जीवन में जब भी संकट की काली घटा छाती है या राह में रुकावटें आकर खड़ी हो जाती हैं, तो मन अनायास ही उस प्रथम पूज्य देव को पुकारने लगता है जिन्हें हम प्यार से 'विघ्नहर्ता' कहते हैं। भगवान गणेश केवल एक देव नहीं हैं, बल्कि हर भक्त के दुख-दर्द को समझने वाले सच्चे साथी हैं। पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी 2027 (Vighneshwara Sankashti Chaturthi 2027) का यह पावन पर्व भगवान गणेश के इसी विघ्नहर्ता रूप को समर्पित है। यदि आप लंबे समय से किसी संकट से जूझ रहे हैं या जीवन में खुशहाली की कामना करते हैं, तो यह पावन व्रत आपकी बंद किस्मत के द्वार खोल सकता है।
यदि आप भी भगवान गणेश की असीम कृपा पाना चाहते हैं, तो विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी 2027 की तिथि (Vighneshwara Sankashti Chaturthi 2027 Date) का यह अवसर आपके लिए बेहद फलदायी साबित होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, गणेश पूजा विधि (Ganesh Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।
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पौष महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी का पर्व (Vighneshwara Sankashti Chaturthi Festival) के नाम से जाना जाता है। संकष्टी शब्द का अर्थ ही होता है संकटों का हरण करना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संकटमोचन गणेश जी की आराधना करने से जीवन में आ रही बड़ी से बड़ी मुसीबतें पल भर में मिट जाती हैं। जो भक्त पूरे नियम और निष्ठा के साथ विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी व्रत (Vighneshwara Sankashti Chaturthi Vrat) रखते हैं, उनके जीवन से नकारात्मकता दूर होकर रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
साल 2027 की शुरुआत में ही विघ्नहर्ता का आशीर्वाद पाने का यह अत्यंत फलदायी अवसर आ रहा है। संकष्टी चतुर्थी की पूजा में चंद्रोदय के दर्शन का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2027 में विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी तिथि (Vighneshwara Sankashti Chaturthi Tithi) और शुभ मुहूर्त की जानकारी नीचे दी गई है:
चतुर्थी तिथि (Vighneshwara Sankashti Chaturthi 2027 Date): 11 जनवरी 2027, सोमवार
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: 11 जनवरी 2027 को तड़के सुबह
चतुर्थी तिथि समाप्त: 12 जनवरी 2027 को प्रातःकाल
चंद्रोदय समय (Vighneshwara Sankashti Chaturthi Moonrise Time): 11 जनवरी 2027 की रात (स्थानीय पंचांग के अनुसार)
(नोट: संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस रात चंद्रोदय होता है, इसलिए 11 जनवरी 2027 को ही व्रत रखना सर्वथा उत्तम रहेगा।)
शास्त्रों में भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और सौभाग्य का दाता माना गया है। पौष मास की इस चतुर्थी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह नए साल की पहली संकष्टी चतुर्थी होती है।
इस दिन व्रत रखने से साधक की बुद्धि में प्रखरता आती है और काम में आ रही मानसिक या शारीरिक रुकावटें समाप्त होती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन भगवान गणेश को दुर्वा और मोदक अर्पित कर चंद्रदेव को अर्घ्य देता है, उसके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं रहती और संतान से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।

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भगवान गणेश बहुत ही भोले और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण पूजा विधि:
प्रातः स्नान और व्रत का संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर बप्पा के सामने व्रत का संकल्प लें
चौकी की स्थापना: उत्तर या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें
दीप और कलश प्रज्वलन: बप्पा के सामने देसी घी का दीपक जलाएं और चंदन या कुमकुम से तिलक लगाएं
विशेष सामग्री अर्पित करें: गणेश जी की पूजा में दुर्वा (दूब घास) का होना सबसे जरूरी है। बप्पा को 21 दुर्वा, लाल सिंदूर, पीले फूल और अक्षत अर्पित करें
भोग सामग्री: बप्पा को उनके प्रिय मोदक या तिल के लड्डू का भोग लगाएं
कथा और मंत्र जप: विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद गणेश मंत्र (Ganesh Mantra) 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें
रात में चंद्र दर्शन और अर्घ्य: रात को जब चंद्रमा निकले, तो एक लोटे में जल, दूध, अक्षत और फूल मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दें और अपने व्रत का पारण करें
व्रत के दिन सुबह से लेकर चंद्रोदय तक पूर्ण उपवास या फलाहार रखें
पूजा में बप्पा को कभी भी तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं, यह शास्त्रों में वर्जित माना गया है
मन में किसी के प्रति कड़वाहट या ईर्ष्या न लाएं और पूरे दिन शांत चित्त रहें
रात को बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए व्रत न खोलें
संकटों का नाश: जीवन में लंबे समय से चली आ रही आर्थिक, मानसिक या शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं
कारोबार और पढ़ाई में सफलता: बप्पा बुद्धि के दाता हैं, इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई में और व्यापारियों को व्यापार में बड़ा लाभ मिलता है。
गृह क्लेश से मुक्ति: परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है और घर का माहौल सकारात्मक बनता है
संतान सुख की प्राप्ति: जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, उन्हें यह व्रत अवश्य रखना चाहिए
क्या करें:
भगवान गणेश को 21 दुर्वा जरूर अर्पित करें
शाम के समय गणेश जी की आरती गाएं और परिवार में प्रसाद बांटें
जरूरतमंदों या गरीबों को तिल और गुड़ का दान करें
क्या न करें:
गणेश जी को भूलकर भी तुलसी दल न अर्पित करें
इस दिन चमड़े की चीजों का प्रयोग न करें और सात्विक रहें
चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर न पड़ें, इसका ध्यान रखें
किसी पशु या जीव को परेशान न करें
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सभी देवता बड़े संकट में फंस गए और मदद के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे। उस समय महादेव के साथ उनके दोनों पुत्र कार्तिकेय और गणेश जी भी बैठे थे। देवताओं की समस्या सुनकर शिवजी ने पूछा कि तुम दोनों में से कौन देवताओं के इस भारी संकट को दूर कर सकता है?
कार्तिकेय और गणेश दोनों ने ही स्वयं को योग्य बताया। तब महादेव ने एक परीक्षा रखी और कहा कि तुम दोनों में से जो भी सबसे पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा, वही इस कार्य के लिए चुना जाएगा।
कार्तिकेय तुरंत अपने वाहन मयूर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। परंतु गणेश जी की सवारी तो मूषक (चूहा) थी और उनका शरीर भी स्थूल था। गणेश जी ने अपनी तीव्र बुद्धि का परिचय दिया। वे उठे और अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) की सात बार परिक्रमा करके हाथ जोड़कर बैठ गए।
जब कार्तिकेय लौटे तो उन्होंने स्वयं को विजयी बताया। तब महादेव ने मुस्कुराते हुए कहा कि माता-पिता में ही समस्त ब्रह्मांड निहित है और गणेश ने उनकी परिक्रमा करके पूरी पृथ्वी की परिक्रमा का पुण्य पा लिया है। देवताओं का संकट दूर करने के लिए गणेश जी को चुना गया और तभी से उन्हें 'विघ्नहर्ता' और प्रथम पूज्य का स्थान मिला।
विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी का यह पावन दिन हमें सिखाता है कि श्रद्धा और बुद्धि के बल पर बड़े से बड़े संकट को भी हराया जा सकता है। वर्ष 2027 की शुरुआत में मिलने वाला यह अवसर भगवान गणेश से जुड़ने और अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने का सबसे सुंदर माध्यम है। 11 जनवरी 2027 को पूरे भाव से विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी 2027 (Vighneshwara Sankashti Chaturthi 2027) पर बप्पा की पूजा करें, वे आपके जीवन के सारे विघ्न हर लेंगे और खुशियों से आपकी झोली भर देंगे।
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Q1: विघ्नेश्वर संकष्टी चतुर्थी 2027 (Vighneshwara Sankashti Chaturthi 2027) में कब है?
यह पावन चतुर्थी 11 जनवरी 2027, सोमवार को मनाई जाएगी।
Q2: गणेश जी को पूजा में दुर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अनलासुर राक्षस के ताप को शांत करने के लिए गणेश जी ने दुर्वा का सेवन किया था, जिससे उन्हें शांति मिली। तभी से दुर्वा बप्पा को अति प्रिय है।
Q3: संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे खोला जाता है?
रात में चंद्रमा निकलने के बाद उन्हें जल, दूध और अक्षत से अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
Q4: क्या संकष्टी चतुर्थी पर बिना चंद्र दर्शन के व्रत खोला जा सकता है?
नहीं, संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन और अर्घ्य का सबसे अधिक महत्व होता है, इसलिए चांद देखने के बाद ही पारण करें।
Q5: इस दिन गणेश जी को किस चीज का भोग लगाना सबसे शुभ होता है?
गणेश जी को मोदक, तिल के लड्डू, बेसन के लड्डू और केले का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.