाहर जलाई गई पवित्र अग्नि वातावरण से नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करती है。

  • संतान सुख और सौभाग्य: नवविवाहितों और बच्चों के लिए इस दिन की गई पूजा जीवन में सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य लाती है。

  • समृद्धि का वास: फसल और अन्न की पूजा करने से घर के अन्नपूर्णा भंडार हमेशा भरे रहते हैं。

क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)

क्या करें:

  • घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और दीप जलाएं。

  • जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल और अन्न का दान करें。

  • लोकगीत गाएं और परिजनों के साथ मिलकर उत्सव मनाएं。

क्या न करें:

  • पवित्र अग्नि में प्लास्टिक या कोई अशुद्ध वस्तु न डालें。

  • लोहड़ी के दिन किसी गरीब या बुजुर्ग का अपमान न करें。

  • इस दिन मांसाहार या मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित रखें。

  • घर में कलह या झगड़ा न करें。

लोहड़ी की लोककथा: दुल्ला भट्टी की कहानी (Lohri Dulla Bhatti Story)

लोहड़ी का त्यौहार दुल्ला भट्टी की कहानी (Dulla Bhatti Story) के बिना अधूरा माना जाता है। मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दुल्ला भट्टी नाम का एक वीर योद्धा पंजाब में रहता था। उसे पंजाब का नायक कहा जाता था।

उस समय जमींदार गरीब लड़कियों को जबरन अमीर लोगों को बेच देते थे। जब दुल्ला भट्टी को पता चला कि दो अनाथ बहने सुंदरी और मुंदरी को जबरन ले जाया जा रहा है, तो उसने उन्हें बचाया। दुल्ला भट्टी ने जंगल में ही लोहड़ी की अग्नि जलाकर उन दोनों लड़कियों का विवाह योग्य युवकों से कराया और स्वयं उनका पिता बनकर कन्यादान किया। उसके पास उपहार देने के लिए कुछ नहीं था, इसलिए उसने शक्कर का एक सेर उन लड़कियों की झोली में डाला।

तभी से दुल्ला भट्टी की याद में 'सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो, दुल्ला भट्टी वाला हो' लोकगीत गाया जाता है। यह कथा हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने और असहायों की मदद करने की सीख देती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

लोहड़ी केवल एक पारंपरिक त्यौहार नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति, आपसी प्रेम और भाईचारे का जीवंत प्रतीक है। वर्ष 2027 में 14 जनवरी को मनाया जाने वाला लोहड़ी 2027 (Lohri 2027) का यह पावन पर्व आपके जीवन के सारे दुखों और नकारात्मकता को अग्नि में भस्म कर दे। आइए, इस लोहड़ी पर हम अपने दिलों से कड़वाहट मिटाएं और भक्ति, प्रेम और उमंग के साथ नए जीवन की शुरुआत करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: लोहड़ी 2027 (Lohri 2027) में कब है?

वर्ष 2027 में लोहड़ी का पर्व 14 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा।

Q2: लोहड़ी की अग्नि में क्या चढ़ाया जाता है?

लोहड़ी की पवित्र अग्नि में मुख्य रूप से रेवड़ी, गजक, मूंगफली, मक्का (पॉपकॉर्न), तिल और गुड़ अर्पित किया जाता है।

Q3: लोहड़ी क्यों मनाई जाती है?

यह पर्व रबी की फसल पकने की खुशी, नए साल के आगमन और सूर्यदेव तथा अग्निदेव के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है।

Q4: लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी का गाना क्यों गाते हैं?

दुल्ला भट्टी ने अनाथ लड़कियों को अत्याचार से बचाकर उनका विवाह कराया था, उनकी इसी वीरता और परोपकार को याद करने के लिए यह लोकगीत गाया जाता है।

Q5: क्या लोहड़ी पर दान करना शुभ होता है?

जी हां, लोहड़ी के दिन तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.