आंगन में सजी रंगोली, लाल चुनरी में लिपटी पवित्र तुलसी मैया और उनके सम्मुख विराजमान शालिग्राम भगवान, यह अलौकिक दृश्य हर सनातनी के घर को भक्ति और उल्लास से भर देता है। देवउठनी एकादशी के ठीक बाद आने वाला तुलसी विवाह का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रभु श्री हरि विष्णु और देवी तुलसी के अटूट और पावन प्रेम का साक्षात उत्सव है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को जब घर-घर में तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ पूरे विधि-विधान से सम्पन्न कराया जाता है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो साक्षात वैकुंठ लोक धरती पर उतर आया हो। इस दिन कन्यादान करने वाले भक्तों को करोड़ों कन्यादानों के समान महापुण्य प्राप्त होता है। यदि आप भी वर्ष में तुलसी विवाह (Tulsi Vivah 2026) की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विवाह विधि जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके भक्ति मार्ग को आलोकित करेगा।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह का महापर्व मनाया जाता है। कुछ परंपराओं में इसे एकादशी की शाम से ही मनाना प्रारंभ कर दिया जाता है, परंतु द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह रचाना अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस पावन दिन माता तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप के साथ पूरे रीती-रिवाजों के साथ रचाया जाता है। इसमें मंडप सजाया जाता है, हल्दी की रस्म होती है, फेरे होते हैं और कन्यादान का संकल्प लिया जाता है। इस विवाह के सम्पन्न होते ही चातुर्मास से रुका हुआ विवाह का शुभ समय शुरू हो जाता है और देश भर में मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।
वर्ष में तुलसी विवाह (Tulsi Vivah 2026) का यह पावन पर्व 21 नवंबर, शनिवार को पूरे देश में अपार भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह 2026 (Tulsi Vivah 2026) का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत अगाध है। पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु की पूजा तुलसी पत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। तुलसी जी को साक्षात महालक्ष्मी का स्वरूप माना गया है।
जिन दंपत्तियों को कन्या सुख प्राप्त नहीं हुआ है, वे यदि तुलसी विवाह में माता तुलसी का कन्यादान करते हैं, तो उन्हें कन्यादान का महापुण्य प्राप्त होता है। इस दिन तुलसी विवाह 2026 (Tulsi Vivah 2026) सम्पन्न कराने से दांपत्य जीवन के सारे तनाव दूर हो जाते हैं, पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम बढ़ता है और घर में सुख, शांति तथा अक्षय समृद्धि का वास होता है।
तुलसी विवाह 2026 (Tulsi Vivah 2026) का अनुष्ठान एक वास्तविक विवाह समारोह की भांति पूरे उल्लास के साथ किया जाता है।

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इस पावन पर्व का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में जलंधर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली दानव था। उसकी पत्नी वृंदा अत्यंत पतिव्रता और धर्मपरायण स्त्री थी। वृंदा के सतीत्व के बल पर जलंधर को कोई भी देव या दानव युद्ध में पराजित नहीं कर पाता था। जलंधर के अत्याचारों से तंग आकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुँचे।
सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण किया और वृंदा के पतिव्रत धर्म को भंग कर दिया। जैसे ही वृंदा का सतीत्व भंग हुआ, भगवान शिव ने युद्ध में जलंधर का वध कर दिया। जब वृंदा को श्री हरि के इस छल का पता चला, तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया।
प्रभु ने वृंदा के श्राप को स्वीकार किया और वे शालिग्राम शिला बन गए। वृंदा अपने पति के साथ सती हो गई। उसकी राख से एक पवित्र पौधा निकला जिसे भगवान विष्णु ने 'तुलसी' नाम दिया। प्रभु विष्णु ने वृंदा के पवित्र प्रेम को अमर करने के लिए कहा कि मैं शालिग्राम रूप में सदा तुलसी के साथ रहूँगा और जो भी कार्तिक द्वादशी को तुलसी जी का विवाह मेरे शालिग्राम स्वरूप से कराएगा, उसे जीवन में कभी दरिद्रता और वियोग नहीं भोगना पड़ेगा। तभी से तुलसी विवाह मनाने की परंपरा चली आ रही है।
तुलसी विवाह 2026 (Tulsi Vivah 2026) केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रेम, समर्पण, पवित्रता और भक्ति का सबसे सुंदर पर्व है। जब हम अपने घर के आंगन में माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह रचाते हैं, तो हमारे जीवन के सारे कष्ट, तनाव और पाप समाप्त हो जाते हैं। वर्ष 2026 का यह तुलसी विवाह आपके और आपके पूरे परिवार के जीवन में अखंड सौभाग्य, अपार समृद्धि, सुख, शांति और प्रभु श्री हरि विष्णु की अलौकिक कृपा लेकर आए। जय माता तुलसी जय भगवान शालिग्राम
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1. तुलसी विवाह 2026 (Tulsi Vivah 2026) में कब है?
तुलसी विवाह 2026 (Tulsi Vivah 2026) का पावन पर्व 21 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा।
2. तुलसी विवाह किस तिथि को मनाया जाता है?
तुलसी विवाह मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है।
3. तुलसी जी का विवाह किसके साथ कराया जाता है?
तुलसी माता का विवाह भगवान श्री हरि विष्णु के स्वरूप भगवान शालिग्राम (शिला) के साथ कराया जाता है।
4. तुलसी विवाह में कन्यादान करने का क्या महत्व है?
मान्यता है कि तुलसी विवाह में माता तुलसी का कन्यादान करने से कई यज्ञों और कन्यादान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
5. तुलसी विवाह का सबसे शुभ समय कौन सा होता है?
तुलसी विवाह हमेशा शाम के समय यानी प्रदोष काल में सम्पन्न कराना अत्यंत शुभ और शास्त्रीय माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.